बैंक ऑफ इंग्लैंड ने 3.75% पर रोकी ब्याज दरें, पर अनिश्चितताओं के बीच ब्रिटिश पाउंड पर दबाव जारी ब्रिटेन के केंद्रीय बैंक ने नीतिगत दरों को स्थिर रखा है, लेकिन मध्य पूर्व संकट और आर्थिक सुस्ती के चलते पाउंड स्टर्लिंग में उतार-चढ़ाव की आशंका गहरा गई है। ब्रिटेन के केंद्रीय बैंक ने अपनी हालिया नीतिगत समीक्षा में बेंचमार्क ब्याज दर को बिना किसी बदलाव के 3.75 प्रतिशत पर बनाए रखने का फैसला किया है। लगातार छठी बैठक में यह दर अपरिवर्तित रही है। मौद्रिक नीति समिति के भीतर इस निर्णय पर आम सहमति नहीं बन सकी और मतदान 6-3 के अंतर से संपन्न हुआ। अल्पमत वाले तीन सदस्यों—मेगन ग्रीन, कैथरीन एल मान और हू पिल—ने ब्याज दरों में 25 आधार अंकों की वृद्धि के पक्ष में अपना मत दिया। बैंक का यह कदम ऐसे समय में आया है जब देश में वेतन वृद्धि की गति धीमी हुई है और सेवा क्षेत्र में मूल्य वृद्धि की रफ्तार नरम पड़ी है, जिससे नीति निर्माताओं को ठहराव बनाए रखने की गुंजाइश मिली। मध्य पूर्व का भू-राजनीतिक तनाव और नीतिगत सख्तियों के संकेत केंद्रीय बैंक ने संकेत दिया है कि मूल्य और मजदूरी निर्धारण की प्रक्रिया में अब तक द्वितीय-स्तरीय महंगाई के खास बड़े लक्षण सामने नहीं आए हैं। इसके बावजूद भविष्य में दरों को बढ़ाने की संभावनाओं को खारिज नहीं किया गया है। गवर्नर एंड्रू बेली ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि “अगर मध्य पूर्व का टकराव लंबे समय तक खिंचता है और द्वितीय-स्तरीय असर बढ़ता है, तो नीति को सख्त करना पड़ सकता है।” वैश्विक ऊर्जा लागतों में जारी अस्थिरता को देखते हुए बैंक ऑफ इंग्लैंड सतर्क बना हुआ है, क्योंकि ऊर्जा की कीमतों में तेज उछाल घरेलू अर्थव्यवस्था में महंगाई को नए सिरे से हवा दे सकता है। बॉन्ड खरीद में कमी और मात्रात्मक सख्ती का बहुवर्षीय रोडमैप केंद्रीय बैंक ने अपनी मात्रात्मक सख्ती की योजना में धीमापन लाने की भी विधिवत घोषणा की है। नए बहुवर्षीय ढांचे के तहत वर्ष 2034 तक बैंक के गिल्ट होल्डिंग्स में सालाना औसतन £46 अरब की कमी की जाएगी, जिसमें हर साल £20 अरब की प्रत्यक्ष बिक्री शामिल रहेगी। यह आंकड़ा पिछले चार वर्षों के दौरान दर्ज की गई प्रति वर्ष £87.5 अरब की औसत कमी और £32 अरब की बिक्री की तुलना में काफी कम है। मात्रात्मक सख्ती की गति धीमी होने से गिल्ट बाजार को कुछ सहारा जरूर मिलता दिख रहा है, लेकिन वास्तविक प्रतिफल अब भी काफी हद तक ईंधन की अंतरराष्ट्रीय कीमतों पर निर्भर रहेगा। जब तक ऊर्जा बाजार पूरी तरह स्थिर नहीं होता, तब तक यील्ड पर लगातार ऊपर की ओर दबाव बने रहने का अनुमान है। स्वैप बाजार के अनुमान और पाउंड के सामने पेश चुनौतियां वित्तीय बाजारों में स्वैप कर्व अगले बारह महीनों के भीतर बैंक ऑफ इंग्लैंड द्वारा लगभग 100 आधार अंकों की अतिरिक्त दर वृद्धि का अनुमान लगा रहा है, जिससे नीतिगत दर 4.75 प्रतिशत तक पहुंचने की बात कही जा रही है। इसके विपरीत, वास्तविक आर्थिक परिदृश्य बताता है कि शायद बैंक को इतनी अधिक सख्ती करने की आवश्यकता न पड़े। ब्रिटेन की घरेलू अर्थव्यवस्था पहले से ही अपनी पूर्ण क्षमता से नीचे काम कर रही है। इसके अलावा 3.75 प्रतिशत की मौजूदा बैंक दर केंद्रीय बैंक द्वारा आकलित 2 प्रतिशत से 4 प्रतिशत की तटस्थ सीमा के ऊपरी छोर के करीब स्थित है। आगे आने वाले समय में वित्तीय नीतियां भी अधिक संकुचित होने के आसार हैं, जिसके परिणामस्वरूप पाउंड स्टर्लिंग पर संभावित नरम रुख की वजह से कमजोरी का खतरा मंडरा रहा है। वैश्विक मुद्रा बाजार: ऑस्ट्रेलियाई डॉलर, जापानी येन और सोना मुद्रा बाजारों में अन्य प्रमुख संपत्तियों पर नजर डालें तो ऑस्ट्रेलियाई डॉलर ने गुरुवार के एशियाई कारोबार के दौरान अपनी स्थिति मजबूत करते हुए 0.7100 का आंकड़ा पुनः हासिल किया। अमेरिकी डॉलर की पूर्ववर्ती तेजी पर ब्रेक लगने, ऑस्ट्रेलियाई रिजर्व बैंक द्वारा दरें बढ़ाने की अटकलों तथा अमेरिका-ईरान कूटनीतिक प्रयासों की उम्मीदों ने जोखिम-सहिष्णु संपत्तियों को सहारा दिया। दूसरी ओर, USD/JPY की जोड़ी एशियाई सत्र में संक्षिप्त रूप से 156.00 के नीचे खिसकने के बाद संभलती दिखी। अमेरिकी डॉलर के सात सप्ताह के उच्चतम स्तर से फिसलने और बैंक ऑफ जापान द्वारा नीतिगत सामान्यीकरण की तेज संभावनाओं ने जापानी येन को समर्थन दिया है। इस बीच, अमेरिकी डॉलर के पीछे हटने और कच्चे तेल की नरमी के बीच सोने की कीमतों में जोरदार उछाल देखा गया और पीली धातु उछलकर $4,480 प्रति ट्रॉय औंस के नए साप्ताहिक शिखर पर पहुंच गई। एक दशक से अधिक समय तक वैश्विक निवेशों को सस्ता वित्तपोषण देने वाला जापानी येन अब बैंक ऑफ जापान के आगामी निर्णयों के साथ एक नए दौर में प्रवेश करने जा रहा है। इसका आप पर असर वैश्विक ब्याज दरों और मुद्रा बाजार के इस घटनाक्रम का असर अंतरराष्ट्रीय व्यापार और व्यक्तिगत वित्तीय फैसलों पर सीधा पड़ेगा। • विदेशी मुद्रा विनिमय: ब्रिटिश पाउंड में संभावित कमजोरी से ब्रिटेन में पढ़ाई या यात्रा करने वाले भारतीयों के लिए खर्च कुछ हद तक सस्ता हो सकता है। यदि पाउंड पर दबाव बढ़ता है, तो भारतीय रुपये के मुकाबले इसकी विनिमय लागत में नरमी देखने को मिल सकती है। • ऋण और निवेश: वैश्विक केंद्रीय बैंकों के कड़े रुख से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कर्ज की लागत ऊंची बनी रहेगी। विदेश में निवेश करने वाले निवेशकों को बॉन्ड यील्ड और मुद्रा में उतार-चढ़ाव पर पैनी नजर रखनी चाहिए। • सोने के खरीदार: सोने की कीमतों में $4,480 प्रति औंस तक की उछाल से घरेलू और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आभूषण तथा बुलियन में निवेश महंगा हो गया है। खरीदारी की योजना बना रहे ग्राहकों को कीमतों में स्थिरता का इंतजार करना पड़ सकता है। • व्यापार और आयात लागत: ऊर्जा की ऊंची कीमतों से लॉजिस्टिक्स और आयात का बिल बढ़ सकता है। ऊर्जा उत्पादों के महंगे बने रहने से उपभोक्ता वस्तुओं के दामों पर भी असर पड़ने का खतरा बना रहता है। ऐसा क्यों हुआ बैंक ऑफ इंग्लैंड ने आर्थिक मंदी और गिरती मुद्रास्फीति के मद्देनजर ब्याज दरों को स्थिर रखने का विकल्प चुना, जबकि बाहरी जोखिमों के कारण भविष्य के रास्ते खुले रखे हैं। • मजदूरी और सेवा क्षेत्र में नरमी: ब्रिटेन में वेतन वृद्धि और सेवा क्षेत्र की मुद्रास्फीति में आई हालिया गिरावट ने केंद्रीय बैंक को ब्याज दरों में तत्काल बढ़ोतरी से बचने की छूट दी। इस गिरावट ने नीति निर्माताओं को घरेलू मांग पर दबाव घटाने का मौका प्रदान किया। • मध्य पूर्व का भू-राजनीतिक तनाव: अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चल रहे भू-राजनीतिक तनाव के चलते ऊर्जा कीमतों में भारी अस्थिरता की स्थिति बनी हुई है। यदि ऊर्जा संकट गहराता है, तो द्वितीय-स्तरीय महंगाई को रोकने के लिए बैंक को दरों में फिर से सख्ती करनी पड़ सकती है। • आर्थिक वृद्धि की धीमी गति: ब्रिटेन की अर्थव्यवस्था अपनी पूर्ण क्षमता से नीचे काम कर रही है, जिससे नीति निर्माताओं को वित्तीय सख्ती कम करने की जरूरत महसूस हो रही है। अतिरिक्त दर वृद्धि आर्थिक गतिविधियों को और ज्यादा नुकसान पहुंचा सकती थी। सवाल-जवाब 1. बैंक ऑफ इंग्लैंड ने अपनी नीतिगत ब्याज दर को किस स्तर पर बनाए रखा है? बैंक ऑफ इंग्लैंड ने अपनी बेंचमार्क नीतिगत ब्याज दर को 3.75 प्रतिशत पर अपरिवर्तित रखा है। 2. मौद्रिक नीति समिति की बैठक में मतदान का क्या नतीजा रहा? समिति ने 6-3 के बहुमत से दरें स्थिर रखने का फैसला किया, जिसमें तीन सदस्यों ने 25 आधार अंकों की बढ़ोतरी की वकालत की। 3. गवर्नर एंड्रू बेली ने किन परिस्थितियों में दरें बढ़ाने की चेतावनी दी है? उन्होंने कहा कि यदि मध्य पूर्व का संकट लंबा खिंचता है और द्वितीय-स्तरीय मुद्रास्फीति का जोखिम बढ़ता है, तो नीति सख्त की जा सकती है। 4. मात्रात्मक सख्ती को लेकर केंद्रीय बैंक की नई योजना क्या है? बैंक 2034 तक सालाना औसतन £46 अरब की गिल्ट होल्डिंग्स कम करेगा, जिसमें £20 अरब की वार्षिक बिक्री शामिल होगी। 5. सोने की कीमतों में हाल ही में क्या हलचल दर्ज की गई? सोने की कीमत तीन दिनों की गिरावट का सिलसिला तोड़ते हुए $4,480 प्रति ट्रॉय औंस के नए साप्ताहिक शिखर पर पहुंच गई। https://trendkia.com/market/bank-of-england-ne-3-75-para-roki-byaja-daren-para-anishchitataon-ke-bicha-british-pound-para-dabava-jari-33634 TrendKia — Har trend, sabse pehle.