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  "type": "article",
  "title": "बैंक ऑफ इंग्लैंड ने ब्याज दर 3.75 प्रतिशत पर रोकी, मुद्रास्फीति के खतरों के बीच ब्रिटिश पाउंड और गिल्ट्स में हलचल",
  "summary": "बैंक ऑफ इंग्लैंड की मौद्रिक नीति समिति ने नीतिगत दर को 3.75 प्रतिशत पर यथावत रखा है, जबकि बढ़ती ऊर्जा कीमतों के कारण महंगाई दर 2027 की शुरुआत में 4 प्रतिशत के पार जाने की आशंका बनी हुई है।",
  "content": "बैंक ऑफ इंग्लैंड की मौद्रिक नीति समिति ने हालिया बैठक में कड़ा रुख अपनाते हुए अपनी प्रमुख बैंक दर को 3.75 प्रतिशत के स्तर पर स्थिर रखने का निर्णय लिया है। नीति निर्माताओं के बीच हुए मतदान में छह सदस्यों ने दरों को यथावत रखने के पक्ष में मत दिया, जबकि तीन सदस्यों का रुख भिन्न रहा। केंद्रीय बैंक ने नीतिगत ठहराव के साथ ही यह भी स्पष्ट स्वीकार किया कि आने वाले समय में मुद्रास्फीति का परिदृश्य अधिक चुनौतीपूर्ण साबित हो सकता है। ब्रिटेन में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक चौथी तिमाही में बढ़कर लगभग 3.75 प्रतिशत तक पहुंचने का अनुमान है, जिसके बाद वर्ष 2027 की शुरुआत में इसके 4 प्रतिशत से थोड़ा ऊपर निकल जाने की संभावना जताई गई है। महंगाई में इस संभावित उछाल का मुख्य कारण ऊर्जा की बढ़ती कीमतों को माना जा रहा है, हालांकि अधिकारियों का यह भी कहना है कि मजदूरी और खुदरा कीमतों में दूसरे दौर के गंभीर प्रभावों के फिलहाल कोई पुख्ता प्रमाण सामने नहीं आए हैं।\n\nमुद्रा बाजार में ब्रिटिश पाउंड पर दबाव और तकनीकी स्तर\nनीतिगत निर्णय के सार्वजनिक होने के बाद विदेशी मुद्रा बाजार में ब्रिटिश पाउंड दबाव में आ गया। व्यापक बाजार में अमेरिकी डॉलर और अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में नरमी आने के बावजूद पाउंड में गिरावट दर्ज की गई। ब्रिटिश पाउंड लुढ़क कर 1.3360 के स्तर तक आ गया। तकनीकी विश्लेषण के अनुसार दैनिक गति मंदी की ओर इशारा कर रही है, हालांकि रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स यानी RSI के ओवरसोल्ड क्षेत्र में फिसलने से इंट्राडे आधार पर कुछ सुधार की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। बाजार में किसी भी उछाल पर बिकवाली का रुझान हावी रहने के आसार हैं।\n\nतकनीकी चार्ट पर प्रतिरोध स्तर 1.3420 पर स्थित है, जो वर्ष 2026 के उच्च और निम्न स्तर के बीच का 38.2 प्रतिशत फिबोनाची रिट्रेसमेंट स्तर है। इसके बाद अगला कड़ा प्रतिरोध 1.3480 पर देखा जा रहा है, जहां 50 दिनों का मूविंग एवरेज मौजूद है। नीचे की तरफ पहला प्रमुख समर्थन 1.3310 पर है, जो 23.6 प्रतिशत फिबोनाची स्तर को दर्शाता है, जबकि दूसरा महत्वपूर्ण समर्थन स्तर 1.3270 पर बना हुआ है। लाइव बाजार आंकड़ों के अनुसार GBP/USD का भाव 1.34 पर दर्ज किया गया, जिसमें पिछले बंद भाव 1.34 के मुकाबले 0.27 प्रतिशत की बढ़त रही है। 52 सप्ताह का दायरा 1.30 से 1.38 के बीच रहा है, जबकि 14-दिवसीय RSI 38 पर और MACD मंदी के संकेत दे रहा है। 20-दिवसीय समर्थन स्तर लगभग 1.33 और प्रतिरोध स्तर 1.37 पर है।\n\nब्रिटिश गिल्ट्स में तेज हलचल और बॉन्ड बिक्री पर रोक\nमुद्रा बाजार की तुलना में सरकारी ऋण बाजार यानी गिल्ट्स में अधिक तीव्र प्रतिक्रिया देखने को मिली। 30 वर्षीय ब्रिटिश गिल्ट्स की यील्ड में लगभग 12 आधार अंकों की भारी गिरावट दर्ज की गई। यील्ड में आई इस कमी को बैंक ऑफ इंग्लैंड द्वारा अपने क्वांटिटेटिव टाइटनिंग यानी QT कार्यक्रम में किए गए बड़े बदलाव से सीधा समर्थन मिला। केंद्रीय बैंक ने बाजार की स्थिति को संतुलित करने के लिए सक्रिय गिल्ट बिक्री को अगले छह महीनों के लिए अस्थायी रूप से रोकने की घोषणा की है, जिससे लंबी अवधि के बॉन्ड की कीमतों को सहारा मिला है।\n\nवैश्विक मुद्रा बाजारों का रुख: ऑस्ट्रेलियाई डॉलर और येन\nब्रिटेन के घटनाक्रम के साथ ही एशियाई और यूरोपीय सत्रों में अन्य प्रमुख मुद्राओं में भी महत्वपूर्ण उतार-चढ़ाव देखने को मिला। एशियाई कारोबारी सत्र में अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में नरमी के चलते अमेरिकी डॉलर के खरीदार पीछे हटे, जिससे AUD/USD लगातार दूसरे दिन सकारात्मक रुख के साथ 0.7100 के ऊपर बना रहा। रिज़र्व बैंक ऑफ़ ऑस्ट्रेलिया की गवर्नर बुलॉक की सख्त टिप्पणियों ने ब्याज दर वृद्धि की उम्मीदों को बढ़ाया, जिससे ऑस्ट्रेलियाई डॉलर को मजबूत समर्थन मिला। हालांकि, फेडरल रिजर्व के आक्रामक रुख और भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं ने अमेरिकी डॉलर के नुकसान को सीमित किया और मुद्रा जोड़ी की बढ़त को सीमित रखा।\n\nयूरोपीय सत्र के दौरान USD/JPY ने अपनी तेजी दोबारा शुरू की और दो सप्ताह के नए उच्च स्तर को छूते हुए 158.00 के करीब पहुंच गया। बैंक ऑफ जापान द्वारा नीतिगत दर को बढ़ाकर 1.25 प्रतिशत किए जाने और गवर्नर उएदा के सख्त बयानों के बावजूद जापानी येन में कमजोरी का सिलसिला जारी रहा। दर वृद्धि के फैसले के खिलाफ आए दो औचक असहमति मतों ने मुद्रा पर भारी दबाव डाला। जापान की अत्यधिक कम ब्याज दरों ने एक दशक से अधिक समय तक खरबों डॉलर के वैश्विक निवेश को वित्तपोषित करने में मदद की थी, जिससे येन दुनिया के सबसे सस्ते फंडिंग स्रोतों में से एक बन गया था। बैंक ऑफ जापान द्वारा इस सप्ताह नीति सख्त करने के साथ यह फायदा एक नए चरण में प्रवेश कर रहा है, जबकि लंबे समय तक जापान बाकी प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में अलग खड़ा रहा था।\n\nसोने में उछाल और बिटकॉइन की रिकवरी\nकमोडिटी बाजार में सोने ने लगातार दूसरे दिन तेजी दर्ज की और शुक्रवार को यूरोपीय सत्र के पहले पहर में नए साप्ताहिक उच्च स्तर को छुआ। अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में गिरावट ने अमेरिकी डॉलर की तेजी को थामे रखा, जिससे सोने के खरीदारों का हौसला बढ़ा। निवेशक फेडरल रिजर्व के अधिकारियों के बयानों और मध्यम स्तर के अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों से पहले 4,400 डॉलर प्रति औंस के पार टिकाऊ मजबूती की प्रतीक्षा कर रहे हैं ताकि नए सौदे बनाए जा सकें।\n\nडिजिटल परिसंपत्तियों के बाजार में बिटकॉइन ने जुलाई में 57,800 डॉलर के वार्षिक निचले स्तर तक गिरने के बाद जबरदस्त वापसी की है। इसमें लगभग 33 प्रतिशत की रिकवरी आई है और जुलाई तथा अगस्त के महीनों में लगातार बढ़त दर्ज की गई है। इस उछाल के बावजूद बिटकॉइन अपने सर्वकालिक उच्च स्तर से लगभग 40 प्रतिशत नीचे बना हुआ है। बाजार के कारोबारी अब इस महत्वपूर्ण सवाल पर विचार कर रहे हैं कि क्या यह नए तेजी के चरण की शुरुआत है या व्यापक मंदी के चक्र के भीतर केवल एक अस्थायी उछाल है।\n\nइसका आप पर असर\nबैंक ऑफ इंग्लैंड द्वारा दरों को रोके रखने और बॉन्ड बिक्री पर रोक लगाने से वैश्विक मुद्रा और ऋण बाजारों पर सीधा असर पड़ेगा।\n\n• मुद्रा विनिमय दर: पाउंड में कमजोरी से ब्रिटेन यात्रा या वहां अध्ययन करने वाले छात्रों के लिए मुद्रा विनिमय पर अल्पकालिक राहत मिल सकती है। मुद्रा में किसी भी उछाल पर बिकवाली के रुझान को देखते हुए जोखिम प्रबंधन जरूरी है।\n• ऋण बाजार और यील्ड: गिल्ट्स की यील्ड में गिरावट से लंबी अवधि के बॉन्ड निवेश पर प्रतिफल प्रभावित होगा। निवेशकों को आगामी छह महीनों तक बॉन्ड बिक्री पर लगी रोक के प्रभावों पर नजर रखनी चाहिए।\n• वैश्विक वित्तीय लागत: केंद्रीय बैंकों द्वारा दरों को ऊंचे स्तरों पर बनाए रखने से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उधार लेना महंगा बना रहेगा। आयात-निर्यात से जुड़े कारोबारियों को विदेशी मुद्रा उतार-चढ़ाव से बचाव के उपाय करने होंगे।\n• जिंस और धातु बाजार: सोने की कीमतों में 4,400 डॉलर की ओर संभावित मजबूती से सुरक्षित निवेश के विकल्प मजबूत हो रहे हैं। डॉलर की नरमी का लाभ उठाकर निवेशक कीमती धातुओं में अपने पोर्टफोलियो का संतुलन बना सकते हैं।\n\nऐसा क्यों हुआ\nबैंक ऑफ इंग्लैंड द्वारा ब्याज दरों को 3.75 प्रतिशत पर स्थिर रखने का मुख्य कारण देश में ऊर्जा की बढ़ती कीमतों से उत्पन्न मुद्रास्फीति का दबाव और आर्थिक स्थिरता की आवश्यकता है।\n\n• ऊर्जा कीमतों में उछाल: ऊर्जा लागत में अचानक आई तेजी के कारण चौथी तिमाही में मुद्रास्फीति के 3.75 प्रतिशत और 2027 की शुरुआत में 4 प्रतिशत तक पहुंचने का अनुमान है। केंद्रीय बैंक ने इस दबाव को देखते हुए दरों में कटौती करने से परहेज किया।\n• नीतिगत समिति में मतभेद: मौद्रिक नीति समिति में 6-3 का विभाजन रहा, जिसमें बहुमत ने मौजूदा आर्थिक अनिश्चितता के बीच दरों को स्थिर रखने का समर्थन किया। तीन सदस्यों का विचार भिन्न था, जिससे नीतिगत सतर्कता का पता चलता है।\n• बाजार स्थिरीकरण उपाय: बॉन्ड बाजार में अत्यधिक अस्थिरता को रोकने के लिए बैंक ने अपने क्वांटिटेटिव टाइटनिंग कार्यक्रम को संशोधित किया। इसके तहत सक्रिय गिल्ट बिक्री को छह महीने के लिए रोक दिया गया ताकि लंबी अवधि की यील्ड को संतुलित किया जा सके।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. बैंक ऑफ इंग्लैंड ने अपनी प्रमुख ब्याज दर को किस स्तर पर रखा है?\nबैंक ऑफ इंग्लैंड ने 6-3 के बहुमत से अपनी प्रमुख बैंक दर को 3.75 प्रतिशत पर अपरिवर्तित रखा है।\n\n2. ब्रिटेन में मुद्रास्फीति को लेकर केंद्रीय बैंक का क्या अनुमान है?\nकेंद्रीय बैंक का अनुमान है कि बढ़ती ऊर्जा कीमतों के कारण मुद्रास्फीति चौथी तिमाही में 3.75 प्रतिशत और 2027 की शुरुआत में 4 प्रतिशत से ऊपर जा सकती है।\n\n3. बैंक ऑफ इंग्लैंड ने अपने बॉन्ड कार्यक्रम में क्या बदलाव किया है?\nकेंद्रीय बैंक ने अपने क्वांटिटेटिव टाइटनिंग कार्यक्रम को संशोधित करते हुए छह महीने के लिए सक्रिय गिल्ट बिक्री को रोक दिया है।\n\n4. इस फैसले के बाद ब्रिटिश पाउंड और 30 वर्षीय गिल्ट्स पर क्या असर पड़ा?\nब्रिटिश पाउंड गिरकर 1.3360 के स्तर पर आ गया, जबकि 30 वर्षीय गिल्ट्स की यील्ड में लगभग 12 आधार अंकों की तेज गिरावट दर्ज की गई।",
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  "publishedAt": "2026-09-19",
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