बैंक ऑफ इंग्लैंड ने ब्याज दर 3.75 प्रतिशत पर रोकी, ऊर्जा झटकों और भू-राजनीतिक तनाव के बीच सख्त कदमों के संकेत बैंक ऑफ इंग्लैंड की मौद्रिक नीति समिति ने ब्याज दर 3.75 प्रतिशत पर बरकरार रखी है, लेकिन पश्चिम एशिया संघर्ष और संभावित ऊर्जा झटकों को देखते हुए आगामी महीनों में दरें बढ़ाने के स्पष्ट संकेत दिए हैं। वैश्विक अर्थव्यवस्था में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की कीमतों के उतार-चढ़ाव के बीच बैंक ऑफ इंग्लैंड की मौद्रिक नीति समिति ने अपनी बेंचमार्क बैंक दर को 3.75 प्रतिशत पर अपरिवर्तित रखने का निर्णय लिया है। मौद्रिक नीति समिति की इस बैठक में फैसला 6-3 के बहुमत से हुआ, जहां बहुमत ने ब्याज दरों को मौजूदा स्तर पर स्थिर रखने के पक्ष में मतदान किया। दरें स्थिर रखने के बावजूद केंद्रीय बैंक का लहजा जुलाई की तुलना में काफी सख्त दिखाई दे रहा है, क्योंकि मुद्रास्फीति को लेकर ऊपर की तरफ जोखिम बने हुए हैं। अर्थव्यवस्था में सकल घरेलू उत्पाद और महंगाई के संशोधित अनुमानों, ऊर्जा आपूर्ति से जुड़े भू-राजनीतिक जोखिमों तथा आगामी नवंबर अथवा दिसंबर में नीतिगत सख्ती बढ़ाने की संभावनाओं ने नीति निर्माताओं का ध्यान खींचा है। भू-राजनीतिक जोखिम और नीतिगत सख्ती के संकेत टीडी सिक्योरिटीज की मैक्रो टीम, जिसका नेतृत्व पूजा कुमरा कर रही हैं, के विश्लेषण के अनुसार केंद्रीय बैंक के भीतर मध्यमार्गी सदस्यों के रुख में स्पष्ट बदलाव देखा गया है। गवर्नर एंड्रयू बेली, राम्सडेन और लोम्बार्डेली जैसे प्रमुख सदस्यों ने आवश्यकता पड़ने पर नीतिगत सख्ती बढ़ाने के विकल्प को खारिज नहीं किया है। एंड्रयू बेली का मानना है कि मौजूदा भू-राजनीतिक हालात से जुड़े जोखिम अधिक हावी हो रहे हैं, विशेषकर तब जब चल रहे संघर्ष को तुरंत हल करने की तत्परता कम दिख रही है। ऊर्जा के अप्रत्यक्ष प्रभाव अब तक बैंक ऑफ इंग्लैंड की अपेक्षाओं से कमजोर रहे हैं और दूसरे दौर के उभरते प्रभावों के प्रमाण भी काफी सीमित हैं। यदि पश्चिम एशिया में संघर्ष लंबे समय तक खिंचता है और दूसरे दौर के प्रभाव जोर पकड़ते हैं, तो मौद्रिक नीति को और अधिक कड़ा करने की नौबत आ सकती है। मौद्रिक नीति समिति के जुलाई के अनुमानों ने व्यापक समिति के इस दृष्टिकोण का समर्थन किया था कि ब्याज दरों को रोकना ही प्रतिबंधात्मक बने रहने का एक साधन है। हालांकि हालिया भू-राजनीतिक उथल-पुथल और संभावित ऊर्जा झटकों के उभरने से यह राय मजबूत हो रही है कि आगे और अधिक प्रतिबंधात्मक नीतिगत कदमों की आवश्यकता पड़ सकती है। आगामी नवंबर की बैठक में केंद्रीय बैंक के सामने न केवल अद्यतन आर्थिक अनुमान पेश होंगे, बल्कि मांग और आपूर्ति दोनों पक्षों पर मुद्रास्फीति के घटनाक्रमों की नई जानकारी भी उपलब्ध होगी। यदि कच्चे तेल की कीमतें मौजूदा स्तरों पर बनी रहती हैं, तो नवंबर या दिसंबर की बैठकों में ब्याज दर वृद्धि की संभावना से बिल्कुल इनकार नहीं किया जा सकता। वैश्विक विदेशी मुद्रा बाजार और ऑस्ट्रेलियाई डॉलर में तेजी वैश्विक वित्तीय बाजारों में गुरुवार के एशियाई सत्र के दौरान मुद्रा विनिमय दरों में खासी हलचल देखी गई। ऑस्ट्रेलियाई डॉलर बनाम अमेरिकी डॉलर (AUD/USD) में नए खरीदारों का प्रवेश देखा गया, जिससे यह मुद्रा जोड़ी 0.7100 के स्तर को दोबारा हासिल करने में सफल रही। इस उछाल के पीछे अमेरिकी डॉलर की उस तेजी का थमना रहा, जो फेडरल रिजर्व के सख्त रुख के कारण जुलाई के अंत के बाद के अपने उच्चतम स्तर पर पहुंच गई थी। साथ ही रिज़र्व बैंक ऑफ़ ऑस्ट्रेलिया (RBA) द्वारा ब्याज दरें बढ़ाने के बढ़ते दांव और अमेरिका तथा ईरान के बीच राजनयिक प्रयासों की उम्मीदों ने बाजार के जोखिम उठाने के मिजाज को बेहतर बनाया। इस सुधरती बाजार धारणा ने जोखिम-संवेदनशील ऑस्ट्रेलियाई डॉलर को मजबूत सहारा प्रदान किया। जापानी येन और बैंक ऑफ जापान की रणनीति अमेरिकी डॉलर बनाम जापानी येन (USD/JPY) जोड़ी गुरुवार के एशियाई सत्र में 156.00 के स्तर से नीचे की संक्षिप्त गिरावट से उबरती दिखाई दी। यह जोड़ी बीते दिन बने लगभग दो सप्ताह के शीर्ष स्तर तक की लगातार तीन दिनों की बढ़त को थामने की कोशिश कर रही है। फेडरल रिजर्व के फैसलों के बाद सात सप्ताह के उच्च स्तर पर पहुंची डॉलर की तेजी अब सुस्ता रही है, जबकि बैंक ऑफ जापान (BoJ) द्वारा मौद्रिक नीति सामान्यीकरण की राह पर तेजी से आगे बढ़ने की संभावनाओं ने जापानी मुद्रा को मजबूती दी है। शुक्रवार को आने वाले बैंक ऑफ जापान के नीतिगत फैसले पर अब बाजार की निगाहें टिकी हैं, जिसने इस मुद्रा जोड़ी की ऊपरी बढ़त को सीमित कर रखा है। जापान की दशकों लंबी अति-निम्न ब्याज दरों ने एक दशक से अधिक समय तक वैश्विक निवेश में खरबों डॉलर के वित्तपोषण में मदद की थी, जिससे जापानी येन दुनिया के सबसे सस्ते फंडिंग स्रोतों में से एक बन गया था। बैंक ऑफ जापान द्वारा नीतिगत सख्ती की तैयारी के साथ यह ऐतिहासिक लाभ अब एक नए चरण में प्रवेश कर रहा है। जहां दुनिया की अधिकांश प्रमुख अर्थव्यवस्थाएं महंगाई से लड़ने के लिए पहले ही ब्याज दरें बढ़ा चुकी हैं, वहीं जापान अब तक वैश्विक अपवाद बना हुआ था। सोने में भारी उछाल और केंद्रीय बैंकों के विविध कदम सुरक्षित निवेश मानी जाने वाली कीमती धातु सोने की कीमतों में गुरुवार को तेज उछाल आया और यह 4,480 डॉलर प्रति ट्रॉय औंस के नए साप्ताहिक शिखर के करीब पहुंच गया। सोने की इस जोरदार रिकवरी ने लगातार तीन दिनों से जारी गिरावट के सिलसिले को पूरी तरह पीछे छोड़ दिया। इस तेजी को अमेरिकी डॉलर में आई उल्लेखनीय गिरावट और कच्चे तेल की कीमतों में दर्ज की गई कमजोरी से बड़ा सहारा मिला। दूसरी ओर अमेरिकी फेडरल रिजर्व ने सर्वसम्मत फैसले के तहत अपनी फेड फंड टारगेट रेंज (FFTR) को 25 आधार अंक बढ़ाकर 3.75%-4.00% कर दिया। अमेरिकी केंद्रीय बैंक ने स्पष्ट किया कि दरों में यह बढ़ोतरी उसके 2 प्रतिशत के मुद्रास्फीति लक्ष्य की समयबद्ध बहाली का समर्थन करने के लिए की गई है। इस तरह एक तरफ जहां ब्रिटेन ने दरें रोकते हुए भविष्य में सख्ती के संकेत दिए, वहीं अमेरिका ने दरें बढ़ाईं और जापान अपनी नीति को सामान्य करने की दहलीज पर खड़ा है। इसका आप पर असर वैश्विक केंद्रीय बैंकों की सख्त मौद्रिक नीतियां और ब्याज दरों में संभावित बढ़ोतरी अंतरराष्ट्रीय बाजारों में पूंजी लागत को महंगा बनाए रख सकती हैं। • वैश्विक स्तर पर: केंद्रीय बैंकों द्वारा ब्याज दरों को उच्च स्तर पर बनाए रखने से कर्ज की लागत महंगी रहेगी। कंपनियों और आवास ऋण लेने वालों को निकट भविष्य में वित्तीय राहत मिलने की उम्मीद कम है। • मुद्रा विनिमय दर: अमेरिकी डॉलर में ठहराव और जापानी येन तथा ऑस्ट्रेलियाई डॉलर में मजबूती से विदेशी मुद्रा विनिमय दरों में अस्थिरता बढ़ेगी। अंतरराष्ट्रीय व्यापार और विदेशों में पढ़ाई या यात्रा करने वाले लोगों के खर्च पर इसका सीधा असर पड़ेगा। • सोने और निवेश पर प्रभाव: सोने के 4,480 डॉलर प्रति औंस पर पहुंचने से सुरक्षित परिसंपत्तियों में आकर्षण बढ़ा है। उच्च मुद्रास्फीति और भू-राजनीतिक तनाव के बीच निवेशक सोने को सुरक्षित हेज के तौर पर देख रहे हैं। • ऊर्जा कीमतों का जोखिम: पश्चिम एशिया संघर्ष के कारण कच्चे तेल में जोखिम बना हुआ है, जिससे ईंधन की लागत बढ़ सकती है। यदि तेल के दाम चढ़ते हैं, तो परिवहन लागत बढ़ने से दैनिक उपभोग की वस्तुएं महंगी हो सकती हैं। ऐसा क्यों हुआ बैंक ऑफ इंग्लैंड द्वारा दरों को 3.75 प्रतिशत पर रोकने लेकिन भविष्य में बढ़ोतरी के संकेत देने का मुख्य कारण भू-राजनीतिक अस्थिरता और ऊर्जा क्षेत्र से जुड़ा महंगाई का दबाव है। विभिन्न देशों के केंद्रीय बैंक अपने मुद्रास्फीति लक्ष्यों को हासिल करने के लिए लगातार सतर्क रुख अपना रहे हैं। • पश्चिम एशिया संघर्ष का प्रभाव: पश्चिम एशिया में लंबे समय से जारी संघर्ष के कारण वैश्विक ऊर्जा बाजारों पर आपूर्ति संकट का खतरा मंडरा रहा है। कच्चे तेल की ऊंची कीमतों से महंगाई के दूसरे दौर के प्रभाव पैदा होने की आशंका बढ़ गई है। • मुद्रास्फीति का दोबारा उभरना: ब्रिटेन में आर्थिक वृद्धि और मुद्रास्फीति के संशोधित आंकड़ों ने केंद्रीय बैंक को चिंतित किया है। यद्यपि ऊर्जा का अप्रत्यक्ष असर अभी सीमित है, लेकिन यदि ईंधन महंगा रहा तो महंगाई लक्ष्य से काफी ऊपर भटक सकती है। • फेडरल रिजर्व का दबाव: अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा दरों को 25 आधार अंक बढ़ाकर 3.75%-4.00% करने से वैश्विक पूंजी प्रवाह पर असर पड़ा है। अन्य केंद्रीय बैंकों को भी अपने घरेलू मुद्रा मूल्य को संभालने के लिए ब्याज दरें ऊंची रखनी पड़ रही हैं। • बैंक ऑफ जापान का सामान्यीकरण: जापान द्वारा दशक पुरानी अति-सस्ती उधारी नीतियों को समाप्त करने की तैयारी से वैश्विक कैरी-ट्रेड और फंडिंग लागतों में बदलाव आ रहा है। सवाल-जवाब 1. बैंक ऑफ इंग्लैंड ने ब्याज दर के बारे में क्या फैसला लिया है? बैंक ऑफ इंग्लैंड ने 6-3 के बहुमत से अपनी बेंचमार्क बैंक दर को 3.75 प्रतिशत पर अपरिवर्तित रखा है। 2. क्या बैंक ऑफ इंग्लैंड आगे ब्याज दरें बढ़ा सकता है? यदि पश्चिम एशिया संघर्ष जारी रहता है और कच्चे तेल की कीमतें ऊंची बनी रहती हैं, तो नवंबर या दिसंबर में दर वृद्धि हो सकती है। 3. अमेरिकी फेडरल रिजर्व ने अपनी नीतिगत दरों में क्या बदलाव किया? फेडरल रिजर्व ने सर्वसम्मति से अपनी फेड फंड टारगेट रेंज को 25 आधार अंक बढ़ाकर 3.75%-4.00% कर दिया है। 4. गुरुवार को सोने की कीमत किस स्तर पर पहुंच गई? सोने की कीमत तेजी से बढ़ते हुए 4,480 डॉलर प्रति ट्रॉय औंस के नए साप्ताहिक शिखर के करीब पहुंच गई। 5. ऑस्ट्रेलियाई डॉलर में बढ़त की मुख्य वजह क्या रही? अमेरिकी डॉलर की तेजी रुकने, ऑस्ट्रेलियाई केंद्रीय बैंक द्वारा दर वृद्धि की संभावनाओं और अमेरिका-ईरान कूटनीतिक उम्मीदों से ऑस्ट्रेलियाई डॉलर चढ़ा। 6. बैंक ऑफ जापान की मौद्रिक नीति में क्या बदलाव आने वाला है? बैंक ऑफ जापान द्वारा इस सप्ताह अपनी अति-निम्न ब्याज दर नीति को और सख्त कर सामान्यीकरण की दिशा में आगे बढ़ने की उम्मीद है। https://trendkia.com/market/bank-of-england-ne-byaja-dara-3-75-pratishata-para-roki-urja-jhatakon-aura-bhu-rajanitika-tanava-ke-bicha-sakhta-kadamon-ke-snketa-33619 TrendKia — Har trend, sabse pehle.