{
  "type": "article",
  "title": "बैंक ऑफ इंग्लैंड ने ब्याज दरें 3.75 प्रतिशत पर रोकीं, पाउंड में कमजोरी से यूरो चढ़ा",
  "summary": "ब्रिटेन के केंद्रीय बैंक ने नीतिगत दर को 3.75% पर स्थिर रखा है, जबकि तीन नीति निर्माताओं ने बढ़ोतरी का समर्थन किया। इस फैसले के बाद ब्रिटिश पाउंड पर दबाव बढ़ा और विदेशी मुद्रा बाजारों में यूरो को मजबूती मिली।",
  "content": "अंतरराष्ट्रीय मुद्रा बाजार में ब्रिटिश पाउंड पर बिकवाली का दबाव गहराने से यूरो ने बढ़त दर्ज की है। ब्रिटेन के केंद्रीय बैंक, बैंक ऑफ इंग्लैंड ने अपनी मुख्य नीतिगत ब्याज दर को 3.75 प्रतिशत पर अपरिवर्तित रखने का फैसला किया। नीति निर्माताओं के बीच ब्याज दरों पर एकमत नहीं बन सका, जिसके बाद नौ सदस्यीय मौद्रिक नीति समिति ने छह बनाम तीन के अंतर से दरों को जस का तस रखने के पक्ष में मतदान किया। इस फैसले के बाद मुद्रा विनिमय बाजार में यूरो बनाम पाउंड का क्रॉस रेट 0.8600 के अहम स्तर के करीब पहुंच गया, जो बीते कई सत्रों का सबसे ऊंचा स्तर है।\n\nब्रिटेन में ब्याज दरों पर केंद्रीय बैंक का कड़ा रुख\nबैंक ऑफ इंग्लैंड द्वारा अपनी नीतिगत दर को 3.75 प्रतिशत पर बनाए रखने का यह लगातार छठा फैसला है। हालांकि, समिति के भीतर मतभेद पूरी तरह खत्म नहीं हुए हैं। जुलाई की बैठक की तरह ही इस बार भी तीन सदस्यों ने ब्याज दर में तत्काल 0.25 प्रतिशत की वृद्धि कर इसे 4.00 प्रतिशत पर पहुंचाने के पक्ष में मतदान किया। ब्रिटेन में मुद्रास्फीति वर्तमान में 3.1 प्रतिशत दर्ज की गई है, जो बैंक के निर्धारित 2 प्रतिशत के लक्ष्य से काफी अधिक है और पांच महीनों के उच्चतम स्तर पर है। बैंक ने आगाह किया है कि महंगाई के जोखिम ऊपर की ओर झुके हुए हैं, जिससे भविष्य में मौद्रिक सख्ती की संभावनाएं बढ़ गई हैं।\n\nबैंक ऑफ इंग्लैंड के गवर्नर एंड्रयू बेली ने भू-राजनीतिक तनावों के आर्थिक असर का जिक्र करते हुए मिडिल ईस्ट में चल रहे संघर्ष और उससे ऊर्जा की कीमतों में आ रहे उतार-चढ़ाव को रेखांकित किया। एंड्रयू बेली ने कहा, \"the longer this volatility persists, the bigger the impact it will have\"। इसके साथ ही उन्होंने इस बात पर बल दिया कि केंद्रीय बैंक की प्राथमिक जिम्मेदारी मुद्रास्फीति के किसी भी नए उछाल को अस्थायी बनाए रखना है ताकि दीर्घकालिक आर्थिक स्थिरता पर चोट न पहुंचे।\n\nतकनीकी चार्ट पर यूरो और पाउंड की स्थिति\nविदेशी मुद्रा बाजार के चार घंटे वाले चार्ट पर नजर डालें तो यूरो और पाउंड का विनिमय अनुपात 0.8597 के आसपास कारोबार करता दिखा। यह जोड़ी 0.8578 पर स्थित 100-अवधि के सिंपल मूविंग एवरेज (SMA) और 0.8569 पर स्थित 20-अवधि के SMA, दोनों से ऊपर बनी हुई है। तकनीकी आधार पर 0.8593 के स्तर पर मौजूद मांग क्षेत्र इस जोड़ी को सहारा दे रहा है। 14-अवधि का रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स यानी RSI 65 पर दर्ज किया गया है, जो खरीदारों की मजबूत स्थिति को दर्शाता है लेकिन अभी तक अत्यधिक खरीद के दायरे में नहीं पहुंचा है।\n\nऊपर की ओर, इस क्रॉस के लिए तत्काल तकनीकी अड़चन 0.8603 के आसपास है, जिसके पार 0.8607 का मजबूत प्रतिरोध मौजूद है। इस स्तर से ऊपर निकलने पर यूरो की तेजी को और गति मिल सकती है। नीचे की ओर गिरावट आने पर 0.8593 का स्तर प्रारंभिक सहारा प्रदान करेगा, जिसके बाद 0.8581 पर दूसरा फ्लोर देखा जा सकता है। यदि बिकवाली का दबाव बढ़ता है, तो 100-अवधि का SMA 0.8578 और 20-अवधि का SMA 0.8569 तेजी के रुख को बचाए रखने वाले महत्वपूर्ण पड़ाव साबित होंगे। इसके समानांतर, यूरो और अमेरिकी डॉलर की जोड़ी पर लाइव बाजार डेटा 1.15 के भाव और 37 के RSI के साथ सतर्क रुख दिखा रहा है, जहां 20-दिन का सपोर्ट लगभग 1.15 पर टिका है।\n\nवैश्विक केंद्रीय बैंकों की नीतियों और अन्य मुद्राओं का हाल\nदुनियाभर के अन्य प्रमुख मुद्रा बाजारों में भी केंद्रीय बैंकों के कदमों का व्यापक प्रभाव देखने को मिला। फेडरल रिजर्व ने अपनी ब्याज दर सीमा को सर्वसम्मति से 25 आधार अंक बढ़ाकर 3.75 प्रतिशत से 4.00 प्रतिशत कर दिया है, ताकि मुद्रास्फीति को समयबद्ध तरीके से 2 प्रतिशत के लक्ष्य तक लाया जा सके। फेडरल रिजर्व की इस सख्ती के बाद अमेरिकी डॉलर की रैली कुछ समय के लिए थमी, जिससे ऑस्ट्रेलियाई डॉलर को समर्थन मिला और वह एशियाई कारोबारी सत्र में 0.7100 के स्तर को दोबारा हासिल करने में कामयाब रहा। इसके अलावा रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया द्वारा दरें बढ़ाने की अटकलों और वाशिंगटन तथा तेहरान के बीच राजनयिक पहलों की उम्मीदों ने भी जोखिम उठाने की धारणा को बढ़ावा दिया।\n\nउधर जापानी येन के मोर्चे पर, बैंक ऑफ जापान की मौद्रिक समीक्षा से पहले डॉलर बनाम येन 156.00 के स्तर से नीचे की संक्षिप्त गिरावट से उबरने की कोशिश करता दिखा। जापान में एक दशक से अधिक समय से लागू बेहद कम ब्याज दरों ने वैश्विक स्तर पर खरबों डॉलर के निवेश को सस्ता फंड मुहैया कराया था, लेकिन बैंक ऑफ जापान द्वारा नीति को सामान्य बनाने की उम्मीदों ने इस गतिशीलता को बदलने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इसके अलावा अंतरराष्ट्रीय जिंस बाजार में अमेरिकी डॉलर की नरमी और कच्चे तेल की कीमतों में आई कमजोरी के चलते सोने में तेज उछाल आया और उसने 4,400 डॉलर प्रति ट्रॉय औंस के पास ताजा साप्ताहिक शिखर छुआ।\n\nइसका आप पर असर\nकेंद्रीय बैंकों के फैसलों और विनिमय दरों में बदलाव का सीधा असर अंतरराष्ट्रीय यात्रा, विदेश में पढ़ाई और आयात खर्च पर पड़ता है।\n\n• मुद्रा विनिमय: ब्रिटिश पाउंड के कमजोर पड़ने से ब्रिटेन की यात्रा या वहां पढ़ाई करने वाले भारतीय छात्रों के लिए मुद्रा परिवर्तन थोड़ा सुगम हो सकता है। यदि पाउंड पर दबाव बना रहता है तो ट्यूशन फीस और रहने के खर्चों के भुगतान में भारतीय रुपये के सापेक्ष तात्कालिक राहत मिल सकती है।\n• आयात-निर्यात व्यापार: यूरोपीय संघ और ब्रिटेन के साथ द्विपक्षीय व्यापार करने वाली भारतीय कंपनियों के बिलिंग मार्जिन पर विनिमय दरों के उतार-चढ़ाव का प्रभाव पड़ेगा। आयातकों और निर्यातकों को अपनी हेजिंग रणनीतियों की तत्काल समीक्षा करनी चाहिए ताकि मुद्रा में अचानक आने वाले झटकों से मुनाफा प्रभावित न हो।\n• वैश्विक जिंस कीमतें: केंद्रीय बैंकों की मौद्रिक सख्ती और कच्चे तेल के उतार-चढ़ाव से अंतरराष्ट्रीय बाजार में आपूर्ति लागत प्रभावित होती है। यदि ऊर्जा की कीमतों में अस्थिरता जारी रही तो परिवहन और विनिर्माण से जुड़ी वस्तुओं की घरेलू कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है।\n• फॉरेक्स निवेशक: मुद्रा विनिमय बाजार में कारोबार करने वाले ट्रेडर्स के लिए प्रमुख तकनीकी स्तरों पर नजर रखना जरूरी है। यूरो और पाउंड के इस अहम मोड़ पर पहुंचने के कारण स्टॉप-लॉस और रिस्क प्रबंधन के नियमों का कड़ाई से पालन करना अनिवार्य है।\n\nऐसा क्यों हुआ\nबैंक ऑफ इंग्लैंड द्वारा ब्याज दरों को 3.75 प्रतिशत पर स्थिर रखने और मुद्रा बाजार में हुए बदलावों के पीछे नीतिगत मतभेद तथा लगातार बनी हुई महंगाई मुख्य कारक हैं।\n\n• नीतिगत मतभेद: मौद्रिक नीति समिति के छह सदस्यों ने आर्थिक गति को झटका दिए बिना दरों को स्थिर रखने का फैसला किया, जबकि तीन सदस्यों ने मुद्रास्फीति को थामने के लिए तत्काल बढ़ोतरी की मांग की। इस बंटे हुए फैसले से संकेत मिला कि केंद्रीय बैंक जल्दबाजी में दरें बढ़ाने के मूड में नहीं है, जिससे पाउंड पर दबाव बना।\n• लगातार ऊंची महंगाई: ब्रिटेन में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक 3.1 प्रतिशत पर पहुंच गया है, जो 2 प्रतिशत के अनिवार्य लक्ष्य से काफी ऊपर और पांच महीने का उच्चतम स्तर है। ऊर्जा लागत में उतार-चढ़ाव और आपूर्ति श्रृंखला के जोखिमों के चलते नीति निर्माताओं के बीच आगे चलकर सख्ती करने की चिंता बढ़ गई है।\n• वैश्विक नीति अंतर: अमेरिका के फेडरल रिजर्व द्वारा दरों में 25 आधार अंकों की वृद्धि किए जाने के विपरीत ब्रिटेन में ठहराव से डॉलर और पाउंड के बीच प्रतिफल का अंतर बदल गया। विभिन्न अर्थव्यवस्थाओं के बीच दरों की इस भिन्न दिशा ने मुद्रा विनिमय दरों को पुनर्गठित किया है।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. बैंक ऑफ इंग्लैंड ने ब्याज दर को किस स्तर पर रखा है?\nबैंक ऑफ इंग्लैंड ने अपनी मुख्य नीतिगत ब्याज दर को 3.75 प्रतिशत पर बनाए रखने का फैसला किया है।\n\n2. दरों को स्थिर रखने के फैसले में मतदान का क्या परिणाम रहा?\nमौद्रिक नीति समिति के छह सदस्यों ने दरें स्थिर रखने के पक्ष में और तीन सदस्यों ने 0.25 प्रतिशत की बढ़ोतरी के पक्ष में मतदान किया।\n\n3. ब्रिटेन में मुद्रास्फीति की मौजूदा दर कितनी है?\nब्रिटेन में मुद्रास्फीति वर्तमान में 3.1 प्रतिशत पर है, जो उसके 2 प्रतिशत के आधिकारिक लक्ष्य से अधिक है।\n\n4. इस फैसले का यूरो और ब्रिटिश पाउंड के विनिमय दर पर क्या असर पड़ा?\nपाउंड में कमजोरी के कारण यूरो मजबूत हुआ और यूरो-पाउंड क्रॉस रेट 0.8600 के स्तर के करीब पहुंच गया।\n\n5. अमेरिकी फेडरल रिजर्व ने अपनी बैठक में ब्याज दरों पर क्या निर्णय लिया?\nफेडरल रिजर्व ने अपनी नीतिगत ब्याज दर सीमा को सर्वसम्मति से 25 आधार अंक बढ़ाकर 3.75%-4.00% कर दिया।",
  "url": "https://trendkia.com/market/bank-of-england-ne-byaja-daren-3-75-pratishata-para-rokin-gbp-men-kamajori-se-eur-charha-33607",
  "category": "बाज़ार",
  "publishedAt": "2026-09-19",
  "tags": [
    "बैंक ऑफ इंग्लैंड",
    "ब्याज दर",
    "यूरो",
    "ब्रिटिश पाउंड",
    "मुद्रास्फीति",
    "विदेशी मुद्रा बाजार",
    "वित्त"
  ],
  "language": "hi",
  "site": "TrendKia"
}