# बैंक ऑफ इंग्लैंड पर बड़ी भविष्यवाणी, ब्याज दरों में बढ़ोतरी के लिए कड़े संकेत

> इंग्लैंड के बैंक की आगामी बैठकों और ब्याज दरों की स्थिति को लेकर नए अनुमान सामने आए हैं। ऊर्जा कीमतों और मुद्रास्फीति के आंकड़ों के आधार पर दरों में बदलाव की संभावनाओं का विश्लेषण किया गया है।

**Type:** article · **Category:** बाज़ार · **Published:** 2026-07-27 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/market/bank-of-england-para-bari-bhavishyavani-byaja-daron-men-barhotari-ke-lie-kare-snketa-11051 · **Language:** Hindi
**Tags:** बैंक ऑफ इंग्लैंड, ब्याज दरें, मुद्रास्फीति, ब्रिटिश अर्थव्यवस्था, विदेशी मुद्रा

बैंक ऑफ इंग्लैंड की ओर से आगामी 30 जुलाई को ब्याज दरों को स्थिर रखने की पूरी उम्मीद जताई जा रही है और आने वाले लंबे समय तक दरों में किसी तरह के बदलाव की संभावना नहीं दिख रही है। वित्तीय विश्लेषकों का अनुमान है कि यह ठहराव 2026 तक खिंच सकता है। केंद्रीय बैंक के नए पूर्वानुमानों में यह बात सामने आ सकती है कि ब्रिटेन में मुद्रास्फीति की दर करीब 3 प्रतिशत के आसपास शीर्ष पर पहुंच सकती है, जो उस 4 प्रतिशत के स्तर से काफी नीचे है जिसे पहले जोखिम भरा माना जाता रहा है। जानकारों का मानना है कि दरों में किसी भी तरह की बढ़ोतरी को सही ठहराने के लिए कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस की कीमतों में बहुत अधिक तेजी आना जरूरी होगा।

## मुद्रास्फीति और ऊर्जा कीमतों का अनुमान
विश्लेषकों का यह भी आकलन है कि केंद्रीय बैंक के संशोधित अनुमान इस साल की दूसरी छमाही और अगले साल की शुरुआत में मुद्रास्फीति को 3 प्रतिशत के काफी करीब दिखाएंगे। सबसे खास बात यह है कि यह आंकड़ा उस 4 प्रतिशत की सीमा से नीचे है, जिसके बारे में बैंक का पहले यह तर्क रहा है कि यह स्तर सांख्यिकीय रूप से द्वितीयक प्रभावों और लंबे समय तक रहने वाले मूल्य दबावों को जन्म दे सकता है। इसी आधार पर यह राय बन रही है कि बोर्ड के सदस्यों को दरों में बढ़ोतरी के पक्ष में खड़ा करने के लिए ऊर्जा की कीमतों में काफी उछाल आना होगा। यदि कच्चे तेल के दाम वापस 90 डॉलर प्रति बैरल से बढ़कर 120 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच जाएं और डच टीटीएफ प्राकृतिक गैस की कीमतें 58 यूरो से बढ़कर लगभग 80 यूरो प्रति मेगावाट घंटा हो जाएं, तो मुद्रास्फीति 4 प्रतिशत से ऊपर निकल जाएगी और इसके परिणामस्वरूप कुछ हद तक मौद्रिक सख्ती देखने को मिल सकती है।

## भू-राजनीतिक जोखिम और नीतिगत दृष्टिकोण
भले ही यह अनुमान लगाना मुश्किल नहीं है कि अगर स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज में अगस्त भर आवाजाही बाधित रहती है तो ऐसे हालात बन सकते हैं, लेकिन मुख्य आधार यही है कि बैंक 2026 तक दरों में कोई बदलाव नहीं करेगा। वर्तमान अनुमानों के अनुसार साल 2027 के वसंत से दो बार दरों में कटौती की जा सकती है, हालांकि यह इस बात पर पूरी तरह निर्भर करता है कि ऑटम बजट के दौरान किसी तरह का बड़ा राजकोषीय प्रोत्साहन सामने न आए। इसके बावजूद, बैंक के भीतर नीति निर्माताओं के बीच स्पष्ट विभाजन बना हुआ है। जिस तरह इस साल की शुरुआत में दरों में कटौती को लेकर बहस देखने को मिली थी, ठीक उसी तरह गवर्नर एंड्रयू बेली समेत पांच अधिकारी इस बात को लेकर कम आश्वस्त नजर आते हैं कि अर्थव्यवस्था उस तरह के महंगाई के दौर के प्रति संवेदनशील है जैसा चार साल पहले देखा गया था। हालिया आंकड़े भी इन्हीं अधिकारियों के रुख का समर्थन करते नजर आते हैं.

## विदेशी मुद्रा बाजार में हलचल
सोमवार को शुरुआती कारोबार में GBP/USD जोड़ी ने शुक्रवार की बढ़त को पीछे छोड़ते हुए 1.3300 के स्तर की तरफ उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की। मध्य पूर्व संघर्ष में थोड़ी नरमी आने के बाद कच्चे तेल की गिरती कीमतों और ब्रिटेन में मुद्रास्फीति के हालिया नरम आंकड़ों ने बैंक ऑफ इंग्लैंड की आगामी बैठक से पहले किसी भी तरह की मौद्रिक सख्ती की संभावनाओं को कमजोर कर दिया है। इसी तरह, सप्ताह की शुरुआत में EUR/USD जोड़ी ने भी अपनी तेजी का रुझान गंवा दिया और फिसलकर 1.1400 के स्तर से नीचे आ गई। मध्य पूर्व में तनाव कम होने की उम्मीदों ने इस मुद्रा जोड़ी को कुछ समर्थन दिया है, हालांकि इस बात को लेकर अभी भी अनिश्चितता बनी हुई है कि अमेरिका और ईरान के बीच कोई स्थायी समाधान निकल पाएगा या नहीं।

## इसका आप पर असर
**व्यापक आर्थिक प्रभाव:**

- **भारत में:** वैश्विक स्तर पर ब्याज दरों में ठहराव और कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव का असर आयातित ऊर्जा लागत और विदेशी मुद्रा बाजार पर पड़ सकता है।
- **बाजार निवेशक:** वैश्विक मुद्रास्फीति के अनुमानों और केंद्रीय बैंकों की नीतियों से जुड़ी यह स्थिति निवेशकों के लिए करेंसी और जिंस बाजारों में रणनीतिक फैसले लेने का आधार बनती है।

## सवाल-जवाब

### 1. बैंक ऑफ इंग्लैंड की अगली बैठक कब है?
बैंक ऑफ इंग्लैंड की आगामी बैठक 30 जुलाई को निर्धारित है।

### 2. ब्रिटेन में मुद्रास्फीति का शिखर कहां तक रहने का अनुमान है?
नए अनुमानों के अनुसार ब्रिटेन में मुद्रास्फीति करीब 3 प्रतिशत के आसपास शीर्ष पर पहुंच सकती है।

### 3. ब्याज दरों में बढ़ोतरी के लिए किन ऊर्जा कीमतों का जिक्र किया गया है?
विश्लेषकों का मानना है कि कच्चे तेल के दाम 120 डॉलर प्रति बैरल और डच टीटीएफ प्राकृतिक गैस 80 यूरो प्रति मेगावाट घंटा तक पहुंचने पर ही दरों में सख्ती आ सकती है।

### 4. भविष्य में ब्याज दरों में कटौती की क्या उम्मीद है?
वर्तमान अनुमानों के मुताबिक साल 2027 के वसंत से दो बार दरों में कटौती की जा सकती है।

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