ब्रिटेन में ब्याज दरों पर बैंक ऑफ इंग्लैंड ले सकता है ठहराव का फैसला, नोमुरा का आकलन अगस्त के महंगाई आंकड़े अनुमान के मुताबिक आने के बाद बैंक ऑफ इंग्लैंड द्वारा सितंबर में ब्याज दरें स्थिर रखने की संभावना मजबूत हुई है, हालांकि ऊर्जा की ऊंची कीमतें आगे चुनौतियां बढ़ा सकती हैं। यूनाइटेड किंगडम में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक पर आधारित महंगाई के अगस्त महीने के आंकड़े लगभग अनुमानों के अनुसार दर्ज किए गए हैं। देश में हेडलाइन महंगाई 3.1 प्रतिशत पर रही है, जबकि कोर और सर्विसेज से जुड़े महंगाई के पैमाने बिना किसी बदलाव के स्थिर बने हुए हैं। इस पृष्ठभूमि में आर्थिक विश्लेषकों का मानना है कि सितंबर की मौद्रिक नीति बैठक में बैंक ऑफ इंग्लैंड अपनी प्रमुख बैंक दर में कोई बदलाव नहीं करेगा और नीतिगत दरों को मौजूदा स्तर पर ही बनाए रखने का विकल्प चुन सकता है। हालांकि, कच्चे तेल और ऊर्जा की बढ़ती कीमतें तथा ईरान युद्ध से उपजे भू-राजनीतिक तनाव आने वाले महीनों में महंगाई का दबाव फिर से बढ़ा सकते हैं, जिससे केंद्रीय बैंक पर आगे चलकर मौद्रिक सख्ती करने का दबाव बढ़ सकता है। महंगाई के आंकड़ों पर नोमुरा की राय और भविष्य की चुनौतियां नोमुरा की ग्लोबल मार्केट्स रिसर्च टीम, जिसमें जोसी एंडरसन, जॉर्ज बकली और आंद्रेज स्जसेपैनिक शामिल हैं, ने इस बात पर जोर दिया है कि हालिया आंकड़े भले ही तात्कालिक राहत देते दिखें, लेकिन महंगाई की कहानी यहीं समाप्त नहीं होती। ऊर्जा के ऊंचे दाम आने वाले महीनों में मूल्य वृद्धि को लगातार हवा दे सकते हैं। यदि भू-राजनीतिक संघर्ष और ईरान युद्ध के कारण ऊर्जा लागत में इजाफा जारी रहता है, तो नीति निर्माताओं पर सख्त कदम उठाने की मजबूरी पैदा होगी। विश्लेषकों का स्पष्ट मानना है कि महंगाई अब 3 प्रतिशत से ऊपर निकल चुकी है और इसके और ऊपर जाने के आसार हैं, जो बैंक ऑफ इंग्लैंड की मौद्रिक नीति समिति यानी एमपीसी पर ब्याज दरें बढ़ाने का दबाव बना सकता है। थोक और उत्पादन कीमतों में नरमी का रुख उत्पादन और आपूर्ति श्रृंखला से जुड़ी अपस्ट्रीम कीमतों के स्तर पर स्थिति कुछ हद तक मिली-जुली देखी गई है। आंकड़ों के अनुसार, आउटपुट कीमतों में महीने-दर-महीने आधार पर 0.7 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई, जो बाजार की अपेक्षाओं से कमजोर रही। विश्लेषकों को यह आशंका थी कि ऊर्जा कीमतों में उछाल की वजह से आउटपुट आंकड़े अधिक ऊंचे रह सकते हैं। इसके साथ ही इनपुट कीमतों में भी नरमी देखी गई, जो महीने-दर-महीने आधार पर मात्र 0.3 प्रतिशत बढ़ीं, जबकि इसके लिए 0.5 प्रतिशत की वृद्धि का अनुमान लगाया गया था। हालांकि इसमें जुलाई महीने की गिरावट में किया गया संशोधन भी शामिल है। वैश्विक मुद्रा बाजार और अमेरिकी डॉलर की मजबूती वैश्विक वित्तीय बाजारों में अमेरिकी डॉलर लगातार बढ़त बनाए हुए है। फेडरल रिजर्व द्वारा संभावित ब्याज दर वृद्धि और कच्चे तेल से संचालित महंगाई की चिंताओं ने अमेरिकी बॉन्ड यील्ड को कई वर्षों के उच्च स्तर पर पहुंचा दिया है। मध्य पूर्व में तनाव बढ़ने के कारण सुरक्षित निवेश के तौर पर डॉलर की मांग में भारी तेजी आई है। इसका सीधा असर ऑस्ट्रेलियाई डॉलर पर पड़ा है, जहां AUD/USD जोड़ी लगातार तीसरे कारोबारी दिन दबाव में रही और बुधवार के एशियाई सत्र में 0.7100 के स्तर का बचाव करते हुए महीने के निचले स्तर के करीब कारोबार करती दिखाई दी। जापानी येन और बैंक ऑफ जापान की मौद्रिक नीति अमेरिकी डॉलर में जारी तेजी के बीच USD/JPY जोड़ी एशियाई सत्र में उछलकर 155.00 के पार एक सप्ताह के नए उच्चतम स्तर पर पहुंच गई। अमेरिका और ईरान के बीच गहराते तनाव ने अमेरिकी मुद्रा की वैश्विक आरक्षित स्थिति को और मजबूत किया है। हालांकि, निवेशक फेडरल रिजर्व के आगामी फैसले और गुरुवार से शुरू हो रही बैंक ऑफ जापान की बैठक से पहले सतर्क नजर आए, जिससे यह जोड़ी 155.00 के मध्य स्तर से नीचे बनी रही। जापान में दशकों तक रही बेहद कम ब्याज दरों ने वैश्विक स्तर पर खरबों डॉलर के निवेश को वित्तपोषित करने में मदद की थी, जिससे येन दुनिया के सबसे सस्ते फंडिंग स्रोतों में से एक बन गया था। चूंकि प्रमुख वैश्विक अर्थव्यवस्थाओं द्वारा ब्याज दरें बढ़ाए जाने के बावजूद जापान अलग बना रहा था, लेकिन अब बैंक ऑफ जापान द्वारा नीति को और सख्त किए जाने की संभावनाओं के बीच यह ऐतिहासिक लाभ एक नए दौर में प्रवेश कर सकता है। सोने की कीमतों में सुधार लगातार दो दिनों की गिरावट के बाद बहुमूल्य धातु सोने के भाव में स्थिरता देखने को मिली है। सोने की कीमतें सुधरते हुए प्रति ट्रॉय औंस 4,350 डॉलर के स्तर पर दोबारा पहुंच गईं। अमेरिकी डॉलर की मजबूती और फेडरल रिजर्व की ब्याज दर घोषणा से पहले अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में नरमी के बावजूद सोने में यह सकारात्मक सुधार दर्ज किया गया, जिससे सुरक्षित निवेश की तलाश कर रहे निवेशकों को सहारा मिला है। इसका आप पर असर वैश्विक स्तर पर ब्याज दरों और महंगाई के इस रुख से आम उपभोक्ताओं और निवेशकों पर सीधा असर पड़ने की संभावना है। • कर्ज और ईएमआई: यदि केंद्रीय बैंक ब्याज दरें स्थिर रखते हैं तो तत्काल ईएमआई नहीं बढ़ेगी। हालांकि भविष्य में दरों में बढ़ोतरी होने पर उधारी की लागत बढ़ सकती है। • ऊर्जा और घरेलू खर्च: अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल और ऊर्जा के ऊंचे दामों से ईंधन महंगा हो सकता है। इससे घरेलू बजट और परिवहन लागत पर असर पड़ेगा। • मुद्रा और आयात: अमेरिकी डॉलर के मजबूत होने से अन्य देशों की मुद्राओं में नरमी आ सकती है। इससे आयातित सामान और विदेश यात्रा महंगी हो सकती है। • सोने में निवेश: 4,350 डॉलर के करीब सोने में आई मजबूती निवेशकों को सुरक्षित परिसंपत्तियों की ओर आकर्षित करेगी। आम खरीदारों को जेवरात के लिए ज्यादा कीमत चुकानी पड़ सकती है। ऐसा क्यों हुआ ब्रिटेन में महंगाई के आंकड़े अनुमान के अनुरूप आने के बावजूद ऊर्जा की लागत और भू-राजनीतिक तनाव ने केंद्रीय बैंकों के सामने नीतिगत चुनौतियां खड़ी कर दी हैं। • महंगाई का मौजूदा स्तर: अगस्त महीने में ब्रिटेन की हेडलाइन महंगाई 3.1 प्रतिशत पर दर्ज की गई। चूंकि कोर और सर्विसेज से जुड़ी महंगाई स्थिर रही, इसलिए नीतिगत दरों में तत्काल बदलाव की जरूरत नहीं समझी गई। • ऊर्जा बाजार में उछाल: अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल और ऊर्जा के बढ़ते भाव ने उत्पादन लागत को प्रभावित किया है। इस कारण आने वाले महीनों में महंगाई दोबारा बढ़ने का जोखिम बना हुआ है। • भू-राजनीतिक संघर्ष: अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव तथा मध्य पूर्व के युद्ध ने वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला को प्रभावित किया है। इस संकट ने सुरक्षित निवेश के रूप में अमेरिकी डॉलर की मांग को काफी बढ़ा दिया है। • केंद्रीय बैंकों का सख्त रुख: फेडरल रिजर्व द्वारा संभावित दर वृद्धि और बॉन्ड यील्ड में तेजी ने वैश्विक वित्तीय बाजारों पर दबाव बनाया है। बैंक ऑफ जापान द्वारा भी अपनी दशकों पुरानी बेहद नरम नीति को बदलने की तैयारी की जा रही है। सवाल-जवाब 1. ब्रिटेन में अगस्त की महंगाई दर कितनी दर्ज की गई? अगस्त महीने में ब्रिटेन की हेडलाइन मुद्रास्फीति 3.1 प्रतिशत पर दर्ज की गई है। 2. सितंबर में बैंक ऑफ इंग्लैंड से किस फैसले की उम्मीद है? आंकड़ों के अनुमान के अनुरूप रहने के चलते बैंक ऑफ इंग्लैंड द्वारा ब्याज दरों को स्थिर रखने की संभावना है। 3. नोमुरा के अनुसार भविष्य में महंगाई बढ़ने का मुख्य कारण क्या है? ऊर्जा की बढ़ती कीमतें और ईरान युद्ध से जुड़े तनाव आने वाले महीनों में महंगाई को और बढ़ा सकते हैं। 4. सोने की कीमत किस स्तर पर पहुंची है? सोना दो दिनों की गिरावट से उबरते हुए 4,350 डॉलर प्रति ट्रॉय औंस के स्तर पर वापस पहुंच गया है। 5. बैंक ऑफ जापान की नीति में क्या बदलाव आने की संभावना है? बैंक ऑफ जापान द्वारा अपनी लंबे समय से चली आ रही बेहद कम ब्याज दरों की नीति को और सख्त किए जाने की संभावना है। https://trendkia.com/market/bank-of-england-poised-to-pause-rate-moves-following-predictable-uk-inflation-numbers-nomura-finds-33765 TrendKia — Har trend, sabse pehle.