# ऊर्जा संकट लंबा खिंचा तो ब्याज दरों पर सख्त कदम उठाने से नहीं हिचकेगा बैंक ऑफ इंग्लैंड, सारा ब्रीडन ने दी चेतावनी

> बैंक ऑफ इंग्लैंड की डिप्टी गवर्नर सारा ब्रीडन ने आगाह किया है कि ऊर्जा की बढ़ती कीमतों का असर लंबे समय तक रहने पर मौद्रिक नीति के जरिए सख्त दखल जरूरी हो जाएगा। केंद्रीय बैंक दूसरे दौर के मुद्रास्फीति प्रभावों के ठोस सबूत मिलने का बहुत ज्यादा इंतजार नहीं कर सकता।

**Type:** article · **Category:** बाज़ार · **Published:** 2026-09-24 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/market/bank-of-england-warns-of-rate-action-as-sarah-breeden-cites-prolonged-energy-risk-37889 · **Language:** Hindi
**Tags:** बैंक ऑफ इंग्लैंड, ब्याज दरें, मुद्रास्फीति, सारा ब्रीडन, ब्रिटिश पाउंड, वैश्विक अर्थव्यवस्था, केंद्रीय बैंक

ब्रिटेन में ऊर्जा कीमतों के रुख और अर्थव्यवस्था पर उनके व्यापक असर को लेकर नीति निर्माताओं की चिंताएं खुलकर सामने आ रही हैं। बैंक ऑफ इंग्लैंड की डिप्टी गवर्नर सारा ब्रीडन ने स्पष्ट शब्दों में आगाह किया है कि ऊर्जा के दामों में गिरावट की कोई स्पष्ट राह फिलहाल नजर नहीं आ रही है। गुरुवार को दिए अपने एक महत्वपूर्ण बयान में उन्होंने साफ किया कि यदि ऊर्जा क्षेत्र को लगने वाला यह झटका ज्यादा बड़ा और लंबे समय तक चलने वाला साबित होता है, तो केंद्रीय बैंक के लिए मौद्रिक नीतिगत कदम उठाना और भी अपरिहार्य हो जाएगा। उनके अनुसार, नीति निर्माताओं के समक्ष जोखिमों का संतुलन पूरी तरह बदल चुका है, और ऐसे हालात में फैसले लेने के लिए ज्यादा देर तक हाथ पर हाथ धरे नहीं बैठा जा सकता।

## अर्थव्यवस्था में सुस्ती और कीमतों के अप्रत्यक्ष असर का गणित
डिप्टी गवर्नर सारा ब्रीडन ने रेखांकित किया कि ऊर्जा की ऊंची कीमतों का जो अप्रत्यक्ष असर अन्य वस्तुओं और सेवाओं तक पहुंचता है, वह अभी तक अपेक्षाकृत सीमित बना हुआ है। अर्थशास्त्र की भाषा में इसे इनडायरेक्ट पास थ्रू कहा जाता है, जिसका मतलब यह है कि ईंधन और बिजली की बढ़ी हुई लागत तुरंत बाकी उपभोक्ता सामानों के दाम में सीधे तौर पर नहीं जुड़ी है। ब्रीडन के विश्लेषण के मुताबिक, यह स्थिति ब्रिटेन की घरेलू अर्थव्यवस्था में मौजूद सुस्ती अथवा खाली क्षमता का संकेत हो सकती है। जब बाजार में मांग नरम होती है और कंपनियों के पास अतिरिक्त क्षमता खाली पड़ी रहती है, तब वे लागत का पूरा बोझ फौरन ग्राहकों पर डालने से बचती हैं।

हालांकि, उन्होंने आगाह किया कि सुस्ती के इस सुरक्षा कवच पर लंबे समय तक निर्भर नहीं रहा जा सकता। यदि ऊर्जा की ऊंची दरों का संकट गहराता है और यह ज्यादा दिनों तक टिकता है, तो कंपनियों की सहनशीलता खत्म होने लगेगी। नतीजतन, वे अपने मार्जिन बचाने के लिए कीमतें बढ़ाने को मजबूर होंगी। सारा ब्रीडन ने दो टूक शब्दों में कहा कि जोखिमों का मौजूदा संतुलन पूरी तरह बदल चुका है, और यदि ये खतरे असलियत में बदलते हैं तो बैंक ऑफ इंग्लैंड को ब्याज दरों में हस्तक्षेप करने के लिए विवश होना पड़ेगा। उन्होंने यह भी जोड़ा कि केंद्रीय बैंक मुद्रास्फीति के दूसरे दौर के प्रभावों के अकाट्य और निर्णायक सबूत आने का बहुत ज्यादा इंतजार नहीं कर सकता, क्योंकि तब तक बहुत देर हो सकती है।

## कंपनियों के मूल्य निर्धारण के रुझानों पर टिकी केंद्रीय बैंक की नजर
नीतिगत फैसलों की दिशा तय करने के लिए सारा ब्रीडन ने कारोबारी सर्वेक्षणों और जमीनी इनपुट्स की अहमियत पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि उनका विशेष ध्यान इस बात पर रहता है कि कंपनियां अपने उत्पादों और सेवाओं के दाम तय करने को लेकर क्या रुख अपना रही हैं। बाजार के वास्तविक मिजाज को भांपने के लिए वे मुख्य रूप से डिसिजन मेकर पैनल सर्वेक्षण, पर्चेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स यानी पीएमआई और केंद्रीय बैंक के क्षेत्रीय एजेंटों के सर्वेक्षणों पर करीबी नजर रखती हैं। इन पैमानों से यह साफ समझ आता है कि कंपनियां भविष्य में कीमतें बढ़ाने की तैयारी कर रही हैं या लागत को खुद वहन कर रही हैं।

ब्रिटेन की संपूर्ण मौद्रिक नीति का संचालन बैंक ऑफ इंग्लैंड द्वारा किया जाता है। इसका सर्वप्रमुख संवैधानिक लक्ष्य देश में मूल्य स्थिरता बनाए रखना है, जिसके तहत वार्षिक मुद्रास्फीति की दर को 2 प्रतिशत के लक्षित स्तर पर स्थिर रखने का दायित्व सौंपा गया है। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए केंद्रीय बैंक का प्राथमिक हथियार आधार उधारी दरों में समायोजन करना है। बैंक ऑफ इंग्लैंड वह ब्याज दर तय करता है जिस पर वह वाणिज्यिक बैंकों को धन उधार देता है और जिस पर बैंक आपस में लेन-देन करते हैं। यही आधार दर पूरे देश की वित्तीय प्रणाली में गृह ऋण, व्यक्तिगत ऋण और व्यापारिक साख की दरों को निर्धारित करती है। इसके साथ ही, यह व्यवस्था विदेशी मुद्रा बाजार में पाउंड स्टर्लिंग के विनिमय मूल्य पर भी सीधा असर डालती है।

## ब्याज दरों, मुद्रास्फीति और पाउंड स्टर्लिंग का आपसी समीकरण
जब भी ब्रिटेन में मुद्रास्फीति बैंक ऑफ इंग्लैंड के 2 प्रतिशत के लक्ष्य से ऊपर निकल जाती है, तो केंद्रीय बैंक ब्याज दरों में बढ़ोतरी करके इस पर लगाम लगाता है। उधारी दरें ऊंची होने से आम नागरिकों और उद्योग-कारोबार दोनों के लिए कर्ज लेना महंगा हो जाता है। लोग खर्चों में कटौती करते हैं और कंपनियां विस्तार योजनाओं को टालती हैं, जिससे बाजार में कुल मांग धीमी पड़ती है और मूल्य वृद्धि पर नियंत्रण स्थापित होता है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा बाजार के नजरिए से ब्याज दरों में यह वृद्धि पाउंड स्टर्लिंग के लिए सकारात्मक साबित होती है। अधिक ब्याज दरें मिलने की वजह से दुनिया भर के वैश्विक निवेशक अपनी पूंजी ब्रिटेन के वित्तीय तंत्र में लगाने के लिए आकर्षित होते हैं, जिससे पाउंड की मांग और कीमत दोनों मजबूत होती हैं।

इसके विपरीत, जब महंगाई की दर 2 प्रतिशत के लक्ष्य से नीचे गिरती है, तो इसे समग्र आर्थिक विकास में सुस्ती का स्पष्ट संकेत माना जाता है। ऐसे दौर में बैंक ऑफ इंग्लैंड ब्याज दरों में कटौती करने पर विचार करता है ताकि बाजार में कर्ज सस्ता और सुलभ बनाया जा सके। सस्ती पूंजी मिलने से कारोबारी नए निवेश करते हैं, रोजगार पैदा होते हैं और आर्थिक गतिविधियों को गति मिलती है। हालांकि, ब्याज दरों में कमी का यह चक्र आमतौर पर पाउंड स्टर्लिंग के विनिमय मूल्य के लिए नकारात्मक साबित होता है, क्योंकि रिटर्न घटने से विदेशी पूंजी का प्रवाह कमजोर पड़ जाता है।

## असाधारण आर्थिक परिस्थितियां और केंद्रीय बैंक के विशेष उपाय
अत्यंत विकट और गंभीर संकट के समय जब पारंपरिक ब्याज दर कटौतियों से अपेक्षित परिणाम नहीं मिलते, तब बैंक ऑफ इंग्लैंड क्वांटिटेटिव ईजिंग यानी क्यूई का सहारा लेता है। इसे केंद्रीय बैंक का अंतिम विकल्प माना जाता है, जिसका उपयोग तब किया जाता है जब पूरी वित्तीय व्यवस्था में नकदी का प्रवाह पूरी तरह जाम हो जाए। इस प्रक्रिया के तहत केंद्रीय बैंक सीधे नई मुद्रा का सृजन करके वाणिज्यिक बैंकों और अन्य वित्तीय संस्थानों से सरकारी बॉन्ड अथवा एएए रेटिंग वाले कॉर्पोरेट बॉन्ड भारी मात्रा में खरीदता है। बॉन्ड खरीद से वित्तीय संस्थानों के पास नकदी की प्रचुरता हो जाती है और वे अर्थव्यवस्था में कर्ज बांटने के लिए प्रेरित होते हैं। हालांकि, मुद्रा की आपूर्ति में भारी बढ़ोतरी के कारण क्वांटिटेटिव ईजिंग का नतीजा आमतौर पर पाउंड स्टर्लिंग की कमजोरी के रूप में सामने आता है।

इसके बिल्कुल उलट उपाय को क्वांटिटेटिव टाइटनिंग यानी क्यूटी कहा जाता है। यह नीति तब लागू की जाती है जब अर्थव्यवस्था संकट से उबरकर मजबूती हासिल करने लगे और महंगाई सिर उठाने लगे। क्वांटिटेटिव ईजिंग में जहां बैंक ऑफ इंग्लैंड वित्तीय संस्थानों को उधारी बढ़ाने के लिए बॉन्ड खरीदता है, वहीं क्वांटिटेटिव टाइटनिंग में केंद्रीय बैंक नए बॉन्ड खरीदना बंद कर देता है। इसके साथ ही, अपने पोर्टफोलियो में पहले से मौजूद बॉन्डों की परिपक्वता पर मिलने वाले मूलधन को दोबारा निवेश करने पर भी रोक लगा दी जाती है। बाजार से नकदी सोखने की यह प्रक्रिया आमतौर पर पाउंड स्टर्लिंग के लिए सकारात्मक मानी जाती है।

## वैश्विक मुद्रा और बॉन्ड बाजारों में व्यापक हलचल
बैंक ऑफ इंग्लैंड की इस सख्त चेतावनी के बीच दुनिया भर के वित्तीय बाजारों में भी कई बड़े बदलाव देखने को मिले हैं। एशियाई कारोबारी सत्र में गुरुवार को ऑस्ट्रेलियाई डॉलर बनाम अमेरिकी डॉलर की जोड़ी 0.7000 के स्तर की तरफ फिसलती नजर आई। यह गिरावट ऑस्ट्रेलिया के अगस्त महीने के रोजगार आंकड़ों के आने के बाद दर्ज की गई। इन आंकड़ों के अनुसार देश में बेरोजगारी दर बढ़कर 4.6 प्रतिशत पर पहुंच गई, जबकि बाजार का अनुमान 4.5 प्रतिशत रहने का था। हालांकि, रोजगार परिवर्तन के मोर्चे पर 39.5 हजार का आंकड़ा दर्ज हुआ, जिसने बाजार के अनुमानों को पीछे छोड़ दिया। इसके साथ ही, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच होने वाली महत्वपूर्ण बैठक से पहले मुद्रा बाजार में घबराहट और अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है।

दूसरी ओर, जापानी येन के मुकाबले अमेरिकी डॉलर तीन सप्ताह के उच्चतम स्तर से फिसलकर एशियाई सत्र में 158.00 के करीब नुकसान झेलता दिखा। जापान में बॉन्ड यील्ड में आई जोरदार तेजी ने जापानी येन को सहारा दिया है, क्योंकि बाजार में सरकारी हस्तक्षेप का जोखिम मंडरा रहा है। वहीं दूसरी तरफ, अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा सख्त मौद्रिक नीति बनाए रखने के कयासों और ऊंची अमेरिकी बॉन्ड यील्ड के बल पर अमेरिकी डॉलर दो महीने के उच्चतम स्तर के करीब अपनी बढ़त बनाए रखने में कामयाब रहा।

## सोने की कीमतों पर दबाव और प्रमुख केंद्रीय बैंकों के हालिया कदम
सुरक्षित निवेश माने जाने वाले सोने की कीमतों में भी लगातार दूसरे दिन कमजोरी का रुख देखा गया। यूरोपीय सत्र के पहले हिस्से में सोना 4,300 डॉलर प्रति औंस के स्तर से नीचे फिसलकर एक सप्ताह के निचले स्तर पर कारोबार कर रहा था। निवेशक डोनाल्ड ट्रंप और शी जिनपिंग की आमने-सामने की मुलाकात के नतीजों का इंतजार कर रहे हैं। हालांकि किसी बहुत बड़े औपचारिक समझौते की उम्मीदें काफी कम हैं, लेकिन बाजार के प्रतिभागी दुर्लभ खनिजों यानी रेयर अर्थ्स, प्रौद्योगिकी प्रतिबंधों और मौजूदा व्यापार समझौते के विस्तार से जुड़ी प्रगति पर पैनी नजर गड़ाए हुए हैं।

यूरोप के अन्य हिस्सों में स्विस नेशनल बैंक ने वित्तीय विश्लेषकों की अपेक्षाओं के अनुरूप अपनी प्रमुख नीतिगत ब्याज दर को बिना किसी बदलाव के 0 प्रतिशत पर ही बरकरार रखा। अपने मौद्रिक नीति आकलन में स्विस केंद्रीय बैंक ने स्पष्ट किया कि उसके पास रखे जाने वाले बैंकों के साइट डिपॉजिट्स पर एक निश्चित सीमा तक नीतिगत दर के बराबर प्रतिफल दिया जाएगा। स्विस नेशनल बैंक ने वर्ष 2026 के लिए मुद्रास्फीति का अनुमान बढ़ाकर 0.7 प्रतिशत कर दिया है, जो कि पहले 0.6 प्रतिशत अनुमानित था। इसके साथ ही बैंक ने रेखांकित किया कि स्विट्जरलैंड के आर्थिक परिदृश्य के लिए सबसे बड़ा जोखिम वैश्विक अर्थव्यवस्था के उतार-चढ़ाव से जुड़ा हुआ है। उधर एशियाई क्षेत्र में बैंक ऑफ जापान ने नीतिगत सामान्यीकरण की दिशा में एक और कदम बढ़ाते हुए अपने अल्पकालिक ब्याज दर लक्ष्य को 1.00 प्रतिशत से बढ़ाकर 1.25 प्रतिशत कर दिया। यह फैसला 7 के मुकाबले 2 वोटों के बहुमत से लिया गया, जो पिछले कई हफ्तों से बाजार की आम अपेक्षाओं के बिल्कुल अनुकूल था।

## इसका आप पर असर
बैंक ऑफ इंग्लैंड द्वारा ब्याज दरों में बढ़ोतरी की चेतावनी और वैश्विक केंद्रीय बैंकों के कड़े कदमों से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उधारी महंगी हो सकती है तथा मुद्रा विनिमय दरों में उतार-चढ़ाव बढ़ सकता है।

- **भारत में:** विदेशी मुद्रा बाजारों में डॉलर और पाउंड के उतार-चढ़ाव से आयात बिल प्रभावित हो सकता है। यदि वैश्विक ऊर्जा कीमतें और ब्याज दरें ऊंची बनी रहीं तो घरेलू शेयर बाजार में विदेशी संस्थागत निवेशकों का प्रवाह सुस्त पड़ सकता है।
- **ब्रिटेन में रहने वाले प्रवासियों के लिए:** ब्रिटेन में ब्याज दरों में संभावित वृद्धि से नए होम लोन और क्रेडिट कार्ड की ईएमआई सीधे तौर पर बढ़ जाएगी। हालांकि, बैंकों में बचत खातों और सावधि जमा पर मिलने वाला ब्याज प्रतिफल पहले से बेहतर हो सकता है।
- **वैश्विक निवेशकों के लिए:** बॉन्ड यील्ड में तेजी आने से सोने और कमोडिटी जैसे बिना ब्याज वाले एसेट्स पर दबाव बढ़ सकता है। निवेशकों को अपने पोर्टफोलियो में फिक्स्ड इनकम और इक्विटी के आवंटन को दोबारा जांचना चाहिए।
- **विदेशी यात्रियों और छात्रों के लिए:** पाउंड और डॉलर की विनिमय दरों में मजबूती आने से विदेश में पढ़ाई और यात्रा का खर्च बढ़ सकता है। विदेश में ट्यूशन फीस जमा करने वाले परिवारों को करेंसी हेजिंग या सही समय पर फंड ट्रांसफर का ध्यान रखना होगा।

## ऐसा क्यों हुआ
यह स्थिति अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में लगातार बने रहने वाले उतार-चढ़ाव, कंपनियों के मार्जिन पर बढ़ते दबाव और प्रमुख वैश्विक केंद्रीय बैंकों द्वारा मुद्रास्फीति पर काबू पाने की प्राथमिकताओं के चलते पैदा हुई है।

- **ऊर्जा कीमतों में अनिश्चितता:** वैश्विक आपूर्ति बाधाओं और अस्थिरता के कारण ईंधन लागत में कमी के स्पष्ट संकेत नहीं दिख रहे हैं। यदि ऊर्जा की ऊंची लागत लंबे समय तक बनी रही तो कंपनियों को अपने तैयार उत्पादों के दाम बढ़ाने पड़ेंगे।
- **आर्थिक सुस्ती का प्रभाव:** ब्रिटेन की अर्थव्यवस्था में मौजूद शिथिलता के कारण कंपनियां अब तक लागत का बोझ खुद झेल रही थीं। लेकिन जब यह सुस्ती खत्म होगी तो लागत का सीधा असर आम उपभोक्ताओं के खुदरा बिलों पर दिखने लगेगा।
- **मुद्रास्फीति का दूसरा चक्र:** केंद्रीय बैंक को आशंका है कि ऊर्जा की महंगाई आगे चलकर मजदूरी और सेवा क्षेत्र की कीमतों को भड़का सकती है। इसी दूसरे दौर के असर को रोकने के लिए नीति निर्माता समय से पहले ब्याज दरें बढ़ाने की तैयारी कर रहे हैं।
- **वैश्विक स्तर पर नीतिगत सख्ती:** स्विट्जरलैंड, जापान और अमेरिका जैसे अन्य प्रमुख देशों के केंद्रीय बैंक भी अपनी मौद्रिक नीतियों को सख्त या सतर्क बनाए हुए हैं। वैश्विक वित्तीय तंत्र में स्थिरता बनाए रखने के लिए बैंक ऑफ इंग्लैंड को भी अपनी दरें प्रतिस्पर्धी रखनी पड़ रही हैं।

## सवाल-जवाब

### 1. बैंक ऑफ इंग्लैंड की डिप्टी गवर्नर सारा ब्रीडन ने क्या चेतावनी दी है?
उन्होंने आगाह किया है कि ऊर्जा कीमतों में गिरावट की कोई स्पष्ट राह नहीं है और यदि यह झटका लंबा खिंचा तो केंद्रीय बैंक को ब्याज दरें बढ़ाने जैसा मौद्रिक नीतिगत कदम उठाना पड़ सकता है।

### 2. मुद्रास्फीति के लिए बैंक ऑफ इंग्लैंड का प्राथमिक लक्ष्य क्या है?
बैंक ऑफ इंग्लैंड का प्राथमिक संवैधानिक लक्ष्य मूल्य स्थिरता बनाए रखना है, जिसके तहत वार्षिक मुद्रास्फीति की दर को 2 प्रतिशत पर स्थिर रखना अनिवार्य है।

### 3. बैंक ऑफ जापान ने हाल ही में ब्याज दरों पर क्या फैसला किया है?
बैंक ऑफ जापान ने 7-2 के बहुमत से अपनी अल्पकालिक ब्याज दर के लक्ष्य को 1.00 प्रतिशत से बढ़ाकर 1.25 प्रतिशत कर दिया है।

### 4. स्विस नेशनल बैंक ने अपनी प्रमुख नीतिगत दर किस स्तर पर रखी है?
स्विस नेशनल बैंक ने अपनी प्रमुख नीतिगत ब्याज दर को बिना किसी बदलाव के 0 प्रतिशत पर अपरिवर्तित रखा है और 2026 के लिए महंगाई दर 0.7 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया है।

### 5. क्वांटिटेटिव ईजिंग और क्वांटिटेटिव टाइटनिंग में मुख्य अंतर क्या है?
क्वांटिटेटिव ईजिंग में केंद्रीय बैंक नकदी बढ़ाने के लिए वित्तीय संस्थानों से बॉन्ड खरीदता है, जबकि क्वांटिटेटिव टाइटनिंग में वह बॉन्ड खरीद रोककर बाजार से अतिरिक्त नकदी वापस खींचता है।

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