बैंक ऑफ जापान ने ब्याज दरें 1.25% कीं, लेकिन दो सदस्यों की असहमति से कमजोर पड़ा येन बैंक ऑफ जापान ने अपनी अल्पकालिक नीतिगत ब्याज दर को 1.00% से बढ़ाकर 1.25% कर दिया है। बोर्ड के दो सदस्यों के विरोध और उएदा के सतर्क रुख के बाद मुद्रा बाजार में येन टूटकर 158.00 के करीब आ गया। जापान के केंद्रीय बैंक, बैंक ऑफ जापान ने मौद्रिक नीति को सामान्य बनाने की दिशा में एक और बड़ा कदम उठाते हुए अपनी अल्पकालिक ब्याज दर के लक्ष्य को 1.00% से बढ़ाकर 1.25% कर दिया है। यह नीतिगत फैसला बोर्ड के भीतर 7-2 के बहुमत से पारित हुआ, जो बाजार की हफ्तों पुरानी अपेक्षाओं के काफी हद तक अनुरूप रहा। हालांकि, दर वृद्धि के पक्ष में पूर्ण सहमति न बनने और बोर्ड के दो सदस्यों द्वारा कड़ा विरोध दर्ज कराने के कारण वित्तीय बाजारों में बैंक के इस कदम को उम्मीद से कम आक्रामक माना गया। नतीजतन, इस फैसले के तुरंत बाद विदेशी मुद्रा बाजार में जापानी येन में भारी गिरावट दर्ज की गई और अमेरिकी डॉलर के मुकाबले येन टूटकर दो सप्ताह के निचले स्तर तथा 158.00 के करीब पहुंच गया। नीतिगत फैसले पर बोर्ड में असहमति और दो सदस्यों का विरोध केंद्रीय बैंक के ताजा नीतिगत निर्णय में सर्वसम्मति की कमी साफ दिखाई दी। बोर्ड के दो सदस्यों, असादा और सातो ने इस बढ़ोतरी के खिलाफ मतदान किया। उनका तर्क था कि उपभोक्ता मूल्य मुद्रास्फीति अब भी 2% से नीचे बनी हुई है। दोनों सदस्यों का मानना था कि अर्थव्यवस्था और कीमतों में हालिया बदलाव इतने तेज नहीं रहे हैं कि ब्याज दरों में एक और बढ़ोतरी को पूरी तरह उचित ठहराया जा सके। उनका विचार था कि घरेलू मांग और कीमतों में जब तक अधिक टिकाऊ तेजी नहीं दिखती, तब तक उधार की लागत बढ़ाना जल्दबाजी हो सकती है। इसके विपरीत, बोर्ड के बहुमत वाले 7 सदस्यों का यह निष्कर्ष था कि देश में महंगाई के 2% के लक्ष्य को स्थायी और स्थिर तरीके से हासिल करने के लिए मौद्रिक सहायता को घटाना अब अनिवार्य हो चुका है। बहुमत के अनुसार, यदि नीति को बहुत लंबे समय तक जरूरत से ज्यादा उदार बनाए रखा गया, तो आगे चलकर मूल्य स्थिरता को नियंत्रित करना मुश्किल हो जाएगा। इसलिए दरों में वृद्धि कर वित्तीय स्थितियों को धीरे-धीरे सामान्य स्तर पर लाना ही देश के आर्थिक हित में है। बुनियादी महंगाई का दबाव और बढ़ती लागत बैंक ऑफ जापान का स्पष्ट आकलन है कि अर्थव्यवस्था में बुनियादी मुद्रास्फीति 2% के स्तर के काफी करीब पहुंच रही है और मूल्य दबाव पहले से अधिक स्थायी रूप ले रहे हैं। तेल की अंतरराष्ट्रीय कीमतों, जापानी मुद्रा येन की कमजोरी और कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी AI से संबंधित नई मांग के कारण थोक मुद्रास्फीति ऊंचे स्तर पर बनी हुई है। इन कारकों से उत्पादन लागत बढ़ रही है और व्यापार-से-व्यापार (B2B) लागत में होने वाली यह वृद्धि अब धीरे-धीरे सीधे उपभोक्ता वस्तुओं की कीमतों में फैल रही है। इसके साथ ही, जापानी कंपनियां भी अपने कर्मचारियों के बढ़े हुए वेतन के असर को बिक्री मूल्यों में स्थानांतरित कर रही हैं। जापानी बाजार में वेतन और कीमतों का यह चक्र सक्रिय होने से आम जनता और उद्योग जगत में मुद्रास्फीति को लेकर उम्मीदें भी लगातार बढ़ रही हैं। बैंक ऑफ जापान का मानना है कि जब तक यह प्रक्रिया जारी रहेगी, तब तक मुद्रास्फीति पर ऊपर की ओर दबाव बना रहेगा, जिसे नियंत्रित रखने के लिए केंद्रीय बैंक को अपनी मौद्रिक नीतियों को सतर्कतापूर्वक संतुलित करना होगा। गवर्नर उएदा ने रेखांकित किए आर्थिक जोखिम बैंक ऑफ जापान के गवर्नर उएदा ने आर्थिक परिदृश्य के सामने खड़े कई प्रमुख जोखिमों की स्पष्ट रूप से पहचान की है। उन्होंने विशेष रूप से पश्चिम एशिया के संघर्ष, कच्चे तेल की अंतरराष्ट्रीय कीमतों, AI से संबंधित मांग और विदेशी मुद्रा बाजार में जारी अस्थिरता को बड़े कारक बताया। उएदा ने कहा कि पश्चिम एशिया के संकट से जुड़ा कीमतों में बढ़ोतरी का दूसरा चरण पहले ही शुरू हो चुका है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि मुद्रास्फीति के 2% के लक्ष्य से बहुत ऊपर निकलने का जोखिम दिखाई देता है, तो बैंक ऑफ जापान को समय से पहले ही एहतियाती कदम उठाने की जरूरत होगी। इसके साथ ही, नीति निर्माताओं की यह भी प्राथमिकता है कि मौद्रिक नीति को बहुत तेजी से कड़ा करने से वित्तीय और आर्थिक नुकसान न हो। इसका अर्थ यह है कि बड़ी या लगातार दरों में बढ़ोतरी का विकल्प केवल तभी चुना जाएगा, जब महंगाई के तय लक्ष्य से बहुत अधिक बढ़ने का खतरा बेहद गंभीर रूप ले ले। गवर्नर उएदा ने यह भी रेखांकित किया कि बैंक ऑफ जापान येन के विनिमय दर स्तर को नियंत्रित करने के लिए मौद्रिक नीति का संचालन नहीं करता है, हालांकि विनिमय दर में होने वाले उतार-चढ़ाव बेहद महत्वपूर्ण बने हुए हैं क्योंकि उनका सीधा प्रभाव आयात लागत और घरेलू कीमतों पर पड़ता है। उएदा ने यह भी कहा कि वित्तीय वर्ष 2027 में होने वाली वसंत ऋतु की वेतन वार्ताएं यह तय करने में निर्णायक भूमिका निभाएंगी कि बुनियादी मुद्रास्फीति 2% के आसपास स्थायी रूप से स्थिर होती है या नहीं। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि केंद्रीय बैंक अपनी पूर्ण स्वतंत्रता बनाए रखेगा और इसके साथ ही सरकार के साथ उचित तालमेल भी जारी रखेगा। नीति सामान्यीकरण का नया चरण और मापा-तुला रुख कुल मिलाकर इस बैठक का लहजा आक्रामक होने के साथ-साथ बेहद नपा-तुला रहा। बैंक ऑफ जापान स्पष्ट रूप से अपनी नीति को सामान्य बनाने के एक नए चरण में प्रवेश कर चुका है। बुनियादी महंगाई की चाल, बढ़े हुए वेतन का कीमतों पर असर और महंगाई की बढ़ती अपेक्षाएं आगे चलकर मौद्रिक सख्ती के लिए एक मजबूत आधार तैयार कर रही हैं। हालांकि, गवर्नर उएदा द्वारा पिछली दर वृद्धियों के संचयी प्रभाव पर दिया गया जोर, जरूरत से ज्यादा तेज गति से बचने की सलाह और भविष्य के लिए किसी निश्चित समय सारिणी की अनुपस्थिति यह दर्शाती है कि आगामी कदम बेहद क्रमिक होंगे। बैंक ऑफ जापान के आने वाले फैसले पूरी तरह से आने वाले आर्थिक आंकड़ों पर निर्भर करेंगे, जिससे यह साफ होता है कि बैंक बिना पर्याप्त साक्ष्यों के ब्याज दरों में जल्दबाजी में कोई भारी बढ़ोतरी नहीं करेगा। बैंक ऑफ जापान का इतिहास और अप्रत्याशित नीतियां बैंक ऑफ जापान देश का केंद्रीय बैंक है, जो जापान में मौद्रिक नीति का निर्धारण करता है। इसका मुख्य जनादेश बैंक नोट जारी करना और मूल्य स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए मुद्रा व मौद्रिक नियंत्रण का संचालन करना है, जिसका सीधा लक्ष्य लगभग 2% की मुद्रास्फीति दर बनाए रखना है। कम मुद्रास्फीति के माहौल से निपटने, अर्थव्यवस्था को गति देने और महंगाई को बढ़ावा देने के उद्देश्य से बैंक ऑफ जापान ने 2013 में एक बेहद उदार मौद्रिक नीति की शुरुआत की थी। बैंक की यह रणनीति परिमाणात्मक और गुणात्मक सुगमता (QQE) पर आधारित थी, जिसके तहत नकदी प्रवाह बढ़ाने के लिए नए नोट जारी कर सरकारी अथवा कॉर्पोरेट बॉन्ड जैसी परिसंपत्तियों की बड़े पैमाने पर खरीद की जाती थी। वर्ष 2016 में, बैंक ने अपनी इस रणनीति को और अधिक आक्रामक बना दिया। पहले उसने नकारात्मक ब्याज दरें लागू कीं और फिर अपने 10-वर्षीय सरकारी बॉन्ड के प्रतिफल को सीधे नियंत्रित करना शुरू किया। आखिरकार मार्च 2024 में, बैंक ऑफ जापान ने ब्याज दरों में बढ़ोतरी की और इस बेहद उदार मौद्रिक रुख से पीछे हटने की प्रक्रिया औपचारिक रूप से शुरू की। मुद्रा अवमूल्यन और वैश्विक वित्तीय समीकरण बैंक ऑफ जापान के इस विशाल मौद्रिक प्रोत्साहन का एक बड़ा परिणाम यह हुआ कि प्रमुख वैश्विक मुद्राओं के मुकाबले जापानी येन में भारी गिरावट आई। वर्ष 2022 और 2023 में यह अवमूल्यन और गहरा हो गया, क्योंकि बैंक ऑफ जापान और दुनिया के अन्य प्रमुख केंद्रीय बैंकों की नीतियों के बीच का अंतर काफी बढ़ गया था। अन्य केंद्रीय बैंक दशकों की रिकॉर्ड महंगाई से निपटने के लिए ब्याज दरों में तेजी से बढ़ोतरी कर रहे थे, जबकि जापान अपनी शून्य या नकारात्मक दरों पर टिका रहा। इस भारी नीतिगत अंतर के कारण येन का मूल्य अंतरराष्ट्रीय बाजारों में तेजी से नीचे खिसकता चला गया। हालांकि, 2024 में यह रुझान आंशिक रूप से तब पलटा जब बैंक ऑफ जापान ने अपनी बेहद ढीली नीति को छोड़ने का अंतिम निर्णय लिया। कमजोर येन और वैश्विक ऊर्जा कीमतों में आए उछाल ने जापान की घरेलू महंगाई को 2% के लक्ष्य से ऊपर धकेल दिया। इसके साथ ही, देश में श्रमिकों के वेतन में बढ़ोतरी की संभावनाओं ने भी इस मूल्य वृद्धि को बनाए रखने में बड़ा योगदान दिया। एक दशक से भी अधिक समय तक जापान की अत्यंत कम ब्याज दरों ने दुनिया भर में खरबों डॉलर के वैश्विक निवेश को वित्तपोषित करने में मदद की थी। इसके चलते जापानी येन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सबसे सस्ते फंडिंग स्रोतों में से एक बन गया था, जिसे कैरी ट्रेड के रूप में इस्तेमाल किया जाता था। अब जब बैंक ऑफ जापान अपनी नीति को कड़ा कर रहा है, तो सस्ते धन का यह लाभ एक नए दौर में प्रवेश कर रहा है, जहां जापान दुनिया के बाकी देशों से अलग-थलग रहने के बजाय अपनी दरों को सामान्य करने की ओर बढ़ रहा है। अन्य वैश्विक वित्तीय बाजारों की स्थिति बैंक ऑफ जापान के इस बड़े निर्णय के बीच अंतरराष्ट्रीय वित्तीय बाजारों में विभिन्न परिसंपत्तियों पर भी महत्वपूर्ण हलचल देखी गई। एशियाई कारोबारी सत्र के दौरान शुक्रवार को ऑस्ट्रेलियाई डॉलर अमेरिकी डॉलर के मुकाबले लगातार दूसरे दिन बढ़त के साथ 0.7100 के स्तर से ऊपर टिका रहा। अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में आई नरमी ने अमेरिकी डॉलर को दबाव में रखा। इसके अलावा, ऑस्ट्रेलिया के केंद्रीय बैंक, रिज़र्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया (RBA) के गवर्नर बुलक की आक्रामक टिप्पणियों ने ब्याज दर बढ़ने की संभावनाओं को हवा दी, जिससे ऑस्ट्रेलियाई डॉलर को मजबूत समर्थन मिला। हालांकि, अमेरिकी फेडरल रिजर्व के सख्त मौद्रिक दृष्टिकोण और वैश्विक भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं ने डॉलर के नुकसान को सीमित रखा और इस मुद्रा जोड़े की बढ़त पर अंकुश लगाया। दूसरी ओर, यूरोपीय सत्र के दौरान शुक्रवार को सोने की कीमतों में लगातार दूसरे दिन तेजी देखी गई और इसने नए साप्ताहिक उच्च स्तरों को छू लिया। बाजार के खरीदार अब आगे की तेजी की स्थिति बनाने से पहले सोने की कीमतों के 4,400 डॉलर के स्तर के पार टिकने का इंतजार कर रहे हैं। अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड प्रतिफल में आई गिरावट ने आगामी अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों और फेडरल रिजर्व के अधिकारियों के भाषणों से पहले डॉलर की मजबूती को रोके रखा। क्रिप्टोकरेंसी बाजार में भी सुधार का रुख देखा गया है। बिटकॉइन जुलाई में 57,800 डॉलर के वार्षिक निचले स्तर तक गिरने के बाद जोरदार वापसी दर्ज करने में सफल रहा। इसमें लगभग 33% की वृद्धि दर्ज की गई और जुलाई तथा अगस्त के महीनों में लगातार दो महीने बढ़त हासिल हुई। हालांकि, इस उल्लेखनीय उछाल के बावजूद बिटकॉइन अपने सर्वकालिक उच्च स्तर से लगभग 40% नीचे बना हुआ है। इसने व्यापारियों और विश्लेषकों के सामने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या यह नई तेजी के दौर की शुरुआत है या फिर व्यापक मंदी के चक्र के भीतर केवल एक अस्थायी सुधार है। इसका आप पर असर बैंक ऑफ जापान द्वारा ब्याज दरें बढ़ाने और जापानी येन में आई कमजोरी का सीधा असर वैश्विक मुद्रा विनिमय, आयात लागत और अंतरराष्ट्रीय निवेश प्रवाह पर पड़ेगा। • वैश्विक निवेशकों के लिए: वैश्विक बाजारों में सस्ता येन उधार लेकर अन्य देशों में निवेश करने का कैरी ट्रेड प्रभावित हो सकता है। ब्याज दरें 1.25% होने से जापान से मिलने वाला सस्ता कर्ज अब पहले जैसा किफायती नहीं रहेगा, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजारों की नकदी पर असर पड़ सकता है। • मुद्रा विनिमय और यात्रियों के लिए: अमेरिकी डॉलर के मुकाबले जापानी येन टूटकर 158.00 के करीब पहुंचने से जापान की यात्रा और खरीदारी विदेशी पर्यटकों के लिए सस्ती बनी रहेगी। हालांकि, आयातित ऊर्जा पर निर्भर रहने वाले जापानी नागरिकों के लिए रोजमर्रा की जरूरतें और महंगी हो सकती हैं। • कमोडिटी और सोने के खरीदारों के लिए: अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में गिरावट और अनिश्चितता के चलते सोना 4,400 डॉलर के स्तर की ओर बढ़ रहा है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बुलियन की कीमतें मजबूत रहने से खुदरा खरीदारों और आभूषण प्रेमियों को ऊंची कीमतों का सामना करना पड़ सकता है। • क्रिप्टोकरेंसी निवेशकों के लिए: जुलाई के 57,800 डॉलर के निचले स्तर से 33% चढ़ने के बाद भी बिटकॉइन अपने शिखर से 40% नीचे है। वैश्विक तरलता में हो रहे बदलावों के बीच व्यापारियों को नई तेजी की पुष्टि होने तक सतर्क रहने की आवश्यकता है। ऐसा क्यों हुआ बैंक ऑफ जापान ने बढ़ती बुनियादी महंगाई और वेतन वृद्धि को देखते हुए ब्याज दरों में बढ़ोतरी की, लेकिन बोर्ड में मतभेद के कारण येन में गिरावट आई। • मुद्रास्फीति का दबाव: तेल की ऊंची कीमतों, आयात लागत और AI से जुड़ी औद्योगिक मांग के चलते थोक कीमतें लगातार बढ़ रही थीं। कंपनियों ने बढ़े हुए वेतन और लागत का बोझ उपभोक्ताओं पर डालना शुरू कर दिया, जिससे बुनियादी महंगाई 2% के लक्ष्य के करीब पहुंच गई। • नीतिगत मतभेद: बोर्ड के दो सदस्यों, असादा और सातो ने दर वृद्धि के खिलाफ वोट दिया क्योंकि वे उपभोक्ता महंगाई को 2% से नीचे देख रहे थे। बोर्ड में इस असहमति और गवर्नर के सतर्क रुख ने बाजार को यह संकेत दिया कि आगे दरें बहुत तेजी से नहीं बढ़ेंगी। • दशकों की ढीली नीति का अंत: जापान ने 2013 से अति-उदार नीति और 2016 से नकारात्मक दरें लागू रखी थीं, जबकि अन्य केंद्रीय बैंक दरें बढ़ा रहे थे। नीतिगत अंतर के चलते कमजोर हुए येन और आयातित महंगाई से निपटने के लिए बैंक ऑफ जापान को अपनी नीति सामान्य करनी पड़ी। सवाल-जवाब 1. बैंक ऑफ जापान ने ब्याज दरों में कितना बदलाव किया है? बैंक ऑफ जापान ने अपनी अल्पकालिक नीतिगत ब्याज दर को 1.00% से बढ़ाकर 1.25% कर दिया है। 2. इस फैसले के खिलाफ किन बोर्ड सदस्यों ने मतदान किया? बोर्ड सदस्य असादा और सातो ने इस बढ़ोतरी का विरोध किया और तर्क दिया कि उपभोक्ता महंगाई दर अभी 2% से नीचे है। 3. दरें बढ़ने के बावजूद जापानी येन कमजोर क्यों हुआ? फैसले में दो सदस्यों की असहमति और गवर्नर उएदा द्वारा अत्यधिक तेज नीतिगत सख्ती से बचने के संकेतों के कारण येन डॉलर के मुकाबले गिरकर 158.00 के करीब आ गया। 4. गवर्नर उएदा ने अर्थव्यवस्था के लिए किन मुख्य जोखिमों का उल्लेख किया? उन्होंने पश्चिम एशिया के संघर्ष, कच्चे तेल की ऊंची कीमतों, AI से संबंधित मांग और विदेशी मुद्रा बाजार में अस्थिरता को प्रमुख जोखिम बताया। 5. वित्तीय वर्ष 2027 की वसंत वेतन वार्ता क्यों महत्वपूर्ण मानी जा रही है? गवर्नर उएदा के अनुसार, FY 2027 की वसंत वेतन वार्ताएं यह तय करेंगी कि मुद्रास्फीति 2% के आसपास स्थायी और स्थिर रूप से टिक पाती है या नहीं। 6. सोने और बिटकॉइन की कीमतों की मौजूदा स्थिति क्या है? सोना यूरोपीय सत्र में साप्ताहिक उच्च स्तर छूते हुए 4,400 डॉलर के पार जाने की तैयारी में है, जबकि बिटकॉइन जुलाई के 57,800 डॉलर के निचले स्तर से 33% सुधर चुका है। https://trendkia.com/market/bank-of-japan-ne-byaja-daren-1-25-kin-lekina-do-sadasyon-ki-asahamati-se-kamajora-para-yen-33432 TrendKia — Har trend, sabse pehle.