भू-राजनीतिक तनाव के बीच तकनीकी बढ़त बरकरार, डब्ल्यूटीआई कच्चे तेल का भाव $89.76 के करीब थमा मुनाफावसूली के कारण वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (डब्ल्यूटीआई) कच्चे तेल की कीमतों में थोड़ी गिरावट आई है, लेकिन मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और मजबूत तकनीकी संकेतकों ने गिरावट को सीमित कर रखा है। वैश्विक बाजारों में मुनाफावसूली के दबाव के बीच अमेरिकी कच्चे तेल के बेंचमार्क वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (डब्ल्यूटीआई) की कीमतों में हाल ही में गिरावट देखी गई है। लाइव बाजार आंकड़ों के अनुसार, यह प्रमुख कमोडिटी फिलहाल $89.76 प्रति बैरल के आसपास कारोबार कर रही है, जो पिछले बंद भाव $92.19 की तुलना में 2.64 प्रतिशत की गिरावट को दर्शाती है। शुरुआती यूरोपीय कारोबारी सत्र के दौरान ट्रेडर्स द्वारा बड़े पैमाने पर की गई मुनाफावसूली को इस गिरावट की मुख्य वजह माना जा रहा है। हालांकि, बाजार विश्लेषकों का मानना है कि कच्चे तेल की कीमतों में इस गिरावट का दायरा सीमित रह सकता है। इसकी बड़ी वजह मध्य पूर्व में लगातार गहराता जा रहा सैन्य और राजनीतिक संकट है, जिसने एक बार फिर वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं। मध्य पूर्व में गहराता सैन्य संकट और ऊर्जा आपूर्ति की चिंताएं कच्चे तेल की कीमतों को भू-राजनीतिक मोर्चे से बड़ा सहारा मिल रहा है। यूएस सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने हाल ही में ईरान समर्थित ठिकानों पर लगातार 13वीं रात को हवाई हमले करने की पुष्टि की है। इन सैन्य अभियानों में विशेष रूप से ड्रोन सुविधाओं और तटीय निगरानी स्थलों को निशाना बनाया गया है। ईरान की सरकारी मीडिया ने भी स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के पास स्थित केश्म और बंदर अब्बास के साथ-साथ उत्तर-पश्चिम में अंदिमेश्क और ओमिदिये के पास भारी विस्फोट होने की जानकारी साझा की है। इन क्षेत्रों में बढ़ते सैन्य तनाव के कारण आने वाले समय में तेल की वैश्विक आपूर्ति बाधित होने का खतरा मंडरा रहा है, जो डब्ल्यूटीआई की कीमतों को निचली सतह से वापस ऊपर की ओर धकेल सकता है। तनाव का एक और बड़ा मोर्चा लाल सागर में खुला है, जहां यमन के ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने कच्चे तेल का परिवहन करने वाले वाणिज्यिक जहाजों पर हमले तेज कर दिए हैं। यह जलमार्ग एक अत्यंत महत्वपूर्ण निर्यात मार्ग है, जिसका उपयोग सऊदी अरब पारंपरिक रूप से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से बचने के लिए करता रहा है। इस बिगड़ते हालात पर सख्त रुख अपनाते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्पष्ट किया है कि अमेरिका हूती विद्रोहियों की इन हिंसक कार्रवाइयों के लिए पूरी तरह से ईरान को जिम्मेदार ठहराएगा। उन्होंने चेतावनी दी है कि ईरान और उसके सहयोगी हूती गुट दोनों को जल्द ही एक बड़ा सैन्य दंड भुगतना पड़ेगा। इस प्रकार की आक्रामक बयानबाजी से बाजार में अनिश्चितता बनी हुई है और कच्चे तेल की कीमतों को नीचे गिरने से रोकने में मदद मिल रही है। तकनीकी संकेतक: मजबूत बुलीश स्ट्रक्चर अभी भी बरकरार दैनिक मूल्य चार्ट पर डब्ल्यूटीआई कच्चे तेल की तकनीकी स्थिति को देखें, तो हालिया गिरावट के बावजूद इसका दीर्घकालिक बुलीश ढांचा पूरी तरह सुरक्षित है। वर्तमान में तेल की कीमतें बोलिंगर बैंड के मध्य बैंड (जो $76.91 पर है) से काफी ऊपर और अपनी 50-दिवसीय सिंपल मूविंग एवरेज (SMA) $84.41 तथा 200-दिवसीय SMA $75.24 से काफी ऊपर बनी हुई हैं। तकनीकी विश्लेषक इसके 50-दिवसीय और 200-दिवसीय मूविंग एवरेज के बीच बने गोल्डन क्रॉस की ओर भी इशारा कर रहे हैं, जो बाजार में दीर्घकालिक तेजी का एक बेहद मजबूत संकेत माना जाता है। वर्तमान तकनीकी पैमानों के अनुसार, RSI(14) अभी 65 पर है, जो दर्शाता है कि बाजार में अभी भी पर्याप्त खरीदारी का रुझान मौजूद है और यह ओवरबॉट सीमा के ठीक नीचे मजबूती से टिका हुआ है। इसके अतिरिक्त, MACD सूचक 2.03 पर है जो इसके सिग्नल स्तर -0.46 से काफी ऊपर है, जिससे यह साफ होता है कि कीमतों में सकारात्मक गति बनी हुई है। हालांकि, स्टोकैस्टिक संकेतक (फास्ट लाइन 85 / सिग्नल लाइन 91) यह संकेत दे रहा है कि अल्पावधि में बाजार थोड़ा अधिक खरीदा जा चुका है, जिसके कारण कीमतों में मामूली सुधार या ठहराव देखने को मिल रहा है। आने वाले समय के लिए प्रतिरोध और समर्थन स्तरों की बात करें, तो डब्ल्यूटीआई के लिए पहला महत्वपूर्ण ऊपरी प्रतिरोध स्तर बोलिंगर के ऊपरी बैंड के पास $91.85 (R1) पर दिखाई देता है। यदि तेजी का दौर जारी रहता है, तो अगला बड़ा प्रतिरोध $93.93 (R2) के स्तर पर होगा। गिरावट की स्थिति में, पहला मजबूत सपोर्ट $88.66 (S1) पर और उसके बाद $87.55 (S2) पर है। मनोवैज्ञानिक रूप से $90.00 का स्तर भी एक मजबूत धुरी के रूप में कार्य कर रहा है, जिसके आसपास वर्तमान में उतार-चढ़ाव जारी है। राबोबैंक के रणनीतिकारों का विश्लेषण राबोबैंक के ऊर्जा रणनीतिकारों के अनुसार, हाल के दिनों में वैश्विक ऊर्जा बाजारों में आई तेजी के पीछे भू-राजनीतिक जोखिम सबसे बड़ा उत्प्रेरक बनकर उभरे हैं। रणनीतिकारों का कहना है कि अमेरिका और ईरान के बीच अंतरिम शांति समझौते के विफल होने के बाद पैदा हुए सैन्य तनाव के साथ-साथ यूक्रेन और रूस के बीच बढ़ते हमलों ने पिछले सप्ताह कच्चे तेल, रिफाइंड उत्पादों, प्राकृतिक गैस और यूरोपीय बिजली बाजारों में सामूहिक रूप से तेजी को हवा दी है। हालांकि मध्यकालिक दृष्टिकोण से रणनीतिकारों का मानना है कि ब्रेंट और डब्ल्यूटीआई की कीमतों में धीरे-धीरे नरमी आ सकती है, लेकिन वर्तमान में जोखिम प्रीमियम के कारण निकट अवधि के कॉन्ट्रैक्ट्स में मजबूती बनी हुई है जो भविष्य के अनुबंधों में शायद पूरी तरह से परिलक्षित नहीं हो पा रही है। क्या है डब्ल्यूटीआई और वैश्विक तेल बाजार में इसका महत्व? डब्ल्यूटीआई यानी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट अंतरराष्ट्रीय तेल बाजारों में बेचे जाने वाले कच्चे तेल के तीन सबसे प्रमुख वैश्विक प्रकारों में से एक है, जिसमें ब्रेंट और दुबई क्रूड भी शामिल हैं। डब्ल्यूटीआई को मुख्य रूप से इसके कम घनत्व और बहुत कम सल्फर की मात्रा के कारण 'लाइट' और 'स्वीट' क्रूड माना जाता है। इसकी उच्च गुणवत्ता के कारण इसे रिफाइन करना बेहद आसान और सस्ता होता है, जिससे इससे पेट्रोल, डीजल और अन्य उच्च मूल्य वाले ईंधन आसानी से तैयार किए जा सकते हैं। इस तेल का स्रोत संयुक्त राज्य अमेरिका है और इसका वितरण कुशिंग, ओक्लाहोमा हब के माध्यम से किया जाता है, जिसे दुनिया के 'पाइपलाइन चौराहे' के रूप में जाना जाता है। यही कारण है कि इसे वैश्विक तेल बाजार का सबसे विश्वसनीय बेंचमार्क माना जाता है। किसी भी अन्य वित्तीय परिसंपत्ति की तरह, डब्ल्यूटीआई की कीमतें भी बुनियादी रूप से मांग और आपूर्ति के नियमों से संचालित होती हैं। मजबूत वैश्विक आर्थिक विकास कच्चे तेल की मांग को बढ़ाता है, जिससे कीमतों में तेजी आती है, जबकि कमजोर वैश्विक विकास मांग को घटाता है। इसके अलावा, युद्ध, प्रतिबंध और राजनीतिक अस्थिरता आपूर्ति श्रृंखला को बाधित कर कीमतों में भारी उछाल ला सकते हैं। इसके साथ ही, दुनिया के 12 बड़े तेल उत्पादक देशों के समूह ओपेक (OPEC) और उनके सहयोगी देशों (ओपेक+) द्वारा लिए जाने वाले उत्पादन कोटे के फैसले सीधे तौर पर वैश्विक कीमतों को प्रभावित करते हैं। चूंकि कच्चे तेल का वैश्विक व्यापार मुख्य रूप से अमेरिकी डॉलर (USD) में होता है, इसलिए डॉलर की मजबूती या कमजोरी भी तेल की कीमतों को सीधे तौर पर प्रभावित करती है। एक कमजोर डॉलर अन्य मुद्राओं वाले देशों के लिए तेल को सस्ता बनाता है, जिससे इसकी मांग और कीमतें बढ़ती हैं। साप्ताहिक इन्वेंट्री रिपोर्ट का मूल्य निर्धारण पर प्रभाव अमेरिकी पेट्रोलियम संस्थान (API) और सरकारी ऊर्जा सूचना प्रशासन (EIA) द्वारा जारी की जाने वाली साप्ताहिक तेल इन्वेंट्री रिपोर्ट भी मूल्य निर्धारण में बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। साप्ताहिक आधार पर जारी होने वाले इन्वेंट्री के आंकड़े सीधे तौर पर मांग और आपूर्ति के ताजा रुझान को प्रदर्शित करते हैं। यदि डेटा में इन्वेंट्री में गिरावट दिखाई देती है, तो इसका सीधा मतलब होता है कि बाजार में मांग मजबूत है, जिससे तेल की कीमतें बढ़ती हैं। इसके विपरीत, इन्वेंट्री में बढ़ोतरी होने पर आपूर्ति अधिक होने का संकेत मिलता है, जिससे कीमतें नीचे आती हैं। सामान्य तौर पर API की रिपोर्ट हर मंगलवार को और EIA की रिपोर्ट उसके अगले दिन यानी बुधवार को जारी होती है। अधिकांश समय (लगभग 75% मामलों में) दोनों के निष्कर्षों में केवल 1% तक का ही अंतर होता है, लेकिन EIA सरकारी एजेंसी होने के कारण निवेशकों द्वारा अधिक विश्वसनीय मानी जाती है। अन्य वित्तीय बाजारों की स्थिति: मुद्रा, सोना और क्रिप्टोकरेंसी का रुख कच्चे तेल में जारी उतार-चढ़ाव और भू-राजनीतिक संकट का असर दुनिया के अन्य बड़े वित्तीय बाजारों पर भी स्पष्ट रूप से देखा जा रहा है। मुद्रा बाजार में, GBP/USD जोड़ी एशियाई कारोबारी घंटों में मामूली सुधार दर्ज करते हुए 1.3325 के आसपास कारोबार कर रही है, जिससे इसकी पिछले पांच दिनों की गिरावट पर कुछ हद तक ब्रेक लगा है। हालांकि, मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के कारण इसकी बढ़त सीमित रहने की आशंका है। इसके अलावा EUR/USD जोड़ी भी पिछले दिन की मामूली गिरावट से उबरकर 1.1380 के आसपास कारोबार कर रही है, लेकिन सुरक्षित विकल्प के तौर पर अमेरिकी डॉलर की बढ़ती मांग यूरोपीय मुद्रा की बढ़त को सीमित कर रही है। सुरक्षित निवेश माने जाने वाले सोने के बाजार में लगातार दूसरे दिन बिकवाली का दबाव देखा गया, जिससे पीली धातु $4,050 प्रति औंस के स्तर से नीचे फिसल गई। विश्लेषकों का मानना है कि अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतें ऊंची बनी हुई हैं, जिससे वैश्विक स्तर पर महंगाई बढ़ने का डर पैदा हो गया है। इसके परिणामस्वरूप अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों को लंबे समय तक ऊंचा रखने की उम्मीदें बढ़ गई हैं, जिससे डॉलर सूचकांक मजबूत हुआ है और गैर-ब्याज वाले सोने के आकर्षण में कमी आई है। क्रिप्टोकरेंसी बाजार भी भू-राजनीतिक अनिश्चितता के दौर से अछूता नहीं है। प्रमुख एल्टकॉइन एथेरियम हाल ही में वायदा बाजार में खुली रुचि (ओपन इंटरेस्ट) में मामूली वृद्धि के बावजूद $1,900 के स्तर से थोड़ा नीचे कारोबार कर रहा है। एथेरियम का कुल ओपन इंटरेस्ट बढ़कर 14.60 मिलियन ETH पर पहुंच गया है, जो पिछले दो दिनों में लगभग 6 लाख ETH की बढ़त को दर्शाता है। वहीं, बाजार की अग्रणी क्रिप्टोकरेंसी बिटकॉइन पर भी दबाव साफ दिख रहा है और यह गिरकर अपने 50-दिवसीय एक्सपोनेंशियल मूविंग एवरेज (EMA) सपोर्ट के करीब $65,135 के आसपास कारोबार कर रही है। पिछले 24 घंटों के दौरान पाई नेटवर्क (Pi Network) और स्काई (Sky) डिजिटल परिसंपत्तियों में सबसे खराब प्रदर्शन करने वाले टोकन साबित हुए हैं। इसका आप पर असर • भारत में प्रभाव: वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें ऊंची रहने से घरेलू स्तर पर ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी का खतरा बढ़ जाता है, जिससे परिवहन लागत और आम उपभोक्ता वस्तुओं की महंगाई प्रभावित हो सकती है। • निवेशकों के लिए: कमोडिटी बाजार में अनिश्चितता बढ़ने से सुरक्षित निवेश के रूप में डॉलर मजबूत हो रहा है, जिससे शेयर बाजारों में अल्पकालिक गिरावट और सोने की कीमतों पर दबाव देखा जा सकता है। सवाल-जवाब 1. डब्ल्यूटीआई कच्चे तेल की कीमतों में हालिया गिरावट का क्या कारण है? शुरुआती कारोबारी सत्रों में ट्रेडर्स द्वारा बड़े पैमाने पर की गई मुनाफावसूली (प्रॉफिट बुकिंग) के कारण कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई है। 2. मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव से कच्चे तेल को कैसे सपोर्ट मिल रहा है? यूएस सेंट्रल कमांड द्वारा ईरान समर्थित ठिकानों पर हमले और हूती विद्रोहियों द्वारा लाल सागर में तेल टैंकरों पर हमलों से वैश्विक तेल आपूर्ति बाधित होने का खतरा बढ़ गया है, जिससे कीमतों को सहारा मिल रहा है। 3. डब्ल्यूटीआई कच्चे तेल के लिए तत्काल तकनीकी सपोर्ट और रेसिस्टेंस स्तर क्या हैं? डब्ल्यूटीआई के लिए तत्काल तकनीकी सपोर्ट स्तर $88.66 (S1) और $87.55 (S2) पर है, जबकि पहला बड़ा रेसिस्टेंस स्तर $91.85 (R1) पर स्थित है। 4. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस संकट पर क्या प्रतिक्रिया दी है? राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि अमेरिका हूती विद्रोहियों की कार्रवाई के लिए ईरान को जिम्मेदार ठहराएगा और दोनों को जल्द ही बड़ी सैन्य सजा मिलेगी। 5. साप्ताहिक आधार पर जारी होने वाली API और EIA रिपोर्ट में क्या अंतर है? API एक निजी संस्था है जो मंगलवार को इन्वेंट्री रिपोर्ट जारी करती है, जबकि EIA एक अमेरिकी सरकारी एजेंसी है जो बुधवार को अधिक विश्वसनीय डेटा जारी करती है। 6. कच्चे तेल की ऊंची कीमतों का सोने के बाजार पर क्या असर पड़ रहा है? तेल की ऊंची कीमतों से महंगाई बढ़ने की आशंका मजबूत हुई है, जिससे ब्याज दरों के लंबे समय तक उच्च स्तर पर रहने की उम्मीद बढ़ी है। इसके चलते डॉलर मजबूत हुआ है और सोना $4,050 के स्तर से नीचे फिसल गया है। https://trendkia.com/market/bhu-rajanitika-tanava-ke-bicha-takaniki-barhata-barakarara-wti-kachche-tela-ka-bhava-89-76-ke-kariba-thama-10328 TrendKia — Har trend, sabse pehle.