जापानी केंद्रीय बैंक के मासु ने मौजूदा आर्थिक माहौल में ब्याज दरों में बढ़ोतरी जारी रहने के संकेत दिए जापान के केंद्रीय बैंक के अधिकारी मासु ने कहा है कि देश में मौजूदा वित्तीय स्थितियों को देखते हुए ब्याज दरों में बढ़ोतरी का सिलसिला जारी रह सकता है। हालांकि, मुख्य महंगाई दर अभी भी दो प्रतिशत के लक्ष्य से थोड़ी नीचे है लेकिन इसके काफी करीब बनी हुई है। जापान के केंद्रीय बैंक (बैंक ऑफ जापान) के अधिकारी मासु ने स्पष्ट किया है कि देश में अभी भी जिस तरह की वित्तीय और आर्थिक स्थिति बनी हुई है, उसे देखते हुए ब्याज दरों में आगे भी बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है। अधिकारियों का मानना है कि मुख्य मुद्रास्फीति यानी महंगाई दर भले ही अभी दो प्रतिशत के आंकड़े से थोड़ी नीचे चल रही है, लेकिन यह उस स्तर के काफी करीब पहुंच चुकी है। ब्याज दरों पर फैसलों का आधार आने वाले समय में ब्याज दरों में बढ़ोतरी का जो भी कदम उठाया जाएगा, उसकी रफ्तार और समय पूरी तरह से इस बात पर निर्भर करेगा कि देश के केंद्रीय बैंक के शुरुआती अनुमान कितनी सटीकता से पूरे होते हैं। इसके साथ ही अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) की मांग और विदेशी मुद्रा विनिमय (FX) बाजार में होने वाले बदलावों से जुड़े जोखिमों पर भी पैनी नजर रखी जाएगी। अधिकारियों के लिए सबसे बड़ा और अहम उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि महंगाई दर किसी भी सूरत में दो प्रतिशत के लक्ष्य से बहुत ज्यादा ऊपर न निकल जाए। ईंधन और रासायनिक वस्तुओं की कीमतें हाल के दिनों में ईंधन और रासायनिक उत्पादों की कीमतों में जो तेजी देखने को मिली है, वह एक बार का झटका यानी वन-ऑफ शॉक साबित हो सकती है। हालांकि, इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि ढुलाई और वितरण लागत बढ़ने के कारण इसका असर अंततः अन्य तमाम चीजों की कीमतों पर भी काफी व्यापक रूप से पड़ सकता है। इसी बीच, वित्तीय बाजार में डॉलर और येन की जोड़ियों में भी लगातार हलचल बनी हुई है और इस मुद्रा जोड़े का कारोबार सीमित दायरे में हो रहा है। जापानी केंद्रीय बैंक का ढांचा और इतिहास बैंक ऑफ जापान देश का प्रमुख केंद्रीय बैंक है जिस पर देश की मौद्रिक नीति तय करने की मुख्य जिम्मेदारी होती है। इस बैंक का मुख्य संवैधानिक दायित्व बैंकनोट जारी करना और मूल्य स्थिरता बनाए रखने के उद्देश्य से मुद्रा और मौद्रिक नियंत्रण का संचालन करना है। मूल्य स्थिरता का सीधा मतलब यह है कि देश में महंगाई की दर को लगभग दो प्रतिशत के आसपास बनाए रखा जाए ताकि अर्थव्यवस्था में संतुलन कायम रह सके। इसी उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए जापानी केंद्रीय बैंक ने साल 2013 में अर्थव्यवस्था को गति देने और कम महंगाई के दौर से बाहर निकालने के लिए एक बेहद उदार मौद्रिक नीति की शुरुआत की थी। इस नीति की नींव मात्रात्मक और गुणात्मक ढील यानी QQE पर आधारित थी, जिसके तहत बाजार में तरलता बढ़ाने के लिए बैंक ने बड़े पैमाने पर सरकारी और कॉरपोरेट बॉंड की खरीद शुरू की थी। इसके बाद साल 2016 में बैंक ने अपनी इस रणनीति को और आगे बढ़ाया तथा नकारात्मक ब्याज दरों को लागू करके और अपने दस साल के सरकारी बॉंड पर मिलने वाले रिटर्न को सीधे नियंत्रित करके नीति को और अधिक ढीला कर दिया था। हालांकि, लंबे समय से चली आ रही इस अति-उदार मौद्रिक नीति से बैंक ने मार्च 2024 में आखिरकार पीछे हटते हुए ब्याज दरों में बढ़ोतरी कर दी थी। येन पर असर और मुद्रास्फीति के कारण बैंक ऑफ जापान की तरफ से चलाए गए इस भारी-भरकम प्रोत्साहन कार्यक्रम के कारण दुनिया की अन्य प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले जापानी येन की कीमत में काफी गिरावट देखने को मिली थी। साल 2022 और 2023 के दौरान यह प्रक्रिया और भी तेज हो गई क्योंकि जापानी बैंक की नीतियों और दुनिया के अन्य प्रमुख केंद्रीय बैंकों के रुख में बड़ा अंतर पैदा हो गया था। दूसरे देशों के केंद्रीय बैंकों ने दशकों के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच चुकी महंगाई से मुकाबला करने के लिए ब्याज दरों में आक्रामक तरीके से बढ़ोतरी की थी। इसके विपरीत जापानी नीति के कारण येन का मूल्य लगातार गिरता चला गया, हालांकि साल 2024 में बैंक द्वारा अपनी नीति बदलने के बाद इस रुझान में कुछ हद तक सुधार जरूर हुआ। एक कमजोर येन और वैश्विक स्तर पर ऊर्जा की कीमतों में आए भारी उछाल के कारण जापान के भीतर घरेलू महंगाई तेजी से बढ़ी और इसने बैंक के दो प्रतिशत के लक्ष्य को भी पार कर दिया। इसके अलावा देश में कर्मचारियों के वेतन में बढ़ोतरी की संभावनाओं ने भी इस पूरी प्रक्रिया में एक अहम भूमिका निभाई क्योंकि वेतन वृद्धि महंगाई को हवा देने वाले मुख्य कारकों में से एक मानी जाती है। व्यापक आर्थिक और बाजार का परिदृश्य इस बीच विदेशी मुद्रा बाजारों में ऑस्ट्रेलियन डॉलर और अमेरिकी डॉलर की चाल में भी स्थिरता और समेकन देखने को मिल रहा है और एशियाई कारोबारी सत्र के दौरान यह जोड़ी ऊंचे स्तर के आसपास टिकी हुई है। रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया द्वारा ब्याज दरें बढ़ाए जाने की बढ़ती उम्मीदों के कारण ऑस्ट्रेलियाई मुद्रा को लगातार समर्थन मिल रहा है। इसके साथ ही वैश्विक स्तर पर अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व के रुख और अमेरिका तथा ईरान के बीच बढ़ते तनाव के कारण अमेरिकी डॉलर को भी कुछ हद तक सुरक्षा का सहारा मिल रहा है। सोने की कीमतों में भी हाल ही में सुधार देखा गया है और इस कीमती धातु ने अपनी लगातार तीन दिनों की गिरावट के सिलसिले को तोड़ते हुए महत्वपूर्ण स्तर को फिर से हासिल कर लिया है। भू-राजनीतिक मोर्चे पर बनी अनिश्चितताओं और अमेरिकी डॉलर पर लगातार बन रहे दबाव के बीच पीली धातु की मांग में यह तेजी दर्ज की गई है। अमेरिका के हालिया रोजगार आंकड़ों ने भी फेडरल रिजर्व के आगामी कदमों को लेकर चल रही बहसों पर पूरी तरह विराम नहीं लगाया है, जिससे नीति निर्माताओं को अपनी नीतियों में लचीलापन बनाए रखने का पूरा अवसर मिल गया है। इसका आप पर असर जापानी केंद्रीय बैंक द्वारा ब्याज दरों में बढ़ोतरी के संकेतों का असर वैश्विक वित्तीय बाजारों और मुद्रा विनिमय दरों पर स्पष्ट रूप से देखने को मिलता है। • भारत में: भारत के आम निवेशकों और विनिमय बाजार पर नजर रखने वालों के लिए ये वैश्विक संकेत इस बात का संकेत हैं कि एशियाई अर्थव्यवस्थाओं में मौद्रिक सख्ती का असर बॉंड और मुद्रा बाजार के उतार-चढ़ाव के जरिए दिखाई दे सकता है। • वैश्विक स्तर पर: मुद्रा बाजार में येन की मजबूती और डॉलर के मुकाबले उसकी चाल से अंतरराष्ट्रीय निवेशकों की रणनीतियों पर सीधा असर पड़ता है। • निवेशकों के लिए: वैश्विक मुद्रा और कमोडिटी बाजारों में कारोबार करने वाले निवेशकों को केंद्रीय बैंकों के बयानों और महंगाई के आंकड़ों के आधार पर अपने जोखिम प्रबंधन को मजबूत रखना चाहिए। • कच्चे तेल और ऊर्जा पर: ऊर्जा और ईंधन की कीमतों में होने वाले उतार-चढ़ाव का सीधा असर आयातित लागतों और वैश्विक व्यापार पर पड़ता है। • आर्थिक नीतियां: विभिन्न देशों के केंद्रीय बैंकों के रुख में अंतर आने से वैश्विक तरलता और निवेश के प्रवाह में बदलाव देखने को मिल सकता है। ऐसा क्यों हुआ बैंक ऑफ जापान द्वारा ब्याज दरों में बदलाव और मौद्रिक नीति को सामान्य बनाने के फैसले के पीछे देश की बदलती आर्थिक स्थितियां और लंबे समय तक चली अति-उदार नीतियों के प्रभाव मुख्य कारण रहे हैं। • महंगाई का लक्ष्य: देश में लंबे समय तक कम महंगाई का दौर रहने के बाद कमजोर येन और वैश्विक ऊर्जा संकट के कारण मुद्रास्फीति का स्तर केंद्रीय बैंक के दो प्रतिशत के लक्ष्य से ऊपर निकल गया। • नीतिगत अंतर: वैश्विक स्तर पर अन्य प्रमुख केंद्रीय बैंकों द्वारा महंगाई से निपटने के लिए ब्याज दरों में भारी बढ़ोतरी करने से जापानी येन पर भारी दबाव पड़ा और येन की कीमत में भारी गिरावट दर्ज की गई। • वेतन वृद्धि की उम्मीदें: जापानी अर्थव्यवस्था में लंबे समय से सुस्त पड़ी मजदूरी और वेतन में बढ़ोतरी की संभावनाओं ने घरेलू मांग को बढ़ावा दिया, जिससे केंद्रीय बैंक को अपनी पुरानी अति-उदार नीतियों को छोड़ने का आधार मिला। • वित्तीय स्थिरता: अर्थव्यवस्था में अत्यधिक सुस्ती को दूर करने के लिए शुरू किए गए नकारात्मक ब्याज दरों और बॉंड यील्ड नियंत्रण के उपायों को अब आर्थिक सामान्यीकरण की ओर मोड़ा जा रहा है ताकि वित्तीय स्थिरता बनी रहे। सवाल-जवाब 1. बैंक ऑफ जापान का मुख्य उद्देश्य क्या है? बैंक ऑफ जापान का मुख्य दायित्व बैंकनोट जारी करना और मूल्य स्थिरता बनाए रखने के लिए मुद्रा और मौद्रिक नियंत्रण का संचालन करना है। 2. मौजूदा समय में महंगाई दर किस स्तर पर है? मुख्य महंगाई दर अभी भी दो प्रतिशत के लक्ष्य से थोड़ी नीचे है लेकिन उस स्तर के काफी करीब बनी हुई है। 3. जापानी केंद्रीय बैंक ने अति-उदार नीति की शुरुआत कब की थी? बैंक ऑफ जापान ने साल 2013 में अर्थव्यवस्था को गति देने और कम महंगाई के माहौल से निपटने के लिए अति-उदार मौद्रिक नीति की शुरुआत की थी। 4. ब्याज दरों में बढ़ोतरी का अगला फैसला किस आधार पर तय होगा? ब्याज दरों की रफ्तार और समय शुरुआती अनुमानों के पूरा होने की संभावनाओं और जोखिमों पर आधारित होगा। 5. येन की कीमत में गिरावट का मुख्य कारण क्या था? अन्य प्रमुख केंद्रीय बैंकों द्वारा ब्याज दरों में तेजी से बढ़ोतरी और जापानी बैंक की नीतियों के बीच अंतर होने के कारण येन में depreciation हुआ। 6. नकारात्मक ब्याज दरें कब समाप्त की गईं? मार्च 2024 में बैंक ऑफ जापान ने ब्याज दरों में बढ़ोतरी कर अति-उदार मौद्रिक नीति रुख से पीछे हटना शुरू किया। https://trendkia.com/market/boj-ke-masu-ne-maujuda-arthika-mahaula-men-byaja-daron-men-barhotari-jari-rahane-ke-snketa-die-30614 TrendKia — Har trend, sabse pehle.