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  "title": "ब्रिटेन की कंपनियों के महंगाई अनुमान में उछाल, अपनी कीमतें बढ़ाने का इरादा 4.1% पर पहुंचा",
  "summary": "बैंक ऑफ इंग्लैंड के डिसीजन मेकर पैनल सर्वे में कंपनियों का एक साल आगे का अपनी कीमतों को लेकर महंगाई अनुमान जून तक की तिमाही में बढ़कर 4.1% हो गया, जबकि वेतन वृद्धि का अनुमान भी 3.5% तक चढ़ गया।",
  "content": "ब्रिटेन की कंपनियां आने वाले एक साल में अपने उत्पादों की कीमतें पहले से तेज रफ्तार से बढ़ाने की तैयारी में हैं। बैंक ऑफ इंग्लैंड के डिसीजन मेकर पैनल (DMP) के ताजा सर्वे के मुताबिक, जून तक की तीन महीने की अवधि में कंपनियों ने एक साल आगे के लिए अपनी कीमतों को लेकर 4.1% महंगाई का अनुमान जताया। यह मई तक की तिमाही में दर्ज आंकड़े से थोड़ा ऊपर है और इस बात का संकेत है कि कारोबारी क्षेत्र के भीतर लागत का दबाव पूरी तरह ठंडा नहीं पड़ा है।\n\nबढ़त भले ही मामूली हो, लेकिन नीति बनाने वालों के लिहाज से इसकी दिशा गलत तरफ है। मई तक की तिमाही के मुकाबले अपनी कीमतों को लेकर महंगाई का अनुमान 0.1 प्रतिशत अंक बढ़कर 4.1% पर पहुंच गया। इसके साथ ही कंपनियों की वेतन योजनाएं भी मजबूत हुई हैं। जून तक की तिमाही में एक साल आगे की अनुमानित वेतन वृद्धि 0.1 प्रतिशत अंक बढ़कर 3.5% हो गई, जो मई में 3.4% थी।\n\nबैंक ऑफ इंग्लैंड इन आंकड़ों पर नजर क्यों रखता है\nबैंक ऑफ इंग्लैंड ब्रिटेन की मौद्रिक नीति तय करता है और इसका सबसे बड़ा लक्ष्य कीमतों में स्थिरता है, जिसे 2% की स्थिर महंगाई दर के रूप में परिभाषित किया गया है। इसका मुख्य हथियार बेस लेंडिंग रेट है, यानी वह दर जिस पर वह वाणिज्यिक बैंकों को कर्ज देता है और जिस पर बैंक आपस में एक-दूसरे को उधार देते हैं। यही एक बेंचमार्क पूरी अर्थव्यवस्था में फैलता है, आम लोगों और कंपनियों के लिए कर्ज की लागत तय करता है और इसी के जरिए पाउंड स्टर्लिंग की कीमत को भी हिलाता है।\n\nब्याज दरें पाउंड को कैसे चलाती हैं\nजब महंगाई 2% के लक्ष्य से ऊपर जाती है, तो बैंक आमतौर पर ब्याज दरें बढ़ाता है। महंगा कर्ज खर्च को ठंडा करता है और साथ ही यह पाउंड को भी सहारा देता है, क्योंकि ऊंची यील्ड ब्रिटेन को दुनियाभर के निवेशकों के लिए पैसा रखने की ज्यादा आकर्षक जगह बना देती है। इसका उल्टा तब होता है जब महंगाई लक्ष्य से नीचे फिसलती है। कीमतों की धीमी बढ़त आमतौर पर अर्थव्यवस्था के सुस्त पड़ने का संकेत देती है, जिससे बैंक ऑफ इंग्लैंड ब्याज दरें घटाने पर विचार करता है ताकि कर्ज सस्ता हो और कंपनियां विकास वाली परियोजनाओं में निवेश के लिए उधार लेने को आगे आएं। कम दरें आमतौर पर पाउंड पर बोझ डालती हैं।\n\nQE और QT का पूरा गणित\nबहुत खराब हालात में बैंक ऑफ इंग्लैंड क्वांटिटेटिव ईजिंग (QE) का सहारा ले सकता है, जो जाम पड़ चुके वित्तीय तंत्र में जबरन कर्ज का प्रवाह बढ़ाने के लिए बनाया गया औजार है। यह आखिरी उपाय होता है और तब इस्तेमाल होता है जब सिर्फ ब्याज दरें घटाने से काम नहीं बनता। QE के तहत बैंक ऑफ इंग्लैंड पैसा छापकर बैंकों और दूसरी संस्थाओं से संपत्तियां खरीदता है, जो आमतौर पर सरकारी बॉन्ड या AAA रेटिंग वाले कॉरपोरेट बॉन्ड होते हैं। इसका असर आमतौर पर कमजोर पाउंड के रूप में सामने आता है।\n\nक्वांटिटेटिव टाइटनिंग (QT) इसका उल्टा है और तब लागू होती है जब विकास मजबूत होने लगता है और महंगाई चढ़ने लगती है। कर्ज को बढ़ावा देने के लिए बॉन्ड खरीदने के बजाय बैंक अपने भंडार में और बॉन्ड जोड़ना बंद कर देता है और पहले से रखे बॉन्ड के मैच्योर होने पर मिलने वाली रकम को दोबारा निवेश करना भी रोक देता है। इस तरह धीरे-धीरे सहारा वापस खींचने से आमतौर पर पाउंड को मजबूती मिलती है।\n\nपाउंड और दूसरे बाजार कहां खड़े हैं\nशुक्रवार को यूरोपीय सत्र में GBP/USD सकारात्मक दायरे में रहा, हालांकि बढ़त 1.3400 के नीचे ही थम गई। लाइव आंकड़ों के मुताबिक यह जोड़ी करीब 1.34 पर है, जो पिछले बंद भाव करीब 1.33 से लगभग 0.61% ऊपर है और 1.30 से 1.38 के 52-हफ्ते के दायरे के भीतर बनी हुई है, जबकि 14-दिन का RSI तटस्थ 54 पर है। अमेरिकी नॉनफार्म पेरोल के अनुमान से कमजोर आंकड़े के बाद अमेरिकी डॉलर लगातार फिसल रहा है, जिसने फेड की और ब्याज दरें बढ़ाने की उम्मीदों को कमजोर किया और पाउंड पर से दबाव हटा दिया।\n\nशुक्रवार को यूरोपीय कारोबार में EUR/USD करीब 1.1450 पर मजबूत बना रहा और तीन हफ्तों में पहली साप्ताहिक बढ़त की ओर बढ़ रहा था, क्योंकि अमेरिकी फेडरल रिजर्व की दरें बढ़ाने की घटती उम्मीदों ने डॉलर को दबाव में रखा।\n\nसोने ने लगातार तीसरे दिन अपना तेजी वाला रुख बनाए रखा और शुरुआती यूरोपीय घंटों में डेढ़ हफ्ते के ऊंचे स्तर के पास कारोबार करता रहा। यह कीमती धातु पांच हफ्तों में पहली साप्ताहिक बढ़त की ओर दिख रही थी, हालांकि खरीदार अब भी इस हफ्ते नवंबर 2025 के बाद के सबसे निचले स्तर से हुई रिकवरी को आगे बढ़ाने पर दांव लगाने से पहले 4,200 डॉलर के स्तर के पार निकलने का इंतजार कर रहे थे।\n\nक्रिप्टो में हाइपरलिक्विड (HYPE) 66 डॉलर के ऊपर चढ़ गया और लंबी अवधि का अपट्रेंड बनाए रखा, जिसे करीब 60 डॉलर पर चढ़ते 50-दिन के EMA का सहारा मिल रहा है। नजदीकी अवधि में रिटेल की भूख बढ़ी, ओपन इंटरेस्ट 24 घंटे में करीब 5% चढ़ा और फंडिंग रेट सकारात्मक बने रहे, जबकि इस हफ्ते अब तक संस्थागत मांग सुस्त रही।\n\nफेड का अनिश्चित पहलू\nअब ध्यान अगले हफ्ते आने वाले FOMC के मिनट्स पर है, जिन्हें कारोबारी इस संकेत के लिए खंगालेंगे कि बंटी हुई कमेटी को ब्याज दरें रोकने से बढ़ाने की तरफ क्या मोड़ सकता है। पिछली बैठक के डॉट प्लॉट ने इस बात को खुलकर सामने रखा कि दरें बढ़ाना जायज है या नहीं, इस पर मतभेद है। अध्यक्ष केविन वॉर्श के तहत फॉरवर्ड गाइडेंस को हल्का किए जाने के साथ फेड का रुख धुंधला बना हुआ है और यह साफ नहीं है कि सख्त नीति के लिए व्यापक समर्थन किस चीज से जुटेगा।\n\nसिंट्रा में जुटे बाजार फेड के अगले कदम को लेकर सुराग तलाशने आए थे, लेकिन उन्हें ज्यादातर यही एक बात लेकर लौटना पड़ा कि वॉर्श इन सुरागों को पढ़ना कहीं ज्यादा मुश्किल बनाने के इरादे में हैं।\n\nइसका आप पर असर\n• पाउंड में कारोबार करने वालों के लिए: महंगाई का अनुमान बढ़ना बैंक ऑफ इंग्लैंड की ओर से दरें रोके रखने या बढ़ाने की गुंजाइश को जिंदा रखता है, जो आमतौर पर पाउंड को सहारा देता है।\n• ब्रिटेन के आम लोगों और कारोबारियों के लिए: कंपनियों का एक साल में 4.1% तक कीमतें और 3.5% तक वेतन बढ़ाने का इरादा बताता है कि लागत और कर्ज का दबाव अभी बना रहेगा।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. बैंक ऑफ इंग्लैंड के DMP सर्वे में क्या सामने आया?\nजून तक की तिमाही में कंपनियों का एक साल आगे का अपनी कीमतों को लेकर महंगाई अनुमान बढ़कर 4.1% हो गया, जो मई तक की तिमाही से 0.1 प्रतिशत अंक ऊपर है।\n\n2. वेतन वृद्धि का अनुमान कितना रहा?\nजून तक की तिमाही में एक साल आगे की अनुमानित वेतन वृद्धि 0.1 प्रतिशत अंक बढ़कर 3.5% हो गई, जो मई में 3.4% थी।\n\n3. बैंक ऑफ इंग्लैंड का महंगाई लक्ष्य क्या है?\nइसका मुख्य लक्ष्य कीमतों में स्थिरता है, जिसे 2% की स्थिर महंगाई दर के रूप में परिभाषित किया गया है।\n\n4. ये आंकड़े पाउंड के लिए क्यों मायने रखते हैं?\nमहंगाई लक्ष्य से ऊपर रहने पर बैंक आमतौर पर दरें बढ़ाता है, जिससे ऊंची यील्ड के चलते पाउंड को मजबूती मिलती है।\n\n5. फिलहाल GBP/USD कहां कारोबार कर रहा है?\nशुक्रवार को यह करीब 1.34 पर सकारात्मक दायरे में रहा, लेकिन बढ़त 1.3400 के नीचे थम गई।\n\n6. आगे बाजार की नजर किस पर है?\nअगले हफ्ते आने वाले FOMC के मिनट्स पर, जिनसे यह अंदाजा लगेगा कि बंटी हुई कमेटी दरें बढ़ाने की तरफ बढ़ेगी या नहीं।",
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  "category": "बाज़ार",
  "publishedAt": "2026-07-03",
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