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  "type": "article",
  "title": "ब्रिटिश पाउंड में 1.3400 के नीचे सुस्ती, ब्रिटेन में महंगाई के नए आंकड़ों और ब्याज दरों पर टिकी नजरें",
  "summary": "ब्रिटेन में बेरोजगारी दर घटकर 4.7 प्रतिशत पर आने और वेतन दबाव बने रहने के बीच ब्रिटिश पाउंड 1.3400 के स्तर से नीचे कारोबार कर रहा है। निवेशक बैंक ऑफ इंग्लैंड के संभावित नीतिगत फैसलों और मुद्रास्फीति के ताजा आंकड़ों की प्रतीक्षा कर रहे हैं।",
  "content": "वैश्विक मुद्रा बाजार में ब्रिटिश पाउंड बुधवार के शुरुआती एशियाई सत्र के दौरान 1.3400 के अहम स्तर से नीचे खिसककर 1.3375 के आसपास कारोबार करता नजर आया। ब्रिटेन में रोजगार के मोर्चे पर आए मजबूत आंकड़ों ने मुद्रा को कुछ सहारा जरूर दिया है, लेकिन उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आधारित महंगाई रिपोर्ट जारी होने से पहले ट्रेडर सतर्क रुख अपना रहे हैं। पिछले कारोबारी सत्र में 1.33 पर बंद होने के बाद पाउंड 0.50 प्रतिशत चढ़कर 1.34 के स्तर पर पहुंचा था, जहां उसे तकनीकी स्तरों पर रुकावट का सामना करना पड़ रहा है। 52 हफ्तों के 1.30 से 1.38 के दायरे में घूमती इस मुद्रा पर फेडरल रिजर्व और बैंक ऑफ इंग्लैंड की आगामी नीतियों का सीधा असर देखा जा रहा है।\n\nमजबूत श्रम बाजार और गिरती बेरोजगारी दर के संकेत\nऑफिस फॉर नेशनल स्टैटिस्टिक्स द्वारा हाल में जारी रिपोर्ट से पता चलता है कि ब्रिटेन का रोजगार बाजार अनुमान से अधिक मजबूत बना हुआ है। अगस्त तक के तीन महीनों में ब्रिटेन की बेरोजगारी दर घटकर 4.7 प्रतिशत पर आ गई, जो जुलाई में 4.9 प्रतिशत दर्ज की गई थी। रोजगार के अवसरों और खाली पदों की संख्या में लगातार गिरावट के बावजूद बेरोजगारी दर में आई यह कमी पिछले एक साल से भी अधिक समय का सबसे निचला स्तर है।\n\nअर्थशास्त्रियों का मानना है कि नौकरी बाजार का यह लचीलापन बैंक ऑफ इंग्लैंड के नीति निर्माताओं को दरों में कटौती के बजाय सख्त रुख बनाए रखने का अवसर देता है। श्रम बाजार में श्रमिकों की उपलब्धता कम रहने से वेतन वृद्धि की रफ्तार भी तेज बनी हुई है। निजी क्षेत्र में औसत वेतन वृद्धि में दर्ज की गई आंशिक तेजी ने केंद्रीय बैंक की मौद्रिक नीति समिति के उन सदस्यों का हौसला बढ़ाया है जो दरों को ऊंचा रखने के पक्षधर रहे हैं, ताकि अर्थव्यवस्था में महंगाई का दूसरा दौर शुरू न हो सके।\n\nमहंगाई के ताजा आंकड़े और बैंक ऑफ इंग्लैंड का नीतिगत रुख\nबाजार की निगाहें अब पूरी तरह से ब्रिटेन के सितंबर उपभोक्ता मूल्य सूचकांक के आंकड़ों पर केंद्रित हैं। इस आंकड़े को बैंक ऑफ इंग्लैंड की भावी दिशा तय करने के लिए निर्णायक माना जा रहा है। विश्लेषकों का अनुमान है कि सितंबर में हेडलाइन मुद्रास्फीति सालाना आधार पर 3.4 प्रतिशत रह सकती है, जबकि कोर मुद्रास्फीति 2.7 प्रतिशत रहने की उम्मीद जताई गई है।\n\nयदि मुद्रास्फीति के ये अनुमान सही साबित होते हैं, तो यह तीन साल से अधिक समय में बैंक ऑफ इंग्लैंड द्वारा ब्याज दरों में पहली बढ़ोतरी का रास्ता साफ कर सकता है। एलएसईजी के आंकड़ों के मुताबिक, वित्तीय बाजार 5 नवंबर को होने वाली केंद्रीय बैंक की अगली बैठक में 25 आधार अंकों की ब्याज दर बढ़ोतरी को लगभग पूरी तरह अपनी कीमतों में शामिल कर चुके हैं। केंद्रीय बैंक का प्राथमिक लक्ष्य महंगाई को 2 प्रतिशत के दायरे में स्थिर रखना है, और मौजूदा आंकड़े इस लक्ष्य से काफी ऊपर बने हुए हैं।\n\nसोसाइटी जेनेराले का विश्लेषण और बाजार में शॉर्ट कवरिंग की गुंजाइश\nसोसाइटी जेनेराले के विश्लेषकों ने अपने ताजा आकलन में रेखांकित किया है कि ब्रिटेन के श्रम बाजार और वेतन आंकड़ों ने मौद्रिक सख्ती के तर्कों को और मजबूत कर दिया है। विश्लेषकों का कहना है कि निजी क्षेत्र की कमाई में हल्की बढ़त नीतिगत दरों को सख्त बनाए रखने के पक्ष में माहौल तैयार कर रही है, जिससे भविष्य में मूल्य स्थिरता को बनाए रखा जा सके।\n\nपोजीशनिंग डेटा भी यह संकेत दे रहा है कि हालिया बिकवाली का दौर अब पलटने के कगार पर पहुंच सकता है। सोसाइटी जेनेराले के अनुसार कमोडिटी फ्यूचर्स ट्रेडिंग कमीशन पर पाउंड के खिलाफ शॉर्ट पोजीशन काफी ज्यादा बढ़ चुकी हैं। यदि बजट के बाद पाउंड में शॉर्ट कवरिंग शुरू होती है और साल के अंत का मौसमी रुझान मजबूत होता है, तो ब्रिटिश मुद्रा में फिर से खरीदारी देखने को मिल सकती है। ब्रिटेन का सीपीआई डेटा इस बात की दिशा तय करेगा कि साल के अंत तक पाउंड किस गति से आगे बढ़ेगा।\n\nनीति निर्माता ग्रीन का सख्त बयान और आर्थिक लचीलापन\nएफएक्सएस स्पीचट्रैकर पर नीति निर्माता ग्रीन के भाषण को 7.4/10 का स्कोर दिया गया, जो उनके ऐतिहासिक औसत के बराबर है। हालांकि, वेतन में आ रही नरमी के थमने और महंगाई के दूसरे दौर के बढ़ते खतरों पर उनके जोर ने उनके सख्त रुख को साफ तौर पर उजागर किया है। आगे के संकेतक दिखा रहे हैं कि वेतन वृद्धि 3.5 प्रतिशत के आसपास बनी रह सकती है, जो केंद्रीय बैंक के 2 प्रतिशत के महंगाई लक्ष्य के अनुकूल नहीं है।\n\nब्रिटेन की अर्थव्यवस्था ने तमाम वैश्विक चुनौतियों के बावजूद अप्रत्याशित मजबूती दिखाई है। श्रम बाजार में सुस्ती का दौर खत्म होने के संकेत मिलने से यह साफ है कि आर्थिक मंदी का कोई बड़ा खतरा फिलहाल नीतियों को सीमित नहीं कर रहा है। मजबूत कारोबारी गतिविधियों, कड़े श्रम बाजार और मुद्रास्फीति के दोबारा उभरने के जोखिमों के चलते बैंक ऑफ इंग्लैंड द्वारा ब्याज दरों में जल्दी किसी ढील की उम्मीद नहीं की जा रही है, जो ब्रिटिश पाउंड को स्वाभाविक सहारा दे रहा है।\n\nफेडरल रिजर्व की अनिश्चितता और डॉलर का रुख\nएक तरफ जहां ब्रिटेन में ब्याज दरों में बढ़ोतरी की जमीन तैयार हो रही है, वहीं अमेरिका में नीतिगत दिशा को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। फेड चेयर वॉर्श ने ब्याज दरों के भावी मार्ग पर कोई स्पष्ट संकेत नहीं दिए हैं। केंद्रीय बैंक प्रमुख की इस चुप्पी ने डॉलर के मुकाबले पाउंड के उतार-चढ़ाव को और संवेदनशील बना दिया है।\n\nअमेरिकी डॉलर इंडेक्स में उतार-चढ़ाव का सीधा असर ब्रिटिश पाउंड और डॉलर के युग्म पर पड़ रहा है। अमेरिकी अर्थव्यवस्था में ब्याज दरों को लंबे समय तक ऊंचा रखे जाने की संभावनाओं और ऊर्जा की कीमतों में बदलाव से डॉलर को आंशिक मजबूती मिलती रही है, जिससे पाउंड की बढ़त पर ऊपरी स्तरों पर लगाम लगती दिख रही है।\n\nजीबीपी/यूएसडी के तकनीकी स्तर और संकेतक\nदैनिक तकनीकी चार्ट पर नजर डालें तो जीबीपी/यूएसडी इस समय ऊपरी बोलिंगर बैंड से थोड़ा ऊपर बना हुआ है, जो हालिया सुधार के जारी रहने का संकेत देता है। हालांकि, 100-दिवसीय सिंपल मूविंग एवरेज इस जोड़ी के लिए एक बड़ी बाधा बना हुआ है। जब तक यह स्तर पार नहीं होता, तब तक व्यापक बाजार का रुझान दबाव में ही रहने की संभावना है।\n\nरिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स 56 के स्तर पर पहुंच गया है, जो गति में सुधार और खरीदारों की बढ़ती दिलचस्पी को दर्शाता है। 14-दिवसीय एडीएक्स इंडिकेटर 26 पर ट्रेंडिंग स्थिति दिखा रहा है, जबकि फास्ट स्टोकेस्टिक 87 और सिग्नल लाइन 78 पर दर्ज की गई है। 20-दिवसीय एक्सपोनेंशियल मूविंग एवरेज 1.33 पर और 50 तथा 200-दिवसीय ईएमए 1.34 पर हैं। बाजार के लिए 20 दिनों का सपोर्ट 1.31 और रेजिस्टेंस 1.34 के पास बना हुआ है, जबकि दैनिक वोलैटिलिटी का स्तर 0.01 के आसपास देखा जा रहा है।\n\nब्रिटिश पाउंड का ऐतिहासिक महत्व और वैश्विक मुद्रा प्रणाली में भूमिका\nब्रिटिश पाउंड दुनिया की सबसे पुरानी सक्रिय मुद्रा है, जिसकी शुरुआत 886 ईस्वी में हुई थी। यह यूनाइटेड किंगडम की आधिकारिक मुद्रा है और विदेशी मुद्रा बाजार में चौथी सबसे अधिक कारोबार की जाने वाली मुद्रा के रूप में जानी जाती है। साल 2022 के आंकड़ों के अनुसार, वैश्विक विदेशी मुद्रा लेन-देन में इसकी हिस्सेदारी 12 प्रतिशत है, जिसका दैनिक औसत लगभग 630 अरब डॉलर का रहता है।\n\nमुद्रा बाजार में इसके प्रमुख व्यापारिक जोड़ों में जीबीपी/यूएसडी शामिल है, जिसे 'केबल' कहा जाता है और यह कुल मुद्रा कारोबार का 11 प्रतिशत हिस्सा रखता है। जीबीपी/जेपीवाई को ट्रेडर 'ड्रैगन' के नाम से जानते हैं, जिसकी हिस्सेदारी 3 प्रतिशत है, जबकि यूरो/जीबीपी का हिस्सा 2 प्रतिशत है। इस मुद्रा को जारी करने का अधिकार बैंक ऑफ इंग्लैंड के पास है, जो मूल्य स्थिरता के सिद्धांत पर काम करता है।\n\nजब मुद्रास्फीति बहुत अधिक होती है, तो बैंक ऑफ इंग्लैंड ब्याज दरों को बढ़ाकर कर्ज महंगा कर देता है। यह स्थिति पाउंड के लिए आमतौर पर सकारात्मक होती है क्योंकि ऊंची ब्याज दरें वैश्विक निवेशकों को ब्रिटेन में अपनी पूंजी लगाने के लिए आकर्षित करती हैं। इसके विपरीत, जब महंगाई बहुत नीचे गिर जाती है और आर्थिक विकास सुस्त पड़ता है, तो केंद्रीय बैंक दरों में कटौती करता है ताकि निवेश को बढ़ावा दिया जा सके।\n\nमुद्रा के मूल्य को प्रभावित करने वाला एक अन्य प्रमुख कारक व्यापार संतुलन है। यह संकेतक किसी देश द्वारा अपने निर्यात से की गई कमाई और आयात पर किए गए खर्च के अंतर को दर्शाता है। यदि ब्रिटेन की वस्तुओं और सेवाओं की मांग दुनिया भर में बढ़ती है, तो विदेशी खरीदारों की मांग के कारण पाउंड की कीमत स्वाभाविक रूप से बढ़ जाती है।\n\nअन्य वैश्विक संपत्तियों और मुद्राओं का प्रदर्शन\nबुधवार के कारोबारी सत्र में केवल ब्रिटिश पाउंड ही नहीं, बल्कि कई अन्य वैश्विक संपत्तियों में भी महत्वपूर्ण गतिविधियां दर्ज की गईं। ऑस्ट्रेलियाई डॉलर और अमेरिकी डॉलर की जोड़ी लगातार चौथे दिन सकारात्मक रुख के साथ 0.7000 से ऊपर तीन हफ्तों के उच्चतम स्तर पर कारोबार करती दिखी। रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया के डिप्टी गवर्नर एंड्रयू हॉसर के सख्त बयानों और महंगाई की चिंताओं ने ऑस्ट्रेलियाई डॉलर को मजबूती दी, हालांकि अमेरिका और ईरान के बीच बनी अनिश्चितता के कारण डॉलर में आई लिवाली ने बढ़त को सीमित किया।\n\nअमेरिकी डॉलर और जापानी येन की जोड़ी 158.50 के स्तर के आसपास कई हफ्तों के दायरे में फंसी रही। बैंक ऑफ जापान द्वारा अगली दर बढ़ोतरी के समय को लेकर अनिश्चितता के चलते येन पर दबाव देखा गया, जबकि तेल की अस्थिर कीमतों और ऊर्जा आधारित महंगाई के खतरों ने डॉलर को समर्थन दिया।\n\nसोने की कीमतों में लगातार चौथे दिन कमजोरी देखने को मिली और यह एशियाई सत्र के दौरान साप्ताहिक निचले स्तर के करीब कारोबार करता रहा। ट्रेडर 4,100 डॉलर प्रति औंस के नीचे एक निर्णायक गिरावट का इंतजार कर रहे हैं। ऊर्जा की बढ़ती कीमतों से उपजी महंगाई ने अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों को लेकर सख्त रुख की संभावनाओं को जिंदा रखा है, जिससे बिना ब्याज वाली बुलियन संपत्तियों की मांग कमजोर हुई है। हालांकि कूटनीतिक वार्ताओं की अपुष्ट खबरों ने सुरक्षित ठिकाने के रूप में डॉलर की बढ़त को रोककर सोने को आंशिक राहत दी है।\n\nइसके साथ ही वॉल स्ट्रीट पर कॉर्पोरेट जगत के नतीजों का भी वित्तीय बाजारों पर गहरा असर पड़ रहा है। नेटफ्लिक्स, मेटा प्लेटफॉर्म्स और टेस्ला इस सप्ताह अपने तिमाही वित्तीय नतीजे घोषित करने जा रहे हैं। इन तीनों दिग्गज कंपनियों की आय रिपोर्ट त्योहारी सीजन से पहले पूरे इक्विटी और करेंसी बाजार की दिशा तय करने में बेहद अहम भूमिका निभा सकती है।\n\nइसका आप पर असर\nब्रिटिश पाउंड में उतार-चढ़ाव और बैंक ऑफ इंग्लैंड की आगामी ब्याज दर नीतियों का सीधा प्रभाव अंतरराष्ट्रीय व्यापार, विदेश में अध्ययन और विदेशी मुद्रा लेनदेन पर पड़ेगा।\n\n• विदेशी यात्रियों और छात्रों के लिए: ब्रिटेन में पढ़ने वाले भारतीय छात्रों और पर्यटकों के लिए पाउंड की स्थिरता खर्चों का बेहतर बजट बनाने में मदद करेगी। यदि पाउंड 1.3400 के ऊपर निकलता है तो ट्यूशन फीस और रहने का खर्च भारतीय रुपये के संदर्भ में बढ़ सकता है।\n• आयात और निर्यातकों पर प्रभाव: ब्रिटेन से व्यापार करने वाले भारतीय कारोबारियों को अपनी लागत और मार्जिन की समीक्षा करनी होगी। मुद्रा के उतार-चढ़ाव से हेजिंग की रणनीतियों में तुरंत बदलाव करने की आवश्यकता होगी।\n• फॉरेक्स ट्रेडर्स के लिए: सीपीआई डेटा आने तक जीबीपी/यूएसडी में तेज अस्थिरता रहने की संभावना है। ट्रेडर्स को 1.3400 के रेजिस्टेंस और 1.3100 के सपोर्ट स्तरों को ध्यान में रखकर स्टॉप-लॉस निर्धारित करना चाहिए।\n• वैश्विक निवेश पोर्टफोलियो: ब्याज दरों में बढ़ोतरी से यूके बॉन्ड्स की यील्ड बढ़ सकती है। इससे अंतरराष्ट्रीय म्यूचुअल फंड्स और डायवर्सिफाइड पोर्टफोलियो पर मिलने वाले रिटर्न में बदलाव देखा जा सकता है।\n\nऐसा क्यों हुआ\nब्रिटिश पाउंड का 1.3400 के नीचे स्थिर रहना ब्रिटेन के मजबूत रोजगार आंकड़ों और आने वाले महंगाई आंकड़ों के बीच बनी असमंजस की स्थिति का नतीजा है। ट्रेडर महत्वपूर्ण आर्थिक संकेतकों से पहले आक्रामक दांव लगाने से बच रहे हैं।\n\n• रोजगार बाजार में अप्रत्याशित मजबूती: बेरोजगारी दर गिरकर 4.7 प्रतिशत पर आ गई है, जिससे यह साफ होता है कि नौकरी बाजार मजबूत बना हुआ है। इसने अर्थव्यवस्था में मंदी की आशंकाओं को कम कर दिया है।\n• वेतन वृद्धि और महंगाई का डर: निजी क्षेत्र में वेतन वृद्धि की गति तेज बनी हुई है, जो 2 प्रतिशत के मुद्रास्फीति लक्ष्य से ऊपर है। नीति निर्माताओं को डर है कि इससे महंगाई का दूसरा दौर शुरू हो सकता है।\n• बैंक ऑफ इंग्लैंड से दर बढ़ोतरी की उम्मीदें: बाजार 5 नवंबर की बैठक में 25 आधार अंकों की दर बढ़ोतरी की पूरी संभावना देख रहा है। यह पिछले तीन वर्षों में दरों में होने वाली पहली बढ़ोतरी होगी।\n• फेडरल रिजर्व की अनिश्चितता: अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ओर से ब्याज दरों पर स्पष्ट दिशा न मिलने के कारण डॉलर की मांग में उतार-चढ़ाव बना हुआ है, जिससे पाउंड को ऊपरी स्तरों पर प्रतिरोध मिल रहा है।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. जीबीपी/यूएसडी इस समय किस स्तर पर कारोबार कर रहा है?\nजीबीपी/यूएसडी शुरुआती एशियाई सत्र में 1.3400 के नीचे 1.3375 के आसपास कारोबार कर रहा है।\n\n2. ब्रिटेन की हालिया बेरोजगारी दर क्या दर्ज की गई है?\nऑफिस फॉर नेशनल स्टैटिस्टिक्स के अनुसार ब्रिटेन की बेरोजगारी दर अगस्त तक के तीन महीनों में घटकर 4.7 प्रतिशत पर आ गई है।\n\n3. ब्रिटेन के लिए सितंबर में हेडलाइन मुद्रास्फीति का क्या अनुमान है?\nअर्थशास्त्रियों का अनुमान है कि सितंबर में ब्रिटेन की हेडलाइन मुद्रास्फीति सालाना आधार पर 3.4 प्रतिशत रह सकती है।\n\n4. बैंक ऑफ इंग्लैंड की अगली बैठक कब है और क्या निर्णय अपेक्षित है?\nबैंक ऑफ इंग्लैंड की अगली बैठक 5 नवंबर को है, जिसमें बाजार 25 आधार अंकों की ब्याज दर बढ़ोतरी की उम्मीद कर रहा है।\n\n5. जीबीपी/यूएसडी के लिए प्रमुख तकनीकी स्तर कौन से हैं?\nतकनीकी रूप से 100-दिवसीय सिंपल मूविंग एवरेज और 1.3400 का स्तर मुख्य रेजिस्टेंस है, जबकि 1.3100 का स्तर मजबूत सपोर्ट प्रदान कर रहा है।",
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  "category": "बाज़ार",
  "publishedAt": "2026-10-21",
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