# ब्रिटिश पाउंड में भारी उतार-चढ़ाव, ब्रिटेन में महंगाई घटने से बदली बैंक ऑफ इंग्लैंड की नीति

> ब्रिटेन में उपभोक्ता महंगाई दर (CPI) गिरकर 2.6% पर आ गई है, जिसने बैंक ऑफ इंग्लैंड द्वारा ब्याज दरें बढ़ाए जाने की उम्मीदों पर पानी फेर दिया है। इसका सीधा असर ब्रिटिश पाउंड पर दिख रहा है, जो 1.3400 के अहम तकनीकी लेवल के आसपास भारी दबाव का सामना कर रहा है।

**Type:** article · **Category:** बाज़ार · **Published:** 2026-07-23 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/market/british-pound-men-bhari-utara-charhava-britain-men-mahngai-ghatane-se-badali-bank-of-england-ki-niti-10095 · **Language:** Hindi
**Tags:** GBP/USD फोरकास्ट, बैंक ऑफ इंग्लैंड, ब्रिटेन महंगाई दर, फॉरेक्स तकनीकी विश्लेषण, बिटकॉइन प्राइस एक्शन, क्रूड ऑयल मार्केट, finance

ब्रिटिश पाउंड इस समय अमेरिकी डॉलर के मुकाबले काफी संभलकर ट्रेड कर रहा है। ग्लोबल मार्केट में कई तरह के विपरीत आर्थिक कारण इस करेंसी को एक सीमित दायरे में बांधे हुए हैं। ताज़ा मार्केट सेशन के अनुसार, GBP/USD पेयर 1.3400 के मनोवैज्ञानिक स्तर के बेहद करीब मँडरा रहा है, जिसमें 0.04% की मामूली दैनिक गिरावट दर्ज की गई है। दुनिया भर के बाज़ारों में अमेरिकी डॉलर के कमज़ोर पड़ने के बावजूद, स्टर्लिंग इस मौके का फायदा उठाकर अपने इमीडिएट मूविंग एवरेज को पार करने में पूरी तरह नाकाम रहा है। मार्केट के निवेशक इस कंसोलिडेशन फेज़ पर पैनी नज़र बनाए हुए हैं, क्योंकि वे अच्छी तरह समझते हैं कि इस तेज़ी की कमी का सीधा कनेक्शन घरेलू आर्थिक आंकड़ों और ग्लोबल रिस्क वाले माहौल से है। इस पेयर का 52-हफ्तों का ट्रेडिंग दायरा 1.30 से 1.38 के बीच बना हुआ है। यह साफ़ तौर पर दिखाता है कि हालिया वोलैटिलिटी, जिसका ATR 0.01 पर है, भले ही थोड़ी शांत हो गई हो, लेकिन ऐतिहासिक रूप से अभी भी बड़े प्राइस मूवमेंट की पूरी गुंजाइश बाकी है। फिलहाल ट्रेडिंग वॉल्यूम 20-दिन के औसत का ठीक 1.00 गुना है, जो इस बात का पक्का संकेत है कि बड़े संस्थागत निवेशक एक्टिव तो हैं, लेकिन किसी साफ़ दिशा के बिना वे बड़े दांव लगाने से बच रहे हैं। एशियाई ट्रेडिंग घंटों के दौरान, इस पेयर ने 1.3385 की तरफ एक हल्का रिबाउंड देखा, लेकिन ग्लोबल चिंताओं के बोझ तले यह रिकवरी दब गई।

## महंगाई का गणित और बैंक ऑफ इंग्लैंड की दुविधा

ब्रिटिश पाउंड की इस हिचकिचाहट के पीछे सबसे बड़ी वजह यूनाइटेड किंगडम में महंगाई दर के ताज़ा आंकड़े हैं। जून महीने के लिए हेडलाइन कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (CPI) के आंकड़ों ने साफ़ तौर पर महंगाई के ठंडे पड़ने का इशारा दिया है। यह आंकड़ा सालाना आधार (YoY) पर गिरकर 2.6% पर आ गया है, जो पिछले महीने के 2.8% के मुकाबले एक बड़ी और मनोवैज्ञानिक रूप से राहत देने वाली गिरावट है। करेंसी ट्रेडर्स और बड़े बॉन्ड निवेशकों के लिए यह डेटा बेहद अहम है, क्योंकि यह सीधे तौर पर बैंक ऑफ इंग्लैंड की आगे की नीतियों को प्रभावित करता है। बैंक ऑफ इंग्लैंड का एक सरकारी लक्ष्य है कि उपभोक्ता महंगाई दर को 2% के करीब रखा जाए। जब महंगाई बेकाबू होती है, तो बैंक ऑफ इंग्लैंड को ब्याज दरें बढ़ाकर या बॉन्ड-खरीद कार्यक्रम को तेज़ी से घटाकर सख्त मॉनेटरी पॉलिसी अपनानी पड़ती है। इस तरह के सख्त कदमों से सिस्टम में पाउंड स्टर्लिंग की सप्लाई कम हो जाती है, जिससे इसकी वैल्यू बढ़ जाती है। इसके ठीक उलट, कीमतों में बढ़ोतरी की रफ्तार कम होने का मतलब है कि बाज़ार अब यह मानकर चल रहा है कि बैंक ऑफ इंग्लैंड निकट भविष्य में ब्याज दरों को तेज़ी से नहीं बढ़ाएगा। निवेशकों के इसी रुख ने पाउंड की उड़ान पर ब्रेक लगा दिया है और इसे एक दायरे में समेट दिया है।

## आगे की राह: रिटेल सेल्स और प्राइवेट सेक्टर के आंकड़े

चूंकि ब्याज दरों को लेकर बाज़ार का नज़रिया अब नरम हो चुका है, इसलिए ट्रेडर्स अब आगे आने वाले बड़े आर्थिक आंकड़ों पर टकटकी लगाए बैठे हैं। बाज़ार इस वक्त शुक्रवार को आने वाले जून के रिटेल सेल्स डेटा का बेसब्री से इंतज़ार कर रहा है। ब्रिटेन की इकोनॉमी का एक बहुत बड़ा हिस्सा आम उपभोक्ताओं के खर्च पर टिका है, और अगर इस डेटा में कोई सुस्ती दिखती है, तो बैंक ऑफ इंग्लैंड के लिए ब्याज दरें बढ़ाना लगभग नामुमकिन हो जाएगा। इसके अलावा, जुलाई के लिए एसएंडपी ग्लोबल के शुरुआती PMI डेटा से भी ब्रिटेन के प्राइवेट सेक्टर की ताज़ा सेहत का असली अंदाज़ा मिलेगा। अगर PMI का डेटा उम्मीद से बेहतर आता है, तो इससे करेंसी में फिर से जान आ सकती है, लेकिन अगर आंकड़े निराश करते हैं, तो पाउंड की परेशानियां और भी बढ़ सकती हैं। आम लोगों की खरीदारी और कॉरपोरेट कामकाज के बीच का यह संतुलन ही तय करेगा कि आर्थिक रिकवरी को लेकर बैंक ऑफ इंग्लैंड कितना आश्वस्त है।

## तकनीकी विश्लेषण: मूविंग एवरेज और अहम सपोर्ट लेवल

चार्ट के तकनीकी विश्लेषण की बात करें, तो GBP/USD पेयर इस वक्त मिला-जुला या हल्का मंदी का रुख दिखा रहा है। लाइव मार्केट डेटा से पता चलता है कि 1.34 के बेहद अहम लेवल के आसपास 20-दिन, 50-दिन और 200-दिन के एक्सपोनेन्शियल मूविंग एवरेज (EMA) और सिंपल मूविंग एवरेज (SMA) पूरी तरह से फ्लैट हो चुके हैं। तेज़ी की उम्मीद कर रहे ट्रेडर्स के लिए सबसे खतरे की घंटी यह है कि चार्ट पर एक लॉन्ग-टर्म 'डेथ क्रॉस' बन चुका है, जहां 50-दिन का मूविंग एवरेज 200-दिन के मूविंग एवरेज के नीचे चला गया है, जो सीधे तौर पर एक लंबी मंदी का पक्का इशारा है। 14-पीरियड का रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स (RSI) बिल्कुल 50 के न्यूट्रल लेवल पर टिका है। यह बताता है कि बाज़ार में खरीदारी तो है, लेकिन उसमें इतनी ताकत नहीं है कि कोई बड़ा ब्रेकआउट हो सके। इसके अलावा, MACD इंडिकेटर 0.00 पर अपनी सिग्नल लाइन के साथ पूरी तरह फ्लैट है, और एवरेज डायरेक्शनल इंडेक्स (ADX) सिर्फ 15 के कमज़ोर लेवल पर है, जो साबित करता है कि बाज़ार फिलहाल किसी भी दिशा में जाने को तैयार नहीं है। स्टोकेस्टिक इंडिकेटर की फास्ट लाइन 22 और सिग्नल लाइन 35 पर है, जो कमज़ोर मोमेंटम की गवाही दे रही है। ऊपरी तरफ की बात करें, तो सबसे पहली रुकावट 1.3501 के डाउनवर्ड ट्रेंडलाइन इलाके में है, जिसके बाद 15 जुलाई का हाई लेवल 1.3558 एक बहुत बड़ी दीवार की तरह खड़ा है। लाइव बोलिंजर बैंड्स भी इस भारी कंसोलिडेशन की गवाही देते हैं, जिनका दायरा 1.32 से 1.35 तक फैला हुआ है और कीमतें फिलहाल बैंड के बिल्कुल बीच फंसी हैं। अगर बाज़ार में बिकवाली का दबाव बढ़ता है, तो नीचे की तरफ पहला मजबूत सपोर्ट 8 जुलाई के लो लेवल 1.3322 पर है। हालांकि, पिवट डेटा बताता है कि 1.34 का पिवट भी एक छोटा सपोर्ट दे सकता है, जबकि सबसे निर्णायक और बड़ा बेस 24 जून के लो लेवल 1.3140 पर टिका है।

## अमेरिकी डॉलर में सुस्ती और यूरोपियन सेंट्रल बैंक से पहले यूरो की तेज़ी

जहां एक तरफ पाउंड स्टर्लिंग को अपने ही देश के कमज़ोर आंकड़ों से जूझना पड़ रहा है, वहीं दूसरी तरफ दुनिया की सबसे ताकतवर करेंसी अमेरिकी डॉलर भी निवेशकों को लुभाने में संघर्ष कर रही है। छह प्रमुख ग्लोबल करेंसियों के मुकाबले अमेरिकी डॉलर की ताकत नापने वाला इंडेक्स (DXY) भारी दबाव में ट्रेड कर रहा है। फिलहाल यह इंडेक्स 101.00 के महत्वपूर्ण लेवल के आसपास डगमगा रहा है और इसमें 0.15% की दैनिक गिरावट आ चुकी है। डॉलर की इस चौतरफा कमज़ोरी का सीधा फायदा दुनिया की दूसरी बड़ी करेंसियों, खास तौर पर यूरो को मिल रहा है। एशियाई ट्रेडिंग के दौरान, EUR/USD पेयर ने लगातार दूसरे दिन अपनी शानदार तेज़ी बरकरार रखी है और यह 1.1410 के लेवल के इर्द-गिर्द मजबूती से टिका है। यूरोपियन सेंट्रल बैंक के आने वाले ब्याज दर के फैसले से ठीक पहले इस सिंगल करेंसी को मजबूत फंडामेंटल सपोर्ट मिल रहा है। बाज़ार का यह रुख साफ़ बता रहा है कि ट्रेडर्स को यूरोपीय नीति निर्माताओं से एक सख्त और आक्रामक लहज़े की पूरी उम्मीद है।

## मिडिल ईस्ट के तनाव से क्रूड ऑयल और सोने में उछाल

विदेशी मुद्रा बाज़ार की इस हलचल से अलग, ग्लोबल कमोडिटी मार्केट में इस वक्त भारी उठापटक मची हुई है, जिसकी इकलौती वजह ग्लोबल जिओपॉलिटिकल तनाव है। आर्थिक और राजनीतिक अनिश्चितता के दौर में सबसे सुरक्षित निवेश माने जाने वाले सोने ने 4,100 डॉलर के ऐतिहासिक मनोवैज्ञानिक लेवल के ऊपर मजबूती से अपने पैर जमा लिए हैं। पिछले दिन अपने कई हफ्तों के हाई लेवल को छूने के बाद अब इसमें हल्की सुस्ती है, लेकिन बड़े निवेशक अभी भी इसे अपने पोर्टफोलियो में सुरक्षित दांव के तौर पर बचाए रखना चाहते हैं। दूसरी ओर, ग्लोबल एनर्जी सेक्टर में बहुत बड़ा और डरावना उछाल देखने को मिल रहा है। क्रूड ऑयल की कीमतें रॉकेट की तरह भागी हैं और इन्होंने 11 जून के बाद का अपना नया हाई लेवल बना लिया है। तेल बाज़ार में आई इस तूफानी तेज़ी की सीधी वजह मिडिल ईस्ट में अमेरिका और ईरान के बीच लगातार बढ़ता तनाव और सैन्य टकराव का डर है। दुनिया भर के मैक्रो ट्रेडर्स और बड़े अर्थशास्त्रियों के लिए तेल की ये आसमान छूती कीमतें एक बड़ा सिरदर्द हैं, क्योंकि इससे ग्लोबल महंगाई के फिर से बेलगाम होने का सीधा खतरा पैदा हो गया है। अगर क्रूड ऑयल की वजह से महंगाई फिर भड़की, तो यह अमेरिकी फेड की आगे की ब्याज दर नीतियों को पूरी तरह से बदल कर रख देगा।

## क्रिप्टो बाज़ार दिखा रहा है अप्रत्याशित मज़बूती

शेयर बाज़ार और फॉरेक्स मार्केट की इस भारी उथल-पुथल के बीच, क्रिप्टोकरेंसी सेक्टर एक बिल्कुल अलग और बेहद मजबूत राह पर चलता नज़र आ रहा है। यह सेक्टर अब ग्लोबल बाज़ारों से अलग अपनी स्वतंत्र दिशा तय कर रहा है। बिटवाइज़ के चीफ इन्वेस्टमेंट ऑफिसर मैट होगन द्वारा पेश किए गए एक डीप इंडस्ट्री एनालिसिस के मुताबिक, अगले बड़े डिजिटल एसेट बुल रन की नींव इस वक्त बहुत तेज़ी से रखी जा रही है। इसका मुख्य कारण डिसेंट्रलाइज़्ड ब्लॉकचेन इंफ्रास्ट्रक्चर और पारंपरिक फाइनेंस सिस्टम का आपस में तेज़ी से जुड़ना है। मंगलवार देर रात पब्लिश हुई अपनी एक विस्तृत रिपोर्ट में, मैट होगन ने एक बेहद मज़बूत तर्क देते हुए कहा है कि पूरा क्रिप्टो बाज़ार इस वक्त मैक्रोइकॉनॉमिक गिरावट के अंतिम चरण के शुरुआती संकेत दे रहा है। उनका यह दावा तुलनात्मक आंकड़ों से पूरी तरह साबित भी होता है, जहां एक तरफ टेक-हेवी पारंपरिक नैस्डैक 100 इंडेक्स 1 जुलाई से अब तक 6% की भारी गिरावट झेल चुका है, वहीं बिटकॉइन ने इसी दौरान 9% का बेहद शानदार रिटर्न देकर सबको चौंका दिया है। ऑल्टकॉइन की दुनिया पर नज़र डालें, तो कई बड़े टोकन अहम तकनीकी मोड़ पर खड़े हैं। रिपल (XRP) इस वक्त अपने 50-दिन के एक्सपोनेन्शियल मूविंग एवरेज पर भारी रेजिस्टेंस का सामना कर रहा है और इसे एक बड़े ब्रेकआउट के लिए भारी वॉल्यूम की तलाश है। वहीं दूसरी ओर, स्टेलर (XLM) अपने सबसे अहम और मजबूत सपोर्ट लेवल 0.187 डॉलर के आसपास पूरी ताकत से टिका हुआ है। इस अप्रत्याशित मज़बूती के बड़े मायनों को किसी भी कीमत पर नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता है। एक तरफ जहां बैंक ऑफ इंग्लैंड और अमेरिकी फेडरल रिज़र्व जैसे पारंपरिक केंद्रीय बैंक लगातार बढ़ती महंगाई और सुस्त आर्थिक विकास दर जैसी दोहरी चुनौतियों से बुरी तरह जूझ रहे हैं, वहीं क्रिप्टोकरेंसी की डिसेंट्रलाइज़्ड प्रकृति संपत्ति को सुरक्षित रखने का एक बिल्कुल नया और बेहतरीन विकल्प पेश कर रही है। बड़े संस्थागत निवेशक अब टॉप-टियर डिजिटल एसेट्स को सिर्फ सट्टेबाज़ी का ज़रिया नहीं मान रहे हैं, बल्कि वे इन्हें अपने डायवर्सिफाइड और आधुनिक पोर्टफोलियो का एक बेहद ज़रूरी और वैध हिस्सा मान रहे हैं, जो उन्हें पारंपरिक सरकारी मुद्राओं के गिरते मूल्य से बचा सकता है। वॉल स्ट्रीट में क्रिप्टो को लेकर बन रहे पॉजिटिव माहौल के बावजूद, डेरिवेटिव मार्केट का ताज़ा डेटा थोड़ा मंदी का संकेत दे रहा है। यह डेरिवेटिव डेटा साफ़ बताता है कि चालाक और बड़े स्पेकुलेटिव ट्रेडर्स इस वक्त बेहद सावधानी बरत रहे हैं। जब तक उन्हें मैक्रोइकॉनॉमिक आंकड़ों या किसी सरकारी रेगुलेशन की तरफ से कोई बिल्कुल साफ दिशा नहीं मिल जाती, वे अपनी ट्रेडिंग कैपिटल बचाकर रखने में ही समझदारी समझ रहे हैं।

## इसका आप पर असर
- **फॉरेक्स और क्रिप्टो निवेशकों के लिए:** ब्रिटिश पाउंड इस वक्त एक बेहद सीमित तकनीकी दायरे में फंसा हुआ है जहां भारी सावधानी की ज़रूरत है, जबकि पारंपरिक टेक शेयरों के मुकाबले बिटकॉइन का शानदार प्रदर्शन निवेशकों को इस आर्थिक अनिश्चितता से बचने का एक नया रास्ता दे रहा है।

## सवाल-जवाब

### 1. ब्रिटिश पाउंड में तेज़ी क्यों नहीं आ पा रही है?
पाउंड को इसलिए संघर्ष करना पड़ रहा है क्योंकि ब्रिटेन की महंगाई दर घटकर 2.6% पर आ गई है, जिससे बैंक ऑफ इंग्लैंड द्वारा ब्याज दरें बढ़ाए जाने की संभावना बहुत कम हो गई है।

### 2. GBP/USD पेयर का ताज़ा तकनीकी ट्रेंड क्या है?
यह पेयर 1.34 के लेवल के आसपास एक बहुत ही संकीर्ण दायरे में फंसा हुआ है, और चार्ट पर बना 'डेथ क्रॉस' भारी दबाव और लंबी मंदी का साफ इशारा दे रहा है।

### 3. अमेरिकी डॉलर के मुकाबले यूरो का प्रदर्शन कैसा है?
कमज़ोर पड़ते अमेरिकी डॉलर के मुकाबले यूरो काफी मज़बूती दिखा रहा है और यह यूरोपियन सेंट्रल बैंक के फैसले से ठीक पहले 1.1410 के आसपास ट्रेड कर रहा है।

### 4. क्रूड ऑयल (कच्चे तेल) की कीमतों में अचानक इतना उछाल क्यों आया है?
मिडिल ईस्ट में अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतें 11 जून के बाद अपने सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गई हैं।

### 5. क्या बिटकॉइन पारंपरिक शेयर बाज़ारों से बेहतर रिटर्न दे रहा है?
हां, जुलाई की शुरुआत से अब तक नैस्डैक 100 जैसे बड़े टेक इंडेक्स में 6% की गिरावट आई है, जबकि इसी दौरान बिटकॉइन ने 9% का शानदार रिटर्न दिया है।

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