बीएसई पर लिस्टिंग के दूसरे दिन फिसला एनएसई, इश्यू प्राइस के करीब पहुंचा शेयर बाजार में शुरुआत के अगले ही दिन नेशनल स्टॉक एक्सचेंज के शेयरों में मुनाफावसूली देखने को मिली, जहां भाव फिसलकर 1,790.10 रुपये के निचले स्तर तक आ गया। दलाल स्ट्रीट पर बहुप्रतीक्षित शुरुआत दर्ज करने के ठीक एक कारोबारी सत्र बाद नेशनल स्टॉक एक्सचेंज ऑफ इंडिया लिमिटेड के काउंटरों पर बिकवाली का दबाव हावी हो गया। शुक्रवार, 25 सितंबर के कारोबारी सत्र के दौरान एक्सचेंज के शेयरों में तेज गिरावट दर्ज की गई, जिससे पहले दिन अर्जित की गई बढ़त का एक बड़ा हिस्सा हाथ से निकल गया। निवेशक बाजार में लिस्टिंग के तुरंत बाद मुनाफा समेटने में जुट गए, जिसके चलते शुरुआती तेजी टिक नहीं सकी। शुरुआती कारोबार में बिकवाली और दिन का उतार-चढ़ाव शुक्रवार को बीएसई पर ट्रेडिंग शुरू होने के वक्त एनएसई का शेयर 1,825 रुपये के आसपास खुला था, जबकि गुरुवार को इसका क्लोजिंग स्तर 1,818 रुपये रहा था। घंटी बजने के फौरन बाद काउंटर में थोड़ी लिवाली दिखी और भाव चढ़कर 1,830 रुपये तक पहुंच गया। हालांकि, यह तेजी बेहद अल्पकालिक साबित हुई क्योंकि ऊंचे स्तरों पर बिकवाली का भारी दबाव शुरू हो गया। देखते ही देखते शेयर लुढ़ककर 1,790.10 रुपये के इंट्राडे निचले स्तर तक आ गया, जो पिछले बंद भाव से लगभग 1.53 प्रतिशत की गिरावट दर्शाता है। कारोबार के दौरान यह शेयर अपने आईपीओ इश्यू प्राइस 1,785 रुपये के बेहद करीब पहुंच गया था। हालांकि निचले स्तरों से खरीदारी लौटने के कारण इसमें कुछ सीमित सुधार देखने को मिला। दोपहर के कारोबार में स्टॉक 1.22 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 1,795.75 रुपये पर ट्रेड करता दिखा। बाजार सहभागियों का मानना है कि पहले सत्र में लगभग 2 प्रतिशत की बढ़त और 1,878 रुपये का उच्चतम स्तर छूने के बाद ट्रेडर्स द्वारा त्वरित मुनाफा समेटने के कारण यह सुस्ती बनी है। लिस्टिंग का सफर और कंपनी का मूल्यांकन नेशनल स्टॉक एक्सचेंज की बाजार में एंट्री बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज यानी बीएसई के प्लेटफॉर्म पर हुई थी। एक्सचेंज का पब्लिक इश्यू पूरी तरह से ऑफर फॉर सेल यानी ओएफएस प्रारूप पर आधारित था। इसका सीधा मतलब यह रहा कि शेयर बिक्री से जुटाया गया पूरा फंड पुराने और मौजूदा शेयरधारकों के पास गया, न कि कंपनी के अपने खजाने में पूंजी विस्तार के तौर पर पहुंचा। लिस्टिंग वाले दिन एनएसई के शेयर 1,800 रुपये के भाव पर खुले थे, जो 1,785 रुपये के निर्गम मूल्य के मुकाबले महज 0.84 प्रतिशत का मामूली प्रीमियम था। हालांकि भारी भरकम लिस्टिंग गेन की उम्मीद लगाए बैठे कुछ निवेशकों को इस शुरुआत से थोड़ी निराशा हुई, लेकिन एक्सचेंज का कुल बाजार पूंजीकरण अब भी बेहद मजबूत बना हुआ है। शुक्रवार के सुस्त रुझान के बावजूद कंपनी का मार्केट कैपिटलाइजेशन 4.5 लाख करोड़ रुपये के विशाल दायरे में टिका रहा। बाजार में एकाधिकार और राजस्व की संरचना भारतीय पूंजी बाजार के ढांचे में एनएसई की स्थिति बेजोड़ और लगभग एकाधिकार वाली मानी जाती है। कैश सेगमेंट के कुल टर्नओवर में इस एक्सचेंज की हिस्सेदारी करीब 93 प्रतिशत बैठती है, जबकि इक्विटी फ्यूचर्स के पूरे कारोबार में इसकी पकड़ लगभग 99.8 प्रतिशत के एकतरफा स्तर पर है। यह विशाल खाई एक्सचेंज को मजबूत प्रतिस्पर्धी बढ़त और निरंतर मजबूत नकदी प्रवाह प्रदान करती है। स्वास्तिका इन्वेस्टमार्ट लिमिटेड में हेड ऑफ वेल्थ शिवानी न्याती के मुताबिक, लिस्टिंग का सामान्य प्रीमियम बाजार की आक्रामक उम्मीदों के बजाय यथार्थवादी नजरिए को दर्शाता है। व्यापार मॉडल की इस ताकत के साथ-साथ एक संवेदनशील पहलू भी जुड़ा हुआ है। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज की कुल कमाई का तकरीबन 79 प्रतिशत हिस्सा सीधे तौर पर बाजार में होने वाले ट्रेडिंग वॉल्यूम से जुड़ा है। जब भी बाजार में उतार-चढ़ाव घटता है या वॉल्यूम गिरता है, तो एक्सचेंज की फीस आय प्रभावित होती है। इसके अतिरिक्त, पूंजी बाजार नियामक सेबी द्वारा नियमों या मार्जिन आवश्यकताओं में किए जाने वाले बदलाव भी सीधे तौर पर कारोबारी मात्रा को प्रभावित करते हैं, जिससे अल्पावधि की आय चक्र पर असर पड़ता है। निवेशकों के लिए रणनीति और स्टॉप लॉस अल्पावधि और लंबी अवधि के निवेशकों के लिए मौजूदा स्तरों पर रणनीतियां काफी अलग हो सकती हैं। बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि जिन्होंने केवल लिस्टिंग लाभ या थोड़े समय के लिए दांव लगाया था, उन्हें जोखिम प्रबंधन को प्राथमिकता देनी चाहिए। शिवानी न्याती ने सुझाव दिया कि शॉर्ट टर्म ट्रेडर्स को 1,740 रुपये प्रति शेयर पर सख्त स्टॉप लॉस बनाकर चलना चाहिए, जो इश्यू प्राइस से करीब 2.5 प्रतिशत नीचे का स्तर है। जैसे-जैसे शेयर एक दायरे में स्थिर हो, इस सुरक्षा स्तर को ऊपर की ओर खिसकाया जा सकता है। दूसरी तरफ, जो निवेशक लंबी अवधि के नजरिए से शेयर में बने रहना चाहते हैं, उनके लिए कारोबारी उतार-चढ़ाव एक सामान्य प्रक्रिया है। भारत की बढ़ती आर्थिक गतिविधियों और वित्तीय बाजारों में खुदरा भागीदारी के विस्तार को देखते हुए एक्सचेंज का बिजनेस मॉडल दीर्घकालिक कंपाउंडिंग की क्षमता रखता है। वॉल्यूम के आधार पर आने वाली अस्थिरता के बीच मजबूत आर्थिक नींव वाले इस काउंटर को लंबी अवधि के लिए होल्ड करने की रणनीति भी अपनाई जा सकती है। इसका आप पर असर एनएसई के शेयरों में आई इस गिरावट और उतार-चढ़ाव का सीधा असर हाल ही में अलॉटमेंट पाने वाले और नए शेयरधारकों पर पड़ रहा है। • आईपीओ निवेशकों पर असर: लिस्टिंग के दिन मिले मामूली प्रीमियम के बाद भाव घटने से अल्पकालिक लाभ काफी सीमित हो गया है। जो निवेशक त्वरित मुनाफे की तलाश में थे, उन्हें 1,740 रुपये के स्टॉप लॉस के साथ अपनी पूंजी सुरक्षित रखनी चाहिए। • लंबी अवधि के खरीदार: बाजार में आई कमजोरी लंबी अवधि के पोर्टफोलियो बनाने वालों के लिए सामान्य अस्थिरता मात्र है। 90 प्रतिशत से अधिक मार्केट शेयर वाली संस्था में निवेशक बाजार की गतिविधियों के अनुरूप धैर्य बनाए रख सकते हैं। • रिटेल ट्रेडिंग कम्युनिटी: यह घटनाक्रम दिखाता है कि प्रतिष्ठित ब्रांड्स में भी लिस्टिंग के बाद मुनाफावसूली हावी हो सकती है। किसी भी नए लिस्टेड स्टॉक में बिना सख्त रिस्क मैनेजमेंट के तुरंत नई पोजीशन बनाने से बचना चाहिए। • वॉल्यूम आधारित जोखिम: कंपनी का बड़ा राजस्व टर्नओवर से जुड़ा होने के कारण बाजार में मंदी आते ही आय प्रभावित हो सकती है। निवेशकों को सेबी के नियामकीय कदमों और ट्रेडिंग वॉल्यूम के आंकड़ों पर नजर रखनी होगी। ऐसा क्यों हुआ एनएसई के शेयरों में लिस्टिंग के दूसरे दिन आई गिरावट के पीछे मुख्य रूप से पहले दिन के लाभ को समेटने की होड़ और मूल्यांकन से जुड़े यथार्थवादी आकलन जिम्मेदार रहे। • तेज मुनाफावसूली: पहले कारोबारी सत्र में शेयर 1,878 रुपये के उच्च स्तर को छू गया था। इसके बाद शॉर्ट टर्म ट्रेडर्स ने अपने लाभ को सुरक्षित करने के लिए बिकवाली शुरू कर दी। • सीमित लिस्टिंग प्रीमियम: शेयर बीएसई पर केवल 0.84 प्रतिशत की मामूली बढ़त के साथ खुला था। अत्यधिक लिस्टिंग गेन न मिलने से कई प्रतिभागियों ने पोजीशन से बाहर निकलना बेहतर समझा। • आय की चक्रीय प्रकृति: एक्सचेंज की 79 प्रतिशत आय बाजार के ट्रेडिंग वॉल्यूम पर टिकी है। बाजार की सुस्ती या नियामकीय बदलावों से होने वाले जोखिम के प्रति निवेशक सतर्क बने हुए हैं। सवाल-जवाब 1. शुक्रवार को एनएसई का शेयर कितने न्यूनतम स्तर तक गिरा? शुक्रवार के कारोबारी सत्र के दौरान एनएसई का शेयर 1,790.10 रुपये के इंट्राडे निचले स्तर तक फिसल गया था। 2. एनएसई का आईपीओ इश्यू प्राइस कितना तय किया गया था? नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का आईपीओ इश्यू प्राइस 1,785 रुपये प्रति शेयर निर्धारित था। 3. एक्सचेंज की लिस्टिंग बीएसई पर किस कीमत पर हुई थी? एनएसई का शेयर बीएसई पर 1,800 रुपये के भाव पर लिस्ट हुआ, जो इश्यू प्राइस से 0.84 प्रतिशत अधिक था। 4. शॉर्ट टर्म निवेशकों के लिए विश्लेषकों ने क्या स्टॉप लॉस सुझाया है? विश्लेषकों ने शॉर्ट टर्म ट्रेडर्स को 1,740 रुपये प्रति शेयर पर सख्त स्टॉप लॉस बनाए रखने की सलाह दी है। 5. भारतीय इक्विटी फ्यूचर्स में एनएसई की कितनी हिस्सेदारी है? एनएसई के पास भारत के इक्विटी फ्यूचर्स बाजार में लगभग 99.8 प्रतिशत की लगभग एकाधिकार वाली हिस्सेदारी है। https://trendkia.com/market/bse-para-listinga-ke-dusare-dina-phisala-nse-ishyu-praisa-ke-kariba-pahuncha-sheyara-38462 TrendKia — Har trend, sabse pehle.