बर्नहैम के प्रधानमंत्री बनने पर भी क्यों शांत है पाउंड, बाजार को नहीं दिख रहा कोई झटका एंडी बर्नहैम के प्रधानमंत्री बनने के बावजूद ब्रिटेन के बाजार शांत हैं और पाउंड स्थिर बना हुआ है। जेम्स स्मिथ के मुताबिक निवेशकों को इस साल किसी बड़े नीतिगत झटके की उम्मीद नहीं, पर अचानक चुनाव सबसे बड़ा जोखिम बना हुआ है। ब्रिटेन के वित्तीय बाजारों ने एंडी बर्नहैम के प्रधानमंत्री बनने पर घबराने के बजाय बेहद ठंडी प्रतिक्रिया दी है। आईएनजी के जेम्स स्मिथ का कहना है कि निवेशक फिलहाल काफी शांत बने हुए हैं और जोखिम प्रीमियम काबू में है, क्योंकि ज्यादातर लोगों को इस साल किसी बड़े नीतिगत झटके की उम्मीद नहीं है। हालांकि स्मिथ यह भी जोड़ते हैं कि यह शांति हमेशा नहीं रहेगी। सोशल हाउसिंग, कल्याणकारी योजनाओं और टैक्स सुधार से जुड़ी बड़ी योजनाएं, राजकोषीय नियमों में बदलाव या अचानक चुनाव की आशंका आने वाले कुछ सालों में ब्रिटिश संपत्तियों को लेकर बाजार की सोच बदल सकती है। पाउंड के लिए शांत शुरुआत स्मिथ का मुख्य संदेश यह है कि बॉन्ड बाजार, जहां नई सरकार को लेकर घबराहट सबसे पहले दिखती है, फिलहाल डर के बजाय भरोसा दिखा रहा है। उनके मुताबिक बॉन्ड बाजारों में जोखिम प्रीमियम काबू में लग रहा है और जिन निवेशकों से उनकी बात होती है, उनमें से ज्यादातर को नहीं लगता कि बर्नहैम इस साल हालात बिगाड़ेंगे। इसका मतलब यह नहीं कि चिंताएं खत्म हो गई हैं। आगे चलकर सरकारी खजाने की दिशा को लेकर बेचैनी अब भी बनी हुई है, लेकिन फिलहाल यह चिंता कारोबारी फैसलों को चलाने के बजाय पीछे बैठी है। बड़े इरादे, कड़ी बंदिशें स्मिथ की नजर में इस शांति की वजह बर्नहैम की चाहत और उनकी मजबूरी के बीच का फर्क है। नए प्रधानमंत्री ने सोशल हाउसिंग में भारी निवेश से लेकर राष्ट्रीयकरण तक के बड़े इरादे सामने रखे हैं। लेकिन ये इरादे उनकी अपनी ही खींची दो लकीरों से टकरा जाते हैं, राजकोषीय नियमों पर टिके रहने का वादा और सबसे बड़े टैक्स न बढ़ाने का संकल्प। दोनों हाथ कुछ हद तक बंधे होने से बाजार को हिला देने वाली किसी नाटकीय नीति की गुंजाइश काफी घट जाती है। कैसा हो सकता है सादा शरद बजट इन बंदिशों को जोड़कर देखें तो नतीजा एक फीका शरद बजट ही निकलता दिखता है। स्मिथ का अनुमान है कि इससे कुछ हद तक एक अपेक्षाकृत मामूली शरद बजट की ओर इशारा मिलता है। उन्हें लगता है कि सरकार ऐसे कदम चुनेगी जो सुर्खियां तो बटोरें पर सस्ते और आसानी से लागू होने वाले हों। यानी ऐसी नीतियां जिन्हें उनकी राजनीतिक चमक के लिए उतना ही चुना जाएगा जितना उनके असर के लिए, क्योंकि इससे बड़ा कुछ करने के लिए पैसा ही नहीं है। स्मिथ खुद इस माहौल को मजाकिया अंदाज में यह कहते हुए बयां करते हैं कि अब तक तो सब उबाऊ ही रहा है। अचानक चुनाव सबसे बड़ा जोखिम सवाल यह है कि इस शरद ऋतु में बर्नहैम बाजार को कैसे चौंका सकते हैं। यहां स्मिथ एक ही आशंका पर सबसे ज्यादा जोर देते हैं। उनका कहना है, "अचानक चुनाव अब भी सबसे बड़ा अनिश्चित पहलू है।" यह ठीक वैसा झटका होगा जिससे निवेशक बचना चाहेंगे। दोबारा मतदान की नौबत ठीक वही अनिश्चितता ले आएगी, जिसके न होने पर मौजूदा शांति टिकी है, और उनके मुताबिक बाजार शायद इसे पसंद नहीं करेंगे। अभी कहां खड़ा है पाउंड इस विश्लेषण की स्थिरता पाउंड की चाल में भी झलकती है। GBP/USD 1.3450 के ऊपर टिका हुआ है लेकिन कोई मजबूत तेजी नहीं पकड़ पा रहा। ताजा कारोबार में यह पिछले बंद स्तर से करीब 0.41% फिसलकर 1.34 के आसपास है। बीते एक साल में यह जोड़ी 1.30 से 1.38 के दायरे में घूमती रही है और रुझान के संकेतक भी दिशाहीनता दिखा रहे हैं। RSI ठीक 50 पर है, ADX 16 पर कमजोर और दायरे में बंधे रुझान की ओर इशारा कर रहा है, और भाव अपने 20, 50 और 200 दिनों के मूविंग एवरेज के पास 1.34 के इर्द-गिर्द चिपका है। समर्थन करीब 1.32 और अवरोध 1.35 के पास दिख रहा है। डॉलर को मजबूती अमेरिका और ईरान के बीच सप्ताहांत की झड़पों के बाद बने तनाव से मिल रही है, जिसने निवेशकों को सुरक्षित ठिकानों की ओर धकेला है। मंगलवार को आने वाली ब्रिटेन की रोजगार रिपोर्ट पाउंड के लिए अगली बड़ी परीक्षा है। बाकी बाजारों का हाल पाउंड अकेले नहीं डोल रहा। EUR/USD सोमवार को 1.1450 के नीचे एक तंग दायरे में सरक रहा है, क्योंकि मिडिल ईस्ट के संकट के बीच कारोबारी बड़े दांव लगाने से कतरा रहे हैं। इस हफ्ते के आखिर में यूरोपियन सेंट्रल बैंक का ब्याज दर पर फैसला इस मोर्चे की सबसे बड़ी घटना है। उधर सोना पिछले हफ्ते की भारी गिरावट के बाद 4,000 डॉलर के ऊपर संभल गया है, हालांकि बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और अमेरिका में ऊंची ब्याज दरों की उम्मीद डॉलर को मजबूत कर रही है, जिससे इस धातु की तेजी पर लगाम लगी है। क्रिप्टो में एथेरियम ने अपने साथियों को पीछे छोड़ा है और पिछले हफ्ते से बुधवार के बीच दोहरे अंकों में बढ़त दर्ज करते हुए बिटकॉइन, XRP और सोलाना को मात दी, इससे पहले कि गुरुवार को पूरा बाजार नीचे मुड़ जाता। फिर भी इस तेजी के नीचे के आंकड़े कमजोर दिख रहे हैं, जो इशारा करते हैं कि यह बढ़त शायद ज्यादा गहरी नींव पर नहीं टिकी। इसका आप पर असर • पाउंड में कारोबार करने वालों के लिए: GBP/USD के 1.34 के आसपास टिके रहने का मतलब है कि निकट भविष्य में तेज उतार-चढ़ाव की उम्मीद कम है, इसलिए बड़े दांव से पहले मंगलवार की रोजगार रिपोर्ट पर नजर रखें। • ब्रिटेन जाने या पैसा भेजने वालों के लिए: पाउंड की स्थिरता का मतलब है कि फिलहाल विनिमय दर में किसी बड़े झटके की आशंका कम है, हालांकि अचानक चुनाव इस तस्वीर को पलट सकता है। सवाल-जवाब 1. बर्नहैम के प्रधानमंत्री बनने पर बाजार की प्रतिक्रिया कैसी रही? बाजार शांत रहे और जोखिम प्रीमियम काबू में रहा, क्योंकि ज्यादातर निवेशकों को इस साल किसी बड़े नीतिगत झटके की उम्मीद नहीं है। 2. पाउंड अभी किस स्तर पर है? GBP/USD 1.3450 के ऊपर टिका है और ताजा कारोबार में करीब 0.41% फिसलकर 1.34 के आसपास चल रहा है। 3. बर्नहैम की बड़ी योजनाएं क्यों सीमित हैं? राजकोषीय नियमों पर टिके रहने के वादे और सबसे बड़े टैक्स न बढ़ाने के संकल्प के कारण उनकी नाटकीय नीतियों की गुंजाइश घट जाती है। 4. बाजार को सबसे बड़ा जोखिम किससे है? जेम्स स्मिथ के मुताबिक अचानक चुनाव सबसे बड़ा अनिश्चित पहलू है और बाजार शायद इसे पसंद नहीं करेंगे। 5. पाउंड के लिए अगली बड़ी घटना क्या है? मंगलवार को आने वाली ब्रिटेन की रोजगार रिपोर्ट पाउंड के लिए अगली बड़ी परीक्षा मानी जा रही है। 6. शरद बजट कैसा रहने का अनुमान है? अपेक्षाकृत मामूली, जिसमें सस्ती और आसानी से लागू होने वाली सुर्खियां बटोरने वाली नीतियों पर जोर रहने की उम्मीद है। https://trendkia.com/market/burnham-ke-pradhanamntri-banane-para-bhi-kyon-shanta-hai-pound-bajara-ko-nahin-dikha-raha-koi-jhataka-9622 TrendKia — Har trend, sabse pehle.