ब्याज दर बढ़ने से पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फेड प्रमुख वॉर्श से बोर्ड के साथ मतदान की बात कही अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि उन्होंने फेड प्रमुख केवन वॉर्श से बोर्ड के साथ मतदान कर लेने को कहा था, क्योंकि उनके मुताबिक नतीजा नहीं बदलने वाला था। उन्होंने फेड की स्वतंत्रता की बात भी की, जबकि डॉलर और अन्य बाज़ारों में ब्याज नीति को लेकर प्रतिक्रियाएँ चल रही थीं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि ब्याज दर बढ़ने से पहले उन्होंने फेड प्रमुख केवन वॉर्श से बोर्ड के साथ मतदान कर लेने को कहा था, क्योंकि उनके मुताबिक इससे नतीजा नहीं बदलने वाला था। ट्रंप ने यह भी कहा कि उन्हें उम्मीद नहीं है कि वॉर्श उनके निर्देश मानेंगे और उन्होंने फेड को स्वतंत्र रखने की इच्छा जताई, लेकिन साथ ही बोर्ड की राजनीति और उसके सदस्यों की नियुक्ति पर सवाल उठाए। ट्रंप की नजर में बोर्ड का नतीजा पहले से तय था ट्रंप ने बताया कि उन्होंने वॉर्श को केवन कहकर पुकारा और उनसे कहा कि बोर्ड के रुख के साथ मतदान करना ही व्यवहारिक विकल्प है, क्योंकि परिणाम नहीं बदलने वाला था। उन्होंने बोर्ड को बेहद विरोधी और राजनीतिक बताया, कहा कि वह गलत काम कर रहा है, और सदस्यों को राजनेताओं द्वारा लगाए गए लोगों के रूप में वर्णित किया। “तुम बोर्ड के साथ मतदान कर दो, क्योंकि उससे कोई फर्क नहीं पड़ने वाला।” यह वाक्य ट्रंप के बयान का मुख्य टकराव दिखाता है: उन्होंने बोर्ड के मत को निर्णायक बताया, लेकिन केंद्रीय बैंक को स्वतंत्र रखने की बात भी की। उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें वॉर्श से अपने निर्देश मानने की उम्मीद नहीं है। इसलिए बहस दरों की पक्की दिशा पर नहीं, बल्कि राजनीतिक राय और फेड की नीति प्रक्रिया के बीच की सीमा पर केंद्रित है। डॉलर 100.35 के पास स्थिर, बाज़ार फेड के संकेत तौल रहे बाज़ार का स्नैपशॉट लिए जाने के समय अमेरिकी डॉलर इंडेक्स (DXY) उस दिन 0.03% की बढ़त के साथ 100.35 पर था। डॉलर ने जुलाई के अंत के बाद अपने उच्चतम स्तर तक पहुंचाने वाली, फेड के सख्त रुख से प्रेरित रैली के बाद विराम लिया, इसलिए यह छोटी तेजी एक नए स्पष्ट टूटाव के बजाय रुकाव को दिखाती थी। ब्याज दर की उम्मीदें निवेशकर्ताओं को देशों के बीच रिटर्न की तुलना करने पर मजबूर करती हैं। जब बाज़ार फेड से अधिक आक्रामक नीति की गणना करता है, तो डॉलर संपत्तियां अंतरराष्ट्रीय पूंजी को आकर्षित कर सकती हैं, जबकि जोखिम पर निर्भर मुद्राएं और वस्तुएं दबाव में आ सकती हैं। ट्रंप की टिप्पणी इस गणना में राजनीतिक पहलू जोड़ती है, लेकिन दिए गए आंकड़े अभी डॉलर में कोई बड़ा नया संकेत नहीं दिखाते। फेड के दो लक्ष्य और ब्याज दर का असर अमेरिका में मुद्रा नीति फेडरल रिज़र्व यानी फेड तय करता है। फेड के दो मुख्य लक्ष्य हैं: कीमतों में स्थिरता और पूर्ण रोजगार। इन दोनों को साधने के लिए उसका मुख्य जरिया ब्याज दरों में बदलाव है, जिससे पूरी अर्थव्यवस्था में उधार की लागत बदलती है और खर्च, निवेश, रोजगार तथा वित्तीय बाज़ारों की कीमतों पर असर पड़ता है। जब कीमतें बहुत तेजी से बढ़ रही हों और महंगाई फेड के 2% लक्ष्य से ऊपर हो, तो केंद्रीय बैंक ब्याज दरें बढ़ाता है। ऊंची दरें ऋण और अन्य क्रेडिट को महंगा बनाती हैं, मांग को धीमा करती हैं और महंगाई को काबू करने में मदद करती हैं। इससे अमेरिकी डॉलर (USD) को भी सहारा मिल सकता है, क्योंकि बेहतर रिटर्न अंतरराष्ट्रीय निवेशकर्ताओं के लिए अमेरिका को अपना धन रखने के लिए आकर्षक बनाते हैं। जब महंगाई 2% से नीचे आ जाए या बेरोजगारी दर बहुत अधिक हो, तो फेड ब्याज दरें घटा सकता है। सस्ती उधार सुविधा घरानों और कारोबारों को ऋण लेकर खर्च या निवेश के लिए प्रोत्साहित करती है। लेकिन घटती उपज डॉलर को अन्य निवेश विकल्पों के मुकाबले कम आकर्षक बना सकती है, जिससे अमेरिकी डॉलर पर दबाव पड़ सकता है। साल में आठ बैठकें और FOMC के बारह अधिकारी फेड साल में आठ नीतिगत बैठकें करता है। इन बैठकों में फेडरल ओपन मार्केट कमेटी (FOMC) अर्थव्यवस्था की स्थिति का आकलन करती है और मुद्रा नीति के फैसले लेती है, जिनमें ब्याज दरें बढ़ाने, घटाने या वही रखने का सवाल शामिल है। FOMC में फेड के बारह अधिकारी शामिल होते हैं: बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के सात सदस्य, फेडरल रिज़र्व बैंक ऑफ न्यूयॉर्क के प्रेसिडेंट और बाकी ग्यारह क्षेत्रीय रिज़र्व बैंकों में से चार के प्रेसिडेंट। क्षेत्रीय सीटें घूमती रहती हैं और ये प्रेसिडेंट कमेटी में एक-एक साल की अवधि के लिए काम करते हैं। इस व्यवस्था का मतलब है कि कोई एक सार्वजनिक बयान समिति की नीति प्रक्रिया की जगह नहीं ले सकता। सामान्य दरों से आगे QE और QT के उपाय बेहद कठिन स्थितियों में फेड क्वांटिटेटिव ईजिंग (QE) अपना सकता है, जिसका मकसद अटकी हुई वित्तीय प्रणाली में क्रेडिट का प्रवाह बढ़ाना है। QE एक असामान्य उपाय है, जिसका इस्तेमाल संकट के समय या जब महंगाई बेहद कम हो, किया जाता है। 2008 के महावित्तीय संकट के दौरान यही फेड का मुख्य उपाय था। इसमें फेड अधिक डॉलर बनाकर वित्तीय संस्थाओं से उच्च गुणवत्ता वाले बॉन्ड खरीदता है। बाज़ार में नकदी और सहारा बढ़ने से QE आमतौर पर अमेरिकी डॉलर को कमजोर करता है। इसका उल्टा क्वांटिटेटिव टाइटनिंग (QT) है, जिसमें फेड वित्तीय संस्थाओं से बॉन्ड खरीदना बंद कर देता है और अपने पास मौजूद बॉन्डों के मुख्य धन को नए बॉन्ड खरीदने के लिए फिर से नहीं लगाता जब वे परिपक्व होते हैं। QT बॉन्ड बाज़ार से सहायता हटाता है, न कि उसमें नई तरलता जोड़ता है, और यह आमतौर पर अमेरिकी डॉलर के मूल्य के लिए सकारात्मक होता है। QE और QT मिलकर दिखाते हैं कि फेड केवल नीति दर से नहीं, बल्कि बॉन्ड खरीदारी और परिपक्व हो चुके निवेश के संचालन से भी मुद्रा और क्रेडिट की स्थिति को प्रभावित कर सकता है। AUD/USD, USD/JPY और सोने में एक जैसे संकेत AUD/USD ने गुरुवार के एशियाई सत्र में पिछले दिन के नुकसान को 0.7100 के पास समेटा। अमेरिकी डॉलर ने फेड के सख्त रुख से प्रेरित अपनी रैली रोकी, जिसने इसे जुलाई के अंत के बाद के उच्चतम स्तर तक पहुंचाया था। रिज़र्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया (RBA) द्वारा ब्याज दर बढ़ाने की संभावनाओं और अमेरिका तथा ईरान के कूटनीतिक प्रयासों की उम्मीदों ने जोखिम भाव सुधारा और ऑस्ट्रेलियाई डॉलर तथा इस मुद्रा जोड़ी को सहारा दिया। USD/JPY ने उसी एशियाई सत्र में 156.00 से नीचे आई छोटी गिरावट से वापसी की। पिछले दिन लगभग दो सप्ताह के उच्च स्तर तक पहुंचाने वाली तीन दिनों की कामयाबी को यह जोड़ी खत्म करने की कोशिश में थी। फेड के बाद सात सप्ताह के उच्च स्तर तक डॉलर की रैली रुकी, जबकि बैंक ऑफ जापान (BoJ) की नीति को सामान्य करने के रास्ते को लेकर अधिक सख्त मूल्यांकन ने जापानी येन को सहारा दिया और जोड़ी की ऊपर की संभावना सीमित रखी। अब ध्यान शुक्रवार को तय BoJ नीति निर्णय पर है। सोना गुरुवार के एशियाई सत्र में $4,300 के स्तर के पास पहुंचा और पिछले दिन छह सप्ताह के निम्न स्तर पर आने के बाद अपना अधिकांश नुकसान वापस पाटने लगा। डॉलर जुलाई के अंत के बाद अपने उच्चतम स्तर से थोड़ा नीचे आया, जिससे सोने को सहारा मिला। इसी दौरान तेल से जुड़ी महंगाई की आशंकाएं अमेरिका और ईरान के कूटनीतिक प्रयासों की उम्मीदों के बीच कम हुईं, जिससे अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड की उपज घटी और बिना ब्याज वाले सोने को फायदा हुआ। ईथेरियम और जापान निवेशकर्ताओं के लिए अलग चुनौतियां ईथेरियम और पूरे क्रिप्टो बाज़ार पर क्लैरिटी एक्ट के सीनेट से मंजूरी न पाने का असर दिखा। विश्लेषकों ने इस विधेयक को दूसरी सबसे बड़ी क्रिप्टोकरेंसी ईथेरियम के लिए बड़ा सहायक कदम बताया था, और इसकी प्रगति से तेजी की उम्मीदें अब बदल गई हैं। इस झटके ने ETH पर अपना असर छोड़ा है। जापान की स्थिति एक लंबे समय से चला आ रहा अलग उदाहरण है। उसकी बेहद कम ब्याज दरों ने एक दशक से अधिक समय तक ट्रिलियनों डॉलर के वैश्विक निवेश को वित्त पोषण देने में मदद की और जापानी येन को दुनिया के सबसे सस्ते फंडिंग स्रोतों में से एक बना दिया। इस सप्ताह बैंक ऑफ जापान से नीति को फिर कसा जाने की उम्मीद है, इसलिए यह लाभ नए चरण में प्रवेश कर सकता है। अधिकांश बड़ी अर्थव्यवस्थाओं ने ब्याज दरें बढ़ाईं, जबकि जापान अलग ही रहा, इसलिए आगे की कसावट से उसकी कम दरों ने वैश्विक निवेश को जो लाभ दिया है, उस पर असर पड़ सकता है। राजनीतिक बयान और बाज़ार की असली दिशा अलग-अलग मुख्य फर्क राजनीतिक राय और वास्तविक मुद्रा नीति के फैसले के बीच है। ट्रंप की टिप्पणियां बताती हैं कि उन्हें बोर्ड का मत कैसे लगता था, लेकिन फेड के दो लक्ष्य, उसकी बैठकों का कैलेंडर और मतदान व्यवस्था ही नीति का ढांचा बनाते हैं। पोर्टफोलियो, ऋण या मुद्रा जोखिम देखने वाले पाठकों के लिए अगले उपयोगी संकेत FOMC का फैसला, डॉलर की प्रतिक्रिया, ट्रेजरी उपज और सोना व ETH जैसी संपत्तियों का व्यवहार होंगे। इसका आप पर असर सबसे तुरंत असर डॉलर, बॉन्ड और उधार की लागत की दिशा में दिख सकता है, लेकिन ट्रंप का बयान कोई नई ब्याज दर तय नहीं करता। • निवेशकर्ताओं और उधार लेने वालों के लिए: फेड की स्वतंत्रता और बोर्ड के मत को लेकर बढ़ा राजनीतिक विवाद दर वृद्धि की बाज़ारी उम्मीदों को अस्थिर कर सकता है; उस समय DXY 0.03% बढ़कर 100.35 था, सोना $4,300 के पास था और USD/JPY 156.00 के आसपास चल रहा था। इसका मतलब है कि विदेशी मुद्रा, बॉन्ड या क्रिप्टो में पैसा लगाने वाले पाठक को केवल बयान नहीं, बल्कि FOMC का फैसला, डॉलर, अमेरिकी ट्रेजरी उपज और ETH जैसी संपत्तियों की प्रतिक्रिया भी देखनी चाहिए; नई उधार लेने योजना बनाने वाले घराने और कारोबार महंगी हो सकने वाली उधार लागत को ध्यान में रखें, जबकि मजबूत डॉलर अंतरराष्ट्रीय निवेश को अमेरिका की ओर आकर्षित कर सकता है। ऐसा क्यों हुआ टिप्पणियां ब्याज दर बढ़ने से पहले की गईं, लेकिन बोर्ड विरोधी क्यों था, यह स्पष्ट नहीं है। ट्रंप ने बोर्ड को राजनीतिक बताया और कहा कि वॉर्श का मत परिणाम नहीं बदलेगा, साथ ही उन्होंने फेड को स्वतंत्र रखने की इच्छा जताई। ज्ञात क्रम राजनीतिक दबाव, समिति के मतदान और बाज़ार की उम्मीदों के बीच टकराव का है, कोई पक्की मुद्रा नीति बदलाव नहीं। • तुरंत कारण: आगामी दर निर्णय ने ट्रंप की टिप्पणियों को बाज़ार के लिए अहम बनाया। उन्होंने कहा कि उन्होंने केवन वॉर्श से बोर्ड के साथ मतदान करने को कहा, क्योंकि परिणाम कोई फर्क नहीं डालने वाला था, और फिर कहा कि उन्हें वॉर्श से अपने निर्देश मानने की उम्मीद नहीं है। • संस्थागत पृष्ठभूमि: फेड साल में आठ बैठकें करता है और FOMC के माध्यम से नीति तय करता है, जिसमें बारह अधिकारी शामिल होते हैं। यह ढांचा फैसले को एक सार्वजनिक बयान के बजाय समिति प्रक्रिया में रखता है। • पहले का उदाहरण और आगे का संकेत: अत्यंत कठिन स्थिति का उदाहरण 2008 का महावित्तीय संकट है, जब फेड ने QE से डॉलर बनाकर उच्च गुणवत्ता वाले बॉन्ड खरीदे; QT इसका उल्टा उपाय है। अब बाज़ार FOMC के फैसले, डॉलर, ट्रेजरी उपज और सोना व ETH जैसी संपत्तियों की प्रतिक्रिया देखेगा, जबकि महंगाई, रोजगार और 2% लक्ष्य दर के परिणाम को मार्गदर्शन देंगे। सवाल-जवाब 1. डोनाल्ड ट्रंप ने केवन वॉर्श से क्या कहा था? ट्रंप ने कहा कि उन्होंने वॉर्श से बोर्ड के साथ मतदान कर लेने को कहा था, क्योंकि उनके मुताबिक इससे नतीजा नहीं बदलने वाला था। 2. क्या ट्रंप ने फेड की स्वतंत्रता की बात की? हां, उन्होंने कहा कि उन्हें उम्मीद नहीं है कि वॉर्श उनके निर्देश मानेंगे और वह फेड को स्वतंत्र रखना चाहते थे। 3. ट्रंप ने फेड बोर्ड के बारे में क्या कहा? उन्होंने बोर्ड को बेहद विरोधी और राजनीतिक बताया, गलत काम करने वाला कहा और सदस्यों को राजनेताओं द्वारा लगाए गए लोगों के रूप में वर्णित किया। 4. लिखे जाने के समय DXY किस स्तर पर था? अमेरिकी डॉलर इंडेक्स (DXY) उस दिन 0.03% बढ़कर 100.35 पर था। 5. महंगाई 2% लक्ष्य से ऊपर हो तो फेड क्या कर सकता है? फेड ब्याज दरें बढ़ाता है, जिससे अर्थव्यवस्था में उधार महंगा होता है और अमेरिकी डॉलर को सहारा मिल सकता है। 6. FOMC में कितने अधिकारी शामिल होते हैं? FOMC में बारह अधिकारी शामिल होते हैं: बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के सात सदस्य, न्यूयॉर्क फेडरल रिज़र्व बैंक के प्रेसिडेंट और चार क्षेत्रीय रिज़र्व बैंक प्रेसिडेंट। 7. QE और QT में क्या अंतर है? QE में फेड डॉलर बनाकर वित्तीय संस्थाओं से उच्च गुणवत्ता वाले बॉन्ड खरीदता है और आमतौर पर डॉलर को कमजोर करता है। QT में खरीदारी रुकती है और परिपक्व बॉन्डों का मूल धन नए बॉन्डों में नहीं लगता, जो आमतौर पर डॉलर के लिए सहायक होता है। 8. क्लैरिटी एक्ट न मिलने से ईथेरियम पर क्या असर पड़ा? विधेयक सीनेट से आगे नहीं बढ़ सका, जिससे ईथेरियम के लिए बड़ी तेजी की उम्मीदें बदल गईं और ETH पर झटका दिखा। https://trendkia.com/market/byaja-dara-barhane-se-pahale-ameriki-rashtrapati-donald-trump-ne-fed-pramukha-warsh-se-borda-ke-satha-matadana-ki-bata-kahi-32840 TrendKia — Har trend, sabse pehle.