# ब्याज दरों में अतिरिक्त बढ़ोतरी की वकालत, फेड अधिकारी मुसालेम ने 3 फीसदी तक महंगाई का दिया हवाला

> सेंट लुइस फेड के मुसालेम ने महंगाई को 2 फीसदी के लक्ष्य पर लाने के लिए अतिरिक्त नीतिगत सख्ती की जरूरत बताई है। उनका मानना है कि दरों में देरी से बड़ी वृद्धि करने के बजाय समय रहते क्रमिक बढ़ोतरी करना अधिक उचित रहेगा।

**Type:** article · **Category:** बाज़ार · **Published:** 2026-09-21 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/market/byaja-daron-men-atirikta-barhotari-ki-vakalata-fed-adhikari-musalem-ne-3-phisadi-taka-mahngai-ka-diya-havala-35943 · **Language:** Hindi
**Tags:** फेडरल रिजर्व, ब्याज दरें, मुद्रास्फीति, अमेरिकी डॉलर, सेंट लुइस फेड, बैंक ऑफ जापान

अमेरिकी केंद्रीय बैंक के नीति निर्माताओं के बीच ब्याज दरों के भविष्य को लेकर बहस तेज हो गई है। सेंट लुइस फेडरल रिजर्व के अधिकारी मुसालेम ने स्पष्ट किया है कि मुद्रास्फीति अब भी असहज स्तर पर बनी हुई है। उनके मुताबिक, आपूर्ति से जुड़ी रुकावटों को अलग करके देखने के बाद भी कीमतें 3% तक के दायरे में दर्ज की जा रही हैं। इस स्थिति को नियंत्रित करने के लिए मौद्रिक नीति को और अधिक सख्त बनाने की दरकार है।

## मांग और लागत दोनों से बढ़ रहा दबाव
मुसालेम के अनुसार वर्तमान मूल्य वृद्धि के पीछे आपूर्ति और मांग दोनों मोर्चों का संयुक्त असर दिखाई दे रहा है। कारोबारी संपर्कों से मिले संकेतों से पता चलता है कि कंपनियां अपने उत्पादों के दाम करीब 3% के आसपास बढ़ाने की रूपरेखा तैयार कर रही हैं। इसके अलावा कच्चे माल की कीमतों में आया उछाल केवल कच्चे तेल तक सीमित नहीं रहा है। तांबे जैसी आधारभूत औद्योगिक धातुओं के दाम भी चढ़े हैं, जिससे विनिर्माण और उत्पादन लागत में इजाफा देखने को मिल रहा है।

श्रम बाजार की समीक्षा करते हुए उन्होंने इसे पूर्ण रोजगार के आसपास संतुलित करार दिया है। मुसालेम ने जोर देकर कहा कि रोजगार परिदृश्य इस समय महंगाई को भड़काने वाला मुख्य कारक नहीं है। हालांकि, उनका अनुमान है कि यदि अतिरिक्त नीतिगत कदम नहीं उठाए गए, तो अगले 18 महीनों में मुद्रास्फीति 2% के निर्धारित लक्ष्य से काफी ऊपर रह सकती है।

## नीतिगत दरों में बढ़ोत्तरी की रणनीति
आगामी कदमों को लेकर मुसालेम का स्पष्ट नजरिया है कि नीति निर्माताओं को दरों में बढ़ोतरी जल्द और छोटे स्तर पर करनी चाहिए। उनका मानना है कि बाद में अचानक भारी वृद्धि करने से बेहतर है कि समय रहते क्रमिक कदम उठाए जाएं। फेडरल ओपन मार्केट कमेटी में इस वर्ष उनके पास मतदान का अधिकार नहीं है, जिसके कारण वित्तीय बाजारों में उनकी इस सख्त टिप्पणी का तात्कालिक प्रभाव सीमित नजर आया। फिर भी नीतिगत स्तर पर दरों को बढ़ाने की ऐसी खुली मांग भविष्य के संभावित रुख का शुरुआती संकेत मानी जा रही है।

## मुद्रा बाजारों की हलचल और वैश्विक रुख
मुसालेम के बयानों के बाद अमेरिकी डॉलर इंडेक्स में मजबूती दर्ज की गई। वहीं एशियाई सत्र के दौरान सोमवार को ऑस्ट्रेलियाई डॉलर 0.7100 के स्तर से ऊपर टिका रहा। पीपुल्स बैंक ऑफ चाइना द्वारा लोन प्राइम दरों को यथावत रखने के फैसले ने ऑस्ट्रेलियाई मुद्रा पर कुछ दबाव बनाया, लेकिन रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया की ओर से संभावित दर वृद्धि की उम्मीदों ने इसे सहारा दिया। साथ ही निवेशक आगामी ट्रंप और शी शिखर सम्मेलन पर भी नजरें टिकाए हुए हैं।

जापानी येन के मुकाबले अमेरिकी डॉलर 157.00 के नीचे फिसल गया। बैंक ऑफ जापान द्वारा शुक्रवार को किए गए रेट चेक के बाद बाजार में हस्तक्षेप की आशंका बढ़ गई थी, जिससे येन को हल्का समर्थन मिला। इसके साथ ही जापान में अवकाश के बीच रूस और यूक्रेन तथा पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनावों ने मुद्रा कारोबारियों को सतर्क रखा है। डॉलर के हालिया सुधार के थमने से इस मुद्रा जोड़ी की गिरावट सीमित दायरे में रही।

## जिंस और बॉन्ड बाजारों की तस्वीर
अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमतों पर दबाव देखा गया और बहुमूल्य धातु 4,350 डॉलर प्रति ट्रॉय औंस के आसपास कारोबार करती रही। अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में गिरावट के बावजूद मजबूत डॉलर ने सोने की तेजी पर ब्रेक लगाया।

तीसरी तिमाही के अंतिम दौर में वित्तीय संपत्तियां मिश्रित रुझान दिखा रही हैं। अनिश्चितता और उतार-चढ़ाव के बीच कच्चे तेल के दाम गिर रहे हैं, जबकि अमेरिकी और यूरोपीय शेयर बाजारों में तेजी के संकेत बने हुए हैं। शुक्रवार को यूरोपीय और अमेरिकी सॉवरेन बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी के बाद सरकारी ऋण बाजार सबसे ज्यादा दबाव में दिखे। इस बीच बैंक ऑफ जापान ने मौद्रिक सामान्यीकरण की दिशा में आगे बढ़ते हुए 7-2 के बहुमत से अपनी अल्पकालिक ब्याज दर का लक्ष्य 1.00% से बढ़ाकर 1.25% कर दिया है, जो विश्लेषकों के पूर्व अनुमानों के पूरी तरह अनुरूप रहा।

## इसका आप पर असर
अमेरिकी ब्याज दरों में संभावित बढ़ोतरी और मजबूत डॉलर का सीधा असर वैश्विक कर्ज लागत, आयात बिल और स्थानीय मुद्रा की मजबूती पर पड़ता है।

- **भारत में:** विदेशी संस्थागत निवेशकों के फंड प्रवाह और रुपये की विनिमय दर पर दबाव बढ़ सकता है। यदि अमेरिकी डॉलर और सख्त होता है तो आयातित कच्चे माल की लागत बढ़ने से घरेलू महंगाई पर असर दिख सकता है।
- **वैश्विक कर्जदारों के लिए:** डॉलर में लिए गए अंतरराष्ट्रीय ऋणों पर पुनर्भुगतान की लागत बढ़ जाएगी। उच्च दरों की अवधि लंबी खिंचने से कॉरपोरेट कंपनियों के लिए नई फंडिंग जुटाना महंगा बना रहेगा।
- **सोने और जिंस खरीदारों के लिए:** अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सोने के भाव 4,350 डॉलर के आसपास सीमित दायरे में रह सकते हैं। डॉलर में मजबूती बने रहने से सोने और तांबे जैसी धातुओं की कीमतों में तेजी पर अस्थायी रोक लग सकती है।
- **फॉरेक्स कारोबारियों के लिए:** प्रमुख मुद्राओं जैसे येन, ऑस्ट्रेलियाई डॉलर और डॉलर के बीच उतार-चढ़ाव में तेजी बनी रहेगी। केंद्रीय बैंकों के अलग-अलग नीतिगत फैसलों के कारण करेंसी ट्रेडिंग में जोखिम प्रबंधन बेहद अहम हो जाता है।

## ऐसा क्यों हुआ
केंद्रीय बैंकों के सामने महंगाई को 2% के लक्ष्य तक सीमित रखने की चुनौती बरकरार है, क्योंकि मांग के साथ-साथ आधारभूत धातुओं की लागत बढ़ रही है।

- **महंगाई का बना रहना:** आपूर्ति की दिक्कतों को अलग रखने के बावजूद मूल्य वृद्धि 3% के पास दर्ज की जा रही है। कारोबारी संपर्कों ने भी स्पष्ट किया है कि वे आने वाले समय में अपने उत्पादों की कीमतों में लगभग 3% का इजाफा करने की तैयारी कर रहे हैं।
- **जिंसों की बढ़ती लागत:** आपूर्ति झटके का असर केवल ऊर्जा क्षेत्र या कच्चे तेल तक सीमित नहीं रहा है। तांबे जैसी आधारभूत औद्योगिक धातुओं के दाम बढ़ने से उत्पादन लागत में निरंतर इजाफा हो रहा है।
- **नीतिगत मतभेद और सतर्कता:** दरें बढ़ाने में अत्यधिक देरी करने पर बाद में अचानक बड़े झटके देने पड़ते हैं, इसलिए नीति निर्माता पहले ही छोटे कदमों की वकालत कर रहे हैं। हालांकि चालू वर्ष में मुसालेम के पास मतदान का अधिकार नहीं होने से यह नीतिगत रुख फिलहाल अनौपचारिक संकेत के रूप में देखा जा रहा है।

## सवाल-जवाब

### 1. मुसालेम ने ब्याज दरों में बढ़ोतरी की मांग क्यों की?
उनका मानना है कि आपूर्ति संबंधी कारकों को हटाने के बाद भी महंगाई 3% तक बनी हुई है, जिसे नियंत्रित करने के लिए दरें बढ़ाना जरूरी है।

### 2. कंपनियां कीमतों में कितनी बढ़ोतरी की योजना बना रही हैं?
कारोबारी संपर्कों के अनुसार कंपनियां अपने उत्पादों के दामों में लगभग 3% के करीब इजाफा करने की योजना पर काम कर रही हैं।

### 3. मुसालेम के अनुसार श्रम बाजार की वर्तमान स्थिति कैसी है?
उन्होंने रोजगार बाजार को पूर्ण रोजगार के आसपास स्थिर बताया है और कहा कि यह महंगाई पर दबाव का मुख्य कारण नहीं है।

### 4. बैंक ऑफ जापान ने हाल ही में क्या नीतिगत निर्णय लिया?
बैंक ऑफ जापान ने 7-2 के बहुमत से अपनी अल्पकालिक ब्याज दर का लक्ष्य 1.00% से बढ़ाकर 1.25% कर दिया है।

### 5. सोने का भाव किस स्तर के आसपास कारोबार कर रहा है?
डॉलर में मजबूती के चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने का भाव 4,350 डॉलर प्रति ट्रॉय औंस के करीब कारोबार कर रहा है।

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