ब्याज दरों में संभावित बढ़ोतरी लगातार कड़े कदमों की शुरुआत नहीं, बैंक ऑफ इंग्लैंड के मुख्य अर्थशास्त्री ह्यु पिल ने दिए संकेत बैंक ऑफ इंग्लैंड के मुख्य अर्थशास्त्री ह्यु पिल ने स्पष्ट किया है कि यदि दरों में कोई बढ़ोतरी होती भी है, तो इसे लंबी मौद्रिक सख्ती का आगाज नहीं समझा जाना चाहिए। इस बयान से पाउंड स्टर्लिंग पर लगातार बढ़त की उम्मीदें कमजोर हुई हैं। यूनाइटेड किंगडम के केंद्रीय बैंक के नीतिगत रुख को लेकर वित्तीय बाजारों में नई बहस छिड़ गई है। बैंक ऑफ इंग्लैंड के मुख्य अर्थशास्त्री ह्यु पिल ने गुरुवार को नीतिगत ब्याज दरों को लेकर एक बड़ा बयान दिया है। हाल के महीनों में चौथाई प्रतिशत यानी 0.25 फीसदी की दर वृद्धि के पक्ष में मतदान करने वाले ह्यु पिल ने साफ तौर पर आगाह किया कि नीति निर्माताओं को ऐसा कोई संकेत या धारणा नहीं बनानी चाहिए कि मौजूदा समय में की जाने वाली कोई भी बढ़ोतरी लगातार होने वाली ब्याज दर वृद्धियों की श्रृंखला की शुरुआत होगी। उनके इस रुख ने बाजार को यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि केंद्रीय बैंक किसी आक्रामक सख्ती चक्र के बजाय केवल सीमित समायोजन पर विचार कर रहा है। भाषण के रुख में बदलाव और पाउंड स्टर्लिंग पर दबाव अर्थशास्त्री ह्यु पिल की इस टिप्पणी के बाद उनके नीतिगत भाषण के विश्लेषण में एक स्पष्ट नरम यानी डोविश रुख दर्ज किया गया। भाषण के विश्लेषण का स्कोर ऐतिहासिक 6.4/10 से गिरकर 3/10 पर आ गया, जो नीतिगत नरमी की ओर सीधा इशारा करता है। ह्यु पिल ने यह रेखांकित करके कि वर्तमान वृद्धि को लगातार बढ़ोतरी की शुरुआत नहीं माना जाना चाहिए, दरअसल एक लंबे मौद्रिक सख्ती चक्र की बाजार उम्मीदों को पीछे धकेल दिया है। इस रुख के कारण पाउंड स्टर्लिंग को तत्काल मिलने वाले व्यापक समर्थन पर एक तरह से रोक लग गई है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि यह टिप्पणी दर्शाती है कि बैंक ऑफ इंग्लैंड आक्रामक नीतिगत रास्ता अपनाने के बजाय बाजार की अपेक्षाओं को संतुलित करने पर अधिक ध्यान केंद्रित कर रहा है। विदेशी मुद्रा बाजार के नजरिए से देखें तो इस संदेश ने अमेरिकी डॉलर और यूरो के मुकाबले ब्रिटिश पाउंड के आकर्षण को काफी सीमित कर दिया है। निवेशक अब किसी भी संभावित ब्याज दर बढ़ोतरी को एक नए तेजी वाले चक्र की शुरुआत के बजाय केवल एक बार का तात्कालिक समायोजन मान रहे हैं। लाइव बाजार आंकड़े और पाउंड की तकनीकी स्थिति विदेशी मुद्रा बाजार में GBP/USD जोड़ी वर्तमान में 1.32 के स्तर पर कारोबार कर रही है, जो पिछले बंद 1.33 के मुकाबले 0.09 प्रतिशत की गिरावट दर्शाती है। 52 हफ्तों के दौरान इस मुद्रा जोड़ी का दायरा 1.30 से 1.38 के बीच रहा है, जबकि ट्रेडिंग वॉल्यूम 20 दिनों के औसत के 1.00 गुना के बराबर बना हुआ है। तकनीकी संकेतकों की बात करें तो 14-दिवसीय रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स यानी RSI 43 पर बना हुआ है, जो तटस्थ से मंदी की स्थिति की ओर झुकाव दर्शाता है। मूविंग एवरेज के मोर्चे पर 20-दिवसीय एक्सपोनेंशियल मूविंग एवरेज यानी EMA20 1.33 पर है, जबकि EMA50 1.34 और EMA200 1.34 पर स्थित है। 50-दिवसीय सिंपल मूविंग एवरेज और 200-दिवसीय सिंपल मूविंग एवरेज दोनों 1.34 पर हैं। चार्ट पर लंबी अवधि के डाउनट्रेंड के साथ-साथ डेथ क्रॉस (EMA50 का EMA200 से नीचे होना) की स्थिति दिख रही है। 20-अवधि के बोलिंगर बैंड्स का दायरा 1.31 से 1.34 के बीच है, जिसका मध्य स्तर 1.33 है और मौजूदा भाव बैंड के भीतर है। एवरेज डायरेक्शनल इंडेक्स यानी ADX 31 पर है जो ट्रेंडिंग बाजार की पुष्टि करता है। स्टोकेस्टिक संकेतक की फास्ट लाइन 63 और सिग्नल लाइन 52 पर है। दैनिक उतार-चढ़ाव को मापने वाला 14-दिवसीय ATR 0.01 पर है। तकनीकी स्तरों के आधार पर पिवट 1.32, रेजिस्टेंस R1 1.33, R2 1.33 तथा सपोर्ट S1 1.32 और S2 1.32 पर मौजूद हैं, जबकि 20 दिनों का सपोर्ट लगभग 1.31 और रेजिस्टेंस 1.34 के आसपास है। बैंक ऑफ इंग्लैंड की मौद्रिक नीति और मुद्रास्फीति का गणित बैंक ऑफ इंग्लैंड यूनाइटेड किंगडम के लिए संपूर्ण मौद्रिक नीति तय करने वाला सर्वोच्च संस्थान है। इस केंद्रीय बैंक का प्राथमिक उद्देश्य मूल्य स्थिरता हासिल करना है, जिसका सीधा पैमाना 2 प्रतिशत की स्थिर मुद्रास्फीति दर को बनाए रखना है। इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए बैंक ऑफ इंग्लैंड का सबसे प्रमुख हथियार आधार उधारी दरों में समायोजन करना है। केंद्रीय बैंक वह दर निर्धारित करता है जिस पर वह वाणिज्यिक बैंकों को ऋण देता है और जिस दर पर बैंक आपस में लेन-देन करते हैं। यही दर ब्रिटेन की पूरी अर्थव्यवस्था में ब्याज दरों के स्तर को तय करती है और इसका सीधा प्रभाव पाउंड स्टर्लिंग के मूल्य पर पड़ता है। जब मुद्रास्फीति बैंक ऑफ इंग्लैंड के 2 प्रतिशत के लक्ष्य से ऊपर निकल जाती है, तो केंद्रीय बैंक ब्याज दरों में बढ़ोतरी करके प्रतिक्रिया देता है। इससे आम नागरिकों और कारोबारियों के लिए कर्ज लेना महंगा हो जाता है, जिससे मांग घटती है। पाउंड स्टर्लिंग के लिए यह कदम सकारात्मक माना जाता है क्योंकि ऊंची ब्याज दरें ब्रिटेन को वैश्विक निवेशकों के लिए अपना पैसा लगाने का एक अधिक आकर्षक स्थान बना देती हैं। इसके विपरीत, जब मुद्रास्फीति लक्ष्य से नीचे गिरती है, तो यह आर्थिक विकास की गति धीमी होने का संकेत होता है। ऐसी स्थिति में केंद्रीय बैंक ब्याज दरों को घटाने पर विचार करता है ताकि ऋण सस्ता हो सके और कंपनियां विकासोन्मुख परियोजनाओं में निवेश के लिए उधार ले सकें, जो आमतौर पर पाउंड स्टर्लिंग के लिए नकारात्मक साबित होता है। क्वांटिटेटिव ईजिंग और क्वांटिटेटिव टाइटनिंग का तंत्र अत्यंत गंभीर या असाधारण आर्थिक परिस्थितियों में बैंक ऑफ इंग्लैंड क्वांटिटेटिव ईजिंग यानी QE की नीति लागू करता है। यह एक ऐसी प्रक्रिया है जिसके जरिए केंद्रीय बैंक संकटग्रस्त या ठप वित्तीय प्रणाली में ऋण के प्रवाह को काफी बढ़ा देता है। क्वांटिटेटिव ईजिंग को अंतिम उपाय माना जाता है, जिसका इस्तेमाल तब होता है जब केवल ब्याज दरों में कटौती करने से अपेक्षित आर्थिक परिणाम नहीं मिल पाते। इस प्रक्रिया के तहत बैंक ऑफ इंग्लैंड नई मुद्रा का सृजन करके बैंकों और अन्य वित्तीय संस्थानों से संपत्तियां खरीदता है, जिनमें आमतौर पर सरकारी बॉन्ड या AAA-रेटेड कॉरपोरेट बॉन्ड शामिल होते हैं। इस कदम से बाजार में नकदी बढ़ती है, लेकिन इसका नतीजा आमतौर पर पाउंड स्टर्लिंग की कमजोरी के रूप में सामने आता है। इसके विपरीत, क्वांटिटेटिव टाइटनिंग यानी QT की नीति क्वांटिटेटिव ईजिंग के बिल्कुल उलट होती है। इसे तब लागू किया जाता है जब अर्थव्यवस्था मजबूत हो रही हो और मुद्रास्फीति ऊपर चढ़ने लगे। जहां क्वांटिटेटिव ईजिंग में बैंक ऑफ इंग्लैंड बैंकों को ऋण देने के लिए प्रोत्साहित करने हेतु सरकारी और कॉरपोरेट बॉन्ड खरीदता है, वहीं क्वांटिटेटिव टाइटनिंग में केंद्रीय बैंक नए बॉन्ड खरीदना बंद कर देता है। इसके साथ ही, अपने पास पहले से मौजूद बॉन्ड की परिपक्वता पर मिलने वाली मूल राशि का दोबारा निवेश करना भी रोक दिया जाता है। यह कदम बाजार से अतिरिक्त तरलता को सोखता है और आमतौर पर पाउंड स्टर्लिंग के लिए सकारात्मक साबित होता है। वैश्विक मुद्रा बाजारों और कमोडिटी का हाल गुरुवार के एशियाई कारोबारी सत्र के दौरान अन्य प्रमुख वैश्विक मुद्राओं और संपत्तियों में भी उल्लेखनीय हलचल देखने को मिली। कमजोर ऑस्ट्रेलियाई रोजगार आंकड़ों के दबाव में AUD/USD की जोड़ी 0.6950 के करीब नुकसान में बनी रही। इसने पिछले कारोबारी सत्र में अपने मासिक उच्च स्तर से शुरू हुई गिरावट को आगे बढ़ाया और गुरुवार के एशियाई सत्र के दौरान एक नया साप्ताहिक निचला स्तर छू लिया। हालांकि, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में गिरावट ने अमेरिकी डॉलर को उसके अप्रैल 2025 के उच्च स्तर से पीछे खींचा, जो बुधवार को गर्म अमेरिकी सीपीआई आंकड़ों के बाद बना था। बॉन्ड यील्ड में आई इस नरमी ने AUD/USD जोड़ी के नुकसान को सीमित रखने में मदद की। दूसरी ओर, USD/JPY जोड़ी ने पिछले दिन के तीन सप्ताह के उच्च स्तर से अपनी गिरावट को और बढ़ाया। इस मुद्रा जोड़ी में लगातार बिकवाली देखी गई और गुरुवार के एशियाई सत्र में यह 158.00 के स्तर से नीचे फिसल गई। जापानी अधिकारियों द्वारा येन को सहारा देने के लिए बाजार में हस्तक्षेप करने की अटकलों के बीच व्यापारी लगातार सतर्क रुख अपनाए हुए हैं। वहीं अमेरिकी डॉलर ने बुधवार को मुद्रास्फीति आंकड़ों से मिली अपनी बढ़त को गंवा दिया, क्योंकि चीन द्वारा बॉन्ड खरीद से जुड़ी चर्चाओं के बीच अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में गिरावट आई, जिससे USD/JPY पर अतिरिक्त दबाव पड़ा। कीमती धातुओं के बाजार में सोने ने अपने साप्ताहिक निचले स्तरों से मजबूत वापसी दर्ज की और गुरुवार की शुरुआत में 4,150 डॉलर का स्तर दोबारा हासिल कर लिया। चीन द्वारा बॉन्ड खरीद की खबरों के बीच ट्रेजरी यील्ड के साथ अमेरिकी डॉलर में आई तेज गिरावट ने सोने को मजबूती प्रदान की। हालांकि तकनीकी रूप से दैनिक RSI मंदी के दायरे में बना हुआ है, जो सोने के खरीदारों के लिए एक रुकावट बना हुआ है। इसके अलावा, एक ब्लूमबर्ग रिपोर्ट में यह संकेत सामने आया है कि चीन अमेरिकी प्रतिभूतियों को अन्य देशों के गैर-अमेरिकी कस्टोडियन बैंकों में स्थानांतरित कर रहा है, जिससे अमेरिकी राजकोषीय घाटे को वित्तपोषित करने में उसकी भूमिका पर पर्दा पड़ता दिखाई दे रहा है। इसका आप पर असर बैंक ऑफ इंग्लैंड के नरम रुख और ब्याज दरों में आक्रामक बढ़ोतरी न होने के संकेत से मुद्रा विनिमय और अंतरराष्ट्रीय लेनदेन पर सीधा असर पड़ेगा। • मुद्रा विनिमय दर: पाउंड स्टर्लिंग में डॉलर के मुकाबले बड़ी तेजी की संभावना फिलहाल सीमित हो गई है। इसका मतलब है कि ब्रिटेन यात्रा करने वाले या वहां रहने वाले भारतीयों को मुद्रा विनिमय दरों में अचानक भारी उछाल का सामना नहीं करना पड़ेगा। • ब्रिटेन में कर्ज की लागत: ब्याज दरों में सीमित बढ़ोतरी से वहां होम लोन और व्यक्तिगत उधारी दरें बहुत तेजी से ऊपर नहीं जाएंगी। ब्रिटेन में कार्यरत प्रवासी और व्यवसाय अपने मासिक ईएमआई बजट की योजना अधिक स्थिरता के साथ बना सकते हैं। • विदेशी निवेश और रिटर्न: ब्रिटेन के बैंक खातों और निश्चित आय साधनों पर मिलने वाले प्रतिफल में बहुत बड़ा इजाफा होने की उम्मीद नहीं है। वैश्विक निवेशक बेहतर यील्ड के लिए अन्य बाजारों की ओर रुख कर सकते हैं। • आयात-निर्यात व्यापार: पाउंड में स्थिरता रहने से भारत और ब्रिटेन के बीच व्यापारिक अनुबंधों में करेंसी हेजिंग की लागत अपेक्षाकृत नियंत्रित रहेगी। आयातक और निर्यातक अपने विदेशी मुद्रा सौदों को बेहतर दरों पर लॉक करने का निर्णय ले सकते हैं। ऐसा क्यों हुआ बैंक ऑफ इंग्लैंड के मुख्य अर्थशास्त्री का यह बयान अर्थव्यवस्था में मुद्रास्फीति नियंत्रण और विकास के बीच संतुलन साधने की रणनीति के तहत सामने आया है। • अपेक्षित नीतिगत संतुलन: केंद्रीय बैंक बाजार में ऐसी घबराहट नहीं पैदा करना चाहता कि आर्थिक वृद्धि को नुकसान पहुंचे। लगातार ब्याज दर वृद्धि का संकेत देने से व्यापारिक निवेश और उपभोक्ता खर्च पर प्रतिकूल असर पड़ने का जोखिम था। • बाजार की उम्मीदों का प्रबंधन: केंद्रीय बैंक आक्रामक सख्ती का वादा किए बिना केवल तात्कालिक मुद्रास्फीति दबावों से निपटने के लिए एक बार के समायोजन का विकल्प खुला रखना चाहता है। इसी कारण नीति निर्माताओं ने लंबी सख्ती श्रृंखला की धारणा को पहले ही खारिज कर दिया। • वैश्विक आर्थिक दबाव: बॉन्ड यील्ड में उतार-चढ़ाव और वैश्विक स्तर पर सुस्त पड़ती आर्थिक गति के बीच केंद्रीय बैंकों को फूंक-फूंक कर कदम रखना पड़ रहा है। यही वजह है कि दरों में किसी भी बदलाव को सीमित रखने की योजना बनाई गई है। सवाल-जवाब 1. बैंक ऑफ इंग्लैंड के मुख्य अर्थशास्त्री ह्यु पिल ने क्या बयान दिया? उन्होंने कहा कि वर्तमान में की जाने वाली किसी ब्याज दर बढ़ोतरी को लगातार होने वाली वृद्धि श्रृंखला की शुरुआत नहीं समझा जाना चाहिए। 2. ह्यु पिल के बयान से पाउंड स्टर्लिंग पर क्या प्रभाव पड़ा? इस बयान से बाजार में लंबे समय तक दरें बढ़ने की उम्मीदें घटी हैं, जिससे पाउंड स्टर्लिंग को मिलने वाला तेजी का समर्थन सीमित हो गया है। 3. बैंक ऑफ इंग्लैंड का प्राथमिक मुद्रास्फीति लक्ष्य क्या है? बैंक ऑफ इंग्लैंड का मुख्य लक्ष्य 2 प्रतिशत की स्थिर वार्षिक मुद्रास्फीति दर को बनाए रखना है। 4. क्वांटिटेटिव ईजिंग और क्वांटिटेटिव टाइटनिंग में क्या अंतर है? क्वांटिटेटिव ईजिंग में केंद्रीय बैंक नकदी बढ़ाने के लिए बॉन्ड खरीदता है, जबकि क्वांटिटेटिव टाइटनिंग में नए बॉन्ड खरीदना और परिपक्व बॉन्ड का पुनर्निवेश बंद कर दिया जाता है। 5. सोने की कीमतों में गुरुवार को क्या हलचल देखी गई? अमेरिकी डॉलर और ट्रेजरी यील्ड में गिरावट के बाद सोने ने वापसी करते हुए 4,150 डॉलर का स्तर दोबारा छू लिया। https://trendkia.com/market/byaja-daron-men-snbhavita-barhotari-lagatara-kare-kadamon-ki-shuruata-nahin-bank-of-england-ke-mukhya-arthashastri-huw-pill-ne-die-47765 TrendKia — Har trend, sabse pehle.