कनाडा ने अमेरिकी शुल्कों के जवाब में 8 सितंबर से जवाबी टैक्स लगाने का किया ऐलान अमेरिका द्वारा कनाडाई सामानों पर 50 फीसदी शुल्क लगाने के बाद, प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने घोषणा की है कि कनाडा भी आगामी 8 सितंबर से अपने जवाबी टैक्स लागू करेगा। अमेरिका द्वारा कुछ खास कनाडाई उत्पादों पर शनिवार को 50 प्रतिशत आयात शुल्क थोपे जाने के बाद व्यापार मोर्चे पर तनाव काफी बढ़ गया है। दोनों पड़ोसी देशों के बीच शुक्रवार को हुई व्यापारिक बातचीत बिना किसी नतीजे के समाप्त हो गई थी, जिसके तुरंत बाद यह बड़ा कदम उठाया गया। इस अचानक उठाए गए कदम के बाद कनाडाई प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने पलटवार करते हुए घोषणा की है कि उनका देश भी आने वाली 8 सितंबर से अपने खुद के जवाबी शुल्क लगाना शुरू कर देगा। मुद्रा बाजार और मौजूदा विनिमय दर का हाल इस व्यापारिक उथल-पुथल के बीच विदेशी मुद्रा बाजार में अमेरिकी डॉलर और कनाडाई डॉलर की जोड़ी में हल्की तेजी देखी जा रही है। मौजूदा समय में यह जोड़ी दिन के कारोबार में 0.22 प्रतिशत की बढ़त के साथ 1.3787 के स्तर पर कारोबार कर रही है। विश्लेषकों का मानना है कि दोनों देशों के बीच छिड़ा यह शुल्क विवाद आने वाले दिनों में विदेशी मुद्रा विनिमय और वैश्विक बाजारों की चाल को काफी हद तक प्रभावित कर सकता है। आयात शुल्क का अर्थ और संरक्षणवाद की नीति व्यापारिक अर्थशास्त्र के लिहाज से शुल्क एक प्रकार के सीमा शुल्क होते हैं जो खास तरह के विदेशी सामानों या उत्पादों के आयात पर लगाए जाते हैं। इनका मुख्य उद्देश्य घरेलू उत्पादकों और निर्माताओं को बाजार में एक मूल्यवान मूल्य लाभ प्रदान करना होता है ताकि वे विदेशी वस्तुओं के मुकाबले बेहतर ढंग से मुकाबला कर सकें। वैश्वीकरण के इस दौर में इन शुल्कों का उपयोग आयात को नियंत्रित करने और घरेलू उद्योगों को बचाने के लिए सुरक्षावादी हथकंडों के रूप में बड़े पैमाने पर किया जाता है। करों और शुल्कों के बीच का बुनियादी फर्क यद्यपि सीमा शुल्क और सामान्य कर दोनों ही सरकारों के लिए राजस्व जुटाने का जरिया बनते हैं जिनका उपयोग सार्वजनिक वस्तुओं और सेवाओं के वित्तपोषण में किया जाता है, फिर भी दोनों में कई बुनियादी अंतर होते हैं। शुल्क हमेशा प्रवेश द्वार या बंदरगाह पर ही पहले से चुकाए जाते हैं, जबकि करों का भुगतान सामान्यतः खरीदारी के समय किया जाता है। इसके अलावा, कर सीधे तौर पर व्यक्तिगत करदाताओं और व्यावसायिक फर्मों पर लगाए जाते हैं, जबकि शुल्कों का वित्तीय बोझ सीधे तौर पर आयातकों को उठाना पड़ता है। अर्थशास्त्रियों के बीच शुल्क नीतियों पर मतभेद शुल्क के उपयोग को लेकर अर्थशास्त्रियों के खेमों में दो अलग-अलग विचार देखने को मिलते हैं। एक धड़े का मानना है कि घरेलू उद्योगों की रक्षा करने और व्यापार असंतुलन को पाटने के लिए शुल्क लगाना बेहद जरूरी है। इसके विपरीत, दूसरा वर्ग इसे एक नुकसानदेह साधन मानता है जो लंबी अवधि में घरेलू स्तर पर उपभोक्ता वस्तुओं की कीमतें बढ़ा सकता है और आपसी जवाबी कार्रवाइयों को बढ़ावा देकर एक विनाशकारी व्यापार युद्ध को जन्म दे सकता है। डोनाल्ड ट्रंप की नीतियां और अमेरिका का आयात परिदृश्य वर्ष 2024 के नवंबर महीने में हुए राष्ट्रपति चुनाव से पहले अपनी चुनावी रैलियों के दौरान डोनाल्ड ट्रंप ने यह बिल्कुल साफ कर दिया था कि वह अमेरिकी अर्थव्यवस्था और स्थानीय निर्माताओं को मजबूत करने के लिए शुल्कों का आक्रामक रूप से इस्तेमाल करने का इरादा रखते हैं। अमेरिकी जनगणना ब्यूरो के आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2024 के दौरान मेक्सिको, चीन और कनाडा ने मिलकर कुल अमेरिकी आयात का 42 प्रतिशत हिस्सा अपने नाम किया था। इस समयावधि में मेक्सिको 466.6 अरब डॉलर के साथ शीर्ष निर्यातक के रूप में उभरा था। यही वजह है कि ट्रंप प्रशासन शुल्क लगाते समय विशेष रूप से इन तीनों प्रमुख देशों पर अपना ध्यान केंद्रित करना चाहता है। इसके साथ ही उनकी यह भी योजना है कि इन शुल्कों के माध्यम से जो राजस्व हासिल होगा, उसका उपयोग व्यक्तिगत आयकर दरों को घटाने के लिए किया जाएगा। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा जोड़े और वैश्विक वित्तीय बाजार व्यापक आर्थिक मोर्चे पर अन्य प्रमुख मुद्राओं की चाल पर नजर डालें तो सप्ताह के अंत में ब्रिटिश पाउंड और अमेरिकी डॉलर की जोड़ी रक्षात्मक रुख अपनाते हुए 1.3600 के निचले दायरे में सिमट गई है, जबकि दिन के शुरुआती घंटों में यह 1.3670 के नए ऊपरी स्तरों को छू चुकी थी। इसी तरह यूरो और अमेरिकी डॉलर की जोड़ी भी 1.1700 के आंकड़े को पार करने के लगातार असफल प्रयासों के बाद 1.1670 के आसपास मामूली नुकसान के साथ कारोबार कर रही है। उधर सोने की कीमतों में भी एशियाई सत्र के दौरान मई के मध्य के बाद के अपने उच्चतम स्तर से थोड़ी नरमी आई है, हालांकि यह अभी भी 4,600 डॉलर के मनोवैज्ञानिक स्तर से ऊपर बनी हुई है। फेडरल रिजर्व की नीतियां और ट्रेजरी की तरलता सहायता अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में तत्काल किसी भी तरह की बढ़ोतरी की संभावनाओं के कम होने से अमेरिकी मुद्रा पर दबाव बना हुआ है, हालांकि तेल की ऊंची कीमतों से उपजी महंगाई की चिंताओं ने इसे थोड़ा थामने की कोशिश की है। इसी बीच अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने बुधवार को एक बड़ा कदम उठाते हुए 10 से 20 साल और 20 से 30 साल की परिपक्वता अवधि वाले सेक्टरों में तरलता समर्थन पुनर्खरीद संचालन के आकार को दोगुना करने का निर्णय लिया। इस बदलाव के तहत अधिकतम सीमा को प्रति ऑपरेशन 2 अरब डॉलर से बढ़ाकर कम से कम 4 अरब डॉलर कर दिया गया है, जो आगामी 9 सितंबर से प्रभावी होकर 4 नवंबर तक जारी रहेगा। इसका आप पर असर भारत में: इस वैश्विक व्यापारिक तनाव का असर भारतीय निर्यातकों और कमोडिटी बाजारों पर अप्रत्यक्ष रूप से पड़ सकता है। वैश्विक स्तर पर: अमेरिका और कनाडा के बीच शुल्क विवाद बढ़ने से आयातित वस्तुओं की कीमतें बढ़ सकती हैं और वैश्विक मुद्रा बाजार में अस्थिरता आ सकती है। सवाल-जवाब 1. अमेरिका ने कनाडाई उत्पादों पर कितना शुल्क लगाया है? अमेरिका ने व्यापार वार्ता टूटने के बाद कुछ कनाडाई उत्पादों पर 50 प्रतिशत का भारी आयात शुल्क लगाया है। 2. कनाडा ने जवाबी शुल्क लगाने की क्या तारीख तय की है? कनाडाई प्रधानमंत्री मार्क कार्नी के अनुसार, कनाडा अपने जवाबी शुल्क आगामी 8 सितंबर से लागू करेगा। 3. वर्ष 2024 में कुल अमेरिकी आयात में शीर्ष निर्यातक देश कौन था? अमेरिकी जनगणना ब्यूरो के अनुसार, वर्ष 2024 में 466.6 अरब डॉलर के साथ मेक्सिको शीर्ष निर्यातक रहा था। 4. अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने तरलता समर्थन पुनर्खरीद के संबंध में क्या घोषणा की है? ट्रेजरी विभाग ने खास सेक्टरों में तरलता समर्थन buyback operations के आकार को दोगुना करते हुए अधिकतम सीमा कम से कम 4 अरब डॉलर कर दी है। https://trendkia.com/market/canada-ke-carney-retaliatory-tariffs-will-start-september-8-20861 TrendKia — Har trend, sabse pehle.