मध्य यूरोप में सुधरती जीडीपी और घटते तनाव से उच्च बीटा मुद्राओं को मिल सकता है संबल आईएनजी के फ्रेंतिसेक ताबोर्स्की का आकलन है कि मध्य और पूर्वी यूरोपीय देशों में आर्थिक वृद्धि और महंगाई के आंकड़ों से बाजार को दिशा मिलेगी। अमेरिका और ईरान के बीच तनाव घटने तथा शांति वार्ताओं के संकेतों से उच्च बीटा मुद्राओं और बांड दरों में सुधार की उम्मीद है। मध्य और पूर्वी यूरोपीय देशों के आर्थिक परिदृश्य में सुधार के संकेत मिल रहे हैं, जिससे इस क्षेत्र की मुद्राओं और वित्तीय बाजारों में नई हलचल देखने को मिल सकती है। आईएनजी के फ्रेंतिसेक ताबोर्स्की का मानना है कि चेक गणराज्य और हंगरी से आने वाले आगामी सकल घरेलू उत्पाद यानी जीडीपी के आंकड़े इस क्षेत्र में मजबूत होती विकास गति पर मुहर लगाएंगे। इसके साथ ही, पोलैंड में ईंधन की कीमतों में तेजी के कारण मुद्रास्फीति के आंकड़ों में एक बार फिर उछाल देखने को मिल सकता है, जो बाजार के जानकारों के लिए महत्वपूर्ण साबित होगा। भू-राजनीतिक तनाव घटने से सुधरेंगी बांड दरें हालिया भू-राजनीतिक मोर्चे पर राहत भरी खबरें आई हैं। सप्ताहांत के दौरान अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष के और आगे न बढ़ने तथा शांति वार्ताओं की सुगबुगाहट शुरू होने से मध्य और पूर्वी यूरोपीय बाजारों को बड़ी राहत मिली है। फ्रेंतिसेक ताबोर्स्की का तर्क है कि इस तरह के सकारात्मक माहौल से क्षेत्र की बांड दरों में तेजी से रिकवरी देखने को मिलेगी, खासकर तब जब पिछले सप्ताह ही बाजार में आक्रामक दरों में बढ़ोतरी का अनुमान लगाया जा रहा था। इस स्थिरता से निवेशकों का भरोसा दोबारा लौट रहा है और जोखिम वाले परिसंपत्ति वर्गों में सुधार की राह आसान हो रही है। पोलैंड में मुद्रास्फीति के आंकड़े और ईंधन का प्रभाव आर्थिक मोर्चे पर पोलैंड के आंकड़े बेहद खास रहने वाले हैं। पोलैंड में जुलाई महीने के लिए मुद्रास्फीति के आंकड़ों के मोर्चे पर बड़ा बदलाव आ सकता है, जहां मासिक आधार पर इसके 0.9 प्रतिशत और वार्षिक आधार पर 3.1 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया गया है। यह आंकड़ा इससे पिछले दौर के -0.5 प्रतिशत मासिक और 2.5 प्रतिशत वार्षिक स्तर से काफी ऊपर होगा। खुदरा ईंधन समर्थन उपायों की अवधि समाप्त होने के बाद बढ़े हुए ईंधन दामों का सीधा असर हेडलाइन महंगाई पर साफ तौर पर दिखाई दे रहा है, जो मुद्रास्फीति को तेजी से ऊपर धकेल रहा है। चेक गणराज्य में ब्याज दरों पर मंथन और कुरुना की चाल चेक नेशनल बैंक की आगामी अगस्त बैठक से ठीक पहले ब्लैकआउट पीरियड गुरुवार से शुरू होने जा रहा है, जिसके चलते बैंक के बोर्ड सदस्य आने वाले दिनों में बाजार को अहम संकेत दे सकते हैं। पिछले सप्ताह ही जान कुबिचेक ने स्पष्ट किया था कि ब्याज दरों में एक और बढ़ोतरी पर विचार किया जा सकता है, लेकिन फिलहाल इसके लिए कोई जल्दबाजी नहीं है। इससे यही संकेत मिलता है कि अगस्त में दरों में कोई बदलाव नहीं किया जाएगा, जो विश्लेषकों के पूर्वानुमान के बिल्कुल अनुकूल है। दूसरी ओर, चेक कुरुना पर दबाव बन सकता है और यह कमजोर होकर 24.200 EUR/CZK के स्तर से ऊपर कारोबार कर सकता है, जिसका मुख्य कारण ब्याज दरों के अंतर और हालिया मूल्य निर्धारण का दायरा है। हंगेरियन फोरिंट और पॉलिश ज्लॉटी को मिलेगा फायदा इस बदलते हुए वृहद आर्थिक और भू-राजनीतिक परिवेश में उच्च बीटा वाली मुद्राएं काफी लाभ की स्थिति में रह सकती हैं। हंगरी का फोरिंट और पोलैंड का ज्लॉटी इस सकारात्मक माहौल का पूरा लाभ उठाने के लिए तैयार हैं, क्योंकि निवेशक जोखिम भरे बाजारों की ओर रुख कर रहे हैं। इसके विपरीत, चेक कुरुना को कुछ चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है क्योंकि दर अंतर और हालिया मूल्य प्रवृत्तियां इसके पक्ष में नहीं दिख रही हैं। बाजार के विश्लेषक इन सभी क्षेत्रीय बदलावों पर पैनी नजर बनाए हुए हैं ताकि मुद्रा बाजारों के अगले रुख का आकलन किया जा सके। विदेशी मुद्रा बाजारों में अन्य जोड़ियों का हाल सोमवार को यूरोपीय सत्र के दूसरे भाग में विदेशी मुद्रा बाजार के अन्य प्रमुख जोड़े भी सुस्त चाल दिखाते नजर आए। शुरुआती कारोबार में तेजी दिखाने के बाद GBP/USD अपनी दिशा बदलकर 1.3300 के आसपास लाल निशान में कारोबार कर रहा है। मध्य पूर्व के संघर्ष में ठहराव आने के बाद कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट आई है, जिसके चलते अमेरिकी डॉलर की बढ़त सीमित हो गई है और यह मुद्रा जोड़ी फिलहाल अपने स्तर को थामे रखने में कामयाब रही है। इसी प्रकार, EUR/USD भी अपनी तेजी की गति गंवा चुका है और सोमवार को दूसरे सत्र में 1.1400 के नीचे मामूली बढ़त के साथ कारोबार कर रहा है। बाजार के सहभागी मध्य पूर्व में संघर्ष के कम होने की उम्मीद लगाए बैठे हैं, हालांकि अमेरिका और ईरान के बीच कोई कूटनीतिक समाधान निकलेगा या नहीं, इस पर अभी भी अनिश्चितता बनी हुई है। इसका आप पर असर यह समाचार वित्तीय बाजारों, वैश्विक मुद्राओं और आयात-निर्यात से जुड़े लोगों के लिए महत्वपूर्ण है। • भारत में: विदेशी मुद्रा बाजारों में उतार-चढ़ाव और कच्चे तेल की कीमतों में नरमी का असर घरेलू मुद्रा और आयातित वस्तुओं की लागत पर पड़ सकता है। • वैश्विक स्तर पर: मध्य पूर्व के तनाव घटने और यूरोपीय अर्थव्यवस्थाओं में सुधार के संकेतों से वैश्विक मुद्रा बाजारों और निवेशक सेंटिमेंट में स्थिरता आ सकती है। सवाल-जवाब 1. मध्य और पूर्वी यूरोपीय मुद्राओं के लिए हालिया दृष्टिकोण क्या है? घटते भू-राजनीतिक तनाव और सुधरती विकास गति के कारण हंगेरियन फोरिंट और पॉलिश ज्लॉटी जैसी उच्च बीटा मुद्राओं को समर्थन मिलने की उम्मीद है। 2. पोलैंड में मुद्रास्फीति के आंकड़ों में तेजी का क्या कारण है? खुदरा ईंधन समर्थन उपायों के समाप्त होने और ईंधन की कीमतें बढ़ने के कारण पोलैंड की हेडलाइन महंगाई में तेजी आने का अनुमान है। 3. चेक गणराज्य के केंद्रीय बैंक की आगामी बैठक को लेकर क्या अनुमान है? विश्लेषकों का मानना है कि चेक नेशनल बैंक अपनी अगस्त की बैठक में ब्याज दरों को स्थिर रख सकता है क्योंकि फिलहाल दरों में बदलाव की कोई जल्दबाजी नहीं है। 4. चेक कुरुना पर किस प्रकार का दबाव देखा जा रहा है? ब्याज दरों के अंतर और हालिया मूल्य निर्धारण के दायरे के कारण चेक कुरुना कमजोर होकर 24.200 EUR/CZK के स्तर से ऊपर जा सकता है। https://trendkia.com/market/cee-fx-lower-us-iran-tensions-and-rising-gdp-boost-high-beta-currencies-11009 TrendKia — Har trend, sabse pehle.