मध्य और पूर्वी यूरोप में ब्याज दरों पर सख्त रुख, डॉलर में तेजी से वैश्विक मुद्राओं और सोने पर दबाव पोलैंड और रोमानिया के केंद्रीय बैंक बढ़ती महंगाई और राजनीतिक अनिश्चितता के कारण नीतिगत दरों पर सतर्क रुख अपना रहे हैं, जबकि मजबूत अमेरिकी डॉलर वैश्विक बाजारों पर हावी है। मध्य और पूर्वी यूरोप के वित्तीय बाजारों में मौद्रिक नीति को लेकर सतर्कता का माहौल बना हुआ है, जहां पोलैंड और रोमानिया के केंद्रीय बैंक महंगाई के नए दबावों और राजनीतिक अनिश्चितताओं के बीच अपनी ब्याज दरों की यथास्थिति बनाए रखने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। पोलैंड का नेशनल बैंक ऑफ पोलैंड अपनी प्रमुख नीतिगत दर को 3.75 प्रतिशत पर स्थिर रख सकता है, लेकिन वहां लगातार मजबूत होती महंगाई नीतिगत सख्ती की गुंजाइश को खुला रख रही है। दूसरी ओर, रोमानिया का नेशनल बैंक ऑफ रोमानिया भी अपनी ब्याज दर को 6.50 प्रतिशत पर अपरिवर्तित रखने की तैयारी में है, क्योंकि देश में नई सरकार के गठन को लेकर अनिश्चितता और ऊंचे दाम नीतिगत ढील देने के रास्ते में बड़ी रुकावट बने हुए हैं। पोलैंड में नीतिगत सख्ती की सुगबुगाहट और दर वृद्धि की संभावना पोलैंड में नेशनल बैंक ऑफ पोलैंड बुधवार को अपनी ब्याज दर को 3.75 प्रतिशत पर अपरिवर्तित रख सकता है, जिसे बाजार एक सख्त रुख वाली यथास्थिति के तौर पर देख रहा है। देश में सितंबर के दौरान उपभोक्ता महंगाई बढ़कर 4.0 प्रतिशत पर पहुंच गई, जिसमें मुख्य भूमिका ईंधन की बढ़ती कीमतों की रही है। केंद्रीय बैंक के नीति निर्माता इस बात पर लगातार जोर दे रहे हैं कि अर्थव्यवस्था में महंगाई को स्थायी रूप से जड़ें जमाने से रोकना सबसे जरूरी प्राथमिकता है। मौद्रिक नीति समिति तुरंत कदम उठाने के बजाय नवंबर के आधिकारिक स्टाफ अनुमानों के जारी होने का इंतजार कर सकती है। अनुमानों के आने के बाद नीतिगत दरों में 25 आधार अंकों की बढ़ोतरी की जा सकती है, जिसके बाद जनवरी में भी 25 आधार अंकों की एक और वृद्धि जोड़ी जा सकती है। हालांकि, विदेशी मुद्रा बाजार में पोलिश ज़्लॉटी को इस सख्त रुख से बहुत सीमित सहारा मिलने की उम्मीद है, क्योंकि मुद्रा बाजार पहले से ही नीतिगत सख्ती की इस संभावना को अपनी कीमतों में शामिल कर चुके हैं। रोमानिया में राजनीतिक गतिरोध और नीतिगत ढील का लंबा इंतजार रोमानिया के मोर्चे पर नेशनल बैंक ऑफ रोमानिया द्वारा अपनी नीतिगत दर को 6.50 प्रतिशत पर बनाए रखने की उम्मीद है। देश में नई सरकार के गठन को लेकर बनी राजनीतिक असमंजस की स्थिति के चलते नीति निर्माता अतिरिक्त सावधानी बरत रहे हैं और धैर्य बनाए रखने का संकेत दे रहे हैं। मौजूदा आर्थिक और राजनीतिक परिस्थितियों को देखते हुए अगली ब्याज दर कटौती केवल 2027 की पहली तिमाही में ही संभव नजर आती है, बशर्ते महंगाई में गिरावट का सिलसिला जारी रहे और देश में एक स्थिर सरकार का गठन हो जाए। वैश्विक विदेशी मुद्रा बाजार पर मजबूत अमेरिकी डॉलर का असर अंतरराष्ट्रीय मुद्रा बाजारों में अमेरिकी डॉलर की नई मजबूती अन्य प्रमुख मुद्राओं पर भारी पड़ रही है। एशियाई कारोबारी सत्र के दौरान ऑस्ट्रेलियाई डॉलर अमेरिकी डॉलर के मुकाबले बिकवाली के दबाव में आ गया और 0.6900 के स्तर की तरफ फिसल गया। पश्चिम एशिया और रूस-यूक्रेन के बीच जारी भू-राजनीतिक तनावों के बीच निवेशकों का ध्यान कच्चे तेल की कीमतों, अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड प्रतिफल और रिज़र्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया से जुड़ी नीतिगत उम्मीदों पर टिका हुआ है। उधर डॉलर-येन जोड़ी ने अपनी शुरुआती गिरावट की भरपाई करते हुए एशियाई सत्र में 158.00 का स्तर फिर से हासिल कर लिया और यह पिछले एक सप्ताह के सीमित दायरे में कारोबार कर रही है। फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दर वृद्धि की घटती उम्मीदों के बावजूद भू-राजनीतिक अनिश्चितता अमेरिकी डॉलर को सहारा दे रही है। हालांकि, बैंक ऑफ जापान की सख्त नीतिगत उम्मीदों और मुद्रा बाजार में जापानी अधिकारियों के संभावित हस्तक्षेप के जोखिम से डॉलर-येन की इस बढ़त पर सीमित दबाव रहने का अनुमान है। यूरो में रिकॉर्ड गिरावट और सोने का सीमित दायरा यूरोपीय मुद्रा में भी तेज कमजोरी दर्ज की गई है और यूरो-डॉलर जोड़ी गिरकर मई 2025 के बाद के अपने सबसे निचले स्तर पर पहुंच गई। यह जोड़ी बुधवार को 1.1312 के निचले स्तर को छू गई, जो जनवरी के 1.2082 के उच्चतम स्तर से काफी नीचे है। यूरो में आई यह गिरावट अमेरिकी डॉलर की व्यापक मजबूती, वैश्विक भू-राजनीतिक अनिश्चितता और यूरोप के ऊर्जा की ऊंची कीमतों के प्रति संवेदनशील होने की चिंताओं का साझा परिणाम है। कीमती धातुओं के बाजार में सोना 4,150 डॉलर प्रति औंस के नीचे सीमित दायरे में कारोबार कर रहा है। शुक्रवार को आए कमजोर अमेरिकी रोजगार आंकड़ों को नजरअंदाज करते हुए अमेरिकी डॉलर ने मजबूत बढ़त हासिल की है और अप्रैल 2025 के बाद के अपने नए उच्चतम स्तर पर पहुंच गया है। डॉलर की यह मजबूती सोने की कीमतों पर दबाव बना रही है, हालांकि अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा अक्टूबर में दर वृद्धि की घटती संभावनाओं से सोने में भारी गिरावट पर रोक लगी हुई है। क्रिप्टो बाजार की स्थिति और अमेरिकी आर्थिक आंकड़े डिजिटल परिसंपत्ति बाजार में बीएनबी, जिसे पहले बिनेंस कॉइन के नाम से जाना जाता था, लगातार तीन हफ्तों की साप्ताहिक बढ़त दर्ज करने के बाद सोमवार को मामूली नरमी के साथ लगभग 790 डॉलर पर कारोबार कर रहा है। डेरिवेटिव्स बाजार में बढ़ते ओपन इंटरेस्ट और सकारात्मक फंडिंग दरों से संकेत मिलता है कि तेजी की पोजीशन अभी भी मजबूत बनी हुई हैं। दूसरी तरफ, अमेरिकी सेवा क्षेत्र की सेहत को लेकर भी नया आंकड़ा सामने आ रहा है, जहां इंस्टीट्यूट फॉर सप्लाई मैनेजमेंट सितंबर के अपने आंकड़े पेश करेगा। बाजार का अनुमान है कि यह सूचकांक अगस्त के 55.4 से मामूली बढ़कर 55.7 पर पहुंच सकता है, जिससे सेवा क्षेत्र की मजबूती और व्यापक आर्थिक स्थिरता की पुष्टि होने की उम्मीद है। इसका आप पर असर अमेरिकी डॉलर की मजबूती और केंद्रीय बैंकों के सख्त रुख से अंतरराष्ट्रीय मुद्रा बाजारों और निवेश साधनों में उतार-चढ़ाव बढ़ गया है। • मुद्रा विनिमय और यात्रा: मजबूत अमेरिकी डॉलर के कारण अन्य वैश्विक मुद्राओं पर दबाव बढ़ रहा है। विदेश यात्रा या विदेशी मुद्रा में लेनदेन करने वाले लोगों के लिए लागत में बढ़ोतरी हो सकती है। • सोने के निवेशक: सोने की कीमतें 4,150 डॉलर प्रति औंस के नीचे सीमित दायरे में फंसी हुई हैं। डॉलर के ऊंचे स्तरों पर बने रहने से सोने में तुरंत बड़ी तेजी की संभावना सीमित दिख रही है। • क्रिप्टोकरेंसी ट्रेडर्स: बीएनबी 790 डॉलर के आसपास सीमित दायरे में है लेकिन डेरिवेटिव्स में तेजी का रुझान बना हुआ है। निवेशकों को बाजार में आने वाले नए आर्थिक आंकड़ों के आधार पर जोखिम प्रबंधन रखना होगा। • वैश्विक कमोडिटी और ईंधन: कच्चे तेल और ऊर्जा की कीमतों पर भू-राजनीतिक तनाव का सीधा असर पड़ रहा है। ऊर्जा की ऊंची लागत से यूरोपीय अर्थव्यवस्थाओं और आयात पर निर्भर देशों में महंगाई का दबाव बना रह सकता है। ऐसा क्यों हुआ यह स्थिति मुख्य रूप से ईंधन की कीमतों से उपजी महंगाई, राजनीतिक गतिरोध और भू-राजनीतिक तनावों के बीच मजबूत हुए अमेरिकी डॉलर के कारण बनी है। • ईंधन की कीमतों में उछाल: पोलैंड में ईंधन महंगा होने से सितंबर की महंगाई दर बढ़कर 4.0 प्रतिशत हो गई। इसी कारण वहां का केंद्रीय बैंक ब्याज दरों में ढील देने के बजाय सख्ती पर विचार कर रहा है। • रोमानिया में राजनीतिक अनिश्चितता: रोमानिया में नई सरकार के गठन को लेकर बना गतिरोध नीतिगत निर्णयों को सीमित कर रहा है। जब तक स्थिर सरकार नहीं बनती और महंगाई कम नहीं होती, तब तक ब्याज दरों में कटौती टल गई है। • भू-राजनीतिक तनाव और डॉलर की मांग: पश्चिम एशिया और रूस-यूक्रेन संघर्ष के चलते वैश्विक निवेशक सुरक्षित निवेश के रूप में अमेरिकी डॉलर की तरफ रुख कर रहे हैं। इस मांग ने डॉलर को अप्रैल 2025 के बाद के उच्चतम स्तर पर पहुंचा दिया है। • आर्थिक आंकड़ों का मिश्रित प्रभाव: अमेरिकी रोजगार आंकड़ों की कमजोरी के बावजूद सेवा क्षेत्र की मजबूती की उम्मीदों ने डॉलर को सहारा दिया है। साथ ही फेडरल रिजर्व द्वारा अक्टूबर में दर वृद्धि की संभावना घटने से सोने को सहारा मिला है। सवाल-जवाब 1. पोलैंड का केंद्रीय बैंक ब्याज दरों पर क्या निर्णय ले सकता है? पोलैंड का केंद्रीय बैंक अपनी प्रमुख ब्याज दर को 3.75 प्रतिशत पर स्थिर रख सकता है, लेकिन भविष्य में दर वृद्धि के सख्त संकेत दे सकता है। 2. रोमानिया में ब्याज दरों में अगली कटौती कब होने की उम्मीद है? रोमानिया में अगली ब्याज दर कटौती केवल 2027 की पहली तिमाही में होने की संभावना है, बशर्ते महंगाई घटे और स्थिर सरकार बने। 3. यूरो में हालिया गिरावट का क्या कारण रहा है? यूरो गिरकर 1.1312 पर पहुंच गया, जिसका मुख्य कारण अमेरिकी डॉलर की मजबूती, भू-राजनीतिक तनाव और ऊर्जा की ऊंची कीमतें हैं। 4. सोने की कीमतों पर दबाव क्यों बना हुआ है? अमेरिकी डॉलर के अप्रैल 2025 के बाद के उच्चतम स्तर पर पहुंचने के कारण सोना 4,150 डॉलर प्रति औंस के नीचे सीमित दायरे में बना हुआ है। 5. क्रिप्टो बाजार में बीएनबी का प्रदर्शन कैसा रहा है? बीएनबी लगभग 790 डॉलर पर कारोबार कर रहा है और डेरिवेटिव्स बाजार में ओपन इंटरेस्ट बढ़ने से तेजी के संकेत बने हुए हैं। https://trendkia.com/market/central-european-banks-men-byaja-daron-para-sakhta-rukha-dollar-men-teji-se-mudraon-aura-gold-para-dabava-43270 TrendKia — Har trend, sabse pehle.