# छह हफ्तों की लगातार गिरावट के बाद क्या संभलेंगे सेंसेक्स और निफ्टी, इन बड़े संकेतों पर रहेगी नजर

> भारतीय शेयर बाजारों में लगातार छह हफ्तों की गिरावट के बाद नए कारोबारी हफ्ते में तकनीकी सुधार की उम्मीद बंधी है। कच्चे तेल की कीमतें, विदेशी निवेशकों की बिकवाली और पश्चिम एशिया का संकट आगे की दिशा तय करेंगे।

**Type:** article · **Category:** बाज़ार · **Published:** 2026-09-19 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/market/chhaha-haphton-ki-lagatara-giravata-ke-bada-kya-snbhalenge-sensex-aura-nifty-ina-bare-snketon-para-rahegi-najara-34055 · **Language:** Hindi
**Tags:** शेयर बाजार, निफ्टी 50, सेंसेक्स, बैंक निफ्टी, कच्चा तेल, विदेशी संस्थागत निवेशक, घरेलू संस्थागत निवेशक, डॉ रवि सिंह

घरेलू इक्विटी बाजारों में बिकवाली का दबाव लगातार छठे हफ्ते हावी रहा, जिसने साल 2020 के बाद गिरावट का सबसे लंबा दौर दर्ज किया है। इस पूरे हफ्ते के दौरान निफ्टी में 0.22 प्रतिशत की नरमी दर्ज की गई और यह 23,346 के स्तर पर बंद हुआ, हालांकि शुक्रवार के सत्र में इसमें 0.33 प्रतिशत की बढ़त देखने को मिली थी। दूसरी तरफ बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का संवेदी सूचकांक सेंसेक्स 0.65 प्रतिशत गिरकर 74,294 के स्तर पर आ गया। इस गिरावट का बड़ा हिस्सा मंगलवार को आई तेज बिकवाली से जुड़ा था, जिसके बाद बाकी कारोबारी दिनों में बाजार ने आंशिक तौर पर वापसी करने का प्रयास किया।

## वैश्विक अनिश्चितता और कमजोर मुद्रा का दबाव
बाजार की चाल तय करने में अंतरराष्ट्रीय स्तर के घटनाक्रम सबसे आगे रहे। अमेरिकी फेडरल ओपन मार्केट कमेटी यानी FOMC की बैठक, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में आने वाले उतार-चढ़ाव, ब्रेंट क्रूड की कीमतें और पश्चिम एशिया में जारी तनाव निवेशकों के रडार पर रहे। इसके अलावा भारतीय मुद्रा में भी लगातार दूसरे हफ्ते कमजोरी दर्ज की गई, जिसने निवेशकों के रुख को अधिक सतर्क बना दिया। विदेशी मुद्रा बाजार में रुपये के फिसलने से घरेलू बाजार में जोखिम उठाने की क्षमता पर असर पड़ा है।

कच्चे तेल की कीमतों ने महंगाई और ब्याज दरों के मोर्चे पर चिंताएं बनाए रखी हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड 103 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बना रहा, हालांकि हफ्ते के आखिरी दिनों में तेल की कीमतों में आई थोड़ी नरमी ने बॉन्ड यील्ड को स्थिर होने में मदद की। इस बीच विदेशी संस्थागत निवेशकों यानी FII की तरफ से लगातार पांचवें हफ्ते बिकवाली जारी रही, जहां उन्होंने कुल 7,619 करोड़ रुपये के शेयर बेचे। इसके विपरीत घरेलू संस्थागत निवेशकों यानी DII ने 11,232 करोड़ रुपये की शुद्ध खरीदारी कर बाजार को बड़ा सहारा दिया।

## निफ्टी के लिए तकनीकी स्तर और रिकवरी की संभावनाएं
लगातार छह हफ्तों की फिसलन के बावजूद निफ्टी की गिरावट सीमित दायरे में सिमटी नजर आई है। सूचकांक ने जून 2026 के निचले स्तरों के करीब अपना आधार तैयार करने की कोशिश की है। तकनीकी पैमानों पर नजर डालें तो बेंचमार्क इंडेक्स ओवरसोल्ड जोन में प्रवेश कर चुका है, जबकि दैनिक रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स यानी RSI इन निचले स्तरों से सुधरना शुरू हुआ है। यह स्थिति आने वाले कारोबारी सत्रों में एक तकनीकी उछाल की संभावना को दर्शाती है।

बाजार के तकनीकी ढांचे का विश्लेषण करते हुए मास्टर कैपिटल सर्विसेज लिमिटेड के चीफ रिसर्च ऑफिसर डॉ. रवि सिंह ने कहा, "23,000 से 23,100 का दायरा तत्काल समर्थन के रूप में काम करने की उम्मीद है। मौजूदा स्तरों से निफ्टी 24,600 की ओर उछल सकता है।" उनके अनुसार, इस स्तर से ऊपर लगातार टिके रहने पर सुधार की यह गति 24,000 के पास स्थित 21-दिवसीय एक्सपोनेंशियल मूविंग एवरेज यानी EMA तक पहुंच सकती है। हालांकि उन्होंने यह भी आगाह किया कि चूंकि व्यापक रुझान अब भी कमजोर बना हुआ है, इसलिए सतर्कता बरतना बेहद जरूरी है। 21 से 25 सितंबर के कारोबारी हफ्ते के लिए 23,000-23,100 का स्तर बेहद अहम बना रहेगा।

## सेंसेक्स पर टाटा समूह के शेयरों का असर
सेंसेक्स में बीते हफ्ते 0.65 प्रतिशत की बड़ी गिरावट देखने को मिली और यह 74,294 के स्तर पर आ गया। इस सूचकांक पर बिकवाली का असर निफ्टी की तुलना में अधिक दिखाई दिया। इसका मुख्य कारण एक प्रशासनिक विवाद के बीच टाटा समूह की कंपनियों के शेयरों में आई भारी बिकवाली रही, जिसने मुख्य सूचकांक को नीचे खींचने में बड़ी भूमिका निभाई।

मंगलवार की भारी गिरावट के बाद बाजार कुछ हद तक संभलने में कामयाब तो रहा, लेकिन निवेशकों का कुल मिजाज बेहद रक्षात्मक बना हुआ है। आने वाले सत्रों में सेंसेक्स की चाल काफी हद तक कच्चे तेल की वैश्विक कीमतों, अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड की दिशा, अंतरराष्ट्रीय संकेतों और पश्चिम एशिया के संकट पर निर्भर करेगी।

## बैंक निफ्टी में नरमी के बीच मजबूती के संकेत
बैंकिंग क्षेत्र के प्रमुख सूचकांक बैंक निफ्टी में बीते हफ्ते 0.44 प्रतिशत की कमजोरी देखी गई, जिससे इसकी लगातार गिरावट का सिलसिला चार हफ्तों तक पहुंच गया। इसके बावजूद यह सूचकांक 55,600 से 55,700 के दायरे के आसपास अपना बेस बनाने की कोशिश कर रहा है, जो एक महत्वपूर्ण हॉरिजॉन्टल सपोर्ट जोन से मेल खाता है। हालिया दबाव के बाद भी बैंक निफ्टी ने व्यापक बाजार के मुकाबले सापेक्ष मजबूती दिखाई है और इसमें बिकवाली की तीव्रता पहले से धीमी हुई है।

डॉ. रवि सिंह ने इस संबंध में बताया, "यह संकेत देता है कि यह सूचकांक व्यापक बाजार को सहारा दे सकता है और 57,000 की ओर उछाल देख सकता है, जो इसके 55-दिवसीय EMA से भी मेल खाता है।" उन्होंने सुझाव दिया कि जब तक सूचकांक अपने हाल के निचले स्तरों को बनाए रखता है, तब तक गिरावट पर संभलकर खरीदारी करने की रणनीति अपनाई जा सकती है। हालांकि उन्होंने कारोबारियों को चेतावनी भी दी कि मौजूदा व्यापक कमजोरी को देखते हुए किसी भी स्थिति में जोखिम प्रबंधन से समझौता न करें।

## कच्चा तेल और भू-राजनीतिक समीकरण
आगामी कारोबारी दिनों में भारतीय बाजार की दिशा तय करने में कच्चे तेल के दाम एक मुख्य उत्प्रेरक की भूमिका निभाएंगे। ब्रेंट क्रूड का 103 डॉलर प्रति बैरल के करीब टिके रहना नीति निर्माताओं और निवेशकों दोनों के लिए सिरदर्द बना हुआ है, क्योंकि यह सीधे तौर पर ईंधन लागत और महंगाई के आंकड़ों को प्रभावित करता है। सप्ताहांत में आई मामूली गिरावट ने यील्ड्स को राहत दी है, लेकिन तेल में होने वाला कोई भी नया उतार-चढ़ाव नीतिगत दरों में कटौती की संभावनाओं को कमजोर कर सकता है।

इसके साथ ही पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक संकट लगातार अनिश्चितता की वजह बना हुआ है। इस क्षेत्र में होने वाले किसी भी नए तनाव से तेल की आपूर्ति शृंखला बाधित होने का खतरा है, जो सीधे मुद्रास्फीति और वैश्विक मौद्रिक नीतियों पर असर डालेगा। निवेशक इन सभी घटनाओं पर पैनी नजर बनाए हुए हैं।

## विदेशी बिकवाली के मुकाबले घरेलू पूंजी की ढाल
संस्थागत पूंजी प्रवाह के आंकड़े घरेलू बाजार की आंतरिक मजबूती को स्पष्ट रूप से दर्शाते हैं। विदेशी संस्थागत निवेशकों की तरफ से 7,619 करोड़ रुपये के शेयर बेचे जाने के बावजूद बाजार में बड़ी गिरावट नहीं आई, क्योंकि घरेलू संस्थागत निवेशकों ने 11,232 करोड़ रुपये की आक्रामक खरीदारी की।

विदेशी फंडों की निरंतर निकासी के सामने घरेलू म्यूचुअल फंडों और वित्तीय संस्थानों की यह मजबूत लिक्विडिटी एक मजबूत सुरक्षा कवच बनकर उभरी है। यह रुझान दिखाता है कि वैश्विक दबाव के बावजूद स्थानीय निवेशक भारतीय अर्थव्यवस्था की दीर्घकालिक विकास क्षमता पर भरोसा बनाए हुए हैं।

## इसका आप पर असर
शेयर बाजार में लगातार छह हफ्तों की कमजोरी और 103 डॉलर के पास बने कच्चे तेल का असर सीधे आपकी बचत और निवेश पर पड़ता है।

- **खुदरा निवेशकों पर असर:** म्यूचुअल फंड SIP जारी रखने वाले निवेशकों के पोर्टफोलियो पर दबाव रह सकता है। निचले स्तरों पर बाजार के ओवरसोल्ड होने से चुनिंदा गुणवत्ता वाले शेयरों में धीरे-धीरे निवेश करने का मौका बन सकता है।
- **पेट्रोलियम और घरेलू खर्च:** अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल 103 डॉलर के स्तर पर टिके रहने से ईंधन कीमतों पर दबाव बना हुआ है। यदि तेल के दाम और चढ़ते हैं तो रोजमर्रा के सामानों की ढुलाई लागत बढ़ सकती है।
- **रुपये की कमजोरी और महंगाई:** भारतीय रुपये में लगातार दूसरे हफ्ते आई गिरावट से आयातित वस्तुएं महंगी हो सकती हैं। विदेश यात्रा, इलेक्ट्रॉनिक्स और आयातित वस्तुओं पर खर्च करने वाले उपभोक्ताओं को अधिक लागत चुकानी पड़ सकती है।
- **अल्पकालिक ट्रेडर्स के लिए संकेत:** निफ्टी में 23,000 से 23,100 का दायरा मजबूत समर्थन के रूप में उभर रहा है। तकनीकी उछाल की स्थिति में ट्रेडर्स 24,000 से 24,600 के स्तरों को लक्ष्य बनाकर सख्त स्टॉपलॉस के साथ काम कर सकते हैं।

## ऐसा क्यों हुआ
भारतीय बाजारों में लगातार छह हफ्तों तक चली इस गिरावट के पीछे कई वैश्विक और घरेलू कारक मिलकर काम कर रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ब्याज दरों और कच्चे तेल की अनिश्चितता ने विदेशी निवेशकों को पूंजी निकालने पर मजबूर किया है।

- **कच्चे तेल की ऊंची कीमतें:** अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड का 103 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बने रहना घरेलू अर्थव्यवस्था के लिए चिंता का विषय बना हुआ है। इससे आयात बिल बढ़ने और महंगाई दर में बढ़ोतरी का जोखिम लगातार बना हुआ है।
- **विदेशी निवेशकों की लगातार निकासी:** विदेशी संस्थागत निवेशकों ने बीते हफ्ते 7,619 करोड़ रुपये के शेयर बेचे, जिससे उनकी लगातार बिकवाली का पांचवां हफ्ता पूरा हुआ। अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में मजबूती और FOMC बैठक से पहले बढ़ती सतर्कता के चलते विदेशी पूंजी बाहर जा रही है।
- **टाटा समूह और कॉर्पोरेट विवाद:** सेंसेक्स पर टाटा समूह से जुड़े शेयरों में प्रशासनिक विवाद के चलते तेज बिकवाली देखने को मिली। इस आंतरिक घटनाक्रम ने बेंचमार्क इंडेक्स पर दबाव को और अधिक गहरा कर दिया।
- **भू-राजनीतिक तनाव और कमजोर रुपया:** पश्चिम एशिया में जारी संकट ने अंतरराष्ट्रीय आपूर्ति को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं। इसके साथ ही घरेलू मुद्रा में दो हफ्तों से जारी गिरावट ने विदेशी निवेशकों की धारणा को और कमजोर किया है।

## सवाल-जवाब

### 1. बीते कारोबारी हफ्ते में निफ्टी और सेंसेक्स का प्रदर्शन कैसा रहा?
बीते हफ्ते निफ्टी 0.22 प्रतिशत गिरकर 23,346 पर बंद हुआ, जबकि सेंसेक्स 0.65 प्रतिशत के नुकसान के साथ 74,294 के स्तर पर समाप्त हुआ।

### 2. आने वाले हफ्ते में निफ्टी के लिए कौन से समर्थन और प्रतिरोध स्तर अहम हैं?
तकनीकी रूप से 23,000 से 23,100 का स्तर मजबूत समर्थन माना जा रहा है, जबकि सुधार की स्थिति में निफ्टी 24,000 और 24,600 की तरफ बढ़ सकता है।

### 3. बैंक निफ्टी का दायरा और स्तर क्या नजर आ रहे हैं?
बैंक निफ्टी 55,600 से 55,700 के स्तर पर आधार बनाने की कोशिश कर रहा है और 57,000 के स्तर की ओर उछाल दर्ज कर सकता है।

### 4. बीते हफ्ते विदेशी और घरेलू संस्थागत निवेशकों ने कितनी खरीद-बिक्री की?
विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) ने 7,619 करोड़ रुपये के शेयर बेचे, जबकि घरेलू संस्थागत निवेशकों (DII) ने 11,232 करोड़ रुपये की खरीदारी की।

### 5. सेंसेक्स में निफ्टी के मुकाबले ज्यादा गिरावट की मुख्य वजह क्या रही?
सेंसेक्स पर प्रशासनिक विवाद के कारण टाटा समूह के शेयरों में आई भारी बिकवाली का अधिक असर पड़ा, जिससे वह निफ्टी की तुलना में अधिक टूटा।

### 6. बाजार की दिशा तय करने में कच्चे तेल का क्या महत्व बना हुआ है?
ब्रेंट क्रूड 103 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बना हुआ है, जिससे महंगाई और ब्याज दरों को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है।

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