# चीन और अमेरिका के बीच टकराव से दोनों को नुकसान, राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने वाशिंगटन में शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व पर दिया जोर

> चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने वाशिंगटन दौरे पर दोनों महाशक्तियों के बीच सहयोग को जरूरी बताते हुए कहा कि आपसी होड़ सीमित और स्वस्थ होनी चाहिए।

**Type:** article · **Category:** बाज़ार · **Published:** 2026-09-25 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/market/china-aura-us-ke-bicha-takarava-se-donon-ko-nukasana-president-xi-jinping-ne-washington-men-shantipurna-saha-astitva-para-diya-jor-38164 · **Language:** Hindi
**Tags:** शी जिनपिंग, डोनाल्ड ट्रंप, अमेरिका चीन व्यापार युद्ध, बैंक ऑफ जापान, यूएसडी जेपीवाई, सोने का भाव, फेडरल रिजर्व, वित्त

वाशिंगटन की अपनी यात्रा के दौरान चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने वैश्विक स्थिरता के लिए बीजिंग और अमेरिकी प्रशासन के बीच टकराव टालने की वकालत की। उन्होंने साफ किया कि दोनों प्रमुख वैश्विक शक्तियों को प्रतिद्वंद्वी बनने के बजाय आपसी साझेदार के रूप में कार्य करने का मार्ग तलाशना होगा। उनके अनुसार दोनों देशों का वास्तविक हित केवल सहयोग में निहित है, जबकि आमने-सामने के गतिरोध में दोनों ही पक्षों को भारी नुकसान उठाना पड़ेगा। इस संवाद में उन्होंने दोनों पक्षों के बीच जारी प्रतिस्पर्धा को संतुलित रखने और टकराव में न बदलने देने का आह्वान किया।

## सहयोग से लाभ और टकराव से दोनों पक्षों को नुकसान
चीनी राष्ट्रपति ने जोर देकर कहा कि दोनों देशों की प्रतिस्पर्धा एक-दूसरे से आगे निकलने की स्वस्थ दौड़ होनी चाहिए, न कि ऐसा अखाड़ा जिसमें केवल एक पक्ष की जीत और दूसरे की हार तय हो। वैश्विक मंच पर बड़ी शक्तियों को अधिक जिम्मेदारी का परिचय देना चाहिए। शी जिनपिंग ने डोनाल्ड ट्रंप के साथ हुई अपनी बातचीत को पूरी तरह स्पष्ट और गहन संवाद बताया। इस चर्चा के बाद द्विपक्षीय व्यापार वार्ताओं से जुड़ी नई व्यवस्था को दोनों देशों के संबंधों के लिए एक सकारात्मक संकेत माना गया। चीनी नेतृत्व ने इस बात को रेखांकित किया कि आपसी मतभेदों को पीछे छोड़कर कई महत्वपूर्ण विषयों पर व्यापक सहमति बनी है, जो दोनों देशों के संबंधों में एक नए ऐतिहासिक पड़ाव की तरह है।

## ट्रेड वॉर का इतिहास और संरक्षणवादी नीतियां
सामान्य तौर पर व्यापार युद्ध तब भड़कता है जब कोई देश घरेलू उद्योगों को बचाने के नाम पर अत्यधिक संरक्षणवादी कदम उठाता है। ऐसे कदमों में आयातित वस्तुओं पर भारी शुल्क या टैरिफ लगाया जाता है, जिसके जवाब में दूसरा पक्ष भी जवाबी शुल्क थोपता है। इसका सीधा असर आयात लागत पर पड़ता है और अंततः आम उपभोक्ताओं के लिए जीवनयापन का खर्च तेजी से बढ़ने लगता है। दोनों महाशक्तियों के बीच यह आर्थिक टकराव वर्ष 2018 की शुरुआत में तब भड़का था, जब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एशियाई दिग्गज पर अनुचित व्यापारिक तौर-तरीके अपनाने और बौद्धिक संपदा की चोरी का आरोप लगाते हुए सख्त व्यापारिक रुकावटें खड़ी की थीं।

चीन ने अमेरिकी कदमों का कड़ा विरोध करते हुए जवाबी कार्रवाई की और ऑटोमोबाइल तथा सोयाबीन जैसे कई प्रमुख अमेरिकी उत्पादों पर भारी आयात शुल्क थोप दिया। लगातार बढ़ते तनाव के बीच जनवरी 2020 में दोनों पक्षों ने 'फेज वन' व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर किए। इस समझौते के तहत चीनी आर्थिक और व्यापारिक तंत्र में ढांचागत सुधारों की प्रतिबद्धता जताई गई थी, ताकि दोनों देशों के बीच विश्वास और स्थिरता बहाल हो सके। इसके तुरंत बाद कोरोना वायरस महामारी के कारण दुनिया का ध्यान इस आर्थिक गतिरोध से भटक गया। इसके बाद सत्ता में आए राष्ट्रपति जो बाइडेन ने भी पूर्ववर्ती सरकार द्वारा लगाए गए शुल्कों को न केवल जारी रखा, बल्कि कुछ अतिरिक्त लेवी भी जोड़ दीं।

## व्हाइट हाउस में डोनाल्ड ट्रंप की वापसी और नया तनाव
अमेरिका के 47वें राष्ट्रपति के रूप में डोनाल्ड ट्रंप की व्हाइट हाउस में वापसी ने दोनों देशों के रिश्तों में एक नया तनाव पैदा कर दिया है। वर्ष 2024 के चुनावी अभियान में ट्रंप ने सत्ता में लौटने पर चीनी उत्पादों पर 60 प्रतिशत तक शुल्क लगाने का संकल्प लिया था, जिसे उन्होंने 20 जनवरी 2025 को पद संभालते ही लागू कर दिया। ट्रंप के इस रुख के बाद दोनों देशों के बीच व्यापारिक टकराव उसी मोड़ से दोबारा शुरू हो गया, जहां वह पहले रुका था। इस प्रकार की 'जैसे को तैसा' वाली व्यापारिक नीतियों से वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला बुरी तरह चरमराने लगी है। इसका सीधा असर कॉर्पोरेट और उपभोक्ता खर्च, विशेषकर पूंजीगत निवेश में कमी के रूप में सामने आया है, जिससे उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आधारित महंगाई दर में लगातार वृद्धि देखी जा रही है।

## मुद्रा बाजारों में हलचल और जापानी येन की स्थिति
वैश्विक आर्थिक परिदृश्य में व्यापारिक खींचतान के बीच विदेशी मुद्रा और बॉन्ड बाजार में व्यापक उठापटक दर्ज की जा रही है। तेल की बढ़ती कीमतों और गहराते महंगाई दबाव के चलते अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में तेजी बनी हुई है, जिससे अमेरिकी डॉलर को मजबूत सहारा मिल रहा है। इस माहौल में ऑस्ट्रेलियाई डॉलर लगातार तीसरे कारोबारी सत्र में फिसलकर अमेरिकी मुद्रा के मुकाबले 0.37 प्रतिशत कमजोर हुआ। एयूडी/यूएसडी की जोड़ी 0.7012 के स्तर पर कारोबार करती दिखी, जो इसके 200-दिवसीय सिंपल मूविंग एवरेज 0.7021 के काफी करीब है।

दूसरी ओर जापानी मुद्रा के मोर्चे पर वित्त मंत्री कातायामा ने गुरुवार को दोहराया कि 31 जुलाई को किए गए संयुक्त अमेरिका-जापान हस्तक्षेप के बुनियादी सिद्धांत आज भी प्रभावी हैं। इसके बावजूद यूएसडी/जेपीवाई बढ़कर 159.00 के स्तर को छू गया, जो सितंबर की शुरुआत के बाद का सबसे ऊपरी स्तर है। लगातार पांचवें सत्र में बढ़त की ओर अग्रसर यह जोड़ी 159.00 के ठीक नीचे बनी रही। जापान के केंद्रीय बैंक यानी बैंक ऑफ जापान ने 7-2 के बहुमत से अपनी अल्पकालिक ब्याज दर लक्ष्य को 1.00 प्रतिशत से बढ़ाकर 1.25 प्रतिशत कर दिया, जो मौद्रिक नीति को सामान्य बनाने की दिशा में एक अहम कदम है। हालांकि बैंक ऑफ जापान की दर वृद्धि, अधिकारियों द्वारा डीलरों के साथ दरों की जांच और कातायामा की बारंबार चेतावनियों के बावजूद येन पर दबाव बना हुआ है।

लाइव बाजार आंकड़ों के अनुसार, यूएसडी/जेपीवाई 158.73 के स्तर पर कारोबार कर रहा है, जो पिछले बंद स्तर 158.26 से 0.29 प्रतिशत की दैनिक बढ़त दर्शाता है। 52 हफ्तों के दौरान इस जोड़ी का दायरा 149.41 से 163.98 के बीच रहा है, जबकि ट्रेडिंग वॉल्यूम 20-दिवसीय औसत के 1.00 गुना के बराबर दर्ज किया गया। तकनीकी संकेतकों की बात करें तो 14-दिवसीय आरएसआई 59 पर स्थित है, जबकि एमएसीडी -0.26 पर है जो इसके सिग्नल स्तर -0.81 के मुकाबले 0.54 का सकारात्मक हिस्टोग्राम दिखाते हुए तेजी का संकेत देता है। 20-दिवसीय ईएमए 156.99, 50-दिवसीय ईएमए 158.09 और 200-दिवसीय ईएमए 157.68 पर स्थित हैं, जहां 50-दिवसीय ईएमए के 200-दिवसीय ईएमए से ऊपर निकलने पर गोल्डन क्रॉस का निर्माण हुआ है। 50-दिवसीय एसएमए 158.70 और 200-दिवसीय एसएमए 158.46 है, जो दीर्घकालिक मजबूती को दर्शाता है। 20-दिवसीय बोलिंजर बैंड 152.07 से 160.96 के बीच फैले हैं, जबकि 14-दिवसीय एडीएक्स 32 पर रुझान की पुष्टि करता है। स्टोकेस्टिक में फास्ट लाइन 96 और सिग्नल लाइन 89 पर है, जबकि 14-दिवसीय एटीआर 1.39 है। पिवट स्तर 158.76 पर है, जिसके ऊपर रेजिस्टेंस आर1 158.82 और आर2 158.92 पर तथा सपोर्ट एस1 158.66 और एस2 158.60 पर स्थित हैं।

## सोने की कीमतों पर फेडरल रिजर्व की नीतियों का असर
ब्याज दरों को लेकर केंद्रीय बैंकों की सख्त नीति का प्रभाव कीमती धातुओं पर भी देखने को मिल रहा है। फेडरल रिजर्व द्वारा इस वर्ष ब्याज दरों में और बढ़ोतरी किए जाने की संभावनाओं के चलते शुक्रवार के शुरुआती एशियाई कारोबारी सत्र में सोने की कीमत गिरकर 4,275 डॉलर के करीब पहुंच गई। सुरक्षित निवेश माने जाने वाले इस सर्राफा धातु पर अमेरिकी केंद्रीय बैंक के कड़े रुख का लगातार दबाव बना हुआ है। बाजार प्रतिभागी मौद्रिक नीति की भावी दिशा को समझने के लिए न्यूयॉर्क फेड के अध्यक्ष जॉन विलियम्स और क्लीवलैंड फेड की अध्यक्ष बेथ हैमैक के आगामी संबोधनों पर करीब से नजर बनाए हुए हैं।

## इसका आप पर असर
अमेरिका और चीन के बीच नए व्यापारिक शुल्क और वैश्विक मौद्रिक नीतियों में सख्ती से आम उपभोक्ताओं और निवेशकों की जेब पर सीधा असर पड़ सकता है।

- **भारत में:** वैश्विक व्यापार में तनाव और 60 प्रतिशत तक के नए अमेरिकी टैरिफ से सप्लाई चेन प्रभावित होगी, जिससे भारत में आयातित इलेक्ट्रॉनिक सामान और ऑटो पार्ट्स महंगे हो सकते हैं। उपभोक्ताओं को आने वाले महीनों में घरेलू बाजार में तकनीकी उत्पादों पर अतिरिक्त खर्च के लिए तैयार रहना चाहिए।
- **वैश्विक निवेशकों के लिए:** अमेरिकी डॉलर में लगातार मजबूती और फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में बढ़ोतरी की आशंकाओं से अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने के भाव गिरकर 4,275 डॉलर पर आ गए हैं। सर्राफा और बॉन्ड बाजार में पैसा लगाने वाले खुदरा निवेशकों को अत्यधिक अस्थिरता को देखते हुए अपने पोर्टफोलियो में स्टॉप-लॉस सीमाओं का कड़ाई से पालन करना चाहिए।
- **मुद्रा विनिमय और यात्रा:** बैंक ऑफ जापान द्वारा नीतिगत दरें बढ़ाकर 1.25 प्रतिशत करने के बावजूद यूएसडी/जेपीवाई 159 के करीब पहुंच चुका है, जिससे डॉलर इंडेक्स को अतिरिक्त मजबूती मिली है। विदेश यात्रा या विदेश में शिक्षा के लिए डॉलर खरीदने वाले छात्रों और पर्यटकों को ऊंची विनिमय दरों का सामना करना पड़ेगा।
- **कंपनियों और रोजगार पर असर:** बहुराष्ट्रीय कंपनियों द्वारा अनिश्चितता के कारण पूंजीगत निवेश घटाने से नई भर्तियों की गति धीमी पड़ सकती है। निजी क्षेत्र में काम करने वाले कर्मचारियों और सप्लायर्स को वैश्विक मांग में उतार-चढ़ाव के प्रति सतर्क रहना होगा।

## ऐसा क्यों हुआ
वाशिंगटन और बीजिंग के बीच नया तनाव अमेरिकी नेतृत्व की आक्रामक संरक्षणवादी नीतियों और पूर्ववर्ती अनसुलझे व्यापारिक विवादों के दोबारा उभरने का प्रत्यक्ष परिणाम है।

- **संरक्षणवादी नीतियां और चुनावी वादे:** राष्ट्रपति पद पर लौटने के बाद डोनाल्ड ट्रंप ने अपने वादे के अनुसार 20 जनवरी 2025 को चीनी आयात पर 60 प्रतिशत टैरिफ लागू कर दिया, जिसने पुराने ट्रेड वॉर को फिर भड़का दिया। इससे पूर्व 2018 में शुरू हुए आर्थिक विवाद के तहत दोनों पक्षों ने ऑटोमोबाइल और सोयाबीन पर भारी शुल्क लगाए थे।
- **महामारी और अनसुलझे मुद्दे:** जनवरी 2020 में हस्ताक्षरित 'फेज वन' समझौते में संरचनात्मक सुधारों की शर्त रखी गई थी, लेकिन कोरोना वायरस महामारी के कारण यह प्रक्रिया अधूरी रह गई। इसके बाद जो बाइडेन प्रशासन ने भी शुल्कों को बरकरार रखा और नए लेवी जोड़ दिए, जिससे बुनियादी अविश्वास कभी खत्म नहीं हुआ।
- **मुद्रा और ब्याज दरों का दबाव:** कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और बढ़ती मुद्रास्फीति के कारण अमेरिकी यील्ड में तेज उछाल आया है, जिससे डॉलर मजबूत हुआ। बैंक ऑफ जापान द्वारा दरें 1.00% से बढ़ाकर 1.25% करने और अधिकारियों की चेतावनियों के बावजूद येन पर बिकवाली का भारी दबाव बना हुआ है।

## सवाल-जवाब

### 1. चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने वाशिंगटन में क्या संदेश दिया?
शी जिनपिंग ने कहा कि चीन और अमेरिका को एक-दूसरे का प्रतिद्वंद्वी बनने के बजाय साझेदार के रूप में शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व का रास्ता निकालना चाहिए, क्योंकि टकराव से दोनों का नुकसान होगा।

### 2. डोनाल्ड ट्रंप ने सत्ता में लौटते ही चीन पर क्या कदम उठाया?
डोनाल्ड ट्रंप ने 20 जनवरी 2025 को राष्ट्रपति पद संभालने के साथ ही चीनी उत्पादों पर 60 प्रतिशत आयात शुल्क लागू कर दिया।

### 3. बैंक ऑफ जापान ने ब्याज दरों को लेकर क्या निर्णय लिया?
बैंक ऑफ जापान ने 7-2 के बहुमत से अपनी अल्पकालिक ब्याज दर लक्ष्य को 1.00 प्रतिशत से बढ़ाकर 1.25 प्रतिशत कर दिया है।

### 4. सोने की कीमतों में गिरावट की मुख्य वजह क्या है?
फेडरल रिजर्व द्वारा इस साल ब्याज दरों में और बढ़ोतरी किए जाने की संभावनाओं के चलते सोना गिरकर 4,275 डॉलर प्रति औंस के करीब आ गया।

### 5. यूएसडी/जेपीवाई का मौजूदा बाजार भाव और प्रमुख स्तर क्या हैं?
लाइव आंकड़ों के अनुसार यूएसडी/जेपीवाई 158.73 पर है, जिसमें 158.76 का पिवट स्तर और 158.66 तथा 158.82 के निकटतम सपोर्ट व रेजिस्टेंस स्तर हैं।

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