चीन के राहत पैकेज से शेयर बाजार की गिरावट थमी, लेकिन तेजी के संकेत कमजोर चीनी नीति निर्माताओं के ताजा कदमों से घरेलू शेयर बाजार में तेज गिरावट पर ब्रेक लगा है, लेकिन विश्लेषकों का मानना है कि यह व्यवस्था लंबी तेजी देने के बजाय केवल सुरक्षा स्तर तैयार करती है। घरेलू शेयर बाजारों में हालिया बिकवाली और गिरावट के दौर के बाद चीन के नीति निर्माताओं ने बाजार को संभालने की कोशिशें तेज कर दी हैं। सुधारात्मक कदमों की इस कड़ी में प्रतिभूति, कोष और बीमा कंपनियों के लिए स्वैप सुविधा यानी एसएफआईएसएफ के दायरे को बढ़ाने के साथ-साथ शेयरों की पुनर्खरीद के लिए सस्ते दरों पर आसान पुनर्वित्त कर्ज की पेशकश की गई है। इसके अलावा नए सार्वजनिक निर्गम यानी आईपीओ की रफ्तार पर अनौपचारिक पाबंदियां भी लगाई गई हैं। इन तमाम उपायों का प्राथमिक उद्देश्य बाजार में निवेशकों के मनोबल को सहारा देना और सूचकांकों के लिए एक मजबूत नीतिगत आधार तैयार करना है, ताकि शेयरों में बड़ी गिरावट का जोखिम सीमित रह सके। नीतिगत आधार को मजबूत करने की कोशिश बाजार के जानकारों का आकलन है कि इन कदमों से गिरावट को थामने में भले ही मदद मिले, लेकिन शेयरों में लंबे समय तक टिकने वाली बड़ी तेजी लाने के लिए यह पर्याप्त साबित नहीं हो रहे हैं। सोसिएते जेनेराल की मिशेल लैम ने हालिया नीतिगत फैसलों का मूल्यांकन करते हुए रेखांकित किया कि इन उपायों से मुख्य रूप से बाजार के लिए एक सुरक्षा घेरा तैयार होता है। मिशेल लैम के अनुसार, चीनी नीति निर्माताओं ने हालिया गिरावट के बाद स्टॉक मार्केट को स्थिर करने के प्रयासों को काफी तेज किया है। उन्होंने बताया कि ताजा कदमों से सेक्योरिटीज, फंड्स एंड इंश्योरेंस कंपनीज स्वैप फैसिलिटी (एसएफआईएसएफ) के जरिए अतिरिक्त 100 अरब आरएमबी की लिक्विडिटी बाजार में आ सकती है। इसके साथ ही शेयर पुनर्खरीद और शेयरधारिता बढ़ाने से जुड़े ऋणों के लिए सस्ती ब्याज दरों पर 200 अरब आरएमबी या उससे अधिक की अतिरिक्त मांग पैदा होने की संभावना बन रही है। मिशेल लैम ने स्पष्ट किया कि अधिकारियों की नीतिगत दिशा बिल्कुल साफ है और वे बाजार के नीचे एक मजबूत नीतिगत आधार खड़ा करना चाहते हैं, हालांकि ये उपाय बड़ी रैली लाने के मुकाबले गिरावट को सीमित करने में ज्यादा असरदार हैं। विश्लेषकों का यह भी मानना है कि इन पहलों का सबसे मजबूत असर बाजार को मिलने वाले संकेतों से पैदा होता है। बार-बार किए जा रहे नीतिगत हस्तक्षेपों से यह साबित होता है कि जब भी बाजार भारी दबाव में आएगा, अधिकारी तुरंत दखल देने को तैयार रहेंगे, जिससे एक मजबूत नीतिगत आधार की मौजूदगी पर निवेशकों का भरोसा गहरा होता है। अमेरिकी राजनीति और वैश्विक मुद्राओं का रुख दूसरी तरफ एशियाई कारोबारी सत्र में वैश्विक मुद्रा बाजारों में भी काफी उथल-पुथल देखने को मिली। बुधवार के कारोबारी सत्र में शुरुआती अमेरिकी मध्यावधि चुनाव के नतीजों से उभरी राजनीतिक अनिश्चितता के कारण अमेरिकी डॉलर पर भारी दबाव देखा गया। वाशिंगटन में राजनीतिक गतिरोध की संभावनाओं ने सुरक्षित निवेश वाली संपत्तियों की तरफ रुझान बढ़ा दिया, जिससे अमेरिकी बॉन्ड प्रतिफल में नई गिरावट दर्ज की गई। अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में आई इस कमी ने फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में बढ़ोतरी से जुड़े दावों के असर को खत्म कर दिया, जिससे अमेरिकी करेंसी और अधिक कमजोर हुई। इस माहौल में ऑस्ट्रेलियाई डॉलर बनाम अमेरिकी डॉलर (AUD/USD) दो सप्ताह के निचले स्तर से ऊपर संभलते हुए 0.6965 के आसपास स्थिर कारोबार करता नजर आया। हालांकि, रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया (आरबीए) के कम आक्रामक रुख ने ऑस्ट्रेलियाई मुद्रा की बढ़त को एक सीमित दायरे में बांधे रखा। वहीं दूसरी तरफ डॉलर बनाम जापानी येन (USD/JPY) पर बुधवार को भारी बिकवाली का दबाव देखा गया। एशियाई सत्र के दौरान यह मुद्रा जोड़ी गिरकर 158.00 के स्तर से नीचे आ गई, क्योंकि अमेरिकी मध्यावधि चुनाव के शुरुआती मतों की गिनती के बाद पैदा हुई राजनीतिक अनिश्चितता के चलते अमेरिकी डॉलर एक महीने के निचले स्तर पर फिसल गया। सुरक्षित निवेश के प्रवाह और अमेरिकी बॉन्ड प्रतिफल में तेज गिरावट ने ग्रीनबैक को नीचे धकेलने में अहम भूमिका निभाई। सोने में उछाल और क्रिप्टोकरेंसी बाजार में तेजी मुद्रा बाजारों में डॉलर की कमजोरी और गिरते अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड का सीधा फायदा बहुमूल्य धातुओं को मिला। सोना पिछले दो लगातार कारोबारी सत्रों की गिरावट को पीछे छोड़ते हुए बुधवार को दोबारा संभलने में कामयाब रहा। पीली धातु ने 4,000 डॉलर प्रति ट्रॉय औंस के अहम मनोवैज्ञानिक स्तर के ऊपर अपनी स्थिति फिर से बहाल कर ली। अमेरिकी डॉलर में आई भारी गिरावट, अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में नरमी और कच्चे तेल की कीमतों में आई नरमी ने मिलकर सोने की कीमतों में इस रिकवरी को पूरा समर्थन दिया। इसी बीच डिजिटल एसेट बाजार में भी निवेशकों का जोखिम उठाने का नजरिया बेहतर होता दिखा। व्यापक क्रिप्टोकरेंसी बाजार में सकारात्मक धारणा लौटने के चलते बुधवार को बिटकॉइन 78,000 डॉलर के स्तर से ऊपर कारोबार करता नजर आया। बिटकॉइन की इस रिकवरी की राह पर चलते हुए दूसरी सबसे बड़ी डिजिटल करेंसी एथेरियम भी संभली और 2,300 डॉलर के स्तर के ऊपर टिकी रही। इसके अलावा रिपल (एक्सआरपी) भी लगातार दो दिनों की बढ़त दर्ज करते हुए 1.28 डॉलर से ऊपर कारोबार करता रहा। वैश्विक बाजारों में राजनीतिक अनिश्चितता और मुद्रा प्रवाह के बीच अलग-अलग एसेट क्लास अपनी दिशा तय करने की कोशिश में जुटे हैं। इसका आप पर असर चीन के नीतिगत कदमों और अमेरिकी राजनीतिक उथल-पुथल से वैश्विक बाजार में लिक्विडिटी और सुरक्षित संपत्तियों का मिजाज बदल रहा है। • भारत में निवेशक: वैश्विक बाजार में डॉलर की कमजोरी और कच्चे तेल की सुस्ती भारतीय इक्विटी सूचकांकों के लिए राहत लेकर आ सकती है। इससे आयात बिल और मुद्रास्फीति का दबाव कम होने से घरेलू बाजारों को स्थिरता मिल सकती है। • सोने के खरीदार: अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने के फिर 4,000 डॉलर के पार जाने से घरेलू खुदरा बाजार में आभूषण महंगे हो सकते हैं। शादी-ब्याह के सीजन में खरीदारी की योजना बना रहे ग्राहकों को ऊंचे भाव पर सौदे करने पड़ सकते हैं। • करेंसी ट्रेडर: अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में गिरावट से डॉलर इंडेक्स कमजोर हुआ है, जिससे उभरते बाजारों की मुद्राओं को फौरी राहत मिलेगी। रुपया-डॉलर के सौदों में ट्रेडर्स को अपनी शॉर्ट पोजीशन और स्टॉप-लॉस पर नजर रखनी चाहिए। • क्रिप्टो निवेशक: बिटकॉइन के 78,000 डॉलर के ऊपर टिकने से भारतीय क्रिप्टो ट्रेडर्स के पोर्टफोलियो में सुधार देखने को मिल सकता है। जोखिम की धारणा सुधरने से प्रमुख टोकन में अल्पकालिक तेजी का फायदा उठाया जा सकता है। ऐसा क्यों हुआ चीनी शेयर बाजार में हालिया तीव्र बिकवाली को थामने और पूंजी निकासी रोकने के लिए अधिकारियों ने व्यवस्थित हस्तक्षेप किया है। • सीधा कारण: हालिया बाजार गिरावट के बाद घरेलू इक्विटी सूचकांकों को स्थिर करने के लिए नीति निर्माताओं ने विशेष लिक्विडिटी साधनों का सहारा लिया। इसके तहत स्वैप सुविधा और सस्ते पुनर्खरीद ऋणों की घोषणा की गई ताकि शेयर बाजारों में बिकवाली को रोका जा सके। • अनुकूल परिस्थितियां: एसएफआईएसएफ के विस्तार और सस्ते ब्याज पर ऋण उपलब्ध कराने से संस्थागत निवेशकों के लिए बाजार में प्रवेश आसान हुआ है। साथ ही नए आईपीओ पर अनौपचारिक रोक लगाकर बाजार में शेयरों की नई आपूर्ति को नियंत्रित किया गया। • वैश्विक कारक: अमेरिकी मध्यावधि चुनावों की अनिश्चितता और बॉन्ड यील्ड में गिरावट के चलते डॉलर कमजोर हुआ, जिससे सुरक्षित निवेश संपत्तियों और अन्य बाजारों को सांस लेने का मौका मिला। • आगे क्या होगा: बाजार विश्लेषकों का मानना है कि ये उपाय तात्कालिक गिरावट को सीमित कर एक मजबूत सुरक्षा घेरा बनाएंगे, हालांकि दीर्घकालिक तेजी के लिए आगे और संरचनात्मक सुधारों की दरकार होगी। सवाल-जवाब 1. चीन के नीति निर्माताओं ने बाजार को सहारा देने के लिए क्या कदम उठाए हैं? अधिकारियों ने एसएफआईएसएफ का दायरा बढ़ाया है, शेयर बायबैक के लिए सस्ते पुनर्वित्त ऋण दिए हैं और नए आईपीओ पर अनौपचारिक पाबंदियां लगाई हैं। 2. एसएफआईएसएफ के जरिए बाजार में कितनी अतिरिक्त लिक्विडिटी आ सकती है? सोसिएते जेनेराल की मिशेल लैम के अनुसार इस सुविधा के विस्तार से बाजार में 100 अरब आरएमबी की अतिरिक्त पूंजी आ सकती है। 3. शेयर बायबैक और शेयरहोल्डिंग बढ़ाने के लिए कितने ऋण की संभावना है? सस्ती ब्याज दरों पर शेयर पुनर्खरीद और हिस्सेदारी बढ़ाने के लिए 200 अरब आरएमबी या उससे अधिक के अतिरिक्त कर्ज की मांग पैदा हो सकती है। 4. अमेरिकी मध्यावधि चुनाव के शुरुआती नतीजों का डॉलर पर क्या असर पड़ा? वाशिंगटन में राजनीतिक अनिश्चितता और गतिरोध की आशंका से अमेरिकी डॉलर एक महीने के निचले स्तर पर फिसल गया। 5. सोने और बिटकॉइन की कीमतों में बुधवार को क्या बदलाव देखा गया? सोना दोबारा संभलकर 4,000 डॉलर प्रति औंस के पार पहुंच गया, जबकि बिटकॉइन 78,000 डॉलर के स्तर के ऊपर कारोबार करता नजर आया। https://trendkia.com/market/china-ke-rahata-paikeja-se-sheyara-bajara-ki-giravata-thami-lekina-teji-ke-snketa-kamajora-56577 TrendKia — Har trend, sabse pehle.