चीन की तीसरी तिमाही में अप्रत्याशित आर्थिक मजबूती, स्टैंडर्ड चार्टर्ड ने 2026 के विकास अनुमान पर जताया भरोसा मजबूत निर्यात और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मांग के सहारे चीन की अर्थव्यवस्था में तीसरी तिमाही के दौरान सुधार देखा गया है। स्टैंडर्ड चार्टर्ड ने जहां 2026 के लिए 4.6 प्रतिशत विकास दर का अनुमान बरकरार रखा है, वहीं वैश्विक बाजारों में ब्याज दरों और मुद्राओं के बीच उठापटक तेज हो गई है। चीन की अर्थव्यवस्था ने चालू वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही में उम्मीद से बेहतर प्रदर्शन करते हुए वैश्विक बाजारों को सकारात्मक संकेत दिए हैं। निर्यात क्षेत्र की शानदार रफ्तार और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़े आधुनिक विनिर्माण की मजबूत मांग ने आर्थिक गतिविधियों को नई दिशा दी है। स्टैंडर्ड चार्टर्ड के अर्थशास्त्री हंटर चान के ताजा विश्लेषण के अनुसार, तीसरी तिमाही में सकल घरेलू उत्पाद यानी जीडीपी में सालाना आधार पर 4.5 प्रतिशत की दर से बढ़ोतरी दर्ज की गई। तिमाही दर तिमाही आधार पर मौसमी समायोजन के बाद यह विकास दर 1.2 प्रतिशत रही, जो कि दूसरी तिमाही के 0.9 प्रतिशत की तुलना में तेज सुधार को दर्शाती है। हालांकि घरेलू खपत की रफ्तार अभी भी सुस्त बनी हुई है, लेकिन औद्योगिक उत्पादन और बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में नए निवेश ने समग्र विकास परिदृश्य को संतुलित रखने में मदद की है। स्टैंडर्ड चार्टर्ड का आर्थिक परिदृश्य और मुद्रास्फीति का रुख अर्थशास्त्री हंटर चान के आकलन के मुताबिक, बैंक ने चालू वर्ष की अंतिम तिमाही के साथ-साथ पूरे 2026 के लिए अपने जीडीपी विकास पूर्वानुमानों को स्थिर बनाए रखा है। बैंक का मानना है कि चौथी तिमाही में देश की विकास दर 4.7 प्रतिशत रह सकती है, जबकि 2026 के पूरे कैलेंडर वर्ष के लिए यह आंकड़ा 4.6 प्रतिशत के आसपास रहने का अनुमान है। उत्पादन और विकास की गति स्थिर रहने के बावजूद मुद्रास्फीति के मोर्चे पर एक अजीब द्वंद्व देखने को मिल रहा है। स्टैंडर्ड चार्टर्ड ने 2026 के लिए उपभोक्ता मूल्य सूचकांक यानी सीपीआई मुद्रास्फीति के अपने अनुमान को घटाकर 0.9 प्रतिशत कर दिया है। उपभोक्ता मूल्य सूचकांक में यह कटौती इस बात का संकेत है कि वैश्विक ऊर्जा कीमतों का असर स्थानीय खुदरा बाजारों तक उस तेजी से नहीं पहुंच रहा है जैसा पहले अनुमान लगाया गया था। इसके साथ ही खाद्य कीमतों में लगातार जारी गिरावट ने भी खुदरा महंगाई को निचले स्तर पर बांध रखा है। दूसरी तरफ, उत्पादक मूल्य सूचकांक यानी पीपीआई में भारी उछाल के संकेत मिल रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल और औद्योगिक धातुओं की ऊंची लागत तथा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़े तकनीकी उपकरणों और उत्पादों की भारी मांग के चलते इस वर्ष पीपीआई मुद्रास्फीति 3 प्रतिशत के आंकड़े को पार कर सकती है। यह स्थिति दिखाती है कि कारखानों और विनिर्माताओं की इनपुट लागत लगातार बढ़ रही है, जबकि खुदरा बाजार में खरीदारों की मांग कमजोर बनी हुई है। घरेलू खपत की कमजोरी और निवेश में सुधार आर्थिक आंकड़ों के गहरे विश्लेषण से पता चलता है कि चीन के भीतर व्यक्तिगत उपभोग की स्थिति अभी पूरी तरह पटरी पर नहीं लौटी है। घरेलू स्तर पर उपभोक्ता खर्च की रफ्तार लोगों की खर्च करने योग्य आय यानी डिस्पोजेबल इनकम की तुलना में काफी धीमी रही है। इसका सीधा मतलब यह है कि आम नागरिक अपनी बचत बढ़ाने पर ज्यादा ध्यान दे रहे हैं और बड़े खर्चों से बच रहे हैं। खुदरा मांग में यह झिझक उन क्षेत्रों के लिए चिंता का विषय है जो सीधे तौर पर घरेलू बाजार की खपत पर निर्भर करते हैं। दूसरी ओर, अचल संपत्ति निवेश यानी फिक्स्ड एसेट इन्वेस्टमेंट के मोर्चे पर एक बड़ी राहत देखने को मिली है। लगातार छह महीनों की मासिक गिरावट के सिलसिले को तोड़ते हुए अचल संपत्ति निवेश में आखिरकार सकारात्मक बदलाव दर्ज किया गया। यह सुधार मुख्य रूप से विनिर्माण और बुनियादी ढांचे में सरकारी एवं निजी पूंजी प्रवाह बढ़ने के कारण संभव हुआ है। विश्लेषकों का स्पष्ट मानना है कि अगर विकास की इस गति को बनाए रखना है, तो बजटीय आवंटन का त्वरित क्रियान्वयन बेहद जरूरी होगा। इसके तहत बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के लिए सरकारी फंड की तेजी से निकासी और स्थानीय सरकारों के छिपे हुए कर्जों तथा बकायों का तत्काल निपटारा सबसे अहम कदम साबित होंगे। वैश्विक मुद्रा बाजारों पर असर और ऑस्ट्रेलियाई डॉलर की तेजी चीन से आए उत्साहजनक जीडीपी और खुदरा बिक्री के आंकड़ों का सीधा असर अंतरराष्ट्रीय मुद्रा बाजारों पर दिखाई दिया है। जोखिम लेने की निवेशकों की भूख बढ़ने से ऑस्ट्रेलियाई डॉलर को बड़ा संबल मिला। ऑस्ट्रेलियाई डॉलर ने अमेरिकी डॉलर के मुकाबले लगातार दो दिनों की बढ़त दर्ज की और 0.50 प्रतिशत से अधिक की मजबूती के साथ 0.6980 के स्तर पर कारोबार करता देखा गया। ऑस्ट्रेलिया का चीन के साथ गहरा व्यापारिक संबंध होने के कारण चीनी औद्योगिक सुधार की हर सकारात्मक खबर ऑस्ट्रेलियाई मुद्रा के लिए सीधे तौर पर फायदेमंद साबित होती है। इसके विपरीत, अमेरिकी डॉलर और जापानी येन के बीच का समीकरण काफी संवेदनशील दौर में पहुंच गया है। एशियाई कारोबारी सत्र के दौरान यूएसडी और जेपीवाई की जोड़ी 158.00 के आसपास रक्षात्मक रुख में बनी रही। अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में हालिया गिरावट के चलते अमेरिकी डॉलर दो सप्ताह के निचले स्तर के करीब दबाव में रहा। वहीं बैंक ऑफ जापान के गवर्नर काज़ुओ उएदा के सख्त बयानों और येन के समर्थन में जापानी अधिकारियों द्वारा संभावित बाजार हस्तक्षेप की आशंकाओं ने येन को मजबूती दी है। हालांकि भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं और अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में बढ़ोतरी की अटकलों के कारण अमेरिकी डॉलर का नुकसान सीमित रहने की भी संभावना जताई जा रही है। सोने के भाव पर दबाव और अमेरिकी फेडरल रिजर्व का रुख कमोडिटी बाजार में सोने की चमक थोड़ी फीकी पड़ती नजर आई। शुक्रवार को आई गिरावट के बाद सोमवार को भी पीली धातु पर बिकवाली का दबाव बना रहा और हाजिर सोना 4,150 डॉलर प्रति ट्रॉय औंस के मनोवैज्ञानिक स्तर से नीचे फिसल गया। अमेरिकी डॉलर में आए हल्के सुधार और अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में सभी अवधियों में हुई रिकवरी ने सोने की कीमतों पर भारी दबाव बनाया हुआ है। जब बांड यील्ड में तेजी आती है, तो बिना ब्याज वाली संपत्तियों जैसे सोने में निवेशकों की रुचि घट जाती है। मुद्रा और कमोडिटी बाजारों की इस पूरी हलचल के केंद्र में अमेरिका के मुद्रास्फीति आंकड़े और केंद्रीय बैंक की मौद्रिक नीति हैं। अमेरिका में हाल ही में जारी सीपीआई रिपोर्ट उम्मीद से ज्यादा मजबूत आई है, जिसने दिसंबर में ब्याज दरें बढ़ाए जाने की संभावना को फिर से हवा दे दी है। यद्यपि फेडरल रिजर्व के प्रमुख वॉर्श ने 28 अक्टूबर को होने वाली आगामी मौद्रिक बैठक में दरों को यथावत रखने के संकेत दिए हैं, लेकिन वित्तीय बाजार अब दो चरणों वाली योजना की ओर देख रहे हैं। बाजार सहभागियों का अनुमान है कि फेडरल रिजर्व 28 अक्टूबर को ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं करेगा, लेकिन इसके बाद 9 दिसंबर को होने वाली बैठक में नीतिगत दरों में बढ़ोतरी का सख्त कदम उठा सकता है। इसका आप पर असर चीन के मजबूत आर्थिक आंकड़ों और अमेरिकी ब्याज दर वृद्धि की आशंकाओं से वैश्विक वित्तीय बाजारों, कमोडिटी कीमतों और मुद्रा दरों पर सीधा प्रभाव पड़ेगा। • भारतीय शेयर निवेशकों के लिए: वैश्विक जोखिम भूख सुधरने से एशियाई बाजारों में स्थिरता आएगी। हालांकि अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और संभावित ब्याज दर वृद्धि के कारण विदेशी संस्थागत निवेशकों का रुख सतर्क बना रह सकता है। • सोने और आभूषण खरीदारों के लिए: अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने के 4,150 डॉलर से नीचे फिसलने से खुदरा कीमतों में ठहराव आ सकता है। कीमतों में आई यह नरमी घरेलू स्तर पर शादी और त्योहारों के दौरान खरीदारी करने वालों को कुछ राहत दे सकती है। • आयात और निर्यात कारोबारियों के लिए: औद्योगिक धातुओं और कच्चे तेल की बढ़ती लागत के चलते विनिर्माण इनपुट महंगे हो सकते हैं। आयातकों को ऊंची लागत झेलनी पड़ सकती है, जबकि तकनीकी और इलेक्ट्रॉनिक निर्यातकों को मांग का फायदा मिलेगा। • मुद्रा विनिमय और विदेश यात्रा: अमेरिकी डॉलर के उतार-चढ़ाव और मजबूत बॉन्ड यील्ड से विकासशील देशों की मुद्राओं में अस्थिरता बढ़ सकती है। विदेश यात्रा या शिक्षा के लिए डॉलर खरीदने वालों को विनिमय दरों पर नजदीकी नजर रखनी चाहिए। ऐसा क्यों हुआ चीन की आर्थिक वृद्धि में यह अप्रत्याशित उछाल और वैश्विक बाजारों की प्रतिक्रिया कई महत्वपूर्ण कारकों के संयोजन का परिणाम है। मजबूत औद्योगिक मांग और केंद्रीय बैंकों की भिन्न नीतियों ने इस पूरे परिदृश्य को जन्म दिया है। • आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और निर्यात मांग: अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तकनीकी क्रांति और एआई उपकरणों की भारी मांग ने चीन के कारखानों को व्यस्त रखा है। इसके चलते तीसरी तिमाही में औद्योगिक उत्पादन और निर्यात में तेज उछाल देखने को मिला। • बुनियादी ढांचे में पूंजी प्रवाह: अचल संपत्ति निवेश में छह महीने से जारी गिरावट आखिरकार इसलिए रुकी क्योंकि विनिर्माण और इंफ्रास्ट्रक्चर में पूंजी का निवेश तेज हुआ। सरकार द्वारा स्थानीय ऋणों को चुकाने और फंड जारी करने के प्रयासों ने इसमें भूमिका निभाई। • घरेलू बचत की प्रवृत्ति: खुदरा बाजार में सुस्ती का कारण यह है कि आम चीनी नागरिक आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच खर्च करने के बजाय बचत बढ़ा रहे हैं। इस वजह से उपभोक्ता कीमतें कम रहीं, जबकि कारखानों की लागत बढ़ती रही। • अमेरिकी मुद्रास्फीति और केंद्रीय बैंक की नीति: अमेरिका में मजबूत सीपीआई आंकड़ों ने निवेशकों को यह मानने पर मजबूर किया कि फेडरल रिजर्व 9 दिसंबर को दरें बढ़ा सकता है। इस उम्मीद ने अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और डॉलर को समर्थन दिया, जिससे सोने की चमक कम हुई। सवाल-जवाब 1. चीन की तीसरी तिमाही की जीडीपी विकास दर कितनी रही? तीसरी तिमाही में चीन की जीडीपी सालाना आधार पर 4.5 प्रतिशत और मौसमी समायोजन के बाद तिमाही दर तिमाही आधार पर 1.2 प्रतिशत बढ़ी। 2. स्टैंडर्ड चार्टर्ड ने 2026 के लिए क्या विकास अनुमान रखा है? स्टैंडर्ड चार्टर्ड ने वर्ष 2026 के लिए पूरे साल की जीडीपी विकास दर का अनुमान 4.6 प्रतिशत पर बरकरार रखा है। 3. चीन में उपभोक्ता महंगाई और उत्पादक महंगाई में क्या अंतर देखा जा रहा है? बैंक ने 2026 के लिए सीपीआई अनुमान घटाकर 0.9 प्रतिशत किया है, जबकि कच्चे तेल, धातुओं और एआई उत्पादों की लागत से पीपीआई 3 प्रतिशत के पार जाने की उम्मीद है। 4. अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों को लेकर क्या संभावनाएं जताई जा रही हैं? फेडरल रिजर्व द्वारा 28 अक्टूबर की बैठक में ब्याज दरों को स्थिर रखने और उसके बाद 9 दिसंबर को दरों में बढ़ोतरी किए जाने की उम्मीद है। 5. सोने की कीमतों में हालिया गिरावट क्यों देखी गई? अमेरिकी डॉलर में सुधार और अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में उछाल के कारण सोना 4,150 डॉलर प्रति ट्रॉय औंस के स्तर से नीचे फिसल गया। https://trendkia.com/market/china-ki-tisari-timahi-men-apratyashita-arthika-majabuti-standard-chartered-ne-2026-ke-vikasa-anumana-para-jataya-bharosa-49540 TrendKia — Har trend, sabse pehle.