चीन में फैक्ट्री रफ्तार पड़ी सुस्त, जुलाई में मैन्युफैक्चरिंग PMI गिरकर 50.9 पर, ऑस्ट्रेलियाई डॉलर पर असर नहीं चीन का रेटिंगडॉग मैन्युफैक्चरिंग PMI जुलाई में घटकर 50.9 पर आ गया, जो जून के 51.7 और बाजार के 51.5 के अनुमान दोनों से कम है। इस कमजोर आंकड़े के बावजूद ऑस्ट्रेलियाई डॉलर लगभग स्थिर रहा। चीन के कारखानों की रफ्तार जुलाई में थोड़ी धीमी पड़ गई। सोमवार को जारी हुए ताजा आंकड़ों के मुताबिक चीन का रेटिंगडॉग मैन्युफैक्चरिंग परचेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स यानी PMI जुलाई में गिरकर 50.9 पर आ गया, जबकि जून में यह 51.7 पर था। बाजार को उम्मीद थी कि यह आंकड़ा 51.5 रहेगा, लेकिन असल नतीजा उससे भी नीचे रहा। इसका मतलब है कि विनिर्माण गतिविधि अब भी बढ़ रही है, मगर पहले के मुकाबले उसकी गति थोड़ी कमजोर हुई है। दिलचस्प बात यह रही कि इस सुस्त आंकड़े के बावजूद ऑस्ट्रेलियाई डॉलर पर कोई खास असर नहीं दिखा। ऑस्ट्रेलियाई डॉलर को अक्सर चीन की अर्थव्यवस्था का प्रॉक्सी माना जाता है, फिर भी PMI के इस आंकड़े के बाद इसमें लगभग कोई हलचल नहीं हुई। खबर लिखे जाने तक AUD/USD जोड़ी दिन के मुकाबले 0.18% की मामूली बढ़त के साथ 0.7035 पर कारोबार कर रही थी। चीन का आंकड़ा ऑस्ट्रेलिया के लिए क्यों अहम है चीन ऑस्ट्रेलिया का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है, इसलिए चीनी अर्थव्यवस्था की सेहत सीधे तौर पर ऑस्ट्रेलियाई डॉलर की कीमत को प्रभावित करती है। जब चीन की अर्थव्यवस्था तेजी से दौड़ती है, तो वह ऑस्ट्रेलिया से ज्यादा कच्चा माल, वस्तुएं और सेवाएं खरीदता है। इससे ऑस्ट्रेलियाई डॉलर की मांग बढ़ती है और उसकी कीमत ऊपर चढ़ती है। इसके उलट, जब चीन की रफ्तार उम्मीद से धीमी होती है, तो इसका असर ऑस्ट्रेलियाई मुद्रा पर उलटा पड़ता है। यही वजह है कि चीन के विकास से जुड़े आंकड़ों में सकारात्मक या नकारात्मक कोई भी चौंकाने वाली बात अक्सर सीधे ऑस्ट्रेलियाई डॉलर और उससे जुड़ी करेंसी जोड़ियों पर दिखती है। ब्याज दरें और रिज़र्व बैंक की भूमिका ऑस्ट्रेलियाई डॉलर को दिशा देने वाले सबसे बड़े कारकों में से एक है रिज़र्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया यानी RBA की तय की गई ब्याज दरें। RBA वह दर तय करता है जिस पर ऑस्ट्रेलियाई बैंक आपस में एक-दूसरे को कर्ज देते हैं, और इससे पूरी अर्थव्यवस्था में ब्याज दरों का स्तर तय होता है। केंद्रीय बैंक का मुख्य मकसद महंगाई को 2 से 3% के बीच स्थिर बनाए रखना है, और इसके लिए वह ब्याज दरों को ऊपर या नीचे करता रहता है। अगर दूसरे बड़े केंद्रीय बैंकों की तुलना में ऑस्ट्रेलिया की ब्याज दरें ऊंची हैं, तो यह ऑस्ट्रेलियाई डॉलर को मजबूती देता है, और अगर दरें अपेक्षाकृत नीची हैं तो इसका असर उल्टा होता है। इसके अलावा RBA क्रेडिट की स्थितियों को प्रभावित करने के लिए क्वांटिटेटिव ईज़िंग और टाइटनिंग जैसे उपाय भी इस्तेमाल करता है। इसमें ईज़िंग ऑस्ट्रेलियाई डॉलर के लिए नकारात्मक मानी जाती है, जबकि टाइटनिंग उसके लिए सकारात्मक होती है। लौह अयस्क की कीमत का सीधा असर ऑस्ट्रेलिया संसाधनों से भरपूर देश है और उसकी मुद्रा को समझने के लिए उसके सबसे बड़े निर्यात यानी लौह अयस्क पर नजर रखना जरूरी है। 2021 के आंकड़ों के मुताबिक ऑस्ट्रेलिया का सबसे बड़ा निर्यात लौह अयस्क ही है, जो सालाना 118 अरब डॉलर का कारोबार करता है, और इसका मुख्य खरीदार चीन है। इसीलिए लौह अयस्क की कीमत ऑस्ट्रेलियाई डॉलर की चाल तय करने में बड़ी भूमिका निभाती है। आमतौर पर जब लौह अयस्क की कीमत चढ़ती है, तो ऑस्ट्रेलियाई डॉलर भी ऊपर जाता है, क्योंकि इस मुद्रा की कुल मांग बढ़ जाती है। इसके उलट, जब लौह अयस्क सस्ता होता है, तो ऑस्ट्रेलियाई डॉलर पर दबाव आता है। ऊंची कीमतों का एक और फायदा यह होता है कि इससे ऑस्ट्रेलिया के लिए व्यापार संतुलन के सकारात्मक रहने की संभावना बढ़ जाती है, जो अपने आप में ऑस्ट्रेलियाई डॉलर के लिए अच्छी खबर है। व्यापार संतुलन का पहलू व्यापार संतुलन भी ऑस्ट्रेलियाई डॉलर की कीमत को प्रभावित करने वाला एक अहम कारक है। सीधे शब्दों में कहें तो व्यापार संतुलन किसी देश की निर्यात से होने वाली कमाई और आयात पर होने वाले खर्च के बीच का अंतर होता है। अगर ऑस्ट्रेलिया ऐसी चीजें बनाता है जिनकी दुनिया भर में जबरदस्त मांग है, तो विदेशी खरीदारों की मांग की वजह से ही उसकी मुद्रा को मजबूती मिलती है, क्योंकि खरीदार आयात पर होने वाले खर्च की तुलना में उसका निर्यात ज्यादा खरीदना चाहते हैं। इस तरह सकारात्मक यानी सरप्लस व्यापार संतुलन ऑस्ट्रेलियाई डॉलर को मजबूत करता है, जबकि नकारात्मक व्यापार संतुलन का असर ठीक उल्टा होता है। बाजार का मूड भी अहम इन आर्थिक कारकों के अलावा बाजार का समग्र रुख भी ऑस्ट्रेलियाई डॉलर की चाल तय करता है। जब निवेशक जोखिम भरे एसेट्स की ओर झुकते हैं, जिसे रिस्क-ऑन कहा जाता है, तो यह ऑस्ट्रेलियाई डॉलर के लिए सकारात्मक होता है। इसके उलट जब निवेशक सुरक्षित ठिकानों यानी सेफ-हेवन की ओर भागते हैं, यानी रिस्क-ऑफ का माहौल बनता है, तो ऑस्ट्रेलियाई मुद्रा दबाव में आ जाती है। जुलाई के PMI आंकड़े के मामले में भले ही संख्या अनुमान से कमजोर रही, लेकिन बाजार की प्रतिक्रिया शांत रही और ऑस्ट्रेलियाई डॉलर बड़े पैमाने पर अपनी जगह बना रहा। इसका आप पर असर • निवेशकों के लिए: चीन का मैन्युफैक्चरिंग PMI अनुमान से कमजोर रहने पर भी ऑस्ट्रेलियाई डॉलर स्थिर रहा, यानी फिलहाल AUD/USD में कोई बड़ा उतार-चढ़ाव नहीं दिख रहा। • करेंसी ट्रेडर्स के लिए: ऑस्ट्रेलियाई डॉलर की चाल पर चीन की अर्थव्यवस्था, लौह अयस्क की कीमत और RBA की ब्याज दरों का सीधा असर पड़ता है, इसलिए इन पर नजर रखना जरूरी है। सवाल-जवाब 1. जुलाई में चीन का रेटिंगडॉग मैन्युफैक्चरिंग PMI कितना रहा? जुलाई में यह 50.9 रहा, जबकि जून में यह 51.7 पर था। 2. बाजार को इस आंकड़े से क्या उम्मीद थी? बाजार का अनुमान 51.5 का था, लेकिन असल आंकड़ा उससे कम रहा। 3. इस आंकड़े का ऑस्ट्रेलियाई डॉलर पर क्या असर हुआ? कमजोर आंकड़े के बावजूद ऑस्ट्रेलियाई डॉलर पर लगभग कोई असर नहीं पड़ा। 4. खबर लिखे जाने तक AUD/USD किस स्तर पर था? AUD/USD दिन के मुकाबले 0.18% की बढ़त के साथ 0.7035 पर कारोबार कर रहा था। 5. चीन का आंकड़ा ऑस्ट्रेलियाई डॉलर के लिए क्यों मायने रखता है? चीन ऑस्ट्रेलिया का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है, इसलिए चीनी अर्थव्यवस्था की सेहत सीधे ऑस्ट्रेलियाई डॉलर को प्रभावित करती है। 6. ऑस्ट्रेलिया का सबसे बड़ा निर्यात क्या है? 2021 के आंकड़ों के मुताबिक लौह अयस्क, जो सालाना 118 अरब डॉलर का है और जिसका मुख्य खरीदार चीन है। https://trendkia.com/market/china-men-phaiktri-raphtara-pari-susta-julai-men-mainyuphaikcharinga-pmi-girakara-50-9-para-australian-dollar-para-asara-nahin-13132 TrendKia — Har trend, sabse pehle.