चीन का मैन्युफैक्चरिंग पीएमआई अगस्त में सुधरकर 49.8 पर पहुंचा, नॉन-मैन्युफैक्चरिंग आंकड़े स्थिर राष्ट्रीय सांख्यिकी ब्यूरो के आंकड़ों के अनुसार अगस्त में चीन का मैन्युफैक्चरिंग परचेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स बढ़कर 49.8 पर पहुंच गया, जबकि नॉन-मैन्युफैक्चरिंग पीएमआई 49.0 पर स्थिर रहा। चीन के राष्ट्रीय सांख्यिकी ब्यूरो द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार देश का मैन्युफैक्चरिंग परचेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स यानी पीएमआई अगस्त महीने में सुधरकर 49.8 पर पहुंच गया है। इससे पिछले महीने यानी जुलाई में यह आंकड़ा 49.2 दर्ज किया गया था। इस बार के आंकड़े बाजार के उन अनुमानों से भी बेहतर रहे जिनमें 49.7 रहने की उम्मीद जताई जा रही थी। नॉन-मैन्युफैक्चरिंग गतिविधियों की स्थिति मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र में सुधार के विपरीत नॉन-मैन्युफैक्चरिंग पीएमआई अगस्त में 49.0 पर स्थिर बना हुआ है। जुलाई के महीने में भी यही आंकड़ा 49.0 दर्ज किया गया था, जिससे यह स्पष्ट होता है कि सेवा और अन्य गैर-उत्पादन क्षेत्रों में स्थिति पिछले महीने जैसी ही बनी हुई है। ऑस्ट्रेलियन डॉलर पर असर चीन के इन सकारात्मक पीएमआई आंकड़ों का चीन से जुड़े माने जाने वाले ऑस्ट्रेलियन डॉलर पर बहुत अधिक प्रभाव नहीं देखा गया है। ताजा आंकड़ों के जारी होने के समय AUD/USD जोड़ी में 0.04 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई और यह 0.7162 के स्तर पर कारोबार कर रही थी। ऑस्ट्रेलियन डॉलर को प्रभावित करने वाले मुख्य कारक ऑस्ट्रेलियन डॉलर के मूल्य को तय करने में कई आर्थिक कारक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, जिनमें रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया द्वारा तय की जाने वाली ब्याज दरें सबसे ऊपर हैं। चूंकि ऑस्ट्रेलिया प्राकृतिक संसाधनों से समृद्ध देश है, इसलिए इसके सबसे बड़े निर्यात उत्पाद यानी लौह अयस्क की कीमतें भी इसकी मुद्रा को सीधे प्रभावित करती हैं। इसके अलावा चीन की अर्थव्यवस्था का स्वास्थ्य, जो कि इसका सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार है, घरेलू महंगाई, विकास दर और देश का व्यापार संतुलन भी इसके रुख को तय करते हैं। निवेशकों का बाजार सेंट्रैलिटी रुख यानी जोखिम भरे परिसंपत्तियों में निवेश करना या सुरक्षित निवेश की तलाश करना भी मुद्रा की चाल को तय करता है। आरबीए की नीतियां और ब्याज दरें रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया वाणिज्यिक बैंकों के बीच उधार दरों को नियंत्रित करके ऑस्ट्रेलियन डॉलर को प्रभावित करता है, जिसका असर पूरी अर्थव्यवस्था पर पड़ता है। इस केंद्रीय बैंक का मुख्य लक्ष्य ब्याज दरों में उतार-चढ़ाव करके महंगाई दर को 2 से 3 प्रतिशत के दायरे में बनाए रखना है। प्रमुख केंद्रीय बैंकों की तुलना में ऊंची ब्याज दरें ऑस्ट्रेलियन डॉलर को मजबूती देती हैं, जबकि कम दरें इसके विपरीत असर डालती हैं। चीन के साथ व्यापारिक संबंध और लौह अयस्क का महत्व चीन ऑस्ट्रेलिया का सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार है, इसलिए चीनी अर्थव्यवस्था की सेहत ऑस्ट्रेलियन डॉलर के मूल्य को तय करने में बहुत बड़ी भूमिका निभाती है। जब चीनी अर्थव्यवस्था बेहतर प्रदर्शन करती है, तो वह ऑस्ट्रेलिया से कच्चे माल और सेवाओं की अधिक खरीदारी करती है, जिससे ऑस्ट्रेलियन डॉलर की मांग बढ़ती है। इसके विपरीत, यदि चीन की वृद्धि धीमी होती है, तो इसका नकारात्मक असर पड़ता है। इसके अलावा लौह अयस्क ऑस्ट्रेलिया का सबसे बड़ा निर्यात है, जो 2021 के आंकड़ों के अनुसार सालाना 118 अरब डॉलर का था और जिसका मुख्य गंतव्य चीन है। लौह अयस्क की कीमतों में तेजी आने से ऑस्ट्रेलियन डॉलर की मांग बढ़ती है और इसका मूल्य ऊपर जाता है। व्यापार संतुलन और विदेशी मुद्रा बाजार के अन्य पहलू व्यापार संतुलन यानी किसी देश के निर्यात से होने वाली कमाई और आयात पर खर्च के बीच का अंतर भी ऑस्ट्रेलियन डॉलर की ताकत को तय करता है। यदि कोई देश ऐसे उत्पादों का निर्यात करता है जिनकी वैश्विक मांग अधिक होती है, तो विदेशी खरीदारों की मांग के कारण उसकी मुद्रा मजबूत होती है। इसके अलावा वैश्विक वित्तीय बाजारों में अन्य मुद्रा जोड़ियों जैसे GBP/USD और EUR/USD में भी विभिन्न आर्थिक बयानों और केंद्रीय बैंक की नीतियों के कारण लगातार हलचल बनी हुई है। वैश्विक बाजार और कमोडिटी के रुझान फेडरल रिजर्व के रुख और भू-राजनीतिक तनावों के बीच सोने की कीमतों में भी मामूली रिकवरी देखने को मिली है, हालांकि सुरक्षित निवेश के रूप में अमेरिकी डॉलर की मांग अभी भी मजबूत बनी हुई है। इसके अलावा ऊर्जा बाजार में डीजल और क्रूड ऑयल के मोर्चे पर भी विशेष स्थितियां बनी हुई हैं, जहां डीजल फ्यूचर्स में रिकॉर्ड तेजी दर्ज की गई है। बाजार विश्लेषकों का मानना है कि वैश्विक बाजारों में निवेश करने से पहले सभी निवेशकों को अपनी स्वतंत्र शोध प्रक्रिया पूरी कर लेनी चाहिए क्योंकि खुले बाजारों में व्यापार करने में बड़ा वित्तीय जोखिम शामिल होता है। इसका आप पर असर चीन के पीएमआई आंकड़ों और वैश्विक आर्थिक संकेतकों का सीधा असर अंतरराष्ट्रीय मुद्रा बाजारों और कमोडिटी की कीमतों पर पड़ता है। • भारत में: कच्चे माल और वैश्विक कमोडिटी की कीमतों में उतार-चढ़ाव का असर घरेलू आयातकों और विनिर्माण लागत पर पड़ सकता है। • वैश्विक स्तर पर: मुद्रा बाजार में निवेश करने वाले ट्रेडर्स और निवेशकों को ऑस्ट्रेलियाई डॉलर तथा प्रमुख वैश्विक मुद्राओं के उतार-चढ़ाव पर नजर रखनी चाहिए। • ब्याज दरों पर प्रभाव: केंद्रीय बैंकों की मौद्रिक नीतियां और ब्याज दरों से जुड़े फैसले वैश्विक स्तर पर ऋण और निवेश लागत को प्रभावित करते हैं। • कमोडिटी बाजार: लौह अयस्क और ऊर्जा उत्पादों की कीमतों में बदलाव से संबंधित उद्योगों के शेयर और व्यावसायिक मार्जिन प्रभावित हो सकते हैं। • जोखिम प्रबंधन: खुले बाजारों में निवेश करने वाले निवेशकों को अपनी पूंजी की सुरक्षा के लिए पूरी सावधानी बरतनी चाहिए। सवाल-जवाब 1. अगस्त में चीन का मैन्युफैक्चरिंग पीएमआई कितना रहा? अगस्त में चीन का मैन्युफैक्चरिंग पीएमआई बढ़कर 49.8 पर पहुंच गया, जो जुलाई में 49.2 था। 2. नॉन-मैन्युफैक्चरिंग पीएमआई में क्या स्थिति रही? चीन का नॉन-मैन्युफैक्चरिंग पीएमआई अगस्त में 49.0 पर स्थिर रहा, जो जुलाई के आंकड़े के बराबर है। 3. इन आंकड़ों का ऑस्ट्रेलियन डॉलर पर क्या असर हुआ? चीन के इन आंकड़ों का ऑस्ट्रेलियन डॉलर पर बहुत कम प्रभाव पड़ा और AUD/USD जोड़ी 0.04 प्रतिशत गिरकर 0.7162 पर कारोबार कर रही थी। 4. ऑस्ट्रेलियन डॉलर को कौन से मुख्य कारक प्रभावित करते हैं? रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया की ब्याज दरें, चीन के साथ व्यापार, लौह अयस्क की कीमतें और व्यापार संतुलन इसके मुख्य कारक हैं। 5. ऑस्ट्रेलिया का सबसे बड़ा निर्यात उत्पाद कौन सा है? लौह अयस्क ऑस्ट्रेलिया का सबसे बड़ा निर्यात उत्पाद है, जिसका मुख्य गंतव्य चीन है। https://trendkia.com/market/china-nbs-manufacturing-pmi-rises-to-49-8-in-august-while-non-manufacturing-holds-steady-at-49-0-24810 TrendKia — Har trend, sabse pehle.