कॉमर्ज़बैंक का अनुमान: 5.25% पर स्थिर रहेगी आरबीआई की रेपो दर, $700 अरब के भंडार से मजबूत बना रुपया कॉमर्ज़बैंक के विश्लेषकों के अनुसार मजबूत घरेलू मांग और निर्यात के दम पर भारतीय अर्थव्यवस्था 6.7% की दर से बढ़ेगी। आरबीआई नीतिगत दरों को 5.25% पर बरकरार रख सकता है। भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूत घरेलू खपत और निर्यात में सकारात्मक उछाल के कारण व्यापक वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भी स्थिर वृद्धि दर्ज कर रही है। विदेशी मुद्रा विश्लेषकों और वित्तीय बाजार विशेषज्ञों का आकलन है कि भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) अपनी आगामी मौद्रिक नीति समीक्षा में प्रमुख नीतिगत दर यानी रेपो रेट को 5.25% के स्तर पर ही अपरिवर्तित रखेगा। देश का विशाल विदेशी मुद्रा भंडार 700 अरब डॉलर के सर्वकालिक आंकड़े से ऊपर बना हुआ है, जो भारतीय रुपये को अंतरराष्ट्रीय उथल-पुथल के बीच ठोस सुरक्षा प्रदान कर रहा है। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय कमोडिटी बाजारों में कच्चे तेल और सोने की बढ़ती कीमतें भारतीय अर्थव्यवस्था और रुपये के विनिमय मूल्य के लिए मुख्य जोखिम कारक बनी हुई हैं। भारतीय अर्थव्यवस्था की विकास दर और आरबीआई की मौद्रिक नीति कॉमर्ज़बैंक के वरिष्ठ शोध विश्लेषक डॉ. हेनरी हाओ और मोसेस लिम द्वारा तैयार किए गए बाजार अवलोकन के अनुसार, भारत का सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) चालू वित्त वर्ष 2026-2027 में 6.7% की दर से बढ़ने का अनुमान है। यद्यपि यह वृद्धि दर पिछले वित्त वर्ष 2025-2026 के दौरान दर्ज की गई 8% की शानदार वृद्धि के मुकाबले थोड़ी धीमी है, फिर भी यह वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में सबसे तेज गति को दर्शाती है। भारतीय अर्थव्यवस्था को आंतरिक मांग और बेहतर निर्यात प्रदर्शन का पूरा समर्थन मिल रहा है। भारतीय अर्थव्यवस्था की वर्तमान स्थिति पर टिप्पणी करते हुए कॉमर्ज़बैंक के विश्लेषकों ने कहा, "मजबूत घरेलू मांग और प्रोत्साहनजनक निर्यात वृद्धि के बल पर अर्थव्यवस्था अच्छी स्थिति में बनी हुई है।" मुद्रास्फीति यानी महंगाई दर चालू वित्त वर्ष 2026-2027 के दौरान 5% रहने का अनुमान जताया गया है। यह आंकड़ा भारतीय रिजर्व बैंक के 2% से 6% के निर्धारित लक्ष्य दायरे के पूरी तरह अनुकूल है। चूंकि महंगाई दर नियंत्रण सीमा के भीतर बनी हुई है, इसलिए केंद्रीय बैंक फिलहाल देखो और इंतजार करो की मौद्रिक नीति अपना रहा है। विश्लेषकों का स्पष्ट अनुमान है कि आरबीआई इस पूरे वर्ष नीतिगत ब्याज दरों को 5.25% पर ही आरामदायक स्थिति में बरकरार रखेगा। विदेशी मुद्रा भंडार और एफसीएनआर(बी) जमा योजना का समय पूर्व समापन भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा विदेशी पूंजी को आकर्षित करने और भारतीय रुपये की विनिमय दर को संभालने के लिए उठाए गए कदम अत्यधिक सफल साबित हुए हैं। देश का विदेशी मुद्रा भंडार 700 अरब डॉलर के ऐतिहासिक स्तर को पार कर चुका है। यह विशाल वित्तीय बफर आरबीआई को विनिमय दर में आने वाले किसी भी अचानक उतार-चढ़ाव और अस्थिरता को प्रभावी ढंग से कम करने की क्षमता प्रदान करता है। विदेशी मुद्रा भंडार की इस सुदृढ़ स्थिति को ध्यान में रखते हुए, रिजर्व बैंक ने एक महत्वपूर्ण फैसला लिया है। आरबीआई अपनी विदेशी मुद्रा अनिवासी बैंक यानी एफसीएनआर(बी) जमा योजना को अपनी निर्धारित समय सीमा से एक महीना पहले ही बंद करने जा रहा है। आधिकारिक योजना के अनुसार, इस डिपॉजिट स्कीम को 31 अगस्त को समाप्त कर दिया जाएगा। निर्धारित समय से एक महीना पहले एफसीएनआर(बी) योजना का समापन यह स्पष्ट संकेत देता है कि भारतीय मौद्रिक प्राधिकरण देश में उपलब्ध विदेशी पूंजी और डॉलर की तरलता से पूरी तरह आश्वस्त है। यूएस ट्रेजरी का लिक्विडिटी बायबैक और अमेरिकी डॉलर का रुख वैश्विक वित्तीय बाजारों में, अमेरिका के वित्त विभाग (यूएस ट्रेजरी) ने एक बड़ा नीतिगत कदम उठाते हुए बाजार में तरलता बढ़ाने के लिए अपनी बॉन्ड बायबैक योजनाओं का अप्रत्याशित रूप से विस्तार किया है। बुधवार को ग्रीनविच मीन टाइम (जीएमटी) के अनुसार दोपहर 12:32 बजे जारी घोषणा में, अमेरिकी ट्रेजरी ने अपने नियमित कैलेंडर से हटकर काम किया। विभाग ने 10 से 20 वर्ष और 20 से 30 वर्ष की परिपक्वता अवधि वाले बॉन्ड क्षेत्रों में अपनी लिक्विडिटी सपोर्ट बायबैक प्रक्रियाओं को दोगुना से अधिक करने का निर्णय लिया है। इस नई व्यवस्था के तहत, प्रति ऑपरेशन अधिकतम बायबैक सीमा को 2 अरब डॉलर से बढ़ाकर कम से कम 4 अरब डॉलर कर दिया गया है। यह विस्तारित बायबैक कार्यक्रम 9 सितंबर से प्रभावी होगा और 4 नवंबर तक जारी रहेगा। यूएस ट्रेजरी के इस तरलता प्रोत्साहन पैकेज के बाद अमेरिकी डॉलर की बिकवाली की गति थोड़ी धीमी पड़ी है। अमेरिकी फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति समिति (एफओएमसी) के सख्त रुख वाले मिनट्स जारी होने के बाद डॉलर तीन महीने के निचले स्तर तक गिर गया था, जहां से अब उसे सहारा मिलता दिख रहा है। वैश्विक मुद्रा बाजार: पाउंड और यूरो की विनिमय दरें वैश्विक विदेशी मुद्रा बाजार में, ब्रिटिश पाउंड (GBP/USD) गुरुवार को यूरोपीय कारोबारी सत्र के दौरान 1.3600 के दायरे में कारोबार करता देखा गया। पाउंड 11 मई के बाद के अपने उच्चतम स्तर से थोड़ा पीछे हटा है, क्योंकि बाजार भागीदार यह आकलन करने में लगे हैं कि अमेरिकी बॉन्ड बायबैक योजना बाजार का रुख बदलने में कितनी कारगर साबित होगी। विदेशी मुद्रा व्यापारी अब आगे की दिशा के लिए अमेरिका के नए आर्थिक आंकड़ों और पश्चिम एशिया से आने वाली भू-राजनीतिक सुर्खियों पर नजर बनाए हुए हैं। इसी तरह, यूरो (EUR/USD) भी यूरोपीय कारोबार में मई के उत्तरार्ध के बाद के अपने उच्चतम स्तर को छूने के बाद 1.1700 के स्तर से ठीक नीचे समेकित हो रहा है। यूरो के खरीदार नई खरीदारी पोजीशन लेने से पहले 1.1700 के स्तर से ऊपर ब्रेकआउट का इंतजार कर रहे हैं। अमेरिकी डॉलर में स्थिरता के बीच निवेशक अमेरिका के बेरोजगारी दावों के आंकड़ों और ईरान से जुड़े क्षेत्रीय तनावों पर बारीक नजर रख रहे हैं। सोने की कीमतें और कमोडिटी बाजार का समीकरण कीमती धातुओं के बाजार में, सोना एशियाई सत्र के दौरान मामूली इंट्राडे नुकसान के साथ 4,500 डॉलर प्रति औंस के स्तर से नीचे कारोबार करता रहा। इसके बावजूद, सोने की कीमतें गुरुवार तड़के दर्ज किए गए जून की शुरुआत के बाद के अपने उच्चतम स्तर के काफी करीब बनी हुई हैं। वैश्विक भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के माहौल के बीच, पिछले दिन तीन महीने के निचले स्तर पर खिसकने के बाद डॉलर में आई स्थिरता ने सोने में कुछ मुनाफावसूली को प्रेरित किया। हालांकि, अमेरिकी सरकारी बॉन्ड यील्ड में आई नरमी ने सोने में अधिक बड़ी बिकवाली को रोकने में मदद की। विश्लेषकों का मानना है कि यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल और सोने की कीमतें उच्च स्तर पर बनी रहती हैं, तो यह वैश्विक मुद्रास्फीति और विशेष रूप से भारत जैसे आयातक देशों के चालू खाता घाटे पर दबाव डाल सकती हैं। क्रिप्टोकरेंसी बाजार: रिपल, सोलाना और कार्डानो का प्रदर्शन अमेरिका में ट्रेजरी बॉन्ड बायबैक योजना की घोषणा के बाद व्यापक क्रिप्टोकरेंसी बाजार में भी तेजी का रुख देखने को मिला। प्रमुख एल्टकॉइन्स जैसे रिपल (XRP), सोलाना (SOL) और कार्डानो (ADA) गुरुवार को मजबूती के साथ टिके रहे। अमेरिकी बांडों में तरलता बढ़ने की उम्मीद से डिजिटल संपत्तियों में निवेशकों का जोखिम उठाने का उत्साह बढ़ा है। विशेष रूप से रिपल (XRP) पिछले कारोबारी दिन 10% की जोरदार तेजी दर्ज करने के बाद 1.0951 डॉलर के स्तर के आसपास कारोबार कर रहा है। चार्ट पर तकनीकी परिदृश्य सुझाव देता है कि XRP और सोलाना (SOL) में आगे भी तेजी जारी रह सकती है। वहीं दूसरी ओर, कार्डानो (ADA) के सामने हाल में हासिल किए गए लाभ को गंवाने का तकनीकी जोखिम बना हुआ है। पूरे वैश्विक क्रिप्टो बाजार में निवेशक अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों के अगले मोड़ का इंतजार कर रहे हैं। इसका आप पर असर • भारत भर में: रेपो दर 5.25% पर स्थिर रहने से बैंक ग्राहकों को होम लोन, कार लोन और पर्सनल लोन की ईएमआई पर तत्काल बढ़ोतरी से राहत मिलेगी। • निवेशकों और यात्रियों के लिए: 700 अरब डॉलर से अधिक का विदेशी मुद्रा भंडार भारतीय रुपये को डॉलर के मुकाबले मजबूत रखेगा, जिससे विदेश यात्रा और आयातित सामान महंगे नहीं होंगे। सवाल-जवाब 1. आरबीआई रेपो दर को किस स्तर पर बनाए रखने का अनुमान है? विश्लेषकों का अनुमान है कि भारतीय रिजर्व बैंक चालू वित्त वर्ष के दौरान रेपो दर को 5.25% के स्तर पर अपरिवर्तित रखेगा। 2. वित्त वर्ष 2026-2027 के लिए भारत की जीडीपी वृद्धि दर का क्या अनुमान है? कॉमर्ज़बैंक के विश्लेषकों ने वित्त वर्ष 2026-2027 के लिए भारत की जीडीपी वृद्धि दर 6.7% रहने का अनुमान जताया है। 3. भारत का वर्तमान विदेशी मुद्रा भंडार कितना है? भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 700 अरब डॉलर के महत्वपूर्ण आंकड़े से ऊपर बना हुआ है। 4. एफसीएनआर(बी) जमा योजना कब बंद हो रही है? एफसीएनआर(बी) जमा योजना तय समय से एक महीना पहले 31 अगस्त को बंद हो रही है। 5. अमेरिकी ट्रेजरी की बायबैक योजना की नई सीमा क्या है? अमेरिकी ट्रेजरी ने बॉन्ड बायबैक योजना की सीमा 2 अरब डॉलर से बढ़ाकर कम से कम 4 अरब डॉलर प्रति ऑपरेशन कर दी है। 6. अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमत का क्या स्तर है? सोना 4,500 डॉलर प्रति औंस के स्तर से थोड़ा नीचे कारोबार कर रहा है, जो जून की शुरुआत के बाद का उच्चतम स्तर है। https://trendkia.com/market/commerzbank-ka-anumana-5-25-para-sthira-rahegi-rbi-ki-repo-dara-700-araba-ke-bhndara-se-majabuta-bana-rupaya-18932 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