कच्चे तेल की नरमी से लुढ़का कनाडाई डॉलर, अमेरिकी डॉलर मजबूत मध्य पूर्व में कच्चे तेल की आपूर्ति सुधरने से कीमतों में आई गिरावट ने कनाडाई डॉलर पर दबाव बढ़ा दिया है, जिससे वैश्विक मुद्रा बाजार में अमेरिकी डॉलर मजबूत बना हुआ है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा बाजार में कनाडाई डॉलर की चमक फीकी पड़ती दिख रही है, क्योंकि कच्चे तेल के दामों में आई ताजा गिरावट ने इस कमोडिटी से जुड़ी मुद्रा को गहरे दबाव में डाल दिया है। अमेरिकी डॉलर के मुकाबले कनाडाई डॉलर में कमजोरी दर्ज की जा रही है, जिससे यूएसडी/सीएडी की जोड़ी में लगातार बढ़त की स्थिति बनी हुई है। ऊर्जा बाजार में आई इस नरमी का मुख्य कारण मध्य पूर्व क्षेत्र से तेल की आपूर्ति का काफी हद तक संघर्ष पूर्व स्तरों पर लौटना माना जा रहा है। हालांकि, व्यापक वित्तीय जगत में अब भी इस बात को लेकर आशंकाएं बनी हुई हैं कि औपचारिक शांति समझौते के बिना यह आपूर्ति प्रवाह लंबे समय तक स्थिर रह पाएगा या नहीं। भू-राजनीतिक अनिश्चितता और तेल आपूर्ति पर मंडराता संकट ऊर्जा क्षेत्र के विशेषज्ञ मानते हैं कि कच्चे तेल की कीमतों में कभी भी तेज उछाल देखने को मिल सकता है, क्योंकि मध्य पूर्व में तनाव की आंच फिर से भड़कने की पूरी आशंका है। होर्मुज जलडमरूमध्य में कम से कम तीन तेल टैंकरों पर हुए हालिया हमलों और ईरान एवं उसके सहयोगी हूती गुट द्वारा क्षेत्रीय रिफाइनरियों पर किए गए सिलसिलेवार हमलों के बाद समुद्री मार्गों पर खतरा बना हुआ है। सुरक्षा विश्लेषकों का मानना है कि ऐसे हालात कभी भी आपूर्ति व्यवस्था को तहस-नहस कर सकते हैं। इसी बीच, अमेरिका द्वारा मध्य पूर्व में एक और विमानवाहक पोत तैनात करने पर विचार किया जा रहा है, जिससे ईरान के साथ टकराव का दायरा व्यापक होने का जोखिम बढ़ गया है। पेंटागन फारस की खाड़ी में 10,000 नाविकों और मरीन सैनिकों की तैनाती की योजना का भी मूल्यांकन कर रहा है। यह कदम राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई तेज करने के लिए अतिरिक्त परिचालन लचीलापन प्रदान करेगा। डोनाल्ड ट्रंप ने पहले ही संकेत दिए हैं कि नवंबर के मध्यावधि चुनावों के बाद सैन्य हमले दोबारा शुरू किए जा सकते हैं, जिससे वैश्विक ऊर्जा बाजारों में आपूर्ति व्यवधान का खतरा गहरा गया है। बैंक ऑफ कनाडा की ब्याज दरों पर टिकी नजरें कनाडा की घरेलू अर्थव्यवस्था से जुड़े आंकड़े भी कनाडाई डॉलर की चाल को प्रभावित कर रहे हैं। टीडी सिक्योरिटीज का विश्लेषण बताता है कि जुलाई महीने के दौरान सामने आई सपाट आर्थिक वृद्धि से यह धारणा मजबूत हुई है कि बैंक ऑफ कनाडा के पास अक्टूबर में ब्याज दरें बढ़ाने की कोई ठोस या तात्कालिक वजह मौजूद नहीं है। वित्तीय संस्था का तर्क है कि हालांकि महीने-दर-महीने के आधार पर आर्थिक गतिविधियां ठहरी हुई नजर आई हैं, लेकिन मौजूदा परिवेश आक्रामक मौद्रिक सख्ती का समर्थन नहीं करता। इसके उलट, आंकड़े भविष्य के नीतिगत फैसलों में अधिक नपे-तुले और सतर्क दृष्टिकोण अपनाने की सिफारिश करते हैं। बैंक ऑफ कनाडा देश की मुद्रा के मूल्य को नियंत्रित करने में केंद्रीय भूमिका निभाता है। केंद्रीय बैंक उस ब्याज दर का निर्धारण करता है जिस पर वाणिज्यिक बैंक आपस में नकदी का लेनदेन करते हैं, और यह दर सीधे तौर पर समाज के हर तबके के लिए उधारी लागत को तय करती है। बैंक ऑफ कनाडा का प्राथमिक लक्ष्य देश में महंगाई को 1 से 3 प्रतिशत के दायरे में बनाए रखना होता है। इसके लिए वह आवश्यकतानुसार दरों में वृद्धि या कटौती करता है। आम तौर पर ऊंची ब्याज दरें कनाडाई डॉलर के लिए सकारात्मक मानी जाती हैं क्योंकि वे विदेशी पूंजी को आकर्षित करती हैं। इसके अतिरिक्त, केंद्रीय बैंक क्रेडिट स्थितियों को नियंत्रित करने के लिए क्वांटिटेटिव ईजिंग और क्वांटिटेटिव टाइटनिंग जैसे नीतिगत उपायों का सहारा भी लेता है, जिनमें से ईजिंग मुद्रा पर दबाव डालती है जबकि टाइटनिंग उसे सहारा देती है। कनाडाई डॉलर के प्रमुख प्रेरक तत्व कनाडाई डॉलर की दिशा तय करने वाले कई बुनियादी घटक हैं, जिनमें बैंक ऑफ कनाडा द्वारा निर्धारित ब्याज दरें और कच्चे तेल की वैश्विक कीमतें सर्वोपरि हैं। पेट्रोलियम कनाडा का सबसे बड़ा निर्यात उत्पाद है, जिसके चलते तेल की अंतरराष्ट्रीय कीमतों का कनाडाई डॉलर के मूल्य पर तुरंत और सीधा असर पड़ता है। जब तेल के दाम बढ़ते हैं, तो कनाडाई मुद्रा की कुल मांग में वृद्धि होती है और उसका मूल्य बढ़ता है। इसके विपरीत, तेल सस्ता होने पर कनाडाई डॉलर में कमजोरी आती है। कच्चे तेल के ऊंचे दाम कनाडा के व्यापार संतुलन को सकारात्मक बनाने में मदद करते हैं, जो निर्यात और आयात के मूल्य के बीच का अंतर होता है। अनुकूल व्यापार संतुलन हमेशा मुद्रा को मजबूत करता है। पारंपरिक आर्थिक सिद्धांतों के अनुसार मुद्रास्फीति को किसी भी मुद्रा के लिए हानिकारक माना जाता रहा है क्योंकि यह पैसे की क्रय शक्ति घटाती है। परंतु आधुनिक वित्तीय दौर में, सीमा पार पूंजी नियंत्रण हटने के बाद, स्थिति काफी बदल चुकी है। जब मुद्रास्फीति बढ़ती है, तो केंद्रीय बैंक ब्याज दरें बढ़ाते हैं। ऊंची दरों से अधिक लाभ कमाने की उम्मीद में वैश्विक निवेशक अपनी पूंजी उस देश में लाते हैं, जिससे स्थानीय मुद्रा की मांग में जोरदार उछाल आता है। कनाडा के मामले में भी यह प्रक्रिया कनाडाई डॉलर की मांग को बल देती है। इसके अलावा, समग्र व्यापक आर्थिक आंकड़े भी अर्थव्यवस्था की मजबूती का पैमाना तय करते हैं। सकल घरेलू उत्पाद यानी जीडीपी, विनिर्माण एवं सेवा पीएमआई, रोजगार के आंकड़े और उपभोक्ता धारणा सर्वेक्षण सीधे तौर पर कनाडाई डॉलर को दिशा देते हैं। मजबूत आर्थिक विकास विदेशी निवेश को लुभाता है और केंद्रीय बैंक को दरें बढ़ाने के लिए प्रेरित करता है, जिससे मुद्रा को ताकत मिलती है। यदि आंकड़े सुस्त आते हैं, तो मुद्रा का गिरना स्वाभाविक हो जाता है। निवेशक धारणा भी एक बड़ा कारक है, जिसमें बाजार में जोखिम उठाने की प्रवृत्ति यानी रिस्क-ऑन माहौल कनाडाई डॉलर के लिए अनुकूल होता है, जबकि सुरक्षित निवेश की तलाश यानी रिस्क-ऑफ माहौल इसे नुकसान पहुंचाता है। सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार होने के नाते अमेरिकी अर्थव्यवस्था की सेहत का प्रभाव भी कनाडाई डॉलर पर स्पष्ट झलकता है। अमेरिकी डॉलर की मजबूती और फेडरल रिजर्व का रुख वैश्विक विदेशी मुद्रा बाजार में अमेरिकी डॉलर लगातार बढ़त बनाए हुए है और डेढ़ साल के उच्च स्तर के करीब कारोबार कर रहा है। स्थिर बनी हुई अमेरिकी मुद्रास्फीति की चिंताओं और आगामी ब्याज दर वृद्धि की उम्मीदों ने डॉलर को मजबूत सहारा प्रदान किया है। हालांकि, फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति को लेकर बाजार की उम्मीदों में हाल के दिनों में तेजी से बदलाव आया है। ठीक एक हफ्ते पहले तक अधिकांश निवेशक अक्टूबर में ब्याज दरों में वृद्धि की प्रबल संभावना देख रहे थे। लेकिन मुद्रास्फीति में आई हल्की नरमी और नीति निर्माताओं की सतर्क टिप्पणियों के बाद दरों में संभावित ठहराव सबसे प्रमुख परिदृश्य बन गया है। अब बाजार भागीदार भविष्य के नीतिगत संकेतों को समझने के लिए अमेरिका के सितंबर नॉन-फार्म पेरोल्स आंकड़ों का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। अन्य वैश्विक मुद्राओं और सोने की चाल अमेरिकी डॉलर के मजबूत रुख और भू-राजनीतिक तनावों का असर अन्य प्रमुख परिसंपत्तियों पर भी साफ देखा जा रहा है। एशियाई कारोबारी सत्र में शुक्रवार को ऑस्ट्रेलियाई डॉलर के मुकाबले अमेरिकी डॉलर यानी एयूडी/यूएसडी किसी भी तरह की सार्थक रिकवरी दर्ज करने के लिए संघर्ष करता दिखा और 0.6900 के ऊपर कारोबार करता रहा, जो जुलाई की शुरुआत के बाद का इसका निचला स्तर है। कच्चे तेल से जुड़ी महंगाई की चिंताओं और भू-राजनीतिक जोखिमों ने सुरक्षित निवेश के रूप में अमेरिकी डॉलर की मांग बढ़ाई है, जिसका सीधा नुकसान ऑस्ट्रेलियाई डॉलर को उठाना पड़ा है। अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में रात भर की गिरावट के बावजूद डॉलर का दबदबा कायम रहा। उधर डॉलर और जापानी येन यानी यूएसडी/जेपीवाई की जोड़ी शुक्रवार को एशियाई सत्र के दौरान 158.00 के अपने साप्ताहिक उच्चतम स्तर के करीब स्थिर रही। टोक्यो सीपीआई के उम्मीद से अधिक गर्म रहने के बाद बैंक ऑफ जापान द्वारा दरों में और बढ़ोतरी की संभावनाओं के बावजूद इस जोड़ी में सीमित हलचल देखी गई। अमेरिकी डॉलर की तेजी इस जोड़ी को समर्थन दे रही है, हालांकि जापानी अधिकारियों द्वारा संभावित बाजार हस्तक्षेप का डर डॉलर की बढ़त को सीमित किए हुए है। दूसरी ओर, सुरक्षित ठिकाना माना जाने वाला सोना भी शुक्रवार को एशियाई सत्र के दौरान कई दिनों के सीमित दायरे में थोड़ा कमजोर होकर कारोबार करता नजर आया। अमेरिकी सितंबर नॉन-फार्म पेरोल्स रिपोर्ट के इंतजार में निवेशक कोई बड़ा जोखिम नहीं ले रहे हैं, क्योंकि इस रिपोर्ट से फेडरल रिजर्व की नीतिगत दिशा तय होगी। गैर-उपज वाली इस पीली धातु और डॉलर के बीच चलने वाली खींचतान में फिलहाल डॉलर भारी पड़ रहा है। कच्चे तेल के चलते पनपी महंगाई की चिंताओं और अमेरिका-ईरान गतिरोध ने डॉलर को डेढ़ साल के शिखर पर बनाए रखा है, जिससे एक्सएयू/यूएसडी पर दबाव निरंतर बना हुआ है। इसका आप पर असर वैश्विक मुद्रा बाजार में कच्चे तेल की नरमी और डॉलर की मजबूती से अंतरराष्ट्रीय व्यापार और विदेशी मुद्रा विनिमय पर सीधा असर देखने को मिलेगा। • मुद्रा विनिमय: विदेश यात्रा करने या डॉलर में भुगतान करने वाले लोगों की लागत बढ़ सकती है। डॉलर के मजबूत रहने से कनाडाई डॉलर जैसी जिंस आधारित मुद्राओं में खर्च करने वालों को अधिक भुगतान करना पड़ेगा। • ईंधन आयात: कच्चे तेल की कीमतों में नरमी से तेल आयातक देशों को राहत मिल सकती है। आपूर्ति सुधरने से ईंधन के खुदरा दामों पर दबाव कुछ हद तक कम होने के आसार हैं। • निवेश रणनीति: सुरक्षित निवेश तलाशने वाले निवेशक डॉलर और बॉन्ड की ओर रुख कर रहे हैं। जोखिम भरी मुद्राओं और सोने जैसे गैर-उपज वाले साधनों में तात्कालिक तौर पर सीमित बढ़त दिख सकती है। • ब्याज दरें: केंद्रीय बैंकों की आगामी बैठकों पर नजर रखना कर्जदारों के लिए जरूरी होगा। बैंक ऑफ कनाडा द्वारा दरों में जल्दबाजी न करने के संकेतों से उधारी दरें फिलहाल स्थिर रह सकती हैं। ऐसा क्यों हुआ कनाडाई डॉलर की कमजोरी और डॉलर की दृढ़ता के पीछे मध्य पूर्व में तेल आपूर्ति की आंशिक बहाली और बदलती मौद्रिक अपेक्षाएं प्रमुख कारण हैं। • तेल आपूर्ति में सुधार: मध्य पूर्व से तेल की आपूर्ति संघर्ष-पूर्व स्तरों पर लौटने से कच्चे तेल की कीमतों में नरमी आई। चूंकि कच्चा तेल कनाडा का सबसे बड़ा निर्यात उत्पाद है, इसलिए कीमतों के घटने से कनाडाई डॉलर कमजोर हुआ। • भू-राजनीतिक जोखिम: होर्मुज जलडमरूमध्य में तीन टैंकरों पर हमले और खाड़ी में अमेरिकी सैनिकों की संभावित तैनाती से तनाव बरकरार है। इस अनिश्चितता के कारण वैश्विक निवेशक सुरक्षित परिसंपत्ति के रूप में अमेरिकी डॉलर को प्राथमिकता दे रहे हैं। • फेडरल रिजर्व का बदलता रुख: मुद्रास्फीति के हल्के आंकड़ों और अधिकारियों की सतर्क टिप्पणियों से अक्टूबर में फेड की दर वृद्धि की उम्मीदें घटी हैं। इसके बावजूद तेल प्रेरित महंगाई के खतरों ने डॉलर को अन्य मुद्राओं की तुलना में मजबूत बनाए रखा है। • कनाडा की सुस्त वृद्धि: जुलाई में कनाडा की आर्थिक विकास दर सपाट रहने से बैंक ऑफ कनाडा पर दरें बढ़ाने का दबाव घट गया है। टीडी सिक्योरिटीज के अनुसार त्वरित सख्ती की आवश्यकता न होने से मुद्रा को घरेलू सहारा नहीं मिल पाया। सवाल-जवाब 1. कनाडाई डॉलर में कमजोरी का मुख्य कारण क्या है? कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट कनाडाई डॉलर की कमजोरी का प्राथमिक कारण है, क्योंकि पेट्रोलियम कनाडा का सबसे बड़ा निर्यात उत्पाद है। 2. मध्य पूर्व में तेल आपूर्ति की वर्तमान स्थिति क्या है? क्षेत्रीय आपूर्ति प्रवाह काफी हद तक संघर्ष पूर्व स्तरों पर पहुंच गया है, हालांकि औपचारिक समझौते के अभाव में अनिश्चितता बनी हुई है। 3. बैंक ऑफ कनाडा द्वारा अक्टूबर में दरें बढ़ाने की क्या संभावना है? टीडी सिक्योरिटीज के अनुसार जुलाई में विकास दर सपाट रहने के कारण बैंक ऑफ कनाडा के पास अक्टूबर में तुरंत दरें बढ़ाने की कोई ठोस वजह नहीं है। 4. फारस की खाड़ी को लेकर अमेरिका क्या कदम उठा रहा है? पेंटागन खाड़ी में 10,000 नाविकों और मरीन सैनिकों की तैनाती और मध्य पूर्व में अतिरिक्त विमानवाहक पोत भेजने के विकल्प का मूल्यांकन कर रहा है। 5. अमेरिकी डॉलर किस स्तर के करीब कारोबार कर रहा है? अमेरिकी डॉलर वैश्विक बाजार में डेढ़ साल के उच्च स्तर के करीब कारोबार कर रहा है। 6. मुद्रा बाजार के प्रतिभागी अब किस प्रमुख आंकड़े का इंतजार कर रहे हैं? ट्रेडर्स और विश्लेषक फेडरल रिजर्व के नीतिगत फैसलों के संकेतों के लिए अमेरिका के सितंबर नॉन-फार्म पेरोल्स डेटा का इंतजार कर रहे हैं। https://trendkia.com/market/crude-oil-ki-narmi-se-ludhka-canadian-dollar-us-dollar-majboot-41574 TrendKia — Har trend, sabse pehle.