# पश्चिम एशिया तनाव के बीच कच्चे तेल में नरमी, अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के बयान से WTI फिसला

> डोनाल्ड ट्रंप द्वारा मध्यावधि चुनाव से पहले ईरान पर सैन्य हमले की संभावना खारिज करने के बाद कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई। हालांकि, होर्मुज जलडमरूमध्य और भू-राजनीतिक जोखिमों के चलते बाजार को सीमित सहारा भी मिल रहा है।

**Type:** article · **Category:** बाज़ार · **Published:** 2026-10-09 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/market/crude-oil-men-narami-donald-trump-ke-bayana-se-wti-phisala-45371 · **Language:** Hindi
**Tags:** कच्चा तेल, WTI, डोनाल्ड ट्रंप, ईरान, ओपेक, अमेरिकी डॉलर, कमोडिटी बाजार, वित्त

अंतरराष्ट्रीय जिंस बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में शुक्रवार को दबाव देखा गया, जिससे अमेरिकी मानक वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट अपने एक हफ्ते के उच्च स्तर से नीचे फिसल गया। पिछले सत्र में 92.40 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंचने के बाद बाजार में लगातार बिकवाली दर्ज की गई। यूरोपीय सत्र के शुरुआती कारोबार में यह जिंस 1.0% से अधिक की गिरावट के साथ 89.50 डॉलर के मध्य स्तर के ठीक ऊपर कारोबार कर रही थी। हालांकि ताजा कारोबारी सत्र में भाव 90.58 डॉलर प्रति बैरल पर दर्ज किया गया, जो पिछले बंद स्तर 91.49 डॉलर के मुकाबले 0.99% की नरमी दिखाता है। बाजार की इस चाल के पीछे एक तरफ भू-राजनीतिक बयानों से मिली फौरी राहत है, तो दूसरी तरफ आपूर्ति व्यवधानों की दीर्घकालिक चिंताएं भी मौजूद हैं।

## ट्रंप की टिप्पणी और भू-राजनीतिक समीकरणों का असर
कच्चे तेल पर ताजा दबाव अमेरिकी राजनीतिक घटनाक्रम के चलते देखने को मिला। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्पष्ट किया कि 3 नवंबर को होने वाले मध्यावधि चुनावों से पहले अमेरिका, ईरान के खिलाफ नए सिरे से सैन्य हमले शुरू करने से परहेज करेगा। इस बयान ने बाजार के उन प्रतिभागियों को मुनाफावसूली का मौका दिया जो किसी बड़े सैन्य टकराव की आशंका में लंबी पोजीशन बनाए हुए थे। सैन्य कार्रवाई टलने की उम्मीद से कच्चे तेल पर छाया युद्ध का फौरी जोखिम कुछ हद तक कम हुआ।

इसके बावजूद विश्लेषक मान रहे हैं कि ऊर्जा बाजार से भू-राजनीतिक प्रीमियम पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। तेहरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर वाशिंगटन और ईरान के बीच गतिरोध बना हुआ है। इसके साथ ही पश्चिम एशिया में व्यापक संघर्ष की स्थिति बनी हुई है। वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए सबसे संवेदनशील मार्ग माने जाने वाले होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास किसी भी तरह की रुकावट कच्चे तेल की कीमतों के लिए मजबूत सहारा बन सकती है। इसी वजह से कीमतों में तेज गिरावट के बजाय सीमित दायरे में ही बिकवाली देखी जा रही है।

## तकनीकी संकेतकों पर चार्ट्स की तस्वीर
चार्ट के तकनीकी ढांचे पर नजर डालें तो कच्चा तेल 4 घंटे के चार्ट पर 100 अवधि के सिंपल मूविंग एवरेज यानी SMA से नीचे बना हुआ है। इसके अलावा अगस्त और सितंबर की तेजी के 38.2% फाइबोनैचि रिट्रेसमेंट स्तर के नीचे कारोबार करने से निकट अवधि में कीमतों पर दबाव साफ झलकता है। इंडिकेटर्स की बात करें तो मूविंग एवरेज कन्वर्जेंस डाइवर्जेंस यानी MACD शून्य से मामूली ऊपर संकुचित दायरे में नजर आ रहा है, जबकि लाइव तकनीकी आंकड़ों में MACD -0.38 पर है और सिग्नल लाइन 0.43 के मुकाबले हिस्टोग्राम -0.82 के साथ कमजोरी दिखा रहा है।

रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स यानी RSI वर्तमान में 48 के स्तर पर बना हुआ है, जो पहले दर्ज 49 के स्तर के समान ही तटस्थ स्थिति का संकेत देता है। यह दिखाता है कि खरीदारों की तेजी की रफ्तार धीमी पड़ चुकी है। लंबी अवधि के मूविंग एवरेज में 20-दिवसीय EMA 91.90 डॉलर, 50-दिवसीय EMA 90.15 डॉलर और 200-दिवसीय EMA 81.20 डॉलर पर स्थित है। दैनिक बोलिंजर बैंड का दायरा 84.22 डॉलर से 104.48 डॉलर के बीच है, जिसमें मध्य बैंड 94.35 डॉलर पर है। निकट अवधि में पिवट बिंदु 90.67 डॉलर है, जबकि पहला प्रतिरोध R1 91.32 डॉलर और R2 92.07 डॉलर पर है। नीचे की तरफ पहला समर्थन S1 89.92 डॉलर और दूसरा समर्थन S2 89.27 डॉलर पर स्थित है, जबकि 20-दिवसीय मुख्य समर्थन स्तर 86.86 डॉलर के करीब आंका गया है।

## WTI कच्चे तेल की विशेषताएं और अंतरराष्ट्रीय मानक
अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट यानी WTI वैश्विक स्तर पर कारोबार किए जाने वाले कच्चे तेल की प्रमुख किस्मों में से एक है। वैश्विक बाजार में मुख्य रूप से तीन प्रकार के बेंचमार्क चलते हैं, जिनमें WTI के अलावा ब्रेंट और दुबई क्रूड शामिल हैं। WTI को उद्योग जगत में लाइट और स्वीट क्रूड के नाम से भी जाना जाता है। इसे लाइट इसलिए कहा जाता है क्योंकि इसका घनत्व या ग्रेविटी अपेक्षाकृत कम होती है, और स्वीट इसलिए कहा जाता है क्योंकि इसमें सल्फर की मात्रा बेहद कम पाई जाती है।

कम सल्फर और हल्के घनत्व के कारण WTI को उच्च गुणवत्ता वाला तेल माना जाता है, जिसे गैसोलीन और डीजल जैसे ईंधनों में रिफाइन करना तकनीकी रूप से काफी आसान और किफायती होता है। इस तेल का उत्पादन संयुक्त राज्य अमेरिका में होता है और इसका मुख्य वितरण केंद्र ओक्लाहोमा का कुशिंग हब है। कुशिंग को विश्व भर में पाइपलाइनों का चौराहा यानी द पाइपलाइन क्रॉसरोड्स ऑफ द वर्ल्ड के तौर पर पहचाना जाता है। यही कारण है कि वित्तीय बाजारों और मीडिया में WTI की कीमतों को वैश्विक ऊर्जा व्यापार के सबसे अहम पैमाने के रूप में उद्धृत किया जाता है।

## मांग, आपूर्ति और मुद्रा विनिमय का प्रभाव
किसी भी वित्तीय जिंस की तरह WTI कच्चे तेल की कीमतें भी बुनियादी रूप से मांग और आपूर्ति के संतुलन पर निर्भर करती हैं। जब वैश्विक आर्थिक विकास दर मजबूत होती है, तब उद्योगों, परिवहन और विनिर्माण क्षेत्रों में ऊर्जा की खपत बढ़ने से मांग में उछाल आता है। इसके विपरीत, जब दुनिया भर में आर्थिक सुस्ती या मंदी के संकेत मिलते हैं, तो तेल की मांग कमजोर पड़ती है और कीमतें घटने लगती हैं। इसके अलावा राजनीतिक अस्थिरता, क्षेत्रीय युद्ध और प्रमुख उत्पादक देशों पर लगाए जाने वाले आर्थिक प्रतिबंध आपूर्ति श्रृंखला को बाधित कर कीमतों में अचानक तेजी ला सकते हैं।

कच्चे तेल की कीमत तय करने में अमेरिकी डॉलर के मूल्य की भी निर्णायक भूमिका होती है। चूंकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल का अधिकांश कारोबार अमेरिकी डॉलर में ही निपटाया जाता है, इसलिए डॉलर की मजबूती या कमजोरी सीधे खरीदारों की क्रय शक्ति पर असर डालती है। जब अमेरिकी डॉलर कमजोर होता है, तो अन्य मुद्राओं वाले देशों के लिए कच्चा तेल अपेक्षाकृत सस्ता हो जाता है, जिससे वैश्विक मांग को बढ़ावा मिलता है। इसके उलट जब अमेरिकी डॉलर मजबूत होता है, तो गैर-अमेरिकी खरीदारों के लिए तेल महंगा हो जाता है, जिससे मांग पर दबाव पड़ता है।

## इन्वेंट्री रिपोर्ट्स और ओपेक के फैसले
कच्चे तेल के अल्पकालिक मूल्य निर्धारण में साप्ताहिक भंडारण आंकड़े अत्यधिक महत्वपूर्ण होते हैं। अमेरिकन पेट्रोलियम इंस्टीट्यूट यानी API और अमेरिकी ऊर्जा सूचना प्रशासन यानी EIA द्वारा जारी की जाने वाली साप्ताहिक इन्वेंट्री रिपोर्ट से बाजार की दिशा तय होती है। इन रिपोर्टों में दर्ज भंडारण परिवर्तन यह दर्शाते हैं कि अमेरिका में वास्तविक मांग बढ़ रही है या आपूर्ति का भंडार जमा हो रहा है। यदि इन्वेंट्री में गिरावट आती है, तो यह मजबूत मांग का संकेत होता है जिससे कीमतों को समर्थन मिलता है। वहीं भंडारों में वृद्धि अधिक आपूर्ति की ओर इशारा करती है, जिससे भाव नीचे आते हैं। API अपनी रिपोर्ट हर मंगलवार को जारी करता है, जबकि सरकारी एजेंसी होने के कारण अधिक विश्वसनीय मानी जाने वाली EIA की रिपोर्ट ठीक अगले दिन यानी बुधवार को आती है। ऐतिहासिक रूप से 75% मामलों में इन दोनों रिपोर्टों के नतीजे एक दूसरे के 1% के दायरे में ही रहते हैं।

वैश्विक आपूर्ति पक्ष को नियंत्रित करने में पेट्रोलियम निर्यातक देशों के संगठन यानी ओपेक की भूमिका केंद्रीय रहती है। 12 प्रमुख तेल उत्पादक देशों का यह समूह साल में दो बार होने वाली बैठकों में सामूहिक रूप से सदस्य देशों के लिए उत्पादन कोटा निर्धारित करता है। जब ओपेक उत्पादन में कटौती का फैसला लेता है, तो वैश्विक बाजार में तेल की उपलब्धता घट जाती है और कीमतें ऊपर चढ़ने लगती हैं। इसके विपरीत उत्पादन बढ़ाने के निर्णय से आपूर्ति बढ़ती है और कीमतें नीचे आती हैं। इस व्यवस्था का एक व्यापक रूप ओपेक प्लस है, जिसमें ओपेक के 12 सदस्यों के अलावा 10 अन्य गैर-ओपेक उत्पादक देश भी शामिल हैं, जिनमें सबसे प्रमुख राष्ट्र रूस है।

## वैश्विक वित्तीय बाजारों और मुद्राओं की व्यापक हलचल
ऊर्जा बाजार के साथ-साथ अन्य अंतरराष्ट्रीय वित्तीय बाजारों में भी डॉलर की चाल और आर्थिक आंकड़ों का असर देखा जा रहा है। एशियाई कारोबार के दौरान ऑस्ट्रेलियाई डॉलर बनाम अमेरिकी डॉलर यानी AUD/USD ने साप्ताहिक निचले स्तर से वापसी करते हुए 0.7000 के स्तर की ओर रुख किया। अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में आई रातोंरात नरमी ने अमेरिकी डॉलर को 18 महीने के उच्चतम स्तर से नीचे बनाए रखा, जिससे इस मुद्रा जोड़ी को बल मिला। इसके साथ ही रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया यानी RBA से जुड़ी सख्त नीतिगत उम्मीदों ने भी ऑस्ट्रेलियाई डॉलर को सहारा प्रदान किया।

दूसरी ओर USD/JPY का भाव 158.00 के आसपास बना रहा। जापान में शुक्रवार को आए आंकड़ों के अनुसार घरेलू खर्च में लगातार नौवें महीने गिरावट दर्ज की गई, जिसने जापानी येन पर दबाव बनाया। हालांकि बॉन्ड यील्ड की गिरावट और पश्चिम एशिया की अनिश्चितताओं के बीच अमेरिकी डॉलर में सुस्ती ने इस जोड़ी की किसी भी तेज गिरावट को थामे रखा। सुरक्षित निवेश मानी जाने वाली पीली धातु यानी सोना एक बार फिर 4,200 डॉलर के स्तर को छूने में कामयाब रहा, जो अपने दो महीने के निचले स्तर से उबरने का संकेत है। तेल कीमतों और ट्रेजरी यील्ड में नरमी से सोने को मजबूती मिली, हालांकि दैनिक RSI अब भी कुछ कमजोरी दर्शा रहा है। इसके अतिरिक्त कनाडा के सांख्यिकी विभाग द्वारा सितंबर के श्रम बल सर्वेक्षण के आंकड़े जारी किए जाने हैं, जहां बाजार को अगस्त की भारी गिरावट के बाद रोजगार में मामूली सुधार की उम्मीद है। यह रिपोर्ट 22 अगस्त से लागू हुए नए अमेरिकी शुल्कों के पूर्ण प्रभाव को दर्शाने वाली पहली रिपोर्ट होगी।

## इसका आप पर असर
कच्चे तेल में आई हालिया नरमी और भू-राजनीतिक अनिश्चितता वैश्विक अर्थव्यवस्था और आम उपभोक्ताओं के बजट पर सीधा असर डालती है।

- **ईंधन की कीमतों पर असर:** अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट से तेल विपणन कंपनियों की इनपुट लागत कम होती है। यदि यह गिरावट 89 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बनी रहती है, तो खुदरा पेट्रोल और डीजल के दामों में बढ़ोतरी का खतरा टल सकता है।
- **महंगाई और परिवहन लागत:** कच्चे तेल की कीमतें नियंत्रित रहने से माल ढुलाई और लॉजिस्टिक्स का खर्च स्थिर बना रहता है। इससे रोजमर्रा के उपयोग की आवश्यक वस्तुओं और खाद्य पदार्थों की खुदरा महंगाई पर लगाम लगाने में मदद मिलती है।
- **घरेलू बजट और बचत:** ऊर्जा आयात बिल में कमी आने से राष्ट्रीय मुद्रा और चालू खाते के घाटे को मजबूती मिलती है। परिणामस्वरूप आम परिवारों के यात्रा और आवागमन खर्च में अचानक बढ़ोतरी का दबाव नहीं आता है।
- **जिंस और शेयर बाजार निवेशक:** ऊर्जा शेयरों और कमोडिटी फ्यूचर्स में कारोबार करने वाले निवेशकों के लिए 90 डॉलर का स्तर एक अहम पिवट बना हुआ है। किसी भी भू-राजनीतिक टकराव की स्थिति में अचानक आने वाले उतार-चढ़ाव से बचने के लिए सख्त स्टॉप लॉस बनाए रखना जरूरी है।

## ऐसा क्यों हुआ
कच्चे तेल में आई यह गिरावट अमेरिकी राजनीतिक नेतृत्व द्वारा सैन्य टकराव को टालने के संकेत देने और ऊर्जा मांग से जुड़ी तकनीकी सीमाओं के कारण हुई है।

- **मध्यावधि चुनाव और सैन्य संयम:** राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्पष्ट रूप से संकेत दिया कि 3 नवंबर के मध्यावधि चुनावों से पूर्व अमेरिका, ईरान पर हमले नहीं करेगा। इस बयान ने बाजार से फौरी युद्ध जोखिम को हटा दिया और तेल में मुनाफावसूली शुरू करवा दी।
- **तकनीकी चार्ट पर प्रतिरोध:** 4 घंटे के चार्ट पर कीमतें 100-अवधि के सिंपल मूविंग एवरेज और 38.2% फाइबोनैचि स्तर को पार करने में असमर्थ रहीं। 92.40 डॉलर के उच्च स्तर पर खरीदारों की गति थमने से तकनीकी बिकवाली तेज हुई।
- **आपूर्ति मार्गों पर स्थायी तनाव:** ईरान के परमाणु कार्यक्रम और होर्मुज जलडमरूमध्य के जोखिमों ने गिरावट को एक सीमित दायरे में थामे रखा। भू-राजनीतिक गतिरोध पूरी तरह समाप्त न होने के कारण तेल की कीमतों में बहुत बड़ी गिरावट नहीं आ सकी।
- **आर्थिक वृद्धि और डॉलर का प्रभाव:** वैश्विक विकास की गति और मजबूत अमेरिकी डॉलर के चलते मांग पक्ष को लेकर सतर्कता बनी हुई है। जब तक ओपेक और इन्वेंट्री आंकड़ों से आपूर्ति में बड़ी कमी की पुष्टि नहीं होती, तब तक निवेशक अतिरिक्त खरीदारी से बच रहे हैं।

## सवाल-जवाब

### 1. WTI कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट का मुख्य कारण क्या रहा?
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा 3 नवंबर के मध्यावधि चुनावों से पहले ईरान पर सैन्य हमले की संभावना खारिज करने से बाजार में मुनाफावसूली दर्ज की गई।

### 2. कच्चे तेल की कीमतों को किन कारकों से सहारा मिल रहा है?
ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य में संभावित आपूर्ति रुकावटों के चलते कीमतों में ज्यादा गिरावट नहीं आई है।

### 3. WTI क्रूड को 'लाइट' और 'स्वीट' क्यों कहा जाता है?
कम घनत्व के कारण इसे लाइट और सल्फर की मात्रा बेहद कम होने के कारण इसे स्वीट कहा जाता है, जिससे इसे रिफाइन करना आसान होता है।

### 4. अमेरिकी तेल इन्वेंट्री रिपोर्ट कब जारी की जाती हैं?
अमेरिकन पेट्रोलियम इंस्टीट्यूट (API) अपनी रिपोर्ट हर मंगलवार को और एनर्जी इंफॉर्मेशन एडमिनिस्ट्रेशन (EIA) अपनी आधिकारिक रिपोर्ट बुधवार को जारी करता है।

### 5. ओपेक प्लस समूह क्या है?
ओपेक 12 तेल उत्पादक देशों का संगठन है, जबकि ओपेक प्लस में रूस सहित 10 अन्य गैर-ओपेक उत्पादक देश भी शामिल हैं जो मिलकर उत्पादन कोटा तय करते हैं।

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