# मध्य पूर्व से तेल आपूर्ति सामान्य होने के बावजूद कच्चे तेल में तेज उछाल, 90 डॉलर के पार निकला भाव

> मध्य पूर्व से शिपमेंट युद्ध पूर्व स्तर पर पहुंचने और होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही सुधरने के बाद भी कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई है, जहां भाव 88 डॉलर के निचले स्तर से उछलकर 90 डॉलर के ऊपर पहुंच गया।

**Type:** article · **Category:** बाज़ार · **Published:** 2026-10-01 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/market/crude-oil-rebounds-above-90-despite-middle-east-shipments-surpassing-pre-war-levels-41128 · **Language:** Hindi
**Tags:** क्रूड ऑयल, डब्ल्यूटीआई ऑयल, कमोडिटी बाजार, होर्मुज जलडमरूमध्य, ऊर्जा बाजार, ओपेक, पेट्रोलियम, वित्त

अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में निचले स्तरों से एक तेज रिकवरी देखने को मिली है, जहां वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट के भाव 91.00 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गए। यह तेजी ऐसे समय में आई है जब मध्य पूर्व क्षेत्र से तेल की ढुलाई युद्ध शुरू होने से पहले के स्तर पर वापस आ चुकी है। न्यूयॉर्क मर्केंटाइल एक्सचेंज पर डब्ल्यूटीआई फ्यूचर्स में शुरुआती कारोबार के दौरान गिरावट दर्ज की गई थी, लेकिन 88.00 डॉलर से ठीक नीचे खरीदारों की जोरदार दिलचस्पी देखने को मिली। इस तेज लिवाली के सहारे कच्चे तेल की कीमतों ने ऊर्ध्वाधर सुधार दर्ज किया और यूरोपीय कारोबारी सत्र में यह लगभग 1.7 प्रतिशत चढ़कर 91.00 डॉलर के मनोवैज्ञानिक स्तर को फिर से हासिल करने में कामयाब रहा।

## होर्मुज जलडमरूमध्य और पाइपलाइन से आपूर्ति में मजबूती
मध्य पूर्व के अहम जलमार्गों और रणनीतिक आपूर्ति गलियारों से ऊर्जा प्रवाह का सामान्य होना वैश्विक तेल बाजार के लिए काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा था। अमेरिकी सैन्य एस्कॉर्ट्स की मौजूदगी ने होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले मालवाहक जहाजों को सुरक्षित रास्ता मुहैया कराने में मदद की है। यह समुद्री मार्ग वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लगभग 20 प्रतिशत हिस्से के आवागमन के लिए एक बेहद नाजुक और अहम केंद्र माना जाता है। जहाजों की सुरक्षा व्यवस्था मजबूत होने के अलावा, सऊदी अरब की पूर्व-पश्चिम पाइपलाइन के माध्यम से आधी क्षमता बहाल होने से भी कुल कच्चे तेल की उपलब्धता में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। इन सकारात्मक आपूर्ति बदलावों के बावजूद बाजार में कीमतों की मजबूती ने कई विश्लेषकों का ध्यान खींचा है।

## केपलर का डेटा और मध्य पूर्व से शिपमेंट के ताजा आंकड़े
कमोडिटी डेटा ट्रैकिंग फर्म केपलर के आंकड़ों से पता चलता है कि फारस की खाड़ी और लाल सागर समेत पूरे मध्य पूर्व क्षेत्र से कच्चे तेल का शिपमेंट कई मौकों पर युद्ध पूर्व स्तर से भी अधिक दर्ज किया गया है। सोमवार तक इस क्षेत्र से ऊर्जा प्रवाह का सात-दिवसीय औसत 19.5 मिलियन बैरल प्रति दिन दर्ज किया गया। यह आंकड़ा संघर्ष शुरू होने से पहले के 17 मिलियन बैरल प्रति दिन के सामान्य आधारभूत स्तर को भी पार कर गया है। डेटा विश्लेषण से यह संकेत भी मिलते हैं कि इस जलमार्ग पर ईरान का रणनीतिक प्रभुत्व अब पहले जैसा प्रभावी नहीं रह गया है, जिसके चलते वहां से बड़े पैमाने पर ऊर्जा का सुरक्षित प्रवाह लगातार जारी है।

केपलर में कमोडिटी रिसर्च के निदेशक मैट स्मिथ ने इस स्थिति पर रोशनी डालते हुए कहा कि ईरान ने संघर्ष के दौरान लगातार यह दावा किया कि उसका होर्मुज पर पूरा नियंत्रण है और उसने कई मौकों पर इस मार्ग को बंद करने की घोषणा भी की। लेकिन अब तेहरान का प्रभाव घटता दिख रहा है क्योंकि इस मार्ग से तेल की भारी मात्रा लगातार गुजर रही है। इस मजबूत आपूर्ति के बावजूद अमेरिकी तेल वायदा 90.78 डॉलर पर कारोबार करता नजर आया। चार्ट पर लघु अवधि का रुझान हल्का दबाव दिखा रहा है क्योंकि भाव 20-दिवसीय एक्सपोनेंशियल मूविंग एवरेज यानी 91.41 डॉलर के ठीक नीचे अटका हुआ है, जो व्यापक तेजी के बावजूद तात्कालिक बढ़त की गति धीमी होने का संकेत देता है। 14-दिवसीय रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स 50.12 पर स्थित है, जो 100 डॉलर के क्षेत्र से हालिया गिरावट के बाद एक सीमित दायरे और कंसॉलिडेशन का संकेत देता है। ऊपर की तरफ 91.41 डॉलर का स्तर तात्कालिक प्रतिरोध बना हुआ है, जबकि नीचे की ओर 86.53 डॉलर का पूर्व ब्रेकआउट दायरा प्रमुख सपोर्ट का काम कर रहा है।

## लाइव मार्केट डेटा और तकनीकी संकेतकों की स्थिति
ताजा क्लोजिंग बेल सत्र के लाइव मार्केट आंकड़ों के अनुसार, कच्चे तेल की कीमत 92.16 डॉलर पर दर्ज की गई, जो पिछले बंद स्तर 90.42 डॉलर की तुलना में 1.92 प्रतिशत की दैनिक बढ़त दर्शाती है। 52-सप्ताह के दायरे में इसका निचला स्तर 54.98 डॉलर और उच्चतम स्तर 119.48 डॉलर रहा है। वर्तमान ट्रेडिंग वॉल्यूम अपने 20-दिवसीय औसत का 0.18 गुना दर्ज हुआ है। तकनीकी मोर्चे पर आरएसआई 49 पर तटस्थ बना हुआ है। एमएसीडी 0.75 पर है जो 2.13 की सिग्नल लाइन से नीचे है और हिस्टोग्राम -1.38 के साथ मंदी का रुख दिखा रहा है। हालांकि मूविंग एवरेज में 20-दिवसीय ईएमए 93.33 डॉलर, 50-दिवसीय ईएमए 90.14 डॉलर और 200-दिवसीय ईएमए 80.60 डॉलर पर स्थित है, जहां 50-दिवसीय ईएमए का 200-दिवसीय ईएमए से ऊपर होना गोल्डन क्रॉस और दीर्घकालिक अपट्रेंड को दर्शाता है। 50-दिवसीय एसएमए 88.58 डॉलर और 200-दिवसीय एसएमए 82.21 डॉलर पर है। बोलिंजर बैंड्स 86.39 डॉलर से 105.64 डॉलर के दायरे में हैं, जिनका मध्य स्तर 96.02 डॉलर है। एडीएक्स 23 पर कमजोर रेंज दर्शाता है, जबकि स्टोकेस्टिक की फास्ट लाइन 20 और सिग्नल लाइन 11 पर है। बाजार की दैनिक अस्थिरता को मापने वाला एटीआर 4.56 पर है, जिसका उपयोग स्टॉप-लॉस बफर के रूप में किया जा सकता है। ट्रेडिंग के प्रमुख स्तरों में मुख्य पिवट 91.19 डॉलर, प्रतिरोध स्तर 93.59 डॉलर और 95.02 डॉलर, तथा सपोर्ट स्तर 89.76 डॉलर और 87.36 डॉलर पर मौजूद हैं।

## डब्ल्यूटीआई कच्चा तेल और इसके मूल्य निर्धारण के कारक
वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट अंतरराष्ट्रीय बाजारों में बेचे जाने वाले कच्चे तेल की एक प्रमुख किस्म है। वैश्विक तेल व्यापार में ब्रेंट और दुबई क्रूड के साथ डब्ल्यूटीआई तीन सबसे बड़े बेंचमार्क्स में गिना जाता है। अपने कम घनत्व और कम सल्फर अंश के कारण इसे क्रमशः हल्का और मीठा कच्चा तेल कहा जाता है। उच्च गुणवत्ता का होने की वजह से रिफाइनरियों में इससे गैसोलीन और डीजल बनाना काफी आसान होता है। इसका उत्पादन अमेरिका में होता है और इसका वितरण कुशिंग हब के जरिए किया जाता है, जिसे दुनिया के पाइपलाइन चौराहे के रूप में जाना जाता है। वैश्विक वित्तीय और कमोडिटी मीडिया में डब्ल्यूटीआई की दरों को नियमित रूप से कोट किया जाता है।

किसी भी अन्य वित्तीय परिसंपत्ति की तरह डब्ल्यूटीआई की कीमतें भी सीधे तौर पर मांग और आपूर्ति के बुनियादी नियमों से तय होती हैं। वैश्विक आर्थिक वृद्धि में तेजी तेल की मांग को बढ़ाती है, जबकि सुस्त विकास मांग को घटा देता है। इसके अलावा भू-राजनीतिक अस्थिरता, क्षेत्रीय युद्ध और व्यापारिक प्रतिबंध आपूर्ति श्रृंखला को बाधित करके कीमतों में अप्रत्याशित उछाल लाते हैं। अमेरिकी डॉलर का मूल्य भी कच्चे तेल की दिशा तय करने में बड़ी भूमिका निभाता है। चूंकि तेल का अधिकांश अंतरराष्ट्रीय कारोबार अमेरिकी डॉलर में होता है, इसलिए डॉलर के कमजोर होने से विदेशी खरीदारों के लिए तेल सस्ता हो जाता है और मांग बढ़ती है, जबकि डॉलर की मजबूती इसे महंगा बना देती है।

## ओपेक के उत्पादन निर्णय और इन्वेंट्री रिपोर्ट्स का प्रभाव
पेट्रोलियम निर्यातक देशों का संगठन यानी ओपेक 12 तेल उत्पादक देशों का एक समूह है, जो साल में दो बार होने वाली बैठकों में अपने सदस्य देशों के लिए उत्पादन कोटा निर्धारित करता है। ओपेक द्वारा कोटा कम करने के फैसले से वैश्विक आपूर्ति घटती है और तेल की कीमतें बढ़ती हैं, जबकि उत्पादन बढ़ाने पर इसके विपरीत परिणाम देखने को मिलते हैं। इस समूह के साथ जब रूस जैसे दस अन्य गैर-ओपेक उत्पादक देश जुड़ते हैं, तो इस विस्तारित गठबंधन को ओपेक प्लस कहा जाता है। इन समूहों की रणनीतियां सीधे तौर पर अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क को प्रभावित करती हैं।

इसके साथ ही अमेरिकन पेट्रोलियम इंस्टीट्यूट और अमेरिकी एनर्जी इंफॉर्मेशन एडमिनिस्ट्रेशन द्वारा जारी की जाने वाली साप्ताहिक इन्वेंट्री रिपोर्ट्स भी बाजार की दिशा बदलने में सक्षम होती हैं। भंडारों में गिरावट मजबूत मांग का संकेत देती है और कीमतों को समर्थन प्रदान करती है, जबकि भंडारों में वृद्धि कमजोर मांग या जरूरत से ज्यादा आपूर्ति को दर्शाती है जिससे कीमतों पर दबाव बनता है। एपीआई अपनी रिपोर्ट हर मंगलवार को जारी करता है और ईआईए उसके अगले दिन डेटा पेश करता है। दोनों के निष्कर्ष लगभग 75 प्रतिशत मामलों में एक प्रतिशत के मामूली अंतर के भीतर समान रहते हैं, हालांकि ईआईए के सरकारी एजेंसी होने के कारण इसके आंकड़ों को बाजार में अधिक आधिकारिक माना जाता है।

## विदेशी मुद्रा बाजार और कीमती धातुओं में हलचल
ऊर्जा बाजार में जारी इस उतार-चढ़ाव का सीधा असर अन्य वैश्विक संपत्तियों और मुद्रा जोड़ियों पर भी देखने को मिला है। एशियाई कारोबारी सत्र में ऑस्ट्रेलियाई डॉलर अमेरिकी डॉलर के मुकाबले दो महीने के निचले स्तर के आसपास 0.6900 के मध्य क्षेत्र में कंसॉलिडेट होता रहा। अमेरिकी पीसीई महंगाई आंकड़ों ने फेडरल रिजर्व द्वारा अक्टूबर में ब्याज दरें बढ़ाए जाने की संभावनाओं को कमजोर किया, लेकिन तेल की बढ़ती कीमतों से उपजी महंगाई की चिंताओं ने अमेरिकी बॉन्ड यील्ड को ऊंचा बनाए रखा। इसके अलावा ऑस्ट्रेलिया का व्यापार अधिशेष अगस्त में तेजी से घटकर 495 मिलियन ऑस्ट्रेलियाई डॉलर रह गया, जिससे ऑस्ट्रेलियाई मुद्रा पर सीमित असर पड़ा।

उधर डॉलर-येन जोड़ी 158.00 के पार अपने साप्ताहिक दायरे के ऊपरी छोर पर टिकी रही। बैंक ऑफ जापान के सख्त रुख की उम्मीदों और जापानी अधिकारियों द्वारा संभावित बाजार हस्तक्षेप के जोखिमों के बावजूद मजबूत अमेरिकी डॉलर का दबदबा कायम रहा, जिसे अमेरिका-ईरान तनाव के चलते सेफ-हेवन खरीदारी का भी सहारा मिला। कीमती धातुओं में सोने ने 4,139 डॉलर के क्षेत्र में खरीदारों को आकर्षित किया और पिछले दिन 4,220 डॉलर के स्तर से आई गिरावट को रोका। हालांकि बॉन्ड यील्ड की मजबूती ने बिना ब्याज वाली पीली धातु की बढ़त को सीमित रखा। क्रिप्टो बाजार में हाइपरलिक्विड टोकन 2 प्रतिशत गिरकर 90 डॉलर के नीचे कारोबार कर रहा था, जिसमें बुधवार को 5 मिलियन डॉलर की निकासी दर्ज की गई। वहीं यूरो-डॉलर जोड़ी गिरकर मई 2025 के बाद के सबसे निचले स्तर 1.1312 पर पहुंच गई, जो जनवरी के 1.2082 के शिखर से काफी नीचे है, हालांकि यूरोजोन में महंगाई के नए झटके यूरो को कुछ सहारा देने की क्षमता रखते हैं।

## इसका आप पर असर
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों के 90 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर बने रहने से ईंधन लागत और खुदरा महंगाई पर सीधा असर पड़ सकता है।

- **ईंधन की खुदरा कीमतें:** अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की लागत बढ़ने से भारतीय तेल विपणन कंपनियों के मार्जिन पर दबाव बढ़ सकता है। अगर यह तेजी लंबे समय तक जारी रहती है तो आने वाले हफ्तों में पेट्रोल और डीजल की खुदरा दरों में बढ़ोतरी का जोखिम बढ़ जाएगा।
- **माल ढुलाई और आवश्यक वस्तुएं:** डीजल के दाम स्थिर या ऊंचे रहने से देश भर में लॉजिस्टिक्स और माल ढुलाई की लागत अधिक बनी रहेगी। इसका सीधा प्रभाव फल, सब्जियों और रोजमर्रा के उपभोक्ता सामानों की कीमतों पर पड़ सकता है।
- **घरेलू मुद्रा पर दबाव:** भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का 85 प्रतिशत से अधिक हिस्सा आयात करता है, जिससे तेल महंगा होने पर व्यापार घाटा बढ़ता है। विदेशी मुद्रा की ज्यादा निकासी से भारतीय रुपये की विनिमय दर में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले कमजोरी आ सकती है।
- **विमानन और यात्रा खर्च:** विमान ईंधन यानी एटीएफ की कीमतें कच्चे तेल से सीधे जुड़ी होती हैं। तेल के 90 डॉलर के पार टिके रहने से एयरलाइंस अपने टिकट किरायों में संशोधन कर सकती हैं, जिससे आगामी यात्रा सत्र में हवाई सफर महंगा हो सकता है।

## ऐसा क्यों हुआ
यह मूल्य उछाल तकनीकी लिवाली और मध्य पूर्व में जारी रणनीतिक तनाव के कारण हुआ है, भले ही भौतिक तेल प्रवाह युद्ध पूर्व स्तर को पार कर चुका है।

- **निचले स्तरों पर तकनीकी खरीदारी:** न्यूयॉर्क मर्केंटाइल एक्सचेंज पर 88.00 डॉलर से ठीक नीचे मजबूत सपोर्ट जोन मौजूद था जहां संस्थागत खरीदारों ने बड़े पैमाने पर नए सौदे बनाए। इस जोरदार लिवाली ने भाव को तेजी से 91.00 डॉलर के करीब पहुंचा दिया।
- **आपूर्ति मार्गों पर सुरक्षा जोखिम:** अमेरिकी नौसेना के जहाजों द्वारा सुरक्षा दिए जाने के बावजूद होर्मुज जलडमरूमध्य में लंबे समय तक तनाव बने रहने की आशंका से ट्रेडर्स जोखिम प्रीमियम जोड़ रहे हैं। इस भू-राजनीतिक अनिश्चितता के कारण बाजार में आपूर्ति बढ़ने की खबरों का पूरा लाभ नहीं दिखा।
- **वैश्विक आर्थिक व मुद्रा कारक:** अमेरिकी डॉलर की मजबूती और बॉन्ड यील्ड में तेजी ने महंगाई की चिंताएं बढ़ा दी हैं। इसके अलावा ओपेक के सख्त उत्पादन कोटा ने वैश्विक बाजार में अतिरिक्त इन्वेंट्री जमा होने की गति को सीमित कर रखा है।

## सवाल-जवाब

### 1. कच्चे तेल की कीमतों में हालिया गिरावट के बाद क्या बदलाव आया है?
डब्ल्यूटीआई कच्चा तेल 88 डॉलर के निचले स्तर से उछलकर 1.7 प्रतिशत की बढ़त के साथ 91 डॉलर के करीब पहुंच गया है।

### 2. मध्य पूर्व से कच्चे तेल का दैनिक प्रवाह कितना दर्ज किया गया है?
केपलर के आंकड़ों के अनुसार क्षेत्र से सात-दिवसीय औसत शिपमेंट 19.5 मिलियन बैरल प्रति दिन रहा है, जो 17 मिलियन बैरल के युद्ध पूर्व स्तर से अधिक है।

### 3. होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही को कैसे सुरक्षित किया गया है?
अमेरिकी सैन्य एस्कॉर्ट्स ने जहाजों को सुरक्षा प्रदान की है जिससे 20 प्रतिशत वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति वाले इस मार्ग से माल की ढुलाई जारी है।

### 4. सऊदी अरब की किस पाइपलाइन से तेल आपूर्ति बहाल हुई है?
सऊदी अरब की पूर्व-पश्चिम पाइपलाइन से आधा प्रवाह बहाल होने से कुल तेल आपूर्ति में उल्लेखनीय सुधार हुआ है।

### 5. तकनीकी चार्ट पर डब्ल्यूटीआई के लिए प्रमुख सपोर्ट और रेजिस्टेंस स्तर क्या हैं?
ऊपर की तरफ 20-दिवसीय ईएमए 91.41 डॉलर पर तात्कालिक रेजिस्टेंस है, जबकि नीचे की तरफ 86.53 डॉलर का स्तर मुख्य सपोर्ट बना हुआ है।

### 6. अमेरिकी तेल इन्वेंट्री से जुड़े आंकड़े कौन सी संस्थाएं जारी करती हैं?
अमेरिकन पेट्रोलियम इंस्टीट्यूट मंगलवार को और अमेरिकी एनर्जी इंफॉर्मेशन एडमिनिस्ट्रेशन बुधवार को अपने साप्ताहिक इन्वेंट्री आंकड़े जारी करते हैं।

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