कच्चे तेल में गिरावट और रिलायंस के नतीजों से बाजार में भारी तेजी, निफ्टी 23,300 के पार नवंबर की शुरुआत घरेलू शेयर बाजारों के लिए जबरदस्त बढ़त के साथ हुई, जहां सेंसेक्स करीब 900 अंक उछला और निफ्टी ने 23,300 का स्तर पार कर लिया। कच्चे तेल की कीमतों में नरमी, रिलायंस के मजबूत आंकड़े और विदेशी निवेशकों के सकारात्मक रुख ने इस तेजी को गति दी। घरेलू इक्विटी बाजारों में नवंबर महीने की शुरुआत जोरदार उछाल के साथ देखने को मिली। कारोबारी सप्ताह के पहले दिन सोमवार को बाजार खुलते ही लिवाली का व्यापक माहौल बना, जिससे प्रमुख सूचकांकों में तेज तेजी दर्ज की गई। बीएसई का मानक संवेदी सूचकांक सेंसेक्स लगभग 900 अंकों की छलांग लगाने में सफल रहा, जबकि एनएसई निफ्टी 50 मजबूती दिखाते हुए 23,300 के महत्वपूर्ण मनोवैज्ञानिक स्तर से ऊपर टिका रहा। बाजार में इस शानदार तेजी का मुख्य आधार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में आई 3 प्रतिशत से अधिक की गिरावट तथा रिलायंस इंडस्ट्रीज द्वारा जारी किए गए मजबूत तिमाही वित्तीय नतीजे रहे। सुबह के कारोबार से ही दलाल स्ट्रीट पर सभी प्रमुख क्षेत्रों में व्यापक खरीदारी देखी गई। पूर्वाह्न करीब 11:39 बजे बीएसई सेंसेक्स 895.11 अंक यानी 1.20 प्रतिशत की बढ़त के साथ 75,354.64 के स्तर पर ट्रेड कर रहा था। वहीं दूसरी तरफ निफ्टी 50 भी 261.05 अंक अथवा 1.13 प्रतिशत चढ़कर 23,314.15 के स्तर पर बना हुआ था। इससे पहले सुबह घंटी बजते ही सेंसेक्स 75,178.24 पर खुला, जो शुक्रवार के बंद स्तर 74,459.53 से सीधे 718.71 अंक ऊपर था। शुरुआती कारोबार के दौरान एक समय सेंसेक्स में 950 अंकों से भी अधिक का उछाल आया था, हालांकि बाद में ऊपरी स्तरों से मामूली नरमी आई। रिलायंस इंडस्ट्रीज के मुनाफे से मिला सबसे बड़ा सहारा शेयर बाजार के इस ताजा उछाल में सबसे बड़ा योगदान सूचकांक की दिग्गज कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज की ओर से देखने को मिला। कंपनी ने 30 अक्टूबर को अपने सितंबर तिमाही के वित्तीय आंकड़े सार्वजनिक किए थे। इन नतीजों में सहयोगियों और संयुक्त उद्यमों की हिस्सेदारी सहित कंपनी का समेकित शुद्ध लाभ (टैक्स के बाद मुनाफा) सालाना आधार पर 33.8 प्रतिशत बढ़कर 29,550 करोड़ रुपये पर पहुंच गया। इसके साथ ही कंपनी ने 362,268 करोड़ रुपये का रिकॉर्ड तिमाही राजस्व दर्ज किया, जिसमें पिछले वर्ष की समान तिमाही के मुकाबले 27.8 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई। शानदार प्रदर्शन के दम पर यह शेयर सूचकांक को ऊपर खींचने वाले शीर्ष शेयरों में शुमार रहा। कच्चे तेल में फिसलन और कूटनीतिक बातचीत के संकेत शेयर बाजार में बने इस सकारात्मक माहौल का दूसरा सबसे बड़ा कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आई गिरावट रहा। ब्रेंट क्रूड सोमवार को करीब 3 प्रतिशत फिसलकर लगभग 110 डॉलर प्रति बैरल के आसपास आ गया। गौरतलब है कि शुक्रवार को यह छह महीने के उच्चतम स्तर लगभग 118 डॉलर पर पहुंच गया था। तेल की कीमतों में यह राहत ईरानी और कतरी अधिकारियों के बीच बातचीत से जुड़े घटनाक्रमों के बाद आई, जिससे ईरान संघर्ष के संभावित समाधान के संकेत मिले। भारत जैसे बड़े आयातक देश के लिए तेल की कीमतों का घटना सीधे तौर पर व्यापक अर्थव्यवस्था और कंपनियों की लागत के लिहाज से राहतकारी माना जाता है। विदेशी संस्थागत निवेशकों के रुख और आर्थिक आंकड़ों का साथ बाजार की इस बढ़त में विदेशी संस्थागत निवेशकों यानी एफआईआई की ओर से लिवाली के शुरुआती सकारात्मक संकेत भी एक अहम प्रेरक कारक बने। बाजार के विश्लेषक इस बात को रेखांकित कर रहे हैं कि भले ही इसे पूर्ण ट्रेंड रिवर्सल कहना अभी जल्दबाजी हो, लेकिन संकेत उत्साहजनक हैं। वैश्विक स्तर पर अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों को स्थिर बनाए रखना इक्विटी बाजारों के लिए सकारात्मक साबित हो रहा है। इसके अलावा भारतीय बाजार में खासकर लार्ज कैप श्रेणी के शेयरों के मूल्यांकन बेहद आकर्षक स्तर पर आ चुके हैं। सबसे महत्वपूर्ण यह है कि भारत में आर्थिक विकास की गति में निरंतर मजबूती के स्पष्ट संकेत दिखाई दे रहे हैं। भारतीय रिजर्व बैंक के आंकड़ों के अनुसार क्रेडिट ग्रोथ यानी ऋण वृद्धि में आया उछाल काफी प्रभावशाली है, जो आगे मजबूत आर्थिक विस्तार की ओर इशारा करता है। सितंबर महीने में ऋण वृद्धि सालाना आधार पर 19.1 प्रतिशत दर्ज की गई। इसमें उद्योग जगत को दिए गए ऋण की वृद्धि 19.5 प्रतिशत तथा सेवा क्षेत्र के ऋण में 28.3 प्रतिशत की उल्लेखनीय बढ़ोतरी देखी गई। साथ ही औद्योगिक पूंजीगत व्यय यानी कैपेक्स में भी सुधार के लक्षण दिख रहे हैं। वैश्विक स्तर पर एआई आधारित ट्रेड में कमजोरी आने के बीच एफपीआई के रुख में आए इस बदलाव ने निफ्टी को 23,000 का स्तर दोबारा हासिल करने में सीधी मदद पहुंचाई। चौतरफा लिवाली से चमके सेक्टोरल सूचकांक दलाल स्ट्रीट पर आज की तेजी किसी एक क्षेत्र तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसमें चौतरफा भागीदारी दिखी। सुबह करीब 10 बजे तक 14 प्रमुख सेक्टोरल सूचकांकों में से 13 हरे निशान में कारोबार कर रहे थे। बैंकिंग, ऑटोमोबाइल और मेटल शेयरों में जबरदस्त लिवाली देखी गई। मजबूत ऑटो बिक्री आंकड़ों के दम पर ऑटो शेयरों में तेजी रही, वहीं टाटा स्टील में 4 प्रतिशत और एनटीपीसी में 2 प्रतिशत का उछाल आया। इसके अलावा डेल्हीवरी, बैंक ऑफ बड़ौदा और इंडियन ऑयल भी लाभ कमाने वाले शेयरों में आगे रहे। मिडकैप और स्मॉलकैप सूचकांकों में भी मजबूती के साथ कारोबार होता दिखा। सूचकांक को गति देने वाले अन्य शेयरों में बीईएल, पावर ग्रिड, एसबीआई, एशियन पेंट्स, महिंद्रा एंड महिंद्रा, अल्ट्राटेक सीमेंट, एचयूएल, एलएंडटी, भारती एयरटेल और अदाणी पोर्ट्स शामिल रहे, जिनमें से अधिकांश 1 से 3 प्रतिशत के दायरे में ऊपर चढ़कर कारोबार कर रहे थे। मुनाफावसूली का शिकार बने कुछ प्रमुख शेयर बाजार में चौतरफा उत्साह के बीच कुछ चुनिंदा शेयरों पर दबाव भी देखने को मिला। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज पर गिरावट दर्ज करने वाले शेयरों में इंफोसिस सबसे आगे रहा, जो 1.39 प्रतिशत गिरकर 1,168 रुपये के भाव पर आ गया। इसके बाद आईसीआईसीआई बैंक में 1.01 प्रतिशत की गिरावट देखी गई। अदाणी पोर्ट्स में 0.82 प्रतिशत और सन फार्मा में 0.64 प्रतिशत की सुस्ती दर्ज हुई। वहीं एक्सिस बैंक, आयशर मोटर्स और एसबीआई लाइफ में मामूली दबाव रहा और इनके शेयर क्रमशः 0.44 प्रतिशत, 0.42 प्रतिशत और 0.39 प्रतिशत नीचे फिसलकर ट्रेड कर रहे थे। तकनीकी स्तर और आगे की रणनीति बाजार के मौजूदा ढांचे को लेकर विश्लेषकों का मानना है कि शॉर्ट टर्म बनावट सकारात्मक बनी हुई है। हालांकि मौजूदा ऊंचे स्तरों पर बाजार में गिरावट पर खरीदारी करने और तेजी आने पर मुनाफा समेटने की रणनीति सबसे मुफीद मानी जा रही है। तकनीकी नजरिए से निफ्टी के लिए 22,800 और 20-डे सिंपल मूविंग एवरेज के पास 22,600 का स्तर महत्वपूर्ण सपोर्ट की तरह काम करेगा। इसी तरह सेंसेक्स के लिए 74,000 और 73,400 के दायरे अहम सपोर्ट जोन बने हुए हैं। जब तक दोनों प्रमुख सूचकांक इन तकनीकी स्तरों से ऊपर बने रहते हैं, तब तक तेजी का यह सिलसिला कायम रहने की संभावना है। इसका आप पर असर बाजार में आई इस बड़ी तेजी और कच्चे तेल में नरमी का सीधा असर खुदरा निवेशकों और घरेलू अर्थव्यवस्था पर सकारात्मक रूप से पड़ता है। • निवेशकों के पोर्टफोलियो: सूचकांकों में 1 प्रतिशत से अधिक की बढ़त से म्यूचुअल फंड और इक्विटी निवेशकों की संपत्ति में तत्काल इजाफा हुआ है। मौजूदा स्तरों पर अचानक भारी पूंजी लगाने के बजाय गिरावट पर किस्तों में खरीदारी की रणनीति अपनानी चाहिए। • पेट्रोलियम और महंगाई: ब्रेंट क्रूड के 118 डॉलर से घटकर 110 डॉलर पर आने से आयातित मुद्रास्फीति का दबाव कम होता है। यदि तेल की कीमतें इसी दायरे में स्थिर रहीं तो कंपनियों की लॉजिस्टिक्स लागत कम होगी जिसका लाभ उपभोक्ताओं को मिल सकता है। • बैंकिंग और लोन: उद्योग और सेवा क्षेत्र में क्रेडिट ग्रोथ 19 से 28 प्रतिशत के दायरे में रहने से कारोबारी गतिविधियों में मजबूती दिख रही है। इससे आने वाले समय में रोजगार और नई औद्योगिक परियोजनाओं को रफ्तार मिलने की उम्मीद है। • तकनीकी सपोर्ट स्तर: निफ्टी के लिए 22,800 और 22,600 जबकि सेंसेक्स के लिए 74,000 मुख्य सपोर्ट स्तर हैं। जब तक सूचकांक इन स्तरों के ऊपर हैं, तब तक लंबी अवधि के निवेशकों को घबराहट में बिकवाली करने से बचना चाहिए। ऐसा क्यों हुआ शेयर बाजार में आए 900 अंकों के उछाल के पीछे अंतरराष्ट्रीय कमोडिटी बाजार, कॉरपोरेट अर्निंग्स और संस्थागत पूंजी प्रवाह से जुड़े तीन प्रमुख कारक रहे। • रिलायंस इंडस्ट्रीज के रिकॉर्ड नतीजे: कंपनी का दूसरी तिमाही का शुद्ध लाभ 33.8 प्रतिशत बढ़कर 29,550 करोड़ रुपये और राजस्व 27.8 प्रतिशत बढ़कर 362,268 करोड़ रुपये रहा। सूचकांक में सबसे बड़ा वजन रखने वाले इस शेयर के शानदार प्रदर्शन ने बेंचमार्क को भारी बढ़त दिलाई। • कच्चे तेल में तेज गिरावट: ब्रेंट क्रूड अपने छह महीने के उच्च स्तर 118 डॉलर से करीब 3 प्रतिशत टूटकर 110 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया। ईरानी और कतरी अधिकारियों के बीच बातचीत से संघर्ष खत्म होने की उम्मीदों ने कच्चे तेल की कीमतों को ठंडा किया। • विदेशी संस्थागत निवेशकों की वापसी: अमेरिकी फेड द्वारा ब्याज दरों को स्थिर रखने और भारतीय लार्ज कैप शेयरों के मूल्यांकन आकर्षक होने से एफआईआई ने खरीदारी के संकेत दिए। साथ ही 19.1 प्रतिशत की मजबूत क्रेडिट ग्रोथ ने घरेलू विकास के भरोसे को और पुख्ता किया। सवाल-जवाब 1. सोमवार को शेयर बाजार में कितनी तेजी दर्ज की गई? कारोबार के दौरान सेंसेक्स करीब 895 अंक उछलकर 75,354 के स्तर पर पहुंचा, जबकि निफ्टी 261 अंक चढ़कर 23,314 पर कारोबार कर रहा था। 2. रिलायंस इंडस्ट्रीज के दूसरी तिमाही के वित्तीय आंकड़े कैसे रहे? रिलायंस का समेकित शुद्ध लाभ 33.8 प्रतिशत बढ़कर 29,550 करोड़ रुपये और कुल राजस्व 27.8 प्रतिशत बढ़कर 362,268 करोड़ रुपये रहा। 3. कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट का मुख्य कारण क्या था? ईरानी और कतरी अधिकारियों के बीच बातचीत से पश्चिम एशिया तनाव कम होने की उम्मीद बंधी, जिससे ब्रेंट क्रूड गिरकर 110 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया। 4. सितंबर महीने में देश की बैंक क्रेडिट ग्रोथ कितनी रही? आरबीआई आंकड़ों के मुताबिक सितंबर में बैंक ऋण वृद्धि सालाना आधार पर 19.1 प्रतिशत रही, जिसमें उद्योग क्षेत्र को 19.5 प्रतिशत और सेवाओं को 28.3 प्रतिशत ऋण वृद्धि मिली। 5. निफ्टी और सेंसेक्स के लिए प्रमुख सपोर्ट स्तर कौन से हैं? निफ्टी के लिए 22,800 और 22,600 का स्तर मजबूत सपोर्ट है, जबकि सेंसेक्स के लिए 74,000 और 73,400 के स्तर अहम सपोर्ट माने गए हैं। 6. इस तेजी के दौरान किन शेयरों में गिरावट देखी गई? एनएसई पर इंफोसिस 1.39 प्रतिशत और आईसीआईसीआई बैंक 1.01 प्रतिशत नीचे गिरे, इसके अलावा सन फार्मा और अदाणी पोर्ट्स में भी सुस्ती रही। https://trendkia.com/market/crude-oil-slump-and-reliance-earnings-drive-stock-market-rally-as-nifty-tops-23300-54889 TrendKia — Har trend, sabse pehle.