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  "type": "article",
  "title": "दलाल स्ट्रीट पर चौतरफा बिकवाली से सहमे कारोबारी, एक ही दिन में स्वाहा हुए 10 लाख करोड़ रुपये",
  "summary": "कमजोर वैश्विक संकेतों, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और रिजर्व बैंक के नीतिगत फैसले के चलते घरेलू शेयर बाजार में गुरुवार को बड़ी गिरावट दर्ज की गई। सेंसेक्स 1,045 अंक फिसल गया और निफ्टी गिरकर 22,231 के स्तर पर आ गया।",
  "content": "घरेलू इक्विटी बाजारों में गुरुवार, 8 अक्टूबर को भारी दबाव का माहौल देखने को मिला, जब बिकवाली के तेज झोंके ने दोनों प्रमुख सूचकांकों को नीचे खींच लिया। वैश्विक वित्तीय बाजारों से मिल रहे कमजोर संकेतों और घरेलू स्तर पर ब्याज दरों से जुड़ी चिंताओं के बीच दलाल स्ट्रीट पर पूरे कारोबारी सत्र के दौरान मंदड़ियों का दबदबा बना रहा। दिन के कारोबार की समाप्ति तक बीएसई बेंचमार्क इंडेक्स 1,000 अंक से ज्यादा फिसल गया, जिसकी वजह से बाजार में निवेश करने वालों की कुल संपत्ति में तकरीबन 10 लाख करोड़ रुपये की भारी चपत लग गई।\n\nप्रमुख सूचकांकों में तेज फिसलन और बाजार का व्यापक रुख\nदिनभर के उतार-चढ़ाव के बाद बाजार लाल निशान में बंद हुआ। बीएसई सेंसेक्स 1,045.46 अंक यानी 1.44 प्रतिशत टूटकर 71,593.24 के स्तर पर बंद हुआ। दूसरी तरफ, एनएसई निफ्टी 371.25 अंक अथवा 1.64 प्रतिशत का गोता लगाकर 22,231.80 के स्तर पर पहुंच गया। बाजार की चौड़ाई पूरी तरह से गिरावट के पक्ष में झुकी नजर आई। सत्र के दौरान कुल 3,280 शेयरों ने लाल निशान में कारोबार खत्म किया, जबकि केवल 951 शेयर बढ़त दर्ज करने में कामयाब रहे और 180 शेयरों के भाव में कोई फेरबदल दर्ज नहीं किया गया। केवल बड़े शेयर ही नहीं, बल्कि मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स भी बिकवाली की चपेट में रहे और दोनों में 2 प्रतिशत से अधिक का नुकसान दर्ज हुआ।\n\nसेक्टरवार स्थिति: रियल्टी और एनर्जी में मची अफरातफरी\nसेक्टरों के स्तर पर बिकवाली का असर बेहद व्यापक रहा और लगभग सभी सेक्टोरल सूचकांक गिरावट के साथ बंद हुए। सबसे तगड़ा झटका निफ्टी रियल्टी इंडेक्स को लगा, जो 2.98 प्रतिशत लुढ़क गया। ऊर्जा क्षेत्र से जुड़ा निफ्टी एनर्जी इंडेक्स भी 2.87 प्रतिशत नीचे आ गया। इसके साथ ही निफ्टी इंफ्रा में 2.66 प्रतिशत, निफ्टी पीएसई में 2.47 प्रतिशत, निफ्टी फार्मा में 2.38 प्रतिशत और निफ्टी एफएमसीजी में 2.01 प्रतिशत की कमजोरी दर्ज की गई। चौतरफा बिकवाली के इस दौर में केवल सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र का निफ्टी आईटी सूचकांक ही 0.04 प्रतिशत की मामूली बढ़त लेकर किसी तरह हरे निशान में बंद होने में कामयाब रहा।\n\nमुनाफे और नुकसान वाले प्रमुख शेयरों का लेखा-जोखा\nबाजार के सामान्य रुझान के विपरीत कुछ ही शेयर बढ़त बनाने में सफल रहे। इंफोसिस के शेयर में 0.50 प्रतिशत, टेक महिंद्रा में 0.34 प्रतिशत और एक्सिस बैंक में 0.20 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई। इसके विपरीत बिकवाली का सबसे कड़ा प्रहार लार्जकैप और अन्य प्रमुख कंपनियों पर हुआ। अडानी एंटरप्राइजेज के शेयरों में 5.36 प्रतिशत की भारी गिरावट देखी गई। इसके अलावा जेएसडब्ल्यू स्टील 4.46 प्रतिशत, आईटीसी 4.03 प्रतिशत, मैक्स हेल्थकेयर 3.81 प्रतिशत, इंडिगो 3.55 प्रतिशत और श्रीराम फाइनेंस 3.24 प्रतिशत तक फिसलकर बंद हुए।\n\nबाजार में आई इस तेज गिरावट की मुख्य वजहें\nबाजार विशेषज्ञों के मुताबिक भारतीय इक्विटी बाजार में 8 अक्टूबर को दर्ज हुई इस गिरावट के पीछे कई महत्वपूर्ण कारक जिम्मेदार रहे। भारतीय रिजर्व बैंक ने तीन साल के लंबे अंतराल के बाद अपनी प्रमुख नीतिगत दर रेपो रेट में 25 आधार अंकों की वृद्धि करके इसे 5.50 प्रतिशत कर दिया है और अपनी मौद्रिक नीति का रुख कैलिब्रेटेड टाइटनिंग में तब्दील कर दिया है। इस कदम से बढ़ती ब्याज दरों को लेकर निवेशकों के बीच सतर्कता का माहौल बन गया। दूसरी तरफ, अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड यील्ड में तेज उछाल देखने को मिला, जहां 30 साल की यील्ड 5.71 प्रतिशत और 10 साल की यील्ड 5.3 प्रतिशत के पार निकल गई। बॉन्ड यील्ड के ऊंचे स्तरों पर पहुंचने से इक्विटी के मुकाबले फिक्स्ड इनकम सिक्योरिटीज निवेशकों के लिए अधिक आकर्षक मानी जाने लगती हैं। इसके अलावा, मध्य पूर्व में जारी तनाव के चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड 102 डॉलर प्रति बैरल के आंकड़े को पार कर गया, जिससे आयात लागत बढ़ने और मुद्रास्फीति में इजाफे का खतरा गहरा गया है।\n\nइसका आप पर असर\nघरेलू बाजार में आई इस भारी गिरावट और रिजर्व बैंक के रेपो रेट बढ़ाने का सीधा असर निवेशकों के पोर्टफोलियो और आम कर्जधारकों के बजट पर पड़ेगा।\n\n• खुदरा निवेशकों पर असर: बाजार में एक ही दिन में 10 लाख करोड़ रुपये का नुकसान होने से म्यूचुअल फंड एनएवी और इक्विटी पोर्टफोलियो का मूल्य घट गया है। निवेशकों को घबराहट में बिना सोचे-समझे बिकवाली करने से बचना चाहिए और अपने वित्तीय लक्ष्यों की समीक्षा करनी चाहिए।\n• ऋण और ईएमआई लागत: रिजर्व बैंक द्वारा रेपो रेट बढ़ाकर 5.50 प्रतिशत करने से बैंकों के फ्लोटिंग रेट होम लोन, ऑटो लोन और पर्सनल लोन महंगे हो सकते हैं। आने वाले हफ्तों में बैंक अपनी ब्याज दरों में बढ़ोतरी कर सकते हैं, जिससे मासिक किस्तें बढ़ जाएंगी।\n• घरेलू महंगाई का खतरा: ब्रेंट क्रूड का 102 डॉलर प्रति बैरल के पार निकलना परिवहन और उत्पादन लागत को बढ़ा सकता है। यदि कच्चे तेल की दरें लंबे समय तक ऊंची रहीं, तो रोजमर्रा की वस्तुओं और ईंधन की कीमतों में इजाफा हो सकता है।\n• फिक्स्ड इनकम में अवसर: बॉन्ड यील्ड और नीतिगत दरों में बढ़ोतरी से फिक्स्ड डिपॉजिट और डेट इंस्ट्रूमेंट्स पर मिलने वाला रिटर्न आकर्षक हो सकता है। सुरक्षित निवेश तलाश रहे लोग बैंक जमा और सरकारी प्रतिभूतियों में नए निवेश के विकल्पों पर विचार कर सकते हैं।\n\nऐसा क्यों हुआ\nघरेलू और अंतरराष्ट्रीय वित्तीय मोर्चों पर एक साथ उभरे कई प्रतिकूल घटनाक्रमों के चलते 8 अक्टूबर को भारतीय शेयर बाजार में भारी बिकवाली देखने को मिली।\n\n• रिजर्व बैंक का मौद्रिक रुख: भारतीय रिजर्व बैंक ने तीन साल बाद रेपो रेट में बढ़ोतरी कर इसे 5.50 प्रतिशत कर दिया और मौद्रिक रुख को कैलिब्रेटेड टाइटनिंग में बदल दिया। इससे कर्ज की लागत बढ़ने और आर्थिक गतिविधियों की रफ्तार धीमी होने की चिंताएं बढ़ गईं।\n• अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में उछाल: अंतरराष्ट्रीय बाजार में 30 साल की अमेरिकी बॉन्ड यील्ड 5.71 प्रतिशत और 10 साल की यील्ड 5.3 प्रतिशत के ऊपर निकल गई। यील्ड के आकर्षक स्तरों पर पहुंचने से पूंजी जोखिम भरी इक्विटी से निकलकर बॉन्ड बाजार की ओर रुख करने लगी।\n• कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें: मध्य पूर्व में बने भू-राजनीतिक तनाव के चलते ब्रेंट क्रूड का भाव 102 डॉलर प्रति बैरल के स्तर को पार कर गया। महंगे तेल से भारत के आयात बिल, चालू खाते के घाटे और कंपनियों के ऑपरेटिंग मार्जिन पर दबाव का डर पैदा हो गया।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. 8 अक्टूबर के कारोबारी सत्र में सेंसेक्स और निफ्टी कितने अंक गिरकर बंद हुए?\nबीएसई सेंसेक्स 1,045.46 अंक फिसलकर 71,593.24 पर बंद हुआ, जबकि एनएसई निफ्टी 371.25 अंक टूटकर 22,231.80 के स्तर पर रहा।\n\n2. इस गिरावट से शेयर बाजार के निवेशकों को कुल कितना नुकसान हुआ?\nचौतरफा बिकवाली के कारण शेयर बाजार में निवेशकों की पूंजी में लगभग 10 लाख करोड़ रुपये का बड़ा नुकसान हुआ।\n\n3. सत्र के दौरान किन सेक्टोरल इंडेक्स में सबसे ज्यादा गिरावट दर्ज की गई?\nनिफ्टी रियल्टी इंडेक्स में सबसे ज्यादा 2.98 प्रतिशत और निफ्टी एनर्जी इंडेक्स में 2.87 प्रतिशत की तेज गिरावट आई।\n\n4. भारी मंदी के बीच किन प्रमुख शेयरों में बढ़त देखने को मिली?\nइंफोसिस (+0.50%), टेक महिंद्रा (+0.34%) और एक्सिस बैंक (+0.20%) जैसे सीमित शेयर ही हरे निशान में बंद हो सके।\n\n5. रिजर्व बैंक के किस फैसले ने बाजार की धारणा को प्रभावित किया?\nरिजर्व बैंक ने तीन साल बाद रेपो रेट बढ़ाकर 5.50 प्रतिशत कर दिया और नीतिगत रुख को कैलिब्रेटेड टाइटनिंग घोषित किया।\n\n6. कच्चे तेल और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड की क्या स्थिति रही?\nब्रेंट क्रूड 102 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया, जबकि अमेरिकी 30 साल की बॉन्ड यील्ड 5.71% और 10 साल की यील्ड 5.3% से ऊपर निकल गई।",
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  "category": "बाज़ार",
  "publishedAt": "2026-10-08",
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