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  "type": "article",
  "title": "डेरेक हेलपैनी के अनुसार डॉलर के मुकाबले यूरो का मजबूती बनाए रखना हुआ मुश्किल",
  "summary": "यूरोपीय सेंट्रल बैंक द्वारा सितंबर में ब्याज दरें बढ़ाने की संभावना के बावजूद बढ़ती ऊर्जा लागत और मध्य पूर्व में गहराते भू-राजनीतिक तनाव के चलते यूरो पर दबाव बढ़ रहा है।",
  "content": "यूरोपीय सेंट्रल बैंक (ECB) की मौद्रिक नीतियों से मिलने वाला समर्थन अब धीरे-धीरे कमजोर पड़ता दिख रहा है, क्योंकि तकनीकी कमजोरी और वैश्विक आर्थिक परिस्थितियां यूरो को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले पीछे धकेल रही हैं। हालांकि नीति निर्माताओं ने संकेत दिया है कि सितंबर में ब्याज दरों में एक और बढ़ोतरी होने की संभावना है, लेकिन बढ़ती ऊर्जा लागत और यूरोपीय अर्थव्यवस्था की सुस्ती यूरो के सामने बड़ी चुनौतियां खड़ी कर रही हैं। इसके विपरीत, अमेरिकी अर्थव्यवस्था काफी मजबूत बनी हुई है, जिससे डॉलर को लगातार बढ़त मिल रही है। बाजार विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले समय में यूरो की मजबूती पूरी तरह से खत्म हो सकती है, जिससे इसमें और गिरावट आने की आशंका है।\n\n \n\nईसीबी का सख्त रुख और ऊर्जा संकट की दोहरी मार\n\nबाजार के जाने-माने विशेषज्ञ डेरेक हेलपैनी के अनुसार, यूरोपीय सेंट्रल बैंक (ECB) के हालिया बयानों से साफ संकेत मिलता है कि सितंबर में ब्याज दरों में एक और बढ़ोतरी हो सकती है। बाजार ने इस बढ़ोतरी की संभावना को लगभग पूरी तरह से स्वीकार कर लिया है और यह कीमतों में भी शामिल हो चुकी है। हालांकि, ऊर्जा की बढ़ती कीमतों के कारण यूरो को मिलने वाला यह समर्थन जल्द ही खत्म हो सकता है। ईसीबी ने स्वीकार किया है कि ऊर्जा की कीमतें फिलहाल उनके अनुमानों के करीब हैं, लेकिन उनका यह भी मानना है कि ऊर्जा संकट का पूरा मुद्रास्फीति प्रभाव अभी अर्थव्यवस्था में सामने आना बाकी है। इससे पता चलता है कि केंद्रीय बैंक के अधिकारी महंगाई को नियंत्रित करने और मूल्य स्थिरता हासिल करने को लेकर अभी भी काफी चिंतित हैं।\n\nमध्य पूर्व में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव ने इस स्थिति को और अधिक जटिल बना दिया है। डेरेक हेलपैनी का मानना है कि अगर आने वाले समय में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट भी आती है, तो भी सितंबर तक यूरोपीय अर्थव्यवस्था की स्थिति में किसी बड़े सुधार की उम्मीद नहीं है। ऐसी स्थिति में ईसीबी द्वारा ब्याज दरों में बढ़ोतरी किया जाना लगभग तय है। लेकिन चूंकि बाजार इस बढ़ोतरी को पहले ही अपनी कीमतों में शामिल कर चुका है, इसलिए यूरो के लिए ऊपर जाने की गुंजाइश बहुत सीमित है। इसके अलावा, यूरोपीय आर्थिक आंकड़े लगातार कमजोर आ रहे हैं, जो अमेरिकी अर्थव्यवस्था की मजबूती के बिल्कुल विपरीत हैं।\n\n \n\nEUR/USD का तकनीकी विश्लेषण और लाइव मार्केट डेटा\n\nअगर हम EUR/USD करेंसी जोड़े के लाइव मार्केट डेटा पर नजर डालें, तो यह फिलहाल 1.14 के स्तर पर कारोबार कर रहा है, जो पिछले बंद भाव 1.14 से 0.21% की मामूली गिरावट दर्शाता है। पिछले 52 हफ्तों के दौरान यह करेंसी जोड़ा 1.13 से 1.20 के दायरे में रहा है, जिससे पता चलता है कि यह अपने एक साल के निचले स्तर के काफी करीब है। तकनीकी संकेतकों से पता चलता है कि यह लंबे समय की मंदी (downtrend) में फंसा हुआ है। चार्ट पर 'डेथ क्रॉस' (death cross) की स्थिति बन चुकी है, जिसमें 50-दिवसीय एक्सपोनेन्शियल मूविंग एवरेज (EMA50) 1.15 पर है, जो 200-दिवसीय एक्सपोनेन्शियल मूविंग एवरेज (EMA200) 1.16 से नीचे आ गया है। वहीं 20-दिवसीय एक्सपोनेन्शियल मूविंग एवरेज (EMA20) 1.14 के स्तर पर है।\n\nअन्य तकनीकी संकेतक भी इसी मंदी की ओर इशारा कर रहे हैं। 14-दिवसीय रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स (RSI) 41 पर है, जिसका मतलब है कि हालांकि बाजार अभी ओवरसोल्ड ज़ोन में नहीं है, लेकिन बिकवाली का दबाव काफी मजबूत है। स्टोकेस्टिक फास्ट लाइन 20 पर और सिग्नल लाइन 29 पर है, जो कमजोर बढ़त को दर्शाती है। एवरेज ट्रू रेंज (ATR) 0.01 पर है, जो रोजाना के उतार-चढ़ाव को दिखाता है। ट्रेडर्स इसे स्टॉप-लॉस (SL) बफर के रूप में इस्तेमाल कर सकते हैं। बोलिंगर बैंड्स की सीमा 1.14 से 1.15 के बीच है और कीमत 20-दिवसीय सपोर्ट स्तर 1.14 के करीब बनी हुई है। अगर यह सपोर्ट टूटता है, तो यूरो में और बड़ी गिरावट देखने को मिल सकती है।\n\nतकनीकी तौर पर, EUR/USD का 1.1400 के स्तर से नीचे जाना अल्पकालिक मंदी को और मजबूत करता है। दूसरी ओर, डॉलर इंडेक्स (DXY) में लगातार तेजी देखी जा रही है और यह अपने पिछले उच्च स्तर 101.80 के करीब पहुंच रहा है। अगर यह इस स्तर को पार कर जाता है, तो डॉलर और मजबूत होगा, जिससे यूरो पर दबाव और बढ़ जाएगा।\n\n \n\nब्रिटिश पाउंड में उतार-चढ़ाव और सोने की कीमतों पर दबाव\n\nवैश्विक फॉरेक्स बाजार में अन्य प्रमुख करेंसी भी भू-राजनीतिक तनाव के कारण उतार-चढ़ाव से गुजर रही हैं। गुरुवार को आई बड़ी गिरावट के बाद, शुक्रवार के यूरोपीय सत्र में GBP/USD जोड़ा 1.3300 के स्तर से थोड़ा ऊपर मामूली बढ़त बनाए रखने में सफल रहा। ब्रिटिश पाउंड को ब्रिटेन के बेहतर खुदरा बिक्री (Retail Sales) आंकड़ों और जुलाई के पीएमआई (PMI) आंकड़ों से थोड़ा सहारा मिला। हालांकि, मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के कारण निवेशकों के सतर्क रुख अपनाने से पाउंड की बढ़त सीमित बनी हुई है। निवेशक अब सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर रुख कर रहे हैं।\n\nदूसरी ओर, अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमतों पर लगातार दूसरे दिन बिकवाली का दबाव देखा जा रहा है। एशियाई कारोबारी सत्र के दौरान सोना गिरकर 4,050 डॉलर के स्तर से नीचे आ गया है। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतें ऊंची बनी हुई हैं, जिससे वैश्विक स्तर पर महंगाई बढ़ने का खतरा पैदा हो गया है। महंगाई की इस चिंता के कारण ऐसी उम्मीदें बढ़ गई हैं कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व लंबे समय तक ब्याज दरों को ऊंचा रख सकता है। ऊंची ब्याज दरों के कारण बिना ब्याज देने वाली संपत्तियों जैसे सोने की मांग घट जाती है। यही कारण है कि अमेरिकी डॉलर मजबूत होकर एक महीने के उच्च स्तर पर पहुंच गया है, जिससे सोने की कीमतों में गिरावट आ रही है।\n\n \n\nक्रिप्टोकरेंसी बाजार पर भू-राजनीतिक संकट का असर\n\nवैश्विक भू-राजनीतिक संकट का असर डिजिटल एसेट्स यानी क्रिप्टोकरेंसी बाजार पर भी साफ देखा जा सकता है। दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी क्रिप्टोकरेंसी एथेरियम (Ethereum) गुरुवार को 3% की गिरावट के साथ 1,900 डॉलर के स्तर से नीचे आ गई। दिलचस्प बात यह है कि यह गिरावट वायदा बाजार (derivatives market) में बढ़ती दिलचस्पी के बावजूद आई है। एथेरियम का ओपन इंटरेस्ट पिछले दो दिनों में 6 लाख ETH बढ़कर 14.60 मिलियन ETH पर पहुंच गया है, जो 7 जून के बाद का सबसे उच्चतम स्तर है। इससे पता चलता है कि बाजार में सट्टेबाजी और ट्रेडिंग वॉल्यूम तो बढ़ रहा है, लेकिन कुल मिलाकर माहौल अभी भी काफी अनिश्चित बना हुआ है।\n\nअमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के कारण पूरा क्रिप्टोकरेंसी बाजार दबाव में है। इसी माहौल के बीच बिटकॉइन (Bitcoin) शुक्रवार को गिरकर अपने 50-दिवसीय एक्सपोनेन्शियल मूविंग एवरेज (EMA) सपोर्ट स्तर के करीब पहुंच गया, जो लगभग 65,135 डॉलर पर है। जब निवेशक जोखिम भरे निवेश से हाथ खींचते हैं, तो छोटी और वैकल्पिक क्रिप्टोकरेंसी पर इसका सबसे ज्यादा असर पड़ता है। पिछले 24 घंटों में पीआई नेटवर्क (Pi Network) और स्काई (Sky) सबसे खराब प्रदर्शन करने वाले डिजिटल एसेट रहे हैं। बढ़ती महंगाई, ब्याज दरों की अनिश्चितता और युद्ध के खतरों ने ट्रेडिशनल और डिजिटल दोनों ही बाजारों के लिए एक बेहद चुनौतीपूर्ण माहौल तैयार कर दिया है।\n\nइसका आप पर असर\nवैश्विक निवेशकों के लिए: भू-राजनीतिक तनाव और करेंसी में उतार-चढ़ाव के कारण बाजार में काफी अस्थिरता है, जिससे ट्रेडर्स को स्टॉप-लॉस और रिस्क मैनेजमेंट पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है।\n\nआम उपभोक्ताओं के लिए: ऊर्जा की लगातार बढ़ती कीमतों और मजबूत होते अमेरिकी डॉलर के कारण आयात खर्च बढ़ सकता है, जिससे ईंधन और रोजमर्रा की चीजों की कीमतों में बढ़ोतरी हो सकती है।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. डेरेक हेलपैनी के अनुसार सितंबर में ईसीबी के फैसले से यूरो को क्यों खास फायदा नहीं होगा?\nसितंबर में ब्याज दर बढ़ाने के ईसीबी के फैसले को बाजार पहले ही अपनी कीमतों में शामिल कर चुका है। इसके अलावा, बढ़ती ऊर्जा लागत और कमजोर आर्थिक आंकड़े यूरो की बढ़त को सीमित कर रहे हैं।\n\n2. EUR/USD के तकनीकी चार्ट पर लाइव डेटा क्या संकेत दे रहा है?\nEUR/USD की लाइव कीमत 1.14 है, जो पिछले बंद से 0.21% कम है। चार्ट पर 'डेथ क्रॉस' (EMA50 का EMA200 से नीचे जाना) बना हुआ है, जो लंबे समय की मंदी को दिखाता है।\n\n3. मध्य पूर्व में अमेरिका-ईरान तनाव का सोने की कीमतों पर क्या असर पड़ा है?\nतनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतें बढ़ी हैं, जिससे महंगाई की चिंताएं तेज हो गई हैं। इससे अमेरिकी ब्याज दरों के लंबे समय तक ऊंचे रहने की उम्मीदें बढ़ी हैं, जिसके कारण बिना ब्याज वाली संपत्ति सोने की कीमतों में गिरावट आई है और यह $4,050 से नीचे आ गया है।\n\n4. भू-राजनीतिक तनाव के बीच बिटकॉइन और एथेरियम का क्या हाल है?\nएथेरियम 3% की गिरावट के साथ $1,900 से नीचे आ गया है, जबकि बिटकॉइन गिरकर अपने 50-दिवसीय ईएमए सपोर्ट स्तर $65,135 के करीब पहुंच गया है।",
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  "publishedAt": "2026-07-24",
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