दिसंबर में ब्याज दरें बढ़ा सकता है ईसीबी, बुंडेसबैंक प्रमुख जोआचिम नागेल ने दिए संकेत यूरोपीय सेंट्रल बैंक की दिसंबर बैठक में ब्याज दरें बढ़ाना बहुत जरूरी हो सकता है, यह बात बुंडेसबैंक के प्रमुख जोआचिम नागेल ने महंगाई के बढ़ते दबाव के बीच कही है। यूरोपीय सेंट्रल बैंक (ईसीबी) की आगामी नीतिगत बैठक को लेकर नीति निर्माताओं के कड़े रुख सामने आने लगे हैं। बुंडेसबैंक के प्रेसिडेंट और यूरोपीय सेंट्रल बैंक की गवर्निंग काउंसिल के सदस्य जोआचिम नागेल ने मंगलवार को स्पष्ट किया कि दिसंबर के महीने में ब्याज दरों में बढ़ोतरी किया जाना अत्यंत आवश्यक होने की पूरी संभावना है। उन्होंने सितंबर में सामने आए महंगाई के दबाव को उम्मीद से अधिक तीव्र बताया और रेखांकित किया कि मौजूदा आर्थिक हालात एक प्रतिकूल परिदृश्य के बेहद करीब पहुंचते दिखाई दे रहे हैं। महंगाई का बढ़ता दबाव और ऊर्जा कीमतों की चुनौती अर्थव्यवस्था में मूल्य स्थिरता को बनाए रखने के संदर्भ में जोआचिम नागेल ने चेतावनी दी कि ऊर्जा की कीमतों में आने वाले किसी भी अचानक उछाल को पूरी अर्थव्यवस्था में व्यापक महंगाई का रूप लेने से रोका जाना चाहिए। उनका मानना है कि मौद्रिक नीति निर्माताओं को यह सुनिश्चित करना होगा कि ईंधन और ऊर्जा की लागत बढ़ने से अन्य सभी वस्तुओं और सेवाओं के दाम अनियंत्रित न होने पाएं। इसके साथ ही जोआचिम नागेल ने फ्रांस के वित्तीय हालात पर भी अपनी राय रखी। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि फ्रांस अपने बजट से जुड़ी समस्याओं और वित्तीय चुनौतियों पर समय रहते नियंत्रण हासिल कर लेगा। इसके तुरंत बाद उन्होंने यह भी साफ कर दिया कि किसी देश के बजट घाटे या वित्तीय प्रबंधन से निपटना मौद्रिक नीति का काम नहीं है, बल्कि यह सरकारों की अपनी राजकोषीय जिम्मेदारी है। विदेशी मुद्रा बाजार में यूरो का प्रदर्शन प्रमुख अंतरराष्ट्रीय मुद्राओं के मुकाबले यूरो की चाल पर नजर डालें तो जापानी येन के सामने यूरो आज सबसे मजबूत स्थिति में दर्ज किया गया। मुद्रा बाजार के हीट मैप के आधार पर विभिन्न प्रमुख करेंसियों के बीच उतार-चढ़ाव देखा जा सकता है, जहां बाईं ओर आधार मुद्रा और ऊपरी हिस्से में कोट मुद्रा को रखकर विनिमय दरों में आए प्रतिशत बदलाव का आकलन किया जाता है। यदि यूरो को आधार मुद्रा और अमेरिकी डॉलर को कोट मुद्रा के रूप में देखा जाए, तो दोनों के बीच का अंतर सीधे तौर पर ईसीबी और अमेरिकी फेडरल रिजर्व की नीतियों के असर को दिखाता है। यूरोपीय सेंट्रल बैंक का ढांचा और मौद्रिक नीति के साधन जर्मनी के फ्रैंकफर्ट में स्थित यूरोपीय सेंट्रल बैंक पूरे यूरोज़ोन के लिए केंद्रीय रिज़र्व बैंक के रूप में काम करता है। यह संस्थान इस पूरे क्षेत्र में ब्याज दरें तय करने और समग्र मौद्रिक नीति की रूपरेखा तैयार करने के लिए जिम्मेदार है। ईसीबी का बुनियादी और प्राथमिक दायित्व यूरोज़ोन में कीमतों की स्थिरता बनाए रखना है, जिसका व्यावहारिक अर्थ मुद्रास्फीति की दर को लगभग 2 प्रतिशत के दायरे में सीमित रखना होता है। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए बैंक का सबसे मुख्य हथियार ब्याज दरों को बढ़ाना या घटाना है। जब ईसीबी ब्याज दरों में बढ़ोतरी करता है, तो आम तौर पर मुद्रा बाजार में यूरो मजबूत होता है, जबकि दरें घटाने पर यूरो में कमजोरी देखने को मिलती है। मौद्रिक नीति से जुड़े फैसले ईसीबी गवर्निंग काउंसिल की साल में होने वाली आठ बैठकों के दौरान लिए जाते हैं। इन बैठकों में यूरोज़ोन के तमाम राष्ट्रीय बैंकों के प्रमुख और छह स्थायी सदस्य शामिल होते हैं, जिनमें ईसीबी की प्रेसिडेंट क्रिस्टीन लेगार्ड भी शामिल हैं। क्वांटिटेटिव ईजिंग और क्वांटिटेटिव टाइटनिंग की भूमिका अत्यधिक गंभीर आर्थिक संकट की स्थितियों में यूरोपीय सेंट्रल बैंक एक विशेष नीतिगत उपाय का सहारा लेता है जिसे क्वांटिटेटिव ईजिंग (क्यूई) कहा जाता है। क्यूई वह प्रक्रिया है जिसके अंतर्गत केंद्रीय बैंक नए यूरो जारी करता है और उस नकदी से वित्तीय संस्थानों व बैंकों से सरकारी या कॉरपोरेट बॉन्ड खरीदता है। इस कदम से व्यवस्था में नकदी का प्रवाह बढ़ता है, जिससे आमतौर पर यूरो कमजोर होता है। यह कदम एक अंतिम उपाय के तौर पर तभी उठाया जाता है जब केवल ब्याज दरों में कटौती करने से कीमतों में स्थिरता लौटना संभव न दिख रहा हो। ईसीबी ने 2009 से 2011 के वैश्विक वित्तीय संकट, 2015 के अत्यधिक कम मुद्रास्फीति वाले दौर और कोविड महामारी के दौरान क्यूई का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया था। दूसरी ओर, क्वांटिटेटिव टाइटनिंग (क्यूटी) पूरी तरह से क्यूई की विपरीत प्रक्रिया है। इसे आर्थिक सुधार शुरू होने और महंगाई के दोबारा सिर उठाने पर लागू किया जाता है। जहां क्यूई में केंद्रीय बैंक बॉन्ड खरीदकर वित्तीय प्रणाली को नकदी देता है, वहीं क्यूटी के तहत ईसीबी नए बॉन्ड की खरीद रोक देता है और अपने पास मौजूद मैच्योर हो चुके बॉन्ड के मूलधन का दोबारा निवेश करना बंद कर देता है। आम तौर पर क्वांटिटेटिव टाइटनिंग की यह प्रक्रिया यूरो की मजबूती के लिए सकारात्मक मानी जाती है। अन्य वैश्विक संपत्तियों और मुद्राओं का ताजा हाल वैश्विक विदेशी मुद्रा बाजार में ऑस्ट्रेलियाई डॉलर बनाम अमेरिकी डॉलर (AUD/USD) में लगातार दूसरे कारोबारी दिन गिरावट दर्ज की गई। ऑस्ट्रेलियाई रिजर्व बैंक (आरबीए) द्वारा आधिकारिक नकद दर में 25 आधार अंकों की बहुप्रतीक्षित बढ़ोतरी किए जाने के बाद उम्मीद से कम आक्रामक रुख सामने आया, जिसके चलते यह मुद्रा जोड़ी फिसलकर 0.6960 के स्तर यानी कई दिनों के निचले स्तर के करीब आ गई। उधर, मंगलवार के एशियाई सत्र में डॉलर बनाम जापानी येन (USD/JPY) थोड़ा कमजोर हुआ और पिछले दिन की 158.00 तक की बढ़त को आंशिक रूप से गंवा बैठा। ईरान से जुड़े कूटनीतिक प्रयासों की उम्मीदों और अमेरिकी मध्यावधि चुनावों से पहले अमेरिकी डॉलर में सुस्ती बनी रही। हालांकि, जापानी अधिकारियों द्वारा बाजार में हस्तक्षेप के जोखिमों ने येन को सहारा दिया, लेकिन बैंक ऑफ जापान (बीओजे) द्वारा दरों में अगली वृद्धि के समय को लेकर अनिश्चितता ने बढ़त को सीमित रखा। कमोडिटी बाजार में सोने (XAU/USD) ने मंगलवार को अपनी बढ़त की गति खो दी। कच्चे तेल की कीमतों में आए उछाल के बाद सोना दबाव में आया। वॉल स्ट्रीट जर्नल द्वारा ईरान के क़ेश्म द्वीप पर अमेरिकी हमले की जानकारी दिए जाने के बाद तेल की कीमतों में तेजी आई थी। उस समय सोना 0.93 प्रतिशत की दैनिक गिरावट के साथ लगभग 3,909 डॉलर प्रति औंस के आसपास कारोबार कर रहा था। क्रिप्टोकरेंसी बाजार में बिटकॉइन मंगलवार को गिरावट के साथ 76,566 डॉलर पर आ गया और अपने छह सप्ताह के निचले स्तर का परीक्षण करता दिखा। एथेरियम भी बिटकॉइन की तरह दबाव में रहा और एक संकीर्ण सपोर्ट दायरे में कंसोलिडेट होता नजर आया। इसके साथ ही एक्सआरपी (रिपल) 1.25 डॉलर के स्तर से थोड़ा ऊपर बना रहा। दूसरी तरफ, अमेरिकी डॉलर इंडेक्स अपने सत्र के निचले स्तरों से सुधरने के बावजूद 102.00 के नीचे अपने पुराने दायरे में ही बना रहा, जहां एक ओर उसे मध्य पूर्व के तनाव और कच्चे तेल की मजबूती से सहारा मिला, तो दूसरी ओर अमेरिकी राजनीतिक अनिश्चितता ने इसकी तेजी पर ब्रेक लगाए रखा। इसका आप पर असर यूरोपीय सेंट्रल बैंक द्वारा ब्याज दरों में बढ़ोतरी के संकेत से वैश्विक बाजारों में उधारी महंगी होने और मुद्राओं की कीमतों में बदलाव की संभावना बढ़ गई है। • वैश्विक कर्जदारों पर: अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दरों में बढ़ोतरी से व्यावसायिक और उपभोक्ता ऋणों की लागत में वृद्धि हो सकती है। आयात-निर्यात से जुड़े व्यवसायों और वैश्विक स्तर पर पूंजी जुटाने वाली कंपनियों को आने वाले समय में अधिक ब्याज वहन करना पड़ सकता है। • मुद्रा विनिमय दरों पर: दरें बढ़ने पर यूरो में अमेरिकी डॉलर और अन्य करेंसियों के मुकाबले मजबूती देखने को मिल सकती है। विदेशी मुद्रा में व्यापार करने वाले व्यापारियों और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर यात्रा करने वाले लोगों को विनिमय दरों में अतिरिक्त उतार-चढ़ाव का सामना करना पड़ेगा। • क्रिप्टो और कमोडिटी निवेशकों पर: केंद्रीय बैंकों द्वारा कड़े रुख के बीच सोना, बिटकॉइन और अन्य जोखिम वाली संपत्तियों पर दबाव बना रह सकता है। निवेशक सुरक्षित संपत्तियों की ओर रुख कर सकते हैं, जिससे डिजिटल मुद्राओं में सुधार की गति धीमी रह सकती है। • भारत में व्यापार पर: यूरोप भारत के प्रमुख व्यापारिक साझेदारों में से एक है, इसलिए वहां ब्याज दरों के बढ़ने से निर्यात की मांग पर असर पड़ सकता है। भारतीय निर्यातकों को यूरोपीय बाजार में मांग की गति और विनिमय दर जोखिमों पर नजर रखनी होगी। ऐसा क्यों हुआ यूरोपीय सेंट्रल बैंक में ब्याज दरें बढ़ाने की चर्चा सितंबर में मुद्रास्फीति के दबाव के उम्मीद से अधिक बढ़ने और ऊर्जा बाजार में पैदा हुए नए जोखिमों के कारण तेज हुई है। • महंगाई का अप्रत्याशित दबाव: सितंबर के आर्थिक आंकड़ों में मुद्रास्फीति की रफ्तार अनुमानों से कहीं अधिक तेज दर्ज की गई, जो केंद्रीय बैंक के प्रतिकूल परिदृश्य के करीब पहुंच रही है। इसी वजह से नीति निर्माताओं को कीमतों पर लगाम कसने के लिए कड़े कदम उठाने की जरूरत महसूस हो रही है। • ऊर्जा कीमतों में उछाल का डर: मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में आई तेजी से व्यापक स्तर पर महंगाई भड़कने का खतरा पैदा हो गया है। ईसीबी यह सुनिश्चित करना चाहता है कि ऊर्जा क्षेत्र की महंगाई पूरी अर्थव्यवस्था के अन्य सामानों को महंगा न कर दे। • वित्तीय और मौद्रिक सीमाओं का अलगाव: फ्रांस जैसे देशों में बजट घाटे की समस्याएं बनी हुई हैं, लेकिन केंद्रीय बैंक का मानना है कि इन मुद्दों का हल राजकोषीय नीति से निकलना चाहिए, न कि मौद्रिक ढील से। इसके चलते नीतिगत फोकस पूरी तरह से 2 प्रतिशत मुद्रास्फीति के लक्ष्य पर केंद्रित बना हुआ है। सवाल-जवाब 1. जोआचिम नागेल ने दिसंबर की बैठक को लेकर क्या बयान दिया है? उन्होंने कहा है कि मुद्रास्फीति के बढ़ते दबाव को देखते हुए दिसंबर में ईसीबी द्वारा ब्याज दरों में बढ़ोतरी किया जाना बहुत जरूरी हो सकता है। 2. यूरोपीय सेंट्रल बैंक का मुख्य लक्ष्य क्या है? ईसीबी का प्राथमिक दायित्व यूरोज़ोन में कीमतों की स्थिरता बनाए रखना है, जिसका लक्ष्य मुद्रास्फीति को करीब 2 प्रतिशत पर रखना होता है। 3. फ्रांस के बजट संकट पर नागेल का क्या रुख है? नागेल को विश्वास है कि फ्रांस अपनी बजट समस्याओं को सुलझा लेगा, लेकिन उन्होंने स्पष्ट किया कि यह मौद्रिक नीति का काम नहीं है। 4. क्वांटिटेटिव ईजिंग और क्वांटिटेटिव टाइटनिंग में क्या अंतर है? क्वांटिटेटिव ईजिंग में नकदी बढ़ाने के लिए बॉन्ड खरीदे जाते हैं, जबकि क्वांटिटेटिव टाइटनिंग में नए बॉन्ड की खरीद और परिपक्व बॉन्ड का पुनर्निवेश बंद कर दिया जाता है। 5. कमोडिटी और क्रिप्टो बाजार में सोने और बिटकॉइन का क्या स्तर रहा? सोना 0.93 प्रतिशत गिरकर लगभग 3,909 डॉलर पर रहा, जबकि बिटकॉइन गिरकर 76,566 डॉलर पर छह सप्ताह के निचले स्तर के करीब कारोबार कर रहा था। https://trendkia.com/market/disnbara-men-byaja-daren-barha-sakata-hai-ecb-bundesbank-pramukha-joachim-nagel-ne-die-snketa-55995 TrendKia — Har trend, sabse pehle.