# दिसंबर में अमेरिकी फेडरल रिजर्व के ब्याज दरें बढ़ाने की संभावनाओं से डॉलर को मिला मजबूत सहारा

> वैश्विक बॉन्ड यील्ड में तेजी और अमेरिकी सेवा क्षेत्र के सकारात्मक आंकड़ों के दम पर अमेरिकी डॉलर मजबूत बना हुआ है, जबकि दिसंबर में फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों में बढ़ोतरी की संभावनाएं बरकरार हैं।

**Type:** article · **Category:** बाज़ार · **Published:** 2026-10-06 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/market/disnbara-men-us-federal-reserve-ke-byaja-daren-barhane-ki-snbhavanaon-se-us-dollar-ko-mila-majabuta-sahara-43852 · **Language:** Hindi
**Tags:** अमेरिकी डॉलर, फेडरल रिजर्व, ब्याज दरें, मुद्रा बाजार, बॉन्ड यील्ड, सोना

अंतरराष्ट्रीय मुद्रा बाजार में कारोबारी हफ्ते के शुरुआती दिनों में अमेरिकी डॉलर को लगातार मजबूत समर्थन मिल रहा है। प्रमुख वैश्विक अर्थव्यवस्थाओं में सरकारी बॉन्ड यील्ड का लगातार ऊंचे स्तरों पर बने रहना और यूरो की आंतरिक कमजोरी डॉलर की मजबूती की बड़ी वजह बनी हुई है। हालांकि शेयर बाजारों के बेहतर प्रदर्शन ने डॉलर की बढ़त को कुछ हद तक सीमित किया और अधिक उतार-चढ़ाव वाली जोखिमभरी मुद्राओं को राहत दी, लेकिन अमेरिका की घरेलू आर्थिक परिस्थितियां अभी भी ग्रीनबैक के पक्ष में मजबूती से टिकी हुई हैं।

## अमेरिकी सेवा क्षेत्र के आंकड़े और फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति
अमेरिकी सेवा क्षेत्र के हालिया आंकड़ों से आर्थिक मजबूती के स्पष्ट संकेत मिले हैं। आपूर्ति प्रबंधन संस्थान यानी आईएसएम का गैर-विनिर्माण सूचकांक पिछले स्तर 55.4 से मामूली गिरकर 54.9 दर्ज किया गया, जबकि विश्लेषकों का आम अनुमान 55.0 का था। मामूली गिरावट के बावजूद यह सूचकांक मजबूती के साथ 50 के स्तर से ऊपर विस्तार के दायरे में बना हुआ है। व्यावसायिक गतिविधियों और नए कारोबारी ऑर्डरों की रफ्तार में कुछ नरमी जरूर देखी गई, लेकिन रोजगार के बेहतर आंकड़े, लंबित ऑर्डरों की संख्या और इनपुट लागत यानी कीमतों के नए उच्च स्तर ने इस गिरावट के असर को पूरी तरह संतुलित कर दिया।

विशेष रूप से रोजगार और कीमतों के मोर्चे पर आए इन आंकड़ों को मौद्रिक नीति के लिहाज से थोड़ा सख्त रुख वाला माना जा रहा है, हालांकि यह अमेरिकी केंद्रीय बैंक यानी फेडरल रिजर्व की मौजूदा रणनीति में कोई बड़ा फेरबदल करने के लिए पर्याप्त नहीं है। यदि 14 अक्टूबर को आने वाला सितंबर माह का कोर सीपीआई मुद्रास्फीति आंकड़ा उम्मीद के मुताबिक महीने-दर-महीने 0.2 प्रतिशत पर रहता है, तो वित्तीय बाजार अक्टूबर की बैठक में ब्याज दरों के स्थिर रहने के फैसले को लेकर सहज बने रहेंगे। इसके बावजूद बाजार विश्लेषकों का बुनियादी अनुमान यही है कि फेडरल रिजर्व दिसंबर की बैठक में नीतिगत दरों में बढ़ोतरी कर सकता है।

## मुद्रा बाजारों में उतार-चढ़ाव और प्रमुख जोड़ों की स्थिति
विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में एशियाई कारोबारी सत्र के दौरान ऑस्ट्रेलियाई डॉलर बनाम अमेरिकी डॉलर यानी AUD/USD जोड़ी में नरमी दर्ज की गई। इससे पिछले हफ्ते छुए गए दो महीने के निचले स्तर से शुरू हुई दो दिवसीय सुधार की रफ्तार थम गई। फिक्स्ड इनकम बाजार में चल रही भारी बिकवाली के चलते अमेरिकी बॉन्ड यील्ड कई वर्षों के उच्च स्तर के करीब बनी हुई है। भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के साथ मिलकर इस स्थिति ने अमेरिकी डॉलर के तेज रुख को बनाए रखने में मदद की है, भले ही अक्टूबर में फेड द्वारा दरें बढ़ाने की उम्मीदें कमजोर पड़ी हों। दूसरी तरफ रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया द्वारा इसी महीने एक और संभावित ब्याज दर वृद्धि की उम्मीद ऑस्ट्रेलियाई मुद्रा को नीचे से सहारा दे रही है।

यूरोपीय कारोबारी सत्र की शुरुआत में डॉलर बनाम जापानी येन यानी USD/JPY जोड़ी दोबारा 158.00 के स्तर के पार पहुंच गई। बैंक ऑफ जापान की ओर से सख्त नीतिगत कदमों की अपेक्षाओं और बाजार में संभावित सरकारी हस्तक्षेप की आशंकाओं के बावजूद जापानी येन कोई मजबूत बढ़त हासिल करने में नाकाम रहा। अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में मजबूती और वैश्विक अनिश्चितता के कारण डॉलर अपने साल के उच्चतम स्तर के करीब टिका हुआ है, जिससे USD/JPY जोड़ी को निरंतर ऊपरी स्तरों पर समर्थन मिल रहा है।

## सोने की कीमतों में सुधार और वैश्विक अनिश्चितताएं
कीमती धातुओं के बाजार में सोने ने 4,100 डॉलर के आसपास यानी दो महीने के निचले स्तर से हल्की वापसी दर्ज करते हुए यूरोपीय सत्र के पहले पहर में 4,150 डॉलर प्रति औंस के पार कदम बढ़ाया। सितंबर के निचले स्तरों से आई हालिया तेज रैली के बाद अमेरिकी डॉलर की रफ्तार थोड़ी थमी, जिसने सर्राफा कीमतों को सहारा दिया। इसके अलावा अक्टूबर में अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरें न बढ़ाने की बढ़ती संभावनाओं ने भी बिना ब्याज देने वाली संपत्तियों जैसे सोने की मांग को बढ़ावा दिया है।

आर्थिक कैलेंडर के अनुसार किसी बड़े स्तर-1 डेटा के अभाव में बाजार का मुख्य ध्यान यूरोपीय घटनाक्रमों और पश्चिम एशिया के भू-राजनीतिक तनावों पर केंद्रित है। फ्रांस में आने वाले दिनों का सबसे संवेदनशील राजनीतिक मुद्दा यह तय करेगा कि क्या सोशलिस्ट पार्टी और मरीन ले पेन की नेशनल रैली पार्टी राष्ट्रीय बजट प्रस्तावों को लेकर मौजूदा सरकार को गिराने का फैसला करती हैं या नहीं।

## यूरोपीय सेंट्रल बैंक के सामने मौद्रिक नीति की दुविधा
यूरोपीय सेंट्रल बैंक यानी ईसीबी के सामने नीतिगत स्तर पर असामान्य चुनौतियां खड़ी हैं। सामान्य परिस्थितियों में अगर मुद्रास्फीति आधिकारिक लक्ष्य से करीब दोगुनी रफ्तार से चल रही हो, तो केंद्रीय बैंक का स्वाभाविक कदम ब्याज दरों में तेज बढ़ोतरी करना होता है। लेकिन वर्तमान आर्थिक माहौल सामान्य नहीं है। सरकारी बॉन्ड बाजार में यील्ड की बढ़त पहले ही वित्तीय स्थितियों को कड़ा करने का काम कर रही है, जिससे ईसीबी के लिए स्वतंत्र रूप से दरों को लेकर फैसला करना एक बेहद जटिल दुविधा बन चुका है।

## इसका आप पर असर
अमेरिकी डॉलर और बॉन्ड यील्ड की मजबूती वैश्विक वित्तीय बाजारों, विदेशी मुद्रा दरों और आम निवेशकों के पोर्टफोलियो पर सीधा असर डालती है।

- **मुद्रा विनिमय और आयात पर असर:** डॉलर के मजबूत रहने से भारतीय रुपये समेत अधिकांश उभरते बाजारों की मुद्राओं पर दबाव बना रहता है। आयात महंगा होने से कच्चे तेल और विदेशी उत्पादों के दाम बढ़ सकते हैं।
- **सोने और निवेश के दाम:** अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सोने की कीमतों में 4,100 से 4,150 डॉलर के बीच अस्थिरता देखी जा रही है। फेड द्वारा ब्याज दरों को लेकर लिए जाने वाले फैसलों से सोने और सर्राफा बाजारों में उतार-चढ़ाव जारी रहेगा।
- **वैश्विक कर्ज और बॉन्ड बाजार:** अमेरिकी बॉन्ड यील्ड के कई सालों के उच्च स्तर के पास रहने से अंतरराष्ट्रीय कर्ज लेना महंगा बना हुआ है। कर्जदाताओं और कॉरपोरेट कंपनियों को अपनी उधारी योजनाओं में सतर्कता बरतनी होगी।
- **शेयर बाजार के निवेशकों के लिए:** वैश्विक अनिश्चितता और दिसंबर में ब्याज दर बढ़ोतरी की आशंका से इक्विटी बाजारों में सीमित बढ़त देखने को मिल सकती है। निवेशकों को रक्षात्मक और कम जोखिम वाली संपत्तियों पर नजर रखनी चाहिए।

## ऐसा क्यों हुआ
अमेरिकी सेवा क्षेत्र के लचीलेपन और ब्याज दरों में बढ़ोतरी की निरंतर संभावनाओं ने डॉलर को ऊपरी स्तरों पर बनाए रखा है। वैश्विक बॉन्ड बाजारों में बिकवाली और यूरोप में जारी आर्थिक व राजनीतिक चिंताओं ने डॉलर की मांग को अतिरिक्त समर्थन दिया है।

- **अमेरिकी सेवा क्षेत्र में विस्तार:** आपूर्ति प्रबंधन संस्थान का सेवा सूचकांक 54.9 पर दर्ज हुआ, जो लगातार आर्थिक विस्तार को दर्शाता है। रोजगार और कीमतों से जुड़े मजबूत घटकों ने आर्थिक सुस्ती की आशंकाओं को कम कर दिया।
- **दिसंबर दर बढ़ोतरी का आधार:** बाजार अक्टूबर में दरों के स्थिर रहने की उम्मीद कर रहे हैं, लेकिन मुद्रास्फीति के दबाव के चलते दिसंबर में ब्याज दर वृद्धि की संभावना बरकरार है। इसी वजह से डॉलर इंडेक्स को लगातार सहारा मिल रहा है।
- **यूरोप और जापान की मुद्रागत कमजोरी:** फ्रांस में बजट विवाद को लेकर सरकार गिरने का खतरा और जापानी येन में सुस्ती डॉलर के मुकाबले प्रतिद्वंद्वी मुद्राओं को कमजोर कर रही है। इससे निवेशक सुरक्षित संपत्ति के तौर पर डॉलर की ओर रुख कर रहे हैं।

## सवाल-जवाब

### 1. अमेरिकी डॉलर को हालिया कारोबार में किस वजह से मजबूती मिल रही है?
वैश्विक बॉन्ड यील्ड के ऊंचे स्तरों पर बने रहने, सेवा क्षेत्र के सकारात्मक आंकड़ों और दिसंबर में फेडरल रिजर्व द्वारा संभावित ब्याज दर बढ़ोतरी के अनुमानों से डॉलर को सहारा मिल रहा है।

### 2. अमेरिकी आईएसएम सेवा सूचकांक के ताजा आंकड़े क्या रहे?
आईएसएम सेवा सूचकांक 55.4 से घटकर 54.9 पर आया, जो 55.0 के बाजार अनुमान से थोड़ा कम है लेकिन अब भी विस्तार के मजबूत दायरे में है।

### 3. सोने की कीमतों में हालिया बदलाव क्या दर्ज किया गया?
सोने ने 4,100 डॉलर के दो महीने के निचले स्तर से उबरते हुए यूरोपीय सत्र में 4,150 डॉलर प्रति औंस के पार वापसी की।

### 4. USD/JPY मुद्रा जोड़ी का ताजा स्तर क्या रहा?
जापानी येन की कमजोरी के बीच USD/JPY जोड़ी बढ़कर 158.00 के पार पहुंच गई है।

### 5. फेडरल रिजर्व की आगामी बैठकों को लेकर विश्लेषकों का क्या रुख है?
यदि सितंबर का कोर सीपीआई 0.2 प्रतिशत रहता है तो अक्टूबर में दरें स्थिर रह सकती हैं, जबकि दिसंबर में ब्याज दर बढ़ोतरी का आधारभूत अनुमान बरकरार है।

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