{
  "type": "article",
  "title": "डॉलर इंडेक्स में तेजी का रुझान बरकरार, 100 के अहम सपोर्ट पर टिके रहे खरीदार",
  "summary": "अमेरिकी डॉलर इंडेक्स 100.96 के आसपास मजबूती से टिका है और ईरान को लेकर चल रहे घटनाक्रम के बीच कारोबारी सतर्क रुख अपनाए हुए हैं। जब तक कीमत लंबी अवधि के अहम मूविंग एवरेज के ऊपर है, तेजी का पलड़ा भारी बना हुआ है।",
  "content": "हफ्ते की शुरुआत में अमेरिकी डॉलर इंडेक्स एक संकरे दायरे में सिमटा नजर आया, जहां खरीदारों की पकड़ तो बनी हुई है लेकिन तेजड़ियों में इतना दम नहीं दिखा कि कोई बड़ा उछाल आ सके। ताज़ा कारोबार में यह सूचकांक करीब 100.96 पर हाथ बदलता दिखा, जो पिछले बंद स्तर 100.75 से थोड़ा ऊपर है। इस तरह इंडेक्स करीब 0.21% की बढ़त के साथ उन स्तरों के ऊपर टिका रहा, जिन्हें कारोबारी मजबूती और कमजोरी के बीच की सीमा रेखा मानते हैं।\n\nDXY असल में अमेरिकी डॉलर की कीमत को दुनिया की छह प्रमुख मुद्राओं की टोकरी के मुकाबले मापने वाला सूचकांक है। सोमवार को यूरोपीय सत्र के शुरुआती घंटों में यह लगभग सपाट रहा, क्योंकि बाजार ईरान से जुड़े हालात पर लगातार नजर बनाए हुए है और आगे की दिशा तय करने से पहले घटनाक्रम को तौल रहा है।\n\nईरान पर टिकी बाजार की नजर\nडॉलर की चाल को इस वक्त सबसे ज्यादा भू-राजनीतिक हलचल प्रभावित कर रही है। अमेरिकी सेना ने सोमवार को बताया कि उसने ईरान के खिलाफ लगातार नौवीं रात हमले पूरे किए हैं। इन हमलों में कमांड सेंटरों, वायु रक्षा ठिकानों, समुद्री साजो-सामान, मिसाइल केंद्रों और संचार नेटवर्क को निशाना बनाया गया। इस तरह के तनाव के दौर में निवेशक अक्सर सुरक्षित माने जाने वाले डॉलर की ओर रुख करते हैं, और यही वजह है कि गिरावट पर भी डॉलर को सहारा मिलता दिख रहा है।\n\nचार्ट पर डॉलर की तस्वीर\nडेली चार्ट पर डॉलर इंडेक्स का नजरिया अभी हल्का सकारात्मक बना हुआ है। कीमत 100-दिन के सिंपल मूविंग एवरेज (SMA) और निचले बोलिंगर बैंड के ऊपर टिकी है, जो इशारा करता है कि हल्की गिरावट आने पर भी नीचे खरीदारी का समर्थन मौजूद है। बड़े दायरे में देखें तो कीमत अब भी दीर्घकालिक तेजी वाले रुझान में है। हालांकि ऊपर की ओर रफ्तार सीमित नजर आती है। ताज़ा आंकड़ों में रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स (RSI) करीब 55 पर है, जो हालिया कंसोलिडेशन के बाद सिर्फ मामूली तेजी वाले दबाव की ओर इशारा करता है। साथ ही MACD 0.21 पर अपनी सिग्नल लाइन 0.31 के नीचे चल रहा है, जिससे गति में थोड़ी नरमी झलकती है।\n\nऊपर की तरफ पहली बड़ी रुकावट बोलिंगर मिडल बैंड और 20-दिन के SMA के आसपास, यानी करीब 101.05 पर है। इसके आगे अगली दीवार ऊपरी बोलिंगर बैंड के पास लगभग 101.60 पर मौजूद है। पिछले 52 हफ्तों में इंडेक्स 95.55 से 101.80 के दायरे में घूमता रहा है, इसलिए 101.80 का ऊपरी छोर भी अहम बना रहेगा।\n\nनीचे की तरफ तत्काल सहारा निचले बोलिंगर बैंड के आसपास लगभग 100.50 पर दिखता है, और उसके बाद 100.00 का मनोवैज्ञानिक स्तर आता है। सबसे मजबूत ढांचागत सहारा 99.60 पर मौजूद 100-दिन के SMA के पास है। अगर यह स्तर टूटता है, तो मौजूदा तेजी का रुझान कमजोर पड़ सकता है और कीमत के और गहरे गिरने का रास्ता खुल सकता है।\n\nडॉलर की ताकत का आधार\nअमेरिकी डॉलर संयुक्त राज्य अमेरिका की आधिकारिक मुद्रा है और कई दूसरे देशों में भी यह स्थानीय नोटों के साथ-साथ व्यवहार में चलता है। यह दुनिया की सबसे ज्यादा कारोबार होने वाली मुद्रा है। 2022 के आंकड़ों के मुताबिक वैश्विक विदेशी मुद्रा कारोबार का 88% से ज्यादा हिस्सा अकेले डॉलर के नाम है, जो रोजाना औसतन 6.6 लाख करोड़ डॉलर के लेन-देन के बराबर बैठता है।\n\nदूसरे विश्व युद्ध के बाद डॉलर ने ब्रिटिश पाउंड की जगह लेते हुए दुनिया की रिजर्व मुद्रा का दर्जा हासिल किया। अपने इतिहास के ज्यादातर हिस्से में डॉलर सोने के भंडार से समर्थित रहा, लेकिन 1971 के ब्रेटन वुड्स समझौते के बाद गोल्ड स्टैंडर्ड खत्म हो गया।\n\nफेडरल रिजर्व की भूमिका\nडॉलर की कीमत तय करने में सबसे बड़ा कारक अमेरिका की मौद्रिक नीति है, जिसे फेडरल रिजर्व (फेड) आकार देता है। फेड के सामने दो मुख्य लक्ष्य हैं, कीमतों में स्थिरता यानी महंगाई पर काबू रखना और रोजगार को बढ़ावा देना। इन दोनों को साधने का उसका सबसे अहम औजार ब्याज दरों में बदलाव है। जब कीमतें बहुत तेजी से बढ़ती हैं और महंगाई फेड के 2% के लक्ष्य से ऊपर चली जाती है, तो फेड दरें बढ़ाता है, जिससे डॉलर को मजबूती मिलती है। इसके उलट जब महंगाई 2% से नीचे आ जाए या बेरोजगारी बहुत ज्यादा हो, तो फेड दरें घटा सकता है, जो डॉलर पर दबाव डालता है।\n\nबेहद कठिन हालात में फेडरल रिजर्व और डॉलर छाप सकता है और क्वांटिटेटिव ईजिंग (QE) का सहारा ले सकता है। यह वह तरीका है जिसके जरिए फेड किसी जाम पड़ चुके वित्तीय तंत्र में कर्ज का प्रवाह बढ़ाता है। यह कोई सामान्य कदम नहीं है, बल्कि तब अपनाया जाता है जब बैंक एक-दूसरे को उधार देने से कतराने लगते हैं और सिर्फ ब्याज दरें घटाने से बात नहीं बनती। 2008 की महामंदी के दौरान पैदा हुए कर्ज संकट से निपटने के लिए फेड ने यही हथियार चुना था। इसके तहत फेड नए डॉलर छापकर उनसे मुख्य रूप से वित्तीय संस्थानों से सरकारी बॉन्ड खरीदता है, और आमतौर पर इससे डॉलर कमजोर पड़ता है।\n\nक्वांटिटेटिव टाइटनिंग (QT) इसकी उलटी प्रक्रिया है, जिसमें फेड बॉन्ड खरीदना बंद कर देता है और पहले से रखे बॉन्ड की मैच्योरिटी से मिली रकम को दोबारा नहीं लगाता। यह प्रक्रिया आमतौर पर डॉलर के लिए मददगार रहती है।\n\nबाकी बाजारों का माहौल\nव्यापक बाजार में भी हलचल बनी रही। एथेरियम ने बीते हफ्ते बाकी बड़ी क्रिप्टोकरेंसी के मुकाबले बेहतर प्रदर्शन किया और बिटकॉइन, XRP तथा सोलाना को पीछे छोड़ते हुए दोहरे अंकों में बढ़त दर्ज की, हालांकि गुरुवार से पूरा बाजार करेक्शन की ओर मुड़ गया। इससे यह भी दिखा कि सतह के नीचे ETH की तेजी अभी नाजुक बनी हुई है।\n\nकार्डानो हल्की रिकवरी के बाद 0.165 डॉलर पर ठहर गया। शनिवार को वैन रॉसेम हार्ड फोर्क लागू होने के साथ कार्डानो का पहला ऐसा प्रोटोकॉल अपग्रेड पूरा हुआ जिसे पूरी तरह ऑनचेन गवर्नेंस के जरिए मंजूरी मिली। इसके साथ आए प्रोटोकॉल वर्जन 11 का मकसद स्मार्ट कॉन्ट्रैक्ट की लागत घटाना है।\n\nमहंगाई के मोर्चे पर भी बड़ी खबर रही। जून का CPI महीने-दर-महीने आधार पर 0.4% गिरा, जो अप्रैल 2020 के बाद किसी एक महीने में सबसे बड़ी गिरावट है। इससे सालाना दर मई के 4.2% से घटकर 3.5% पर आ गई और तीन महीने से चली आ रही तेजी की कड़ी टूट गई। कोर कीमतें महीने के दौरान स्थिर रहीं और सालाना आधार पर घटकर 2.6% पर आ गईं, दोनों ही आंकड़े अनुमान से नीचे रहे। महंगाई में यह नरमी आगे फेड की दरों को लेकर उम्मीदों को आकार देगी, जिसका सीधा असर डॉलर की चाल पर पड़ेगा।\n\nइसका आप पर असर\n• करेंसी कारोबारियों के लिए: डॉलर 100.50 के सपोर्ट के ऊपर टिका है, इसलिए 101.05 और 101.60 अगले अहम स्तर हैं, जबकि 99.60 टूटने पर रुझान बदल सकता है।\n• आम पाठक के लिए: मजबूत डॉलर आयातित सामान और विदेश यात्रा को महंगा बना सकता है, जबकि जून की नरम महंगाई आगे ब्याज दरों की दिशा तय करने में अहम रहेगी।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. डॉलर इंडेक्स इस समय किस स्तर पर है?\nताज़ा कारोबार में डॉलर इंडेक्स करीब 100.96 पर है, जो पिछले बंद स्तर 100.75 से लगभग 0.21% ऊपर है।\n\n2. डॉलर के लिए अहम सपोर्ट और रेजिस्टेंस कहां हैं?\nतत्काल सपोर्ट करीब 100.50 पर और उसके बाद 100.00 तथा 99.60 पर है, जबकि रेजिस्टेंस 101.05 और 101.60 पर मौजूद है।\n\n3. डॉलर की चाल को अभी क्या प्रभावित कर रहा है?\nबाजार ईरान से जुड़े घटनाक्रम पर नजर रखे हुए है, जहां अमेरिकी सेना ने लगातार नौवीं रात हमले पूरे किए हैं, और इस तनाव में डॉलर को सहारा मिल रहा है।\n\n4. तकनीकी संकेतक क्या कह रहे हैं?\nRSI करीब 55 पर मामूली तेजी दिखा रहा है, जबकि MACD अपनी सिग्नल लाइन के नीचे है, यानी ऊपर की रफ्तार अभी सीमित है।\n\n5. जून के CPI आंकड़े कैसे रहे?\nजून का CPI महीने-दर-महीने 0.4% गिरा और सालाना दर 4.2% से घटकर 3.5% पर आ गई, जबकि कोर महंगाई 2.6% पर रही।\n\n6. तेजी का रुझान कब खतरे में पड़ेगा?\nअगर कीमत 100-दिन के SMA यानी करीब 99.60 के नीचे टूटती है, तो मौजूदा तेजी का रुझान कमजोर पड़ सकता है।",
  "url": "https://trendkia.com/market/dolara-index-men-teji-ka-rujhana-barakarara-100-ke-ahama-saporta-para-tike-rahe-kharidara-9249",
  "category": "बाज़ार",
  "publishedAt": "2026-07-21",
  "tags": [
    "डॉलर इंडेक्स",
    "DXY",
    "फेडरल रिजर्व",
    "अमेरिकी डॉलर",
    "फॉरेक्स",
    "ईरान तनाव",
    "तकनीकी विश्लेषण",
    "CPI महंगाई",
    "finance"
  ],
  "language": "hi",
  "site": "TrendKia"
}