डॉलर के मुकाबले जापानी येन में ऐतिहासिक गिरावट: 163 के पार पहुंचा भाव, बाजार को अहम डेटा का इंतजार जापानी येन दशकों के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया है और विदेशी मुद्रा बाजार में भारी अस्थिरता का सामना कर रहा है। निवेशक अब जापान के व्यापार आंकड़ों और अमेरिकी फेडरल रिजर्व के ब्याज दर संकेतों का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। विदेशी मुद्रा बाजार में एक ऐतिहासिक गतिरोध देखने को मिल रहा है, जहां जापानी येन (Yen) अमेरिकी डॉलर (Dollar) के मुकाबले कई दशकों के सबसे निचले स्तर पर फंसा हुआ है। यह स्थिति फिलहाल सुलझने का नाम नहीं ले रही है। कई हफ्तों से, USD/JPY करेंसी पेयर ऐतिहासिक ऊंचाई के ठीक नीचे अटका हुआ था, जो यह दर्शाता है कि कारोबारी किसी बड़े फैसले को लेकर भारी कश्मकश में थे। सोमवार को बाजार में बहुत ही सीमित दायरे में कारोबार हुआ, जहां यह पेयर केवल 40 पिप्स के छोटे से दायरे में 162.50 के आसपास घूमता रहा। एक तरफ 162.00 का मजबूत सपोर्ट था और दूसरी तरफ 163.00 के करीब एक बड़ा रेजिस्टेंस खड़ा था। पिछले दो हफ्तों से यह पेयर पूरी तरह से स्थिर था और एक ही जगह पर अटका हुआ था, जबकि खाड़ी (Gulf) देशों की भू-राजनीतिक खबरों के कारण बाकी डॉलर इंडेक्स में भारी उतार-चढ़ाव देखा जा रहा था। हालांकि, अब ताजा लाइव मार्केट डेटा से पता चलता है कि यह गतिरोध तेजी से टूट रहा है। USD/JPY ने 163.00 के अपने पिछले चक्र के अहम रेजिस्टेंस को पार कर लिया है और वर्तमान में यह 163.06 पर ट्रेड कर रहा है। यह कीमत इसके पिछले बंद स्तर 162.49 के मुकाबले 0.35% की बढ़ोतरी दर्शाती है। इस उछाल ने बाजार को ऐसे क्षेत्र में धकेल दिया है जहां दशकों से कारोबार नहीं हुआ था। अब इसकी 52 हफ्तों की रेंज 146.22 से 163.23 के बीच पहुंच गई है। ट्रेडिंग वॉल्यूम अपने 20-दिन के औसत का 1.00 गुना बना हुआ है। इस लंबे ठहराव के पीछे एकतरफा तेजी का रुझान काम कर रहा है। पिछले दस हफ्तों में से नौ हफ्तों में इस पेयर ने फ्लैट या उससे ऊपर की साप्ताहिक क्लोजिंग दी है, जो बाजार में ग्रीनबैक (अमेरिकी डॉलर) की मजबूत पकड़ को साबित करता है। टेक्निकल इंडिकेटर्स और बाजार का रुझान टेक्निकल एनालिसिस (Technical Analysis) की बात करें तो, शुरुआत में डेली स्टोकैस्टिक रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स (Relative Strength Index) ओवरबॉट जोन से गिरकर 30 के निचले स्तर पर आ गया था, और वह भी बिना किसी बड़ी कीमत की गिरावट के। यह साफ तौर पर दिखाता है कि सेलर्स को शॉर्ट पोजीशन लेने के लिए कोई ठोस बुनियादी वजह नहीं मिल रही थी। लेकिन अब लाइव डेटा के अनुसार कहानी बदल चुकी है, 14-पीरियड RSI उछलकर 67 पर पहुंच गया है, जो ओवरबॉट जोन के बेहद करीब है। स्टोकैस्टिक (Stochastic) की फास्ट लाइन 94 पर है, जो 85 की अपनी सिग्नल लाइन से बहुत आगे निकल चुकी है। यह दर्शाता है कि बाजार में खरीदारों का पूरा दबदबा बना हुआ है। इसके बावजूद, कुछ इंडिकेटर्स में हल्की मंदी भी दिखाई दे रही है। MACD 0.52 पर है जबकि इसकी सिग्नल लाइन 0.54 पर है, और इसका हिस्टोग्राम -0.02 के साथ हल्का मंदी (बियरिश) का संकेत दे रहा है। फिर भी, लंबी अवधि का ट्रेंड पूरी तरह से तेजी की ओर इशारा कर रहा है। बाजार में एक क्लासिक गोल्डन क्रॉस (Golden Cross) बन चुका है, क्योंकि 50-दिन का एक्सपोनेंशियल मूविंग एवरेज (EMA50) 161.01 पर आ गया है, जो 200-दिन के EMA (156.85) से काफी ऊपर है। साथ ही 20-दिन का EMA 162.06 पर कीमत को मजबूत सपोर्ट दे रहा है। बॉलिंगर बैंड्स (Bollinger Bands) के ऊपरी स्तर को भी कीमत ने पार कर लिया है, जो 161.37 से 163.00 (जिसकी मिडलाइन 162.18 है) तक फैले हैं। इसके अलावा 14-पीरियड का ADX अभी 18 पर है, जो संकेत देता है कि रेंज अभी बहुत मजबूत नहीं है। बाजार में डेली वोलैटिलिटी और स्टॉप-लॉस तय करने के लिए 14-दिन का ATR 0.66 है। अब ट्रेडर्स अहम लेवल्स पर नजर गड़ाए हुए हैं: पिवट पॉइंट 162.98 है, जबकि पहला रेजिस्टेंस R1 163.30 और दूसरा R2 163.55 पर है। अगर बाजार गिरता है, तो नीचे की तरफ सपोर्ट S1 162.74 और S2 162.42 पर मजबूती से मौजूद है। मिनिस्ट्री ऑफ फाइनेंस के हस्तक्षेप का डर बाजार में 162.50 के आसपास इस लंबे ठहराव की एक बड़ी वजह जापान के मिनिस्ट्री ऑफ फाइनेंस (Ministry of Finance) का खौफ है। वसंत ऋतु के दौरान, सरकारी एजेंसियों ने 160 के स्तर को बचाने के लिए आक्रामक कदम उठाते हुए एक ही दिन में बाजार में करीब 5.5 ट्रिलियन येन झोंक दिए थे। यह मुद्रा बाजार में पिछले दो सालों का सबसे बड़ा और चौंकाने वाला सरकारी हस्तक्षेप था। अधिकारियों ने इसके बाद मई की छुट्टियों के दौरान भी ऐसा ही बड़ा कदम उठाया था। लेकिन अब जमीनी हकीकत पूरी तरह से बदल चुकी है। USD/JPY करेंसी पेयर अब उस स्तर से ढाई आंकड़े ऊपर ट्रेड कर रहा है, जिसने सरकार को पिछली बार इतना पैसा खर्च करने पर मजबूर किया था। यही कारण है कि अब सरकारी अधिकारियों की चेतावनियों का बाजार पर कोई खास असर नहीं हो रहा है; बाजार एक तरह से सरकार की धमकियों को नजरअंदाज कर रहा है। कोई भी ट्रेडर 163.00 के पार बहुत बड़ा दांव लगाकर सरकार के अगले हमले को बुलावा नहीं देना चाहता है, लेकिन साथ ही कोई भी कैरी ट्रेड (Carry Trade) से मिलने वाले शानदार मुनाफे को खुशी-खुशी छोड़ना भी नहीं चाहता। यह उलझन येन को एक अजीब सी स्थिति में फंसाए हुए है, जहां न तो खुलकर खरीदारी हो रही है और न ही बड़ी बिकवाली। आयात का भारी खर्च और व्यापार के अहम आंकड़े येन की इस लगातार कमजोरी का जापान की घरेलू अर्थव्यवस्था पर सीधा और बहुत बुरा असर पड़ रहा है। अब सबकी निगाहें मंगलवार (23:50 GMT) को जारी होने वाले जून महीने के अहम व्यापार डेटा पर टिकी हैं। बाजार के जानकारों की नजर निर्यात की सफलता पर नहीं, बल्कि जापान के भारी-भरकम और बढ़ते आयात बिल पर है। अर्थशास्त्रियों का अनुमान है कि आयात की वृद्धि दर 12.5% से तेज होकर 21% (साल-दर-साल) तक पहुंच सकती है। चूंकि जापान अपनी जरूरत का लगभग पूरा तेल और गैस विदेशों से आयात करता है, इसलिए यह वृद्धि दर देश की जनता के लिए एक बड़े ऊर्जा-टैक्स की तरह काम कर रही है। खाड़ी (Gulf) देशों में सप्लाई की समस्या ने इस ऊर्जा संकट को और भी गहरा कर दिया है। दूसरी ओर, कमजोर येन का सीधा फायदा निर्यातकों को जरूर मिल रहा है। निर्यात वृद्धि दर भी 16.8% से बढ़कर 18.6% होने का अनुमान है, जो मुख्य रूप से मुद्रा की कमजोरी का गणितीय प्रभाव है, न कि उत्पादन में कोई बड़ी क्रांति। इन दोनों आंकड़ों को आपस में मिलाने पर, कुल व्यापार घाटा (मर्चेंडाइज डेफिसिट) करीब 392 अरब येन से घटकर 120 अरब येन पर आ जाने की उम्मीद है। व्यापार के आंकड़ों के ठीक बाद गुरुवार को राष्ट्रीय महंगाई (इन्फ्लेशन) के आंकड़े जारी किए जाएंगे, जिससे यह साफ हो जाएगा कि महंगी ऊर्जा का बोझ आम जनता की जेब पर कितना भारी पड़ रहा है। अमेरिकी डेटा और फेडरल रिजर्व की खामोशी मंगलवार और गुरुवार को टोक्यो से आने वाले घरेलू डेटा के अलावा, मैक्रोइकॉनॉमिक्स के नजरिए से पूरी दुनिया की नजर अमेरिका (America) पर है। शुक्रवार (13:45 GMT) को आने वाला अमेरिकी फ्लैश परचेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स (Flash Purchasing Managers Index) या PMI इस हफ्ते का सबसे अहम डेटा है। अगले बुधवार को होने वाली फेडरल रिजर्व (Fed) की मौद्रिक नीति बैठक से पहले यह इकलौता बड़ा और महत्वपूर्ण अमेरिकी आर्थिक आंकड़ा है, जिस पर रेड-बैंड का अलर्ट लगा है। यह समय इसलिए भी बहुत संवेदनशील है क्योंकि फेडरल रिजर्व के सभी बड़े अधिकारी फिलहाल एक सख्त ब्लैकआउट (Blackout) पीरियड में हैं। इसका सीधा मतलब है कि वे ब्याज दरों पर कोई सार्वजनिक बयान या भाषण नहीं दे सकते। इस खामोशी के कारण मुद्रा बाजार के पास दिशा तय करने के लिए ब्याज दरों से जुड़ा कोई नया बयान नहीं है। ऐसे में यह PMI डेटा ही यह तय करेगा कि अमेरिकी अर्थव्यवस्था कितनी मजबूत है और क्या ब्याज दरें आगे भी लंबे समय तक ऊंची बनी रहेंगी या कटौती का कोई रास्ता निकलेगा। बैंक ऑफ जापान की नीतियां और सेफ हेवन का दर्जा जापानी येन की वर्तमान दुर्दशा को समझने के लिए, इसकी वैश्विक भूमिका को जानना जरूरी है। यह दुनिया की सबसे ज्यादा ट्रेड होने वाली करेंसियों में से एक है। इसकी कीमत मुख्य रूप से जापान की अर्थव्यवस्था के प्रदर्शन, बैंक ऑफ जापान (Bank of Japan) की नीतियों, अमेरिका और जापान के बांड यील्ड में भारी अंतर, और ग्लोबल निवेशकों के जोखिम लेने की क्षमता पर निर्भर करती है। बैंक ऑफ जापान की मुख्य जिम्मेदारियों में मुद्रा का नियंत्रण भी शामिल है, इसलिए उसके फैसले बहुत ज्यादा मायने रखते हैं। अतीत में बैंक ने येन की कीमत कम करके निर्यात बढ़ाने के लिए बाजार में सीधा हस्तक्षेप किया है, हालांकि अपने बड़े व्यापारिक साझेदारों की राजनीतिक चिंताओं के कारण वह ऐसा बार-बार करने से हमेशा बचता है। मौजूदा संकट की असल जड़ बैंक ऑफ जापान की वह बेहद ढीली (अल्ट्रा-लूज) मौद्रिक नीति है जिसे 2013 से 2024 के बीच सख्ती से लागू रखा गया। इस नीति ने येन को अपने प्रमुख वैश्विक प्रतिस्पर्धियों के मुकाबले काफी कमजोर कर दिया। इस दौरान अन्य केंद्रीय बैंकों और बैंक ऑफ जापान की नीतियों में इतना बड़ा अंतर आ गया कि अमेरिका और जापान के 10-साल के बांड यील्ड का फासला बहुत बढ़ गया, जिससे अमेरिकी डॉलर को सीधा फायदा पहुंचा। हालांकि, 2024 में बैंक ऑफ जापान ने इस ढीली नीति को धीरे-धीरे छोड़ने का ऐतिहासिक फैसला किया। इसके साथ ही अन्य देशों में ब्याज दरों में कटौती की उम्मीदों से यह अंतर कुछ कम हो रहा है, जिससे येन को थोड़ा बहुत बुनियादी सहारा मिल रहा है। आमतौर पर जापानी येन को एक मजबूत सेफ हेवन (Safe Haven) यानी सुरक्षित निवेश माना जाता रहा है। इसका मतलब है कि जब बाजार में भारी तनाव, युद्ध या आर्थिक संकट होता है, तो वैश्विक निवेशक अपनी पूंजी की सुरक्षा के लिए जापानी मुद्रा में पैसा लगाते हैं। लेकिन मौजूदा हालातों ने इस पूरी धारणा को बदल दिया है। भारी ब्याज दर के अंतर के कारण इसका सुरक्षित निवेश वाला आकर्षण लगभग खत्म हो गया है, क्योंकि निवेशक सुरक्षा से ज्यादा ज्यादा मुनाफे को तरजीह दे रहे हैं। ग्लोबल मार्केट का हाल: यूरो, पाउंड और गोल्ड अमेरिकी डॉलर की मजबूती का असर सिर्फ एशियाई बाजारों तक सीमित नहीं है; यह दुनिया के अन्य बाजारों पर भी साफ दिख रहा है, जिसने कई प्रमुख संपत्तियों के मूल्यांकन को पूरी तरह से बदल कर रख दिया है। उदाहरण के लिए, ब्रिटिश पाउंड (GBP/USD) में भारी और अतिरिक्त बिकवाली देखी जा रही है। यह करेंसी पेयर 1.3420 के करीब अपने कई दिनों के निचले स्तर पर पहुंच गया है, जो कारोबारी हफ्ते की एक बेहद निराशाजनक और मंदी (बियरिश) वाली शुरुआत है। केबल (Cable) में यह भारी गिरावट सीधे तौर पर मजबूत हो रहे ग्रीनबैक के बीच आई है। वैश्विक निवेशक अमेरिका और ईरान (Iran) के बीच चल रहे भू-राजनीतिक संघर्ष में हो रहे नए घटनाक्रमों का बहुत घबराहट के साथ आकलन कर रहे हैं। इतिहास गवाह है कि जब दुनिया में अस्थिरता बढ़ती है, तो पूंजी डॉलर की तरफ भागती है। आगे चलकर, पाउंड के कारोबारियों का पूरा ध्यान मंगलवार को आने वाली यूके की महत्वपूर्ण एम्प्लॉयमेंट रिपोर्ट पर केंद्रित हो जाएगा। इसी तरह, यूरो (Euro) यानी EUR/USD में डॉलर के मुकाबले मंदी का गहरा रुख मजबूती से बना हुआ है। सिंगल करेंसी लगातार नीचे की तरफ खिसक रही है और 1.1400 के अहम क्षेत्र की ओर बढ़ रही है, जहां इसे कुछ शुरुआती सपोर्ट मिलता दिख रहा है। अमेरिकी डॉलर की शक्तिशाली शुरुआत ने दुनिया के सभी जोखिम भरे निवेशों को भारी दबाव में ला दिया है। मिडिल ईस्ट (Middle East) के तनाव के कारण निवेशक फूंक-फूंक कर कदम रख रहे हैं। भू-राजनीति से हटकर, अब बाजार को यूरोजोन और विशेष रूप से जर्मन (Germany) इकोनॉमिक सेंटीमेंट (ZEW) के अहम आंकड़ों का बेसब्री से इंतजार है। कमोडिटी बाजार की बात करें तो, जोखिम और मुनाफे की यह रस्साकशी सोने (Gold) की कीमतों में भी साफ दिखाई दे रही है। इस कीमती धातु ने शुक्रवार के अपने उछाल को पूरी तरह से उलट दिया है। वर्तमान में सोना 4,000 डॉलर प्रति ट्रॉय औंस के अहम मनोवैज्ञानिक स्तर के आसपास भारी उतार-चढ़ाव का सामना कर रहा है। यह सच है कि मिडिल ईस्ट में बढ़ती सैन्य कार्रवाइयां इस धातु को बुनियादी समर्थन दे रही हैं, लेकिन अमेरिका में लंबे समय तक ऊंची ब्याज दरें बने रहने की उम्मीदें अमेरिकी डॉलर को लगातार मजबूत कर रही हैं। चूंकि सोने में निवेश पर कोई ब्याज नहीं मिलता, इसलिए मजबूत डॉलर और ज्यादा यील्ड सोने को महंगा और कम आकर्षक बना देते हैं। इसका आप पर असर • फॉरेक्स ट्रेडर्स के लिए: 163.00 के अहम स्तर को पार करने के बाद बाजार में अस्थिरता काफी बढ़ सकती है, इसलिए स्टॉप-लॉस और रिस्क मैनेजमेंट का ध्यान रखना बहुत जरूरी है। • जापानी अर्थव्यवस्था के लिए: कमजोर येन के कारण आयातित कच्चे तेल और गैस की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं, जिससे आम जनता पर महंगाई का बोझ और ज्यादा पड़ेगा। • ग्लोबल निवेशकों के लिए: अमेरिका और जापान के बीच ब्याज दरों के बड़े अंतर के कारण अमेरिकी डॉलर का आकर्षण बना हुआ है, जिससे निवेशकों का पैसा वहां जा रहा है। सवाल-जवाब 1. अमेरिकी डॉलर के मुकाबले जापानी येन इतना कमजोर क्यों है? इसकी मुख्य वजह अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ऊंची ब्याज दरों और बैंक ऑफ जापान की लंबे समय से चली आ रही बेहद ढीली मौद्रिक नीति के बीच का बड़ा अंतर है। 2. क्या जापान सरकार येन को मजबूत करने के लिए कोई कदम उठाएगी? मिनिस्ट्री ऑफ फाइनेंस ने पहले 5.5 ट्रिलियन येन खर्च करके बाजार में हस्तक्षेप किया था, लेकिन वे अपने व्यापारिक साझेदारों की राजनीतिक चिंताओं के कारण इसे बार-बार करने से बच रहे हैं। 3. कमजोर येन का जापान के व्यापार संतुलन पर क्या असर पड़ रहा है? इससे आयात बहुत महंगा हो गया है, खासकर ऊर्जा और गैस, जिससे आयात वृद्धि 21% तक पहुंचने की उम्मीद है, हालांकि यह निर्यात के आंकड़ों को भी गणितीय रूप से बेहतर दिखाता है। 4. USD/JPY के लिए अभी मुख्य टेक्निकल लेवल्स कौन से हैं? लाइव डेटा के अनुसार यह पेयर 163.06 पर ट्रेड कर रहा है; इसके लिए पहला रेजिस्टेंस 163.30 (R1) और मजबूत सपोर्ट 162.74 (S1) पर है। 5. बाजार की नजर शुक्रवार के अमेरिकी PMI डेटा पर क्यों है? फेडरल रिजर्व के अधिकारियों का इस समय ब्लैकआउट पीरियड चल रहा है, इसलिए ब्याज दरों के भविष्य का अनुमान लगाने के लिए बाजार के पास यह इकलौता बड़ा अमेरिकी आर्थिक आंकड़ा है। https://trendkia.com/market/dollar-ke-mukabale-japani-yen-men-aitihasika-giravata-163-ke-para-pahuncha-bhava-bajara-ko-ahama-deta-ka-intajara-9871 TrendKia — Har trend, sabse pehle.