डॉलर के संभलते ही थमी यूरो की तेजी, दो दिन की बढ़त पर लगा ब्रेक अमेरिकी डॉलर के दोबारा संभलने से यूरो की दो दिन से चली आ रही तेजी रुक गई और यूरो/डॉलर दबाव में कारोबार करता दिखा। नरम पड़ती अमेरिकी महंगाई ने फेडरल रिजर्व की दर बढ़ोतरी की उम्मीदों को टाला जरूर, पर पटरी से नहीं उतारा। यूरो की छोटी सी उड़ान की हवा निकल गई। अमेरिकी डॉलर के दोबारा पैर जमाते ही यूरो/डॉलर की लगातार दो दिन से चली आ रही बढ़त पर ब्रेक लग गया और यह जोड़ी दबाव में कारोबार करती नजर आई। दिलचस्प बात यह है कि इस गिरावट की वजह यूरो की कोई नई कमजोरी नहीं, बल्कि पिछले कुछ सत्रों की पिटाई के बाद डॉलर का संभल जाना है। हफ्ते की शुरुआत में उम्मीद से नरम रही अमेरिकी महंगाई ने डॉलर की धार को थोड़ा कुंद जरूर किया, लेकिन यह इतना भी नहीं था कि फेडरल रिजर्व को उसकी सख्ती की राह से हटा दे। यानी दर बढ़ोतरी की उम्मीदें टली हैं, खत्म नहीं हुई हैं। डॉलर ने दोबारा जमाए पैर अमेरिकी डॉलर इंडेक्स (DXY), जो छह प्रमुख मुद्राओं की टोकरी के मुकाबले डॉलर की कीमत को मापता है, फिलहाल करीब 100.60 के आसपास कारोबार कर रहा है। बुधवार को यह गिरकर 100.35 तक पहुंच गया था, जो 18 जून के बाद का इसका सबसे निचला स्तर था। वहीं से वापसी करते हुए डॉलर ने खुद को संभाला और यही वापसी यूरो की तेजी के आड़े आ गई। जब आधार मुद्रा यानी डॉलर मजबूत होता है, तो उसके सामने खड़ी दूसरी मुद्राओं पर स्वाभाविक रूप से दबाव बढ़ जाता है। महंगाई ठंडी पड़ी, पर फेड की राह वही अमेरिका में महंगाई के मोर्चे पर बड़ी हलचल रही। जून का उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) मासिक आधार पर 0.4% गिर गया, जो अप्रैल 2020 के बाद किसी एक महीने में आई सबसे बड़ी गिरावट है। इस गिरावट ने सालाना महंगाई दर को मई के 4.2% से घटाकर 3.5% पर ला दिया और लगातार तीन महीने से चली आ रही तेजी की कड़ी को तोड़ दिया। कोर यानी बुनियादी कीमतें एक कदम भी आगे नहीं बढ़ीं, महीने के आधार पर सपाट रहीं और सालाना आधार पर घटकर 2.6% पर आ गईं। दोनों ही आंकड़े बाजार के अनुमान से नीचे रहे। नरम महंगाई अक्सर ब्याज दरों पर दबाव कम करती है, फिर भी फेड की सख्ती की उम्मीदें पूरी तरह हटी नहीं हैं। अमेरिकी आंकड़े मजबूत बने रहे अर्थव्यवस्था की सेहत बताने वाले आंकड़े ठीकठाक रहे। जून में अमेरिकी रिटेल सेल्स मासिक आधार पर 0.2% बढ़ीं, जो अनुमान के बिल्कुल मुताबिक है। मई का आंकड़ा भी थोड़ा ऊपर संशोधित हुआ और 0.9% से बढ़ाकर 1.0% कर दिया गया। रिटेल सेल्स का कंट्रोल ग्रुप भी उम्मीद के अनुरूप 0.5% रहा, हालांकि यह मई की 0.8% की बढ़त से कम है। दूसरी ओर, बेरोजगारी दावों यानी जॉबलेस क्लेम्स के आंकड़े अनुमान से बेहतर रहे, जो श्रम बाजार में अब भी मजबूती का संकेत देते हैं। ईसीबी से एक और बढ़ोतरी की उम्मीद यूरोप की ओर से भी नीति को लेकर साफ रुझान दिख रहा है। ज्यादातर अर्थशास्त्रियों का मानना है कि यूरोपीय सेंट्रल बैंक इस साल एक बार और ब्याज दर बढ़ाएगा। यही उम्मीद यूरो को लंबी अवधि में एक सहारा देती है, भले ही अल्पकाल में डॉलर की मजबूती उस पर भारी पड़ रही हो। मध्य पूर्व का तनाव और चढ़ता तेल भू राजनीतिक मोर्चे पर तनाव तेज हो गया है। अमेरिका ने ईरानी ठिकानों पर लगातार पांचवीं रात हमले किए, जबकि जवाब में तेहरान ने कुवैत, बहरीन और जॉर्डन में मौजूद अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाया। हालात और गंभीर हैं क्योंकि ईरान ने यमन के हूती विद्रोहियों को निर्देश दिया है कि अगर अमेरिका उसके बिजली नेटवर्क पर हमला करता है, तो वे लाल सागर की ओर जाने वाले बाब अल-मंदेब रास्ते को बंद कर दें। यह जलमार्ग वैश्विक व्यापार और तेल आपूर्ति के लिए बेहद अहम है। इसी तनाव का असर कच्चे तेल पर साफ दिख रहा है। वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) करीब 80 डॉलर पर कारोबार कर रहा है और इस हफ्ते अब तक इसमें करीब 12% की तेजी आ चुकी है। मुद्राओं के बीच यूरो का दिन प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले यूरो का प्रदर्शन मिलाजुला रहा। आज के कारोबार में यूरो सबसे मजबूत स्विस फ्रैंक के मुकाबले रहा। यानी डॉलर के सामने भले ही यूरो को दबाव झेलना पड़ा हो, लेकिन कुछ दूसरी मुद्राओं के मुकाबले उसने अपनी पकड़ बनाए रखी। कुल मिलाकर तस्वीर यह है कि नरम अमेरिकी महंगाई और मजबूत अमेरिकी आंकड़ों के बीच डॉलर ने खुद को संभाला, जिससे यूरो की छोटी तेजी थम गई, जबकि मध्य पूर्व का बढ़ता तनाव तेल की कीमतों को ऊपर धकेलता रहा। इसका आप पर असर • ट्रेडर्स और निवेशकों के लिए: डॉलर के संभलने से यूरो/डॉलर पर छोटी अवधि में दबाव है, इसलिए फॉरेक्स में पोजिशन लेने से पहले फेड और ईसीबी की दर पर नजर रखना फायदेमंद रहेगा। • आम उपभोक्ता के लिए: कच्चे तेल में इस हफ्ते करीब 12% की तेजी आगे चलकर ईंधन और ढुलाई की लागत पर असर डाल सकती है, जिसका बोझ अंततः जेब पर पड़ता है। सवाल-जवाब 1. यूरो की तेजी क्यों थमी? अमेरिकी डॉलर के दोबारा संभलने से यूरो/डॉलर दबाव में आ गया, जिससे लगातार दो दिन से चली आ रही यूरो की बढ़त रुक गई। 2. अमेरिकी डॉलर इंडेक्स इस समय कहां है? DXY करीब 100.60 पर कारोबार कर रहा है। बुधवार को यह गिरकर 100.35 तक पहुंचा था, जो 18 जून के बाद का सबसे निचला स्तर था। 3. जून में अमेरिकी महंगाई के आंकड़े कैसे रहे? जून का CPI मासिक आधार पर 0.4% गिरा, जो अप्रैल 2020 के बाद की सबसे बड़ी मासिक गिरावट है, और सालाना दर 4.2% से घटकर 3.5% पर आ गई। 4. कच्चे तेल की कीमतों पर क्या असर पड़ा? मध्य पूर्व में तनाव बढ़ने से वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) करीब 80 डॉलर पर पहुंच गया और इस हफ्ते इसमें करीब 12% की तेजी आ चुकी है। 5. ईसीबी को लेकर क्या उम्मीद है? ज्यादातर अर्थशास्त्रियों का मानना है कि यूरोपीय सेंट्रल बैंक इस साल एक बार और ब्याज दर बढ़ाएगा। 6. जून में अमेरिकी रिटेल सेल्स कैसी रहीं? रिटेल सेल्स मासिक आधार पर 0.2% बढ़ीं, जो अनुमान के मुताबिक है, और मई का आंकड़ा भी 0.9% से बढ़ाकर 1.0% कर दिया गया। https://trendkia.com/market/dollar-ke-snbhalate-hi-thami-euro-ki-teji-do-dina-ki-barhata-para-laga-breka-8176 TrendKia — Har trend, sabse pehle.