# डॉलर में मजबूती और ट्रेजरी यील्ड में उछाल से वैश्विक बाजारों में हलचल, सोने और कच्चे तेल में नरमी

> सुरक्षित निवेश की मांग बढ़ने से अमेरिकी डॉलर 102.50 के स्तर पर पहुंच गया है, जबकि सोने की कीमतें गिरकर 4,100 डॉलर और कच्चा तेल 90 डॉलर के आसपास आ गया है।

**Type:** article · **Category:** बाज़ार · **Published:** 2026-10-05 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/market/dollar-men-majabuti-aura-treasury-yield-men-uchhala-se-vaishvika-bajaron-men-halachala-gold-aura-crude-oil-men-narami-43532 · **Language:** Hindi
**Tags:** अमेरिकी डॉलर, विदेशी मुद्रा बाजार, सोना भाव, कच्चा तेल, बिटकॉइन, ट्रेजरी यील्ड, यूरोपीय सेंट्रल बैंक

वैश्विक वित्तीय बाजारों में सप्ताह की शुरुआत भारी उतार-चढ़ाव के साथ देखने को मिली है। सुरक्षित निवेश के रूप में अमेरिकी मुद्रा की मांग में जोरदार बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जिससे अमेरिकी डॉलर इंडेक्स यानी DXY उछलकर 102.50 के दायरे में पहुंच गया। अप्रैल 2025 के बाद यह पहला मौका है जब डॉलर इंडेक्स ने इस महत्वपूर्ण ऊंचाई को छुआ है। अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में सभी अवधियों में दोबारा शुरू हुई तेजी ने ग्रीनबैक को अतिरिक्त सहारा दिया है। वहीं दूसरी तरफ, यूरोप में बढ़ते राजकोषीय संकट और बजटीय चिंताओं ने निवेशकों के जोखिम लेने के उत्साह को काफी हद तक ठंडा कर दिया है।

## बॉन्ड यील्ड में तेजी और अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों का इंतजार
अमेरिकी सरकारी बॉन्ड यील्ड में आई नई तेजी ने मुद्रा बाजार में डॉलर की बढ़त को रफ्तार दी है। बाजार सहभागियों की नजर अब अमेरिका से जारी होने वाले अहम आर्थिक संकेतकों पर टिकी हुई है। इस क्रम में एडीपी एम्प्लॉयमेंट चेंज वीकली के आंकड़े पेश होने वाले हैं, जो रोजगार बाजार की मौजूदा सेहत का संकेत देंगे। इसके अलावा व्यापार संतुलन यानी बैलेंस ऑफ ट्रेड के नतीजे, आरसीएम/टीआईपीपी इकोनॉमिक ऑप्टिमिज्म इंडेक्स और अमेरिकी कच्चे तेल के भंडार को लेकर एपीआई की साप्ताहिक इन्वेंट्री रिपोर्ट भी जारी होनी है। मौद्रिक नीति के मोर्चे पर अमेरिकी फेडरल रिजर्व के अधिकारी विलियम्स और बोमन के संबोधन पर भी निवेशकों का खासा ध्यान रहने वाला है, क्योंकि उनकी टिप्पणियां आने वाले दिनों में ब्याज दरों की दिशा तय करने में मदद कर सकती हैं।

## जापानी येन और एशियाई मुद्रा बाजार की चाल
मुद्रा बाजार के अन्य प्रमुख जोड़ों में भी डॉलर की मजबूती का साफ असर देखा जा रहा है। USD/JPY जोड़ी सीमित दायरे से निकलकर 158.00 के स्तर से ऊपर कारोबार करती दिखी। हालांकि, इस जोड़ी में बढ़त काफी मामूली रही। जापानी बाजार में 10 साल के जेजीबी ऑक्शन पर निवेशकों की पैनी नजर है, जिससे सरकारी प्रतिभूतियों की मांग का पता चलेगा। साथ ही बैंक ऑफ जापान यानी BoJ के गवर्नर उएदा का भाषण भी तय है। यद्यपि भू-राजनीतिक अनिश्चितता डॉलर को बल दे रही है और फेड द्वारा दरों में वृद्धि की उम्मीदें कमजोर पड़ी हैं, फिर भी BoJ की ओर से नीति सख्त करने के संकेतों और येन को सहारा देने के लिए जापानी अधिकारियों के संभावित करेंसी दखल के जोखिम के चलते USD/JPY की तेजी सीमित रह सकती है। उधर late एशियाई कारोबार में AUD/USD पर भारी बिकवाली देखी गई और यह 0.6900 की तरफ फिसल गया। मिडिल ईस्ट और रूस-यूक्रेन के बीच जारी भू-राजनीतिक तनाव, कच्चे तेल के उतार-चढ़ाव, ट्रेजरी बॉन्ड यील्ड और आरबीए से जुड़ी उम्मीदें ऑस्ट्रेलियाई डॉलर के लिए नए उत्प्रेरक की भूमिका निभा रही हैं।

## कच्चे तेल पर जी7 और आपूर्ति का दबाव
ऊर्जा बाजार में कमजोरी का रुख बना हुआ है। फ्रंट-मंथ डब्ल्यूटीआई क्रूड फ्यूचर्स ने शुक्रवार की गिरावट को आगे बढ़ाते हुए प्रति बैरल 90.00 डॉलर के स्तर को नीचे की तरफ तोड़ दिया। तेल की कीमतों में आई इस नरमी के पीछे मिडिल ईस्ट से कच्चे तेल के बढ़ते निर्यात को मुख्य वजह माना जा रहा है। इसके साथ ही जी7 देशों द्वारा अपने रणनीतिक भंडारों से डीजल और कच्चे तेल को बाजार में जारी करने के ऐलान ने भी कीमतों पर दबाव बढ़ा दिया है। इस अतिरिक्त आपूर्ति के फैसले से वैश्विक बाजार में तेल की तात्कालिक कमी की आशंकाएं घटी हैं, जिससे वायदा भाव में बिकवाली देखने को मिली।

## सोने में बिकवाली और क्रिप्टो बाजार की स्थिति
कीमती धातुओं के बाजार में सोना मंदी के दबाव में आ गया है। डॉलर में लगातार जारी उछाल और अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में नए सिरे से आई तेजी के चलते सोने के भाव फिसलकर 4,100 डॉलर प्रति ट्रॉय औंस के बेहद करीब आ गए हैं। शुक्रवार की नरमी को आगे बढ़ाते हुए पीली धातु नए कारोबारी हफ्ते में अपने अहम समर्थन स्तरों के पास जूझती नजर आई। इसके विपरीत, डिजिटल परिसंपत्तियों के बाजार में मिला-जुला रुख रहा। बिटकॉइन 86,000 डॉलर के मनोवैज्ञानिक स्तर के ऊपर एक संकीर्ण दायरे में कंसोलिडेट कर रहा है। वहीं ऑल्टकॉइन्स में सकारात्मक रुझान देखा गया, जहां एथेरियम मजबूत होकर 2,700 डॉलर के पार निकल गया और रिपल 1.52 डॉलर के ऊपर स्थिरता बनाए रखने में कामयाब रहा।

## यूरोपीय सेंट्रल बैंक के सामने मौद्रिक नीति का असमंजस
यूरोपीय अर्थव्यवस्था में मुद्रास्फीति का दबाव केंद्रीय बैंक के लिए गंभीर चुनौती बना हुआ है। यूरोपियन सेंट्रल बैंक यानी ईसीबी के सामान्य नियमों के मुताबिक, जब महंगाई दर तय लक्ष्य से लगभग दोगुनी रफ्तार से चल रही हो, तो सीधा और सामान्य कदम ब्याज दरों में बढ़ोतरी करना होता है। लेकिन वर्तमान परिस्थितियां सामान्य से काफी अलग हैं। इस समय बॉन्ड मार्केट खुद ही अपनी पैदावार बढ़ाकर वित्तीय स्थितियों को कड़ा करने का काम कर रहा है। बॉन्ड यील्ड में इस स्वतः बढ़ोतरी के कारण ईसीबी के सामने एक पेचीदा दुविधा खड़ी हो गई है कि क्या वह खुद दरें बढ़ाए या वित्तीय बाजारों के इस अपने-आप होते संकुचन पर नजर बनाए रखे।

## इसका आप पर असर
अमेरिकी डॉलर और बॉन्ड यील्ड में आए इस तेज उछाल का असर दुनिया भर के कमोडिटी और मुद्रा बाजारों पर प्रत्यक्ष रूप से दिखाई देगा।

- **मुद्रा विनिमय पर प्रभाव:** डॉलर इंडेक्स के 102.50 पर पहुंचने से उभरते बाजारों की मुद्राओं पर अवमूल्यन का दबाव बढ़ेगा। इसका असर आयातित वस्तुओं की लागत पर पड़ सकता है।
- **सोने और आभूषण खरीदारों पर:** सोने का भाव गिरकर 4,100 डॉलर प्रति औंस के करीब आने से वैश्विक सर्राफा बाजार में नरमी का रुख बना रहेगा। स्थानीय खुदरा बाजार में खरीदारों को कीमतों में तत्काल मामूली राहत मिल सकती है।
- **ईंधन और ऊर्जा क्षेत्र:** डब्ल्यूटीआई क्रूड के 90 डॉलर प्रति बैरल से नीचे फिसलने से तेल आयातक देशों के आयात बिल में कमी आएगी। जी7 देशों द्वारा भंडार जारी करने से वैश्विक स्तर पर पेट्रोल-डीजल की महंगाई पर अंकुश लग सकता है।
- **क्रिप्टोकरेंसी निवेशकों के लिए:** बिटकॉइन का 86,000 डॉलर के ऊपर टिकना और एथेरियम का 2,700 डॉलर पार करना बाजार में चुनिंदा खरीदारी का संकेत है। खुदरा निवेशकों के लिए बड़े ऑल्टकॉइन्स में उतार-चढ़ाव की स्थिति बनी रहेगी।

## ऐसा क्यों हुआ
सुरक्षित निवेश संपत्तियों की तलाश, बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और आपूर्ति में वृद्धि के संयुक्त प्रभाव ने इस बाजार चक्र को जन्म दिया है।

- **डॉलर की सुरक्षित मांग:** मध्य पूर्व और रूस-यूक्रेन के बीच जारी भू-राजनीतिक अनिश्चितता तथा यूरोप की राजकोषीय चिंताओं ने निवेशकों को डॉलर में शरण लेने के लिए प्रेरित किया। इसी के चलते डॉलर इंडेक्स अप्रैल 2025 के बाद अपने नए उच्च स्तर पर पहुंचा।
- **ट्रेजरी यील्ड में उछाल:** अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में सभी अवधियों में दोबारा गति पकड़ने से बॉन्ड प्रतिफल बढ़े हैं। इसने बिना ब्याज वाली संपत्तियों जैसे सोने से नकदी खींचकर डॉलर संपत्तियों की तरफ मोड़ दी।
- **कच्चे तेल में आपूर्ति बढ़ोतरी:** मध्य पूर्व से कच्चे तेल के निर्यात में वृद्धि होने और जी7 देशों द्वारा अपने आपातकालीन भंडारों से क्रूड व डीजल जारी करने की घोषणा ने आपूर्ति चिंताओं को कम किया, जिससे कीमतें 90 डॉलर से नीचे गिरीं।
- **यूरोप में स्वतंत्र बॉन्ड कसावट:** यूरोज़ोन में बॉन्ड मार्केट द्वारा यील्ड बढ़ाकर स्वतः वित्तीय कसावट लाने से केंद्रीय बैंक के सामने नीतिगत गतिरोध उत्पन्न हुआ है। इस असमंजस ने यूरो की तुलना में डॉलर के आकर्षण को और बढ़ा दिया।

## सवाल-जवाब

### 1. अमेरिकी डॉलर इंडेक्स (DXY) किस स्तर पर पहुंच गया है?
अमेरिकी डॉलर इंडेक्स उछलकर 102.50 के दायरे में पहुंच गया है, जो अप्रैल 2025 के बाद इसका उच्चतम स्तर है।

### 2. कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट की मुख्य वजह क्या है?
मिडिल ईस्ट से तेल निर्यात में बढ़ोतरी और जी7 देशों द्वारा रणनीतिक भंडार से क्रूड व डीजल जारी करने के ऐलान से डब्ल्यूटीआई क्रूड 90 डॉलर प्रति बैरल के नीचे आ गया।

### 3. सोने के भाव पर दबाव क्यों देखने को मिल रहा है?
अमेरिकी डॉलर की मजबूती और अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में लगातार तेजी के कारण सोना फिसलकर 4,100 डॉलर प्रति ट्रॉय औंस के पास आ गया है।

### 4. क्रिप्टोकरेंसी बाजार में बिटकॉइन और एथेरियम की क्या स्थिति है?
बिटकॉइन 86,000 डॉलर के ऊपर सीमित दायरे में कारोबार कर रहा है, जबकि एथेरियम 2,700 डॉलर और रिपल 1.52 डॉलर के ऊपर बने हुए हैं।

### 5. यूरोपीय सेंट्रल बैंक (ईसीबी) किस दुविधा का सामना कर रहा है?
महंगाई दर लक्ष्य से दोगुनी होने पर दरें बढ़ाना सामान्य उपाय है, लेकिन बॉन्ड बाजार पहले ही यील्ड बढ़ाकर स्वतः सख्ती ला रहा है, जिससे ईसीबी के लिए फैसला लेना कठिन हो गया है।

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