# डोनाल्ड ट्रंप की आर्थिक चेतावनी पर तेहरान का जवाब, अमेरिकी कर्ज संकट से ध्यान भटकाने का लगाया आरोप

> ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की आर्थिक कार्रवाई की चेतावनी को खारिज करते हुए कहा कि अमेरिका अपने बढ़ते कर्ज और ब्याज लागत से ध्यान भटकाने की कोशिश कर रहा है।

**Type:** article · **Category:** बाज़ार · **Published:** 2026-08-20 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/market/donald-trump-ki-arthika-chetavani-para-iran-ka-javaba-us-karja-snkata-se-dhyana-bhatakane-ka-lagaya-aropa-18804 · **Language:** Hindi
**Tags:** ईरान अमेरिका तनाव, डोनाल्ड ट्रंप, अब्बास अराघची, कच्चा तेल, WTI क्रूड, ओपेक, अमेरिकी ट्रेजरी, क्रिप्टो बाजार

वैश्विक कूटनीतिक और आर्थिक मंच पर तनाव एक बार फिर गहरा गया है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से तेहरान के खिलाफ दी गई अभूतपूर्व आर्थिक कार्रवाई की चेतावनी का करारा जवाब दिया है। अराघची का कहना है कि वाशिंगटन द्वारा दी जा रही यह धमकी दरअसल अमेरिकी अर्थव्यवस्था में बढ़ते राष्ट्रीय कर्ज और चढ़ती ब्याज लागत से दुनिया का ध्यान भटकाने की एक चाल है। उन्होंने साफ किया कि वाशिंगटन की यह पुरानी रणनीति किसी भी सूरत में कामयाब नहीं होगी और इससे केवल अमेरिका को नाकामी ही हाथ लगेगी।

ईरानी विदेश मंत्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि नाकाम हो चुकी नीतियों को बार-बार दोहराने से केवल पराजय मिलेगी और ईरानी जनता के मन में दुश्मनी की भावना और गहरी होगी। उनके अनुसार अमेरिकी आर्थिक नीतियां वास्तव में आर्थिक आतंकवाद का रूप ले चुकी हैं, जो पूरी दुनिया की संप्रभुता और वैश्विक वित्तीय स्थिरता के लिए एक गंभीर खतरा पैदा कर रही हैं। यह बयान ऐसे समय में आया है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर अब तक के सबसे कड़े प्रतिबंध लगाने का ऐलान किया है। ट्रंप ने चेतावनी दी थी कि तेहरान को वित्तीय मदद देने वाले देशों को भी गंभीर आर्थिक परिणामों का सामना करना पड़ेगा।

## कच्चे तेल का बाजार और डब्ल्यूटीआई क्रूड के मुख्य चालक
पश्चिम एशिया में बढ़ते इस तनाव के बीच अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में लगातार हलचल देखी जा रही है। बेंचमार्क वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट यानी WTI क्रूड ऑयल की कीमतों में मामूली बढ़त दर्ज की गई और यह 0.10 प्रतिशत की तेजी के साथ 84.35 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर कारोबार करता देखा गया। कच्चे तेल की कीमतें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर वैश्विक मांग, आपूर्ति और भू-राजनीतिक घटनाओं से सीधे तौर पर प्रभावित होती हैं।

WTI क्रूड अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार में बेचे जाने वाले तीन सबसे प्रमुख बेंचमार्क में से एक है, जिसमें ब्रेंट क्रूड और दुबई क्रूड भी शामिल हैं। WTI को इसकी कम विशिष्ट गुरुत्वाकर्षण और सल्फर की बेहद कम मात्रा के कारण लाइट और स्वीट क्रूड माना जाता है। रिफाइनिंग के लिहाज से इसे बेहद उच्च गुणवत्ता वाला तेल माना जाता है। इसका उत्पादन अमेरिका में होता है और इसका वितरण कुशिंग हब के माध्यम से किया जाता है, जिसे दुनिया भर में पाइपलाइन क्रॉसरोड्स के नाम से जाना जाता है। मीडिया और वित्तीय बाजारों में कच्चे तेल की अंतरराष्ट्रीय दरों को मापने के लिए WTI के भाव का ही व्यापक रूप से हवाला दिया जाता है।

किसी भी संपत्ति की तरह कच्चे तेल की कीमतें भी मांग और आपूर्ति के मूलभूत सिद्धांतों पर काम करती हैं। जब वैश्विक आर्थिक विकास की रफ्तार तेज होती है, तो ईंधन की मांग में बढ़ोतरी होती है जिससे कीमतें चढ़ती हैं। इसके विपरीत सुस्त आर्थिक विकास मांग को घटा देता है। इसके अलावा युद्ध, राजनीतिक अस्थिरता और व्यापारिक प्रतिबंध आपूर्ति श्रृंखला को बाधित करके कीमतों को उछाल देते हैं। अमेरिकी डॉलर का मूल्य भी कच्चे तेल की दर तय करने में बड़ी भूमिका निभाता है, क्योंकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड का कारोबार मुख्य रूप से अमेरिकी डॉलर में ही होता है। कमजोर डॉलर से तेल खरीदना सस्ता हो जाता है, जिससे वैश्विक मांग को समर्थन मिलता है।

## इन्वेंट्री रिपोर्ट और ओपेक का तेल उत्पादन पर प्रभाव
ऊर्जा बाजार के विश्लेषक तेल की कीमतों का आकलन करने के लिए साप्ताहिक स्टॉक रिपोर्ट का बारीकी से अध्ययन करते हैं। अमेरिकन पेट्रोलियम इंस्टीट्यूट यानी API और एनर्जी इंफॉर्मेशन एजेंसी यानी EIA हर हफ्ते कच्चे तेल के भंडार से जुड़े आंकड़े जारी करते हैं। ये रिपोर्ट बाजार में मांग और आपूर्ति के रुझान को स्पष्ट करती हैं। यदि आंकड़ों में क्रूड स्टॉक में गिरावट दिखती है, तो इसका मतलब है कि मांग बढ़ी है जिससे तेल की कीमतें ऊपर जाती हैं। दूसरी ओर, इन्वेंट्री में वृद्धि आपूर्ति सरप्लस का संकेत देती है, जिससे कीमतों पर दबाव बनता है।

API अपनी रिपोर्ट हर मंगलवार को जारी करता है, जबकि सरकारी संस्था EIA अगले दिन यानी बुधवार को अपने आंकड़े पेश करती है। ऐतिहासिक रूप से 75 प्रतिशत मामलों में दोनों एजेंसियों के आंकड़े एक प्रतिशत के दायरे में समान रहते हैं। हालांकि, सरकारी एजेंसी होने के कारण EIA के आंकड़ों को बाजार में अधिक विश्वसनीय और प्रामाणिक माना जाता है।

कच्चे तेल की अंतरराष्ट्रीय कीमतों को नियंत्रित करने में 12 तेल उत्पादक देशों के संगठन ओपेक की भी निर्णायक भूमिका होती है। ओपेक देश वर्ष में दो बार बैठक करके उत्पादन कोटा तय करते हैं। जब ओपेक सप्लाई घटाने के लिए उत्पादन कोटा में कटौती करता है, तो बाजार में तेल की तंगी होती है और कीमतें बढ़ जाती हैं। इसके विपरीत उत्पादन बढ़ाने पर कीमतें नीचे आती हैं। ओपेक के साथ 10 गैर-ओपेक सदस्य देश भी जुड़े हैं जिन्हें संयुक्त रूप से ओपेक प्लस कहा जाता है, जिसमें रूस सबसे प्रमुख भूमिका निभाता है।

## विदेशी मुद्रा और सोने के बाजार में उतार-चढ़ाव
मध्य पूर्व में तनाव और अमेरिकी ट्रेजरी की नई घोषणाओं के कारण विदेशी मुद्रा बाजार में भी व्यापक हलचल देखने को मिल रही है। 11 मई के बाद के अपने उच्चतम स्तर से पीछे हटने के बाद GBP/USD यूरोपीय कारोबारी सत्र के दौरान 1.3600 के स्तर के आसपास बना रहा। अमेरिकी डॉलर के बिकवाली दबाव थमने के पीछे ट्रेजरी द्वारा शुरू किए गए बॉन्ड बायबैक कार्यक्रम का असर देखा जा रहा है। निवेशक अब अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों और मध्य पूर्व की खबरों पर नजर बनाए हुए हैं।

दूसरी ओर, EUR/USD यूरोपीय बाजार में 1.1700 के ठीक नीचे मजबूती दर्ज कर रहा है। मई के अंत के बाद के अपने उच्चतम स्तर को छूने के बाद यह मुद्रा जोड़ा एक मजबूत चरण में प्रवेश कर गया है। अमेरिकी डॉलर के स्थिर होने के बीच ट्रेडर्स 1.1700 के ऊपर ब्रेकआउट का इंतजार कर रहे हैं। वहीं, अमेरिकी बेरोजगारी दावों के आंकड़े जारी होने से पहले ईरान से जुड़े सुरक्षा जोखिमों पर भी नजर रखी जा रही है।

कीमती धातुओं की बात करें तो सोना एशियाई सत्र के दौरान हल्की गिरावट के साथ 4,500 डॉलर प्रति औंस के स्तर से नीचे आ गया। हालांकि, यह गुरुवार तड़के बने अपने जून के बाद के उच्चतम स्तर के करीब ही बना हुआ है। अमेरिकी फेडरल रिजर्व की FOMC बैठक के कार्यवृत्त आने और डॉलर के तीन महीने के निचले स्तर से संभलने के बाद निवेशकों ने मुनाफावसूली की, जिससे सोने पर मामूली दबाव दिखा। हालांकि अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में आई गिरावट ने सोने की कीमतों को बड़ा नुकसान होने से बचा लिया।

## क्रिप्टो बाजार की रिकवरी और अमेरिकी ट्रेजरी का बॉन्ड बायबैक कदम
अमेरिकी वित्तीय निर्णयों का असर डिजिटल एसेट मार्केट यानी क्रिप्टो बाजार पर भी देखा जा रहा है। अमेरिकी ट्रेजरी द्वारा बॉन्ड बायबैक योजना की घोषणा के बाद प्रमुख ऑल्टकॉइन्स में जोरदार उछाल देखा गया। रिपल यानी XRP, सोलाना यानी SOL और कार्डानो यानी ADA जैसे प्रमुख टोकन अपने निचले स्तरों से उबरकर स्थिर कारोबार कर रहे हैं। तकनीकी विश्लेषण संकेत देता है कि XRP और SOL में आगे और तेजी देखने को मिल सकती है, जबकि ADA हालिया बढ़त को बरकरार रखने के लिए संघर्ष कर रहा है। XRP एक ही दिन में 10 प्रतिशत की उछाल के साथ 1.0951 डॉलर के स्तर के आसपास कारोबार कर रहा था।

अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने वित्तीय बाजार में तरलता बढ़ाने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। बुधवार को दोपहर 12:32 GMT पर ट्रेजरी ने घोषणा की कि वह 10 से 20 साल और 20 से 30 साल की अवधि वाले बॉन्ड के लिए बायबैक ऑपरेशन का आकार कम से कम दोगुना करेगी। इस योजना के तहत प्रति ऑपरेशन अधिकतम सीमा को 2 अरब डॉलर से बढ़ाकर कम से कम 4 अरब डॉलर कर दिया गया है। यह व्यवस्था 9 सितंबर से लागू होगी और 4 नवंबर तक जारी रहेगी। इस कदम का मुख्य उद्देश्य वित्तीय बाजारों में लिक्विडिटी को मजबूती प्रदान करना है।

## इसका आप पर असर
**वैश्विक बाजार पर:** मध्य पूर्व में बढ़ता कूटनीतिक तनाव और अमेरिकी ट्रेजरी का नया बॉन्ड बायबैक कदम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल, सोने और वित्तीय बाजारों में अस्थिरता बढ़ा सकता है।

**भारत में:** कच्चे तेल की कीमतों में किसी भी बड़ी बढ़त से भारत का आयात बिल बढ़ सकता है, जिससे घरेलू स्तर पर ईंधन की कीमतों और महंगाई दर पर असर पड़ सकता है।

## सवाल-जवाब

### 1. ईरान के विदेश मंत्री ने अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप की चेतावनी पर क्या प्रतिक्रिया दी?
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने ट्रंप की आर्थिक कार्रवाई की चेतावनी को खारिज करते हुए कहा कि अमेरिका अपने बढ़ते राष्ट्रीय कर्ज और ब्याज लागत से ध्यान भटकाने की कोशिश कर रहा है।

### 2. WTI क्रूड ऑयल की कीमत और इसकी खासियत क्या है?
WTI क्रूड 84.35 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था। यह एक उच्च गुणवत्ता वाला लाइट और स्वीट कच्चा तेल है, जिसे आसानी से रिफाइन किया जा सकता है।

### 3. अमेरिकी ट्रेजरी ने बॉन्ड बायबैक योजना में क्या बदलाव किया है?
अमेरिकी ट्रेजरी ने 10 से 30 साल की अवधि वाले बॉन्ड के लिए बायबैक का आकार 2 अरब डॉलर से बढ़ाकर कम से कम 4 अरब डॉलर प्रति ऑपरेशन कर दिया है, जो 9 सितंबर से 4 नवंबर तक लागू रहेगा।

### 4. कच्चे तेल की कीमतों को कौन से मुख्य कारक प्रभावित करते हैं?
कच्चे तेल की कीमतें वैश्विक मांग और आपूर्ति, युद्ध और तनाव जैसी भू-राजनीतिक घटनाओं, ओपेक के उत्पादन फैसलों तथा अमेरिकी डॉलर के मूल्य से प्रभावित होती हैं।

### 5. इस दौरान सोने और क्रिप्टो बाजार की क्या स्थिति रही?
सोना हल्की गिरावट के साथ 4,500 डॉलर से नीचे कारोबार कर रहा था, जबकि अमेरिकी ट्रेजरी की घोषणा के बाद रिपल (XRP 10% उछाल के साथ $1.0951) सहित प्रमुख क्रिप्टो कॉइन्स में रिकवरी देखी गई।

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