कच्चे तेल में नरमी और कूटनीतिक उम्मीदों से अमेरिकी वायदा बाजारों में उछाल, ब्याज दरों पर भी टिकी नजर मध्य पूर्व में शांति वार्ता की संभावनाओं और कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट से वैश्विक बाजारों में सकारात्मक माहौल दिखा है। दूसरी ओर अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा दर वृद्धि के बढ़ते अनुमानों के बीच निवेशक प्रमुख संपत्तियों पर सतर्क नजर बनाए हुए हैं। अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आई गिरावट और मध्य पूर्व में कूटनीतिक कदमों से तेल आपूर्ति बहाल होने की उम्मीदों ने अमेरिकी शेयर बाजारों को मजबूती दी है। सोमवार को यूरोपीय कारोबारी घंटों के दौरान प्रमुख सूचकांक वायदा बढ़त के साथ कारोबार करते दिखे। निवेशकों की नजर अब अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग समेत कई वैश्विक नेताओं के बीच संभावित बैठकों पर टिकी हुई है, जिससे भू-राजनीतिक मोर्चे पर जारी अनिश्चितताओं के कम होने के संकेत मिल रहे हैं। हालांकि, इसके साथ ही बाजार भागीदार अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व के सख्त मौद्रिक रुख और आगामी नीति बैठक में ब्याज दरों में संभावित बढ़ोतरी के दबाव का भी बारीक आकलन कर रहे हैं। अमेरिकी सूचकांकों में मजबूती और प्रमुख वायदा आंकड़े यूरोपीय कारोबारी सत्र के दौरान डॉव जोन्स वायदा 0.60 प्रतिशत चढ़कर 52,390 के आसपास पहुंच गया। इसी तरह एसएंडपी 500 वायदा में 0.57 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई और यह 7,760 के स्तर पर कारोबार करता दिखाई दिया, जबकि नैस्डैक 100 वायदा 0.86 प्रतिशत की शानदार बढ़त के साथ 30,170 के करीब पहुंच गया। शेयरों में यह उछाल ऊर्जा लागत में गिरावट और कूटनीतिक वार्ताओं से आपूर्ति संकट टलने की उम्मीदों से उपजा है, जिससे व्यापारिक धारणा में व्यापक सुधार देखा गया। डॉयचे बैंक के रणनीतिकारों का बाजार विश्लेषण बाजार की चाल पर डॉयचे बैंक के रणनीतिकारों का कहना है कि पिछले सप्ताह का इक्विटी बाजार यह समझने के लिए एक उपयोगी उदाहरण पेश करता है कि 2026 का बाकी समय किस तरह आगे बढ़ सकता है। उनके अनुसार, मूल्य व्यवहार स्पष्ट रूप से दो चरणों में विभाजित होता दिखा। पहले चरण में कच्चे तेल की कीमतों में नए सिरे से आई तेजी ने जोखिम लेने की क्षमता को कमजोर किया, जिसके चलते रक्षात्मक शेयरों, न्यूनतम अस्थिरता वाली रणनीतियों और वैल्यू शेयरों ने बेहतर प्रदर्शन किया। रणनीतिकारों का मानना है कि यह स्थिति इस बात का संभावित खाका पेश करती है कि आने वाले समय में ऊर्जा की कीमतों में नए झटकों पर बाजार किस प्रकार प्रतिक्रिया दे सकते हैं। फेडरल रिजर्व की सख्त नीति और दर वृद्धि की संभावनाएं सीएमई फेडवॉच टूल के आंकड़ों के अनुसार, वित्तीय बाजार अब अक्टूबर की बैठक में एक और ब्याज दर वृद्धि की 53.1 प्रतिशत संभावना मान रहे हैं, जो पिछले सप्ताह के 43.5 प्रतिशत अनुमान से काफी अधिक है। केंद्रीय बैंक के कड़े रुख को दोहराते हुए फेड चेयर केविन वार्श ने स्पष्ट किया कि मुद्रास्फीति अब भी अस्वीकार्य रूप से ऊंचे स्तर पर बनी हुई है और गर्मियों के हालिया आंकड़ों से बुनियादी रुझानों में कोई खास सुधार नहीं दिखा है। इस सख्त रुख ने निवेशकों को सतर्क कर दिया है, क्योंकि उधार की बढ़ती लागत कंपनियों की आय पर सीधा असर डालती है। डॉव जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज की संरचना और कार्यप्रणाली डॉव जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज दुनिया के सबसे पुराने शेयर बाजार सूचकांकों में से एक माना जाता है, जिसमें अमेरिका के 30 सबसे अधिक कारोबार वाले शेयर शामिल होते हैं। यह सूचकांक बाजार पूंजीकरण के बजाय मूल्य-भारित आधार पर काम करता है। इसकी गणना घटक शेयरों की कीमतों को जोड़कर और उन्हें एक विशिष्ट विभाजक से विभाजित करके की जाती है, जो वर्तमान में 0.152 है। इस सूचकांक की स्थापना चार्ल्स डॉव ने की थी, जिन्होंने वॉल स्ट्रीट जर्नल की भी नींव रखी थी। बाद के वर्षों में इस सूचकांक की इस बात के लिए आलोचना भी होती रही है कि यह व्यापक बाजार का पूरी तरह प्रतिनिधित्व नहीं करता, क्योंकि यह एसएंडपी 500 जैसे व्यापक सूचकांकों के मुकाबले केवल 30 बड़े समूहों पर नजर रखता है। डीजेआईए को प्रभावित करने वाले प्रमुख कारक डॉव जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज की चाल को कई अलग-अलग आर्थिक कारक संचालित करते हैं। इसमें सबसे महत्वपूर्ण कारक घटक कंपनियों की तिमाही वित्तीय रिपोर्ट में दिखने वाला समग्र प्रदर्शन होता है। इसके अलावा अमेरिका और दुनिया भर से आने वाले व्यापक आर्थिक आंकड़े भी निवेशक धारणा पर सीधा असर डालते हैं। फेडरल रिजर्व द्वारा तय की जाने वाली ब्याज दरें भी सूचकांक को बड़े पैमाने पर प्रभावित करती हैं, क्योंकि वे कंपनियों के लिए ऋण की लागत तय करती हैं, जिस पर कई बड़े कॉर्पोरेट अत्यधिक निर्भर होते हैं। इस प्रकार महंगाई और अन्य मैक्रो आंकड़े, जो फेड के निर्णयों की दिशा तय करते हैं, सूचकांक की चाल के प्रमुख निर्धारक बन जाते हैं। चार्ल्स डॉव का डॉव सिद्धांत डॉव सिद्धांत शेयर बाजार के प्राथमिक रुझान की पहचान करने की एक जानी-मानी पद्धति है, जिसे चार्ल्स डॉव ने विकसित किया था। इस सिद्धांत का एक महत्वपूर्ण कदम डॉव जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज और डॉव जोन्स ट्रांसपोर्टेशन एवरेज की दिशा की तुलना करना है, जिसके तहत केवल उन्हीं रुझानों का अनुसरण किया जाता है जहां दोनों सूचकांक एक ही दिशा में बढ़ रहे हों। इसमें ट्रेडिंग वॉल्यूम को पुष्टिकरण मानदंड के रूप में इस्तेमाल किया जाता है और यह तकनीक चोटियों तथा गर्तों के विश्लेषण पर आधारित होती है। डॉव के इस सिद्धांत में बाजार रुझान के तीन स्पष्ट चरण बताए गए हैं: संचय चरण, जब चतुर निवेशक खरीदारी या बिकवाली शुरू करते हैं; सार्वजनिक भागीदारी चरण, जब आम जनता इसमें शामिल होती है; और वितरण चरण, जब बड़े और चतुर निवेशक बाजार से बाहर निकलने लगते हैं। डीजेआईए में निवेश और ट्रेडिंग के विकल्प डॉव जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज में ट्रेडिंग और निवेश के कई लोकप्रिय माध्यम उपलब्ध हैं। पहला तरीका एक्सचेंज ट्रेडेड फंड्स का उपयोग करना है, जो निवेशकों को सभी 30 अलग-अलग कंपनियों के शेयर खरीदने के बजाय सूचकांक को एकल प्रतिभूति के रूप में ट्रेड करने की सुविधा प्रदान करते हैं। इसका एक प्रमुख उदाहरण एसपीडीआर डॉव जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज ईटीएफ है, जिसका टिकर डीआईए है। इसके अलावा डीजेआईए फ्यूचर्स अनुबंध ट्रेडर्स को सूचकांक के भविष्य के मूल्य पर सट्टा लगाने में सक्षम बनाते हैं, जबकि ऑप्शंस निवेशकों को भविष्य में एक पूर्व-निर्धारित कीमत पर सूचकांक खरीदने या बेचने का अधिकार देते हैं, बिना किसी अनिवार्यता के। म्यूचुअल फंड भी निवेशकों को डीजेआईए शेयरों के विविध पोर्टफोलियो का हिस्सा खरीदने की अनुमति देते हैं, जिससे पूरे सूचकांक में व्यापक निवेश पहुंच प्राप्त होती है। विदेशी मुद्रा बाजार और केंद्रीय बैंकों का रुख मुद्रा बाजार में सोमवार को एशियाई सत्र के दौरान ऑस्ट्रेलियाई डॉलर बनाम अमेरिकी डॉलर 0.7100 के ऊपर स्थिर बना रहा। हालांकि लगातार भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के बीच अमेरिकी डॉलर की हालिया गिरावट थम गई है, जो जुलाई के अंत के बाद से अपने उच्चतम स्तर से फिसल रहा था। पीपुल्स बैंक ऑफ चाइना द्वारा लोन प्राइम दरों पर यथास्थिति बनाए रखने से ऑस्ट्रेलियाई डॉलर पर दबाव देखा गया, लेकिन रिज़र्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया द्वारा एक और ब्याज दर वृद्धि के दांव ट्रंप और शी जिनपिंग के बीच आगामी शिखर सम्मेलन से पहले ऑस्ट्रेलियाई मुद्रा को सहारा दे रहे हैं। वहीं अमेरिकी डॉलर बनाम जापानी येन एशियाई सत्र में 157.00 के नीचे आ गया। शुक्रवार को बैंक ऑफ जापान द्वारा दर जांच किए जाने के बाद संभावित सरकारी हस्तक्षेप के जोखिमों से जापानी येन में मामूली मजबूती दिखी। जापान में छुट्टी के माहौल और रूस-यूक्रेन तथा मध्य पूर्व में बढ़ते भू-राजनीतिक तनावों के बीच व्यापारी सतर्क रहे, जिससे डॉलर की गिरावट सीमित हो गई। इसके अलावा बैंक ऑफ जापान ने मौद्रिक नीति को सामान्य बनाने की दिशा में कदम उठाते हुए 7-2 के बहुमत से अपने अल्पकालिक ब्याज दर लक्ष्य को 1.00 प्रतिशत से बढ़ाकर 1.25 प्रतिशत कर दिया है, जो काफी हद तक बाजार की पूर्व अपेक्षाओं के अनुरूप रहा। सोने की चाल, डॉगकॉइन की रिकवरी और अमेरिकी आवास आंकड़े कमोडिटी बाजार में सोने ने नए कारोबारी सप्ताह की शुरुआत नरमी के साथ की। शुक्रवार को 4,400 डॉलर के स्तर के पास विफल रहने के बाद सोना 4,350 डॉलर के स्तर के आसपास कारोबार करता दिखा। व्यापारी अब मध्य पूर्व संकट से जुड़े नए घटनाक्रमों और मुद्रास्फीति पर उनके संभावित प्रभावों का इंतजार कर रहे हैं, जो ब्याज दरों की अपेक्षाओं को तय कर बिना ब्याज वाले सोने की मांग को प्रभावित करेगा। क्रिप्टोकरेंसी बाजार में पिछले सप्ताह लगभग 6 प्रतिशत की बढ़त दर्ज करने के बाद डॉगकॉइन अपनी रिकवरी को आगे बढ़ाते हुए 0.088 डॉलर के ऊपर कारोबार कर रहा है। डॉग स्पॉट ईटीएफ के माध्यम से संस्थागत मांग की वापसी ने इस मीम कॉइन को मजबूत समर्थन दिया है। बेहतर होते तकनीकी संकेतक और बड़े व्हेल खातों द्वारा संचय के संकेत इस टोकन के लिए सकारात्मक परिदृश्य पेश कर रहे हैं। घरेलू अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों की दृष्टि से यह सप्ताह अपेक्षाकृत शांत रहेगा, जहां मुख्य ध्यान गुरुवार को जारी होने वाली नई आवासीय बिक्री रिपोर्ट पर होगा। जुलाई में तेज गिरावट के बाद अगस्त में नई घर बिक्री के 2.6 प्रतिशत सुधरकर 623,000 की वार्षिक रफ्तार तक पहुंचने की उम्मीद है। हालांकि ऊंची गिरवी ब्याज दरें घरों की पहुंच और मांग पर असर डाल रही हैं, लेकिन बिल्डरों द्वारा दी जा रही रियायतें जारी रहीं और महीने के दौरान आवासीय परिस्थितियों में कोई गंभीर गिरावट दर्ज नहीं हुई। इसका आप पर असर कच्चे तेल में नरमी और फेडरल रिजर्व की दर वृद्धि की बढ़ती संभावनाओं का असर शेयर बाजारों, ईंधन खर्च और निवेशकों के वैश्विक पोर्टफोलियो पर सीधा पड़ता है। • भारतीय शेयर बाजार पर प्रभाव: कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट से भारत के आयात बिल में कमी आती है और घरेलू कंपनियों की परिचालन लागत घटती है। इससे दलाल स्ट्रीट के प्रमुख सूचकांकों को राहत मिलती है, हालांकि अमेरिकी दर वृद्धि का जोखिम विदेशी संस्थागत पूंजी की आवक को धीमा कर सकता है। • ईंधन और महंगाई: अंतरराष्ट्रीय तेल कीमतों में स्थिरता रहने से घरेलू स्तर पर पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर दबाव कम होता है। इससे परिवहन लागत नियंत्रित रहती है और आम उपभोक्ताओं को खाद्य तथा आवश्यक वस्तुओं की महंगाई से तात्कालिक राहत मिलती है। • वैश्विक इक्विटी निवेशक: अमेरिकी वायदा में तेजी दर्शाती है कि अल्पकालिक स्तर पर जोखिम लेने की प्रवृत्ति लौटी है। जो निवेशक ईटीएफ या म्यूचुअल फंड के जरिए अंतरराष्ट्रीय बाजारों में निवेश करते हैं, उन्हें ऊर्जा लागत में गिरावट से फायदा हो सकता है। • सोने के खरीदार और निवेशक: सोने की कीमतों का 4,350 डॉलर के करीब स्थिर होना दर्शाता है कि ब्याज दरों की सख्ती से गैर-ब्याज वाली संपत्तियों पर दबाव है। यदि फेडरल रिजर्व अक्टूबर में दरें बढ़ाता है, तो सोने की कीमतों में निकट भविष्य में सीमित दायरे का कारोबार देखने को मिल सकता है। ऐसा क्यों हुआ कच्चे तेल की कीमतों में आई गिरावट और मध्य पूर्व में कूटनीतिक वार्ताओं की शुरुआत ने वैश्विक वित्तीय बाजारों में ऊर्जा आपूर्ति को लेकर उपजी चिंताओं को कम किया है। हालांकि, मजबूत अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों और अनियंत्रित मुद्रास्फीति ने फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में बढ़ोतरी की उम्मीदों को भी हवा दी है। • कूटनीतिक प्रयास और तेल में नरमी: मध्य पूर्व में कूटनीति के जरिए ऊर्जा आपूर्ति को स्थिर करने की आशाओं ने कच्चे तेल के दामों को नीचे धकेला है। ऊर्जा लागत में आई इस कमी ने वैश्विक बाजारों में जोखिम उठाने की धारणा को दोबारा जीवित किया है। • फेडरल रिजर्व की सख्त टिप्पणी: फेड चेयर केविन वार्श द्वारा मुद्रास्फीति को अस्वीकार्य रूप से ऊंचा बताने से नीतिगत सख्ती का दौर जारी रहने के संकेत मिले हैं। गर्मियों के आंकड़ों में सुधार न दिखने के कारण बाजार अक्टूबर में ब्याज दर बढ़ने की संभावना 53.1 प्रतिशत मान रहे हैं। • द्विपक्षीय शिखर वार्ता की उम्मीदें: राष्ट्रपति ट्रंप और वैश्विक नेताओं, विशेष रूप से राष्ट्रपति शी जिनपिंग, के बीच नियोजित मुलाकातों ने निवेशकों को भू-राजनीतिक तनाव घटने की उम्मीद दी है। इस राजनीतिक परिदृश्य ने मुद्रा और शेयर बाजारों को अतिरिक्त संबल प्रदान किया है। • बैंक ऑफ जापान का कदम: बैंक ऑफ जापान द्वारा अपनी नीतिगत दर को 1.00 प्रतिशत से बढ़ाकर 1.25 प्रतिशत करने से वैश्विक तरलता की स्थिति और सख्त हुई है। इस वैश्विक सामान्यीकरण ने मुद्रा विनिमय दरों और ट्रेजरी प्रतिफल को प्रभावित किया है। सवाल-जवाब 1. सोमवार को अमेरिकी सूचकांक वायदा में तेजी क्यों देखी गई? मध्य पूर्व में कूटनीतिक प्रयासों से तेल आपूर्ति स्थिर होने की उम्मीद और कच्चे तेल की कीमतों में आई गिरावट से बाजार धारणा में सुधार हुआ। 2. अक्टूबर में फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दर बढ़ाने की कितनी संभावना है? सीएमई फेडवॉच टूल के अनुसार, अक्टूबर की नीति बैठक में ब्याज दर में बढ़ोतरी की संभावना 53.1 प्रतिशत आंकी गई है। 3. फेड चेयर केविन वार्श ने मुद्रास्फीति को लेकर क्या बयान दिया? उन्होंने कहा कि मुद्रास्फीति अस्वीकार्य रूप से उच्च स्तर पर बनी हुई है और हालिया गर्मियों के आंकड़ों से बुनियादी रुझानों में कोई सार्थक सुधार नहीं दिखा है। 4. डॉव जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज का इंडेक्स डिवाइजर वर्तमान में कितना है? डॉव जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज में 30 कंपनियों के शेयरों के कुल मूल्य को विभाजित करने वाला विभाजक वर्तमान में 0.152 है। 5. बैंक ऑफ जापान ने अपनी ब्याज दर को किस स्तर पर तय किया है? बैंक ऑफ जापान ने 7-2 के बहुमत वाले मतदान के बाद अपने अल्पकालिक ब्याज दर लक्ष्य को 1.00 प्रतिशत से बढ़ाकर 1.25 प्रतिशत कर दिया। 6. कमोडिटी बाजार में सोने का मौजूदा स्तर क्या है? शुक्रवार को 4,400 डॉलर के स्तर के पास से लौटने के बाद सोना कमजोर रुख के साथ 4,350 डॉलर प्रति औंस के आसपास कारोबार कर रहा है। https://trendkia.com/market/easing-crude-oil-prices-lift-us-stock-futures-as-markets-assess-rate-hike-prospects-35665 TrendKia — Har trend, sabse pehle.