ईसीबी अधिकारी इसाबेल श्नाबेल ने ईंधन कीमतों में उछाल पर जताई गहरी चिंता, ब्याज दरों में नई बढ़ोतरी के संकेत यूरोपीय सेंट्रल बैंक की कार्यकारी बोर्ड सदस्य इसाबेल श्नाबेल ने ऊर्जा कीमतों में हालिया तेजी को बेहद चिंताजनक बताते हुए और दर वृद्धियों की संभावना जताई है। यूरोपीय सेंट्रल बैंक की कार्यकारी बोर्ड सदस्य इसाबेल श्नाबेल ने ऊर्जा बाजारों में हालिया उतार-चढ़ाव और ईंधन की बढ़ती कीमतों को लेकर गहरी चिंता व्यक्त की है। उनका कहना है कि तेल और विशेषकर डीजल की कीमतों में आ रहा उछाल व्यापक आर्थिक संतुलन को बिगाड़ सकता है। पिछले सप्ताह ब्याज दरों में किए गए बदलाव के बाद अब नीति निर्माता आगामी महीनों में उधार लागत बढ़ाने के और विकल्पों पर सक्रियता से विचार कर रहे हैं। लगातार झटकों से जूझ रही वैश्विक अर्थव्यवस्था में राजकोषीय और वित्तीय स्थिरता बनाए रखने की चुनौती अब और जटिल होती दिख रही है। रिफाइनिंग क्षमता और ऊर्जा बाजार का संकट ऊर्जा क्षेत्र में उत्पन्न दबाव केवल कच्चे तेल तक सीमित नहीं है, बल्कि शोधित उत्पादों पर भी इसका भारी असर पड़ रहा है। इसाबेल श्नाबेल ने रेखांकित किया कि डीजल की कीमतों में तेजी के पीछे रिफाइनिंग क्षमता में आई तेज गिरावट एक बड़ा कारक है। वैश्विक स्तर पर रिफाइनिंग क्षमताओं में भारी कमी आई है और इसे थोड़े समय में दोबारा खड़ा नहीं किया जा सकता। ढांचागत सीमाओं की वजह से आपूर्ति का संकट गहराया है, जिससे ईंधन के दाम ऊंचे बने हुए हैं और इसका सीधा दबाव औद्योगिक लागत और परिवहन खर्च पर पड़ रहा है। यूरोपीय सेंट्रल बैंक का कार्यक्षेत्र और मुद्रास्फीति लक्ष्य जर्मनी के फ्रैंकफर्ट शहर में स्थित यूरोपीय सेंट्रल बैंक पूरे यूरोज़ोन के केंद्रीय बैंक के रूप में कार्य करता है। ईसीबी इस पूरे 20 देशों के साझा आर्थिक क्षेत्र के लिए मौद्रिक नीति का निर्धारण करता है और मुख्य ब्याज दरों को नियंत्रित करता है। संस्था का प्रमुख संवैधानिक दायित्व यूरोज़ोन में मूल्य स्थिरता को बनाए रखना है, जिसके तहत मध्यम अवधि में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक यानी मुद्रास्फीति को करीब 2% के स्तर पर रखने का लक्ष्य तय किया गया है। मूल्य स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए केंद्रीय बैंक का प्राथमिक हथियार ब्याज दरों को बढ़ाना या घटाना है। जब उधारी की दरें अपेक्षाकृत ऊंची रखी जाती हैं, तो आम तौर पर मुद्रा आपूर्ति में कमी आती है और यूरो मुद्रा मजबूत होती है। इसके विपरीत, जब दरें घटाई जाती हैं तो आर्थिक गतिविधियों को प्रोत्साहन मिलने के साथ मुद्रा का मूल्य घट सकता है। ईसीबी की गवर्निंग काउंसिल साल में आठ बार आयोजित होने वाली बैठकों में मौद्रिक नीतियों पर अहम निर्णय लेती है। इन उच्चस्तरीय बैठकों में यूरोज़ोन के सभी राष्ट्रीय केंद्रीय बैंकों के गवर्नर और ईसीबी अध्यक्ष क्रिस्टीन लेगार्ड समेत छह स्थायी बोर्ड सदस्य मतदान करते हैं। क्वांटिटेटिव ईजिंग और क्वांटिटेटिव टाइटनिंग के टूल्स अत्यधिक आर्थिक संकट या असामान्य परिस्थितियों में यूरोपीय सेंट्रल बैंक क्वांटिटेटिव ईजिंग यानी क्यूई का सहारा लेता है। इस विशेष नीतिगत प्रक्रिया के तहत बैंक अतिरिक्त यूरो जारी करके बैंकिंग प्रणाली तथा अन्य वित्तीय संस्थानों से सरकारी और कॉर्पोरेट बॉन्ड खरीदता है। इस तरह वित्तीय व्यवस्था में तरलता झोंकी जाती है, जिससे साधारणतया यूरो कमजोर पड़ता है। यह कदम अंतिम उपाय के तौर पर तभी उठाया जाता है जब साधारण ब्याज दरों में कटौती से मूल्य स्थिरता का लक्ष्य पाना संभव नहीं दिखता। ईसीबी ने 2009 से 2011 के वैश्विक वित्तीय संकट, वर्ष 2015 में लंबे समय तक अत्यंत कम रही मुद्रास्फीति से निपटने और कोविड महामारी के दौरान इस नीति का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया था। इसके उलट क्वांटिटेटिव टाइटनिंग यानी क्यूटी की प्रक्रिया आर्थिक सुधार के दौर में शुरू की जाती है, जब मुद्रास्फीति अनियंत्रित होने लगती है। क्यूई में जहां केंद्रीय बैंक परिसंपत्तियां खरीदकर बाजार में पूंजी डालता है, वहीं क्यूटी में ईसीबी नए बॉन्ड खरीदने बंद कर देता है और परिपक्व होने वाले बॉन्ड से मिलने वाले मूलधन का दोबारा निवेश नहीं करता। वित्तीय व्यवस्था से तरलता समेटने का यह कदम आमतौर पर यूरो के लिए सकारात्मक और तेजी लाने वाला माना जाता है। विदेशी मुद्रा बाजार और वैश्विक परिसंपत्तियों की हलचल मौद्रिक नीतियों के रुख के बीच विदेशी मुद्रा बाजार में विभिन्न जोड़ियों पर उतार-चढ़ाव दर्ज किया गया है। एशियाई कारोबारी सत्र के दौरान सोमवार को एयूडी/यूएसडी जोड़ी करीब डेढ़ सप्ताह के निचले स्तर 0.7140 के पास पहुंची, हालांकि इसे आगे बड़ी दिशा नहीं मिल सकी और यह 0.7100 के मध्य क्षेत्र से थोड़ा ऊपर कारोबार करती रही, जिसमें दिन के दौरान लगभग 0.25% की गिरावट रही। दूसरी ओर, नए हफ्ते की शुरुआत में यूएसडी/जेपीवाई जोड़ी में खरीदारों की दिलचस्पी देखने को मिली और यह एशियाई सत्र में 154.00 के स्तर के करीब चढ़ गई, जिससे शुक्रवार को हुए नुकसान का कुछ हिस्सा सुधर गया। इसके बावजूद यह जोड़ी पिछले एक सप्ताह के सीमित दायरे में बनी रही, जो पिछले मंगलवार को छुए गए करीब सात महीने के निचले स्तर के बेहद नजदीक है। डिजिटल परिसंपत्ति वर्ग में पाई नेटवर्क यानी पीआई ने लगातार दो हफ्तों की बढ़त के बाद सोमवार को अपनी रिकवरी जारी रखी और यह $0.097 के ऊपर कारोबार करता दिखा। पारिस्थितिकी तंत्र के विस्तार और बेहतर डेवलपर टूल्स से इसकी उपयोगिता को समर्थन मिल रहा है, हालांकि चार्ट पर ऊपर की ओर मौजूद घातीय गतिशील औसत यानी ईएमए इसके लाभ को सीमित कर रहे हैं। वहीं कनाडाई डॉलर के लिए बाजार की नजरें अगस्त के उपभोक्ता मूल्य सूचकांक के आंकड़ों पर टिकी हैं। सांख्यिकी कनाडा के ये आंकड़े मूल्य दबावों की स्थिति स्पष्ट करेंगे, विशेषकर बैंक ऑफ कनाडा की 2 सितंबर की उस बैठक के बाद जिसमें ब्याज दर को 2.25% पर स्थिर रखा गया था। यूरो-डॉलर विनिमय दर पर तकनीकी परिदृश्य लाइव बाजार आंकड़ों के अनुसार ईयूआर/यूएसडी जोड़ी 1.15 के स्तर पर स्थिर बनी हुई है, जो पिछले बंद स्तर 1.15 की तुलना में 0.11% की हल्की बढ़त दर्शाती है। इसका 52 हफ्तों का दायरा 1.13 से 1.20 के बीच रहा है और कारोबारी वॉल्यूम अपने 20-दिवसीय औसत के 1.00 गुना पर दर्ज हुआ है। तकनीकी संकेतकों में 14-दिवसीय आरएसआई 37 के स्तर पर है, जो मंदी के दबाव का संकेत देता है। एमएसीडी -0.00 पर अपने सिग्नल शून्य के मुकाबले कमजोर बना हुआ है। 20, 50 और 200 दिनों के ईएमए 1.16 पर स्थित हैं, जबकि 50-दिवसीय एसएमए 1.15 और 200-दिवसीय एसएमए 1.16 पर है। 50-दिवसीय ईएमए का 200-दिवसीय ईएमए से नीचे आना लॉन्ग-टर्म डाउनट्रेंड और डेथ क्रॉस की पुष्टि करता है। 20-दिवसीय बोलिंजर बैंड्स 1.15 से 1.17 के दायरे में हैं और एडीएक्स 26 पर ट्रेंड की मौजूदगी दिखा रहा है। प्रमुख स्तरों में 1.15 पिवोट और तात्कालिक रेजिस्टेंस R1 व R2 1.15 पर हैं, जबकि पहला सपोर्ट S1 1.15 और दूसरा सपोर्ट S2 1.14 पर स्थित है। इसका आप पर असर यूरोपीय सेंट्रल बैंक की ओर से ब्याज दरें और बढ़ाए जाने के संकेतों से वैश्विक और भारतीय बाजारों में ऋण लागत, पूंजी प्रवाह और आयात खर्च पर सीधा असर पड़ सकता है। • भारत में प्रभाव: वैश्विक स्तर पर केंद्रीय बैंकों की सख्त मौद्रिक नीति से विदेशी संस्थागत पूंजी प्रवाह पर दबाव बना रह सकता है। इससे घरेलू मुद्रा रुपये की विनिमय दर प्रभावित हो सकती है और आयातित ईंधन व सामान महंगा होने का जोखिम बना रहता है। • यूरोप व वैश्विक यात्रियों के लिए: यदि यूरो मजबूत होता है तो भारतीय पर्यटकों और छात्रों के लिए यूरोप में यात्रा व पढ़ाई का खर्च बढ़ सकता है। विदेशी मुद्रा रूपांतरण के समय अतिरिक्त बजट योजना बनाना जरूरी होगा। • ऊर्जा उपभोक्ताओं के लिए: रिफाइनिंग क्षमता की कमी और डीजल के बढ़े दामों का असर अंतरराष्ट्रीय लॉजिस्टिक्स पर पड़ना तय है। इसके चलते वैश्विक माल ढुलाई लागत ऊंची रह सकती है जिसका अंतिम असर खुदरा सामानों के मूल्यों पर दिखेगा। • फॉरेक्स और बॉन्ड निवेशकों के लिए: नीतिगत दरों में बढ़ोतरी की उम्मीदें बॉन्ड यील्ड को ऊपर खींच सकती हैं और मुद्रा जोड़ियों में अस्थिरता बढ़ा सकती हैं। व्यापारियों को सख्त स्टॉप-लॉस स्तरों और आगामी केंद्रीय बैंक निर्णयों पर पैनी नजर रखनी चाहिए। ऐसा क्यों हुआ कच्चे तेल और विशेषकर डीजल की शोधन क्षमता में आई तेज गिरावट ने आपूर्ति संकट पैदा कर दिया है, जिससे ऊर्जा कीमतें फिर से उछलने लगी हैं। केंद्रीय बैंक के 2% मुद्रास्फीति लक्ष्य को हासिल करने के प्रयासों पर इन उच्च ऊर्जा लागतों से पानी फिरने का जोखिम पैदा हो गया है। • रिफाइनिंग क्षमता में गिरावट: वैश्विक रिफाइनरी क्षमताओं में आई तीव्र कमी को अल्पावधि में ठीक नहीं किया जा सकता। इस ढांचागत बाधा के चलते डीजल और ईंधन का शोधन मांग के अनुपात में नहीं हो पा रहा है, जिससे कीमतों पर सीधा दबाव बन गया है। • ऊर्जा कीमतों का नया उछाल: कच्चे तेल और ईंधन के बढ़ते दामों ने उत्पादन तथा ढुलाई की लागत को काफी बढ़ा दिया है। इस स्थिति से समग्र मूल्य सूचकांक पर फिर से दबाव आने का खतरा खड़ा हो गया है। • मूल्य स्थिरता की रक्षा: यूरोपीय सेंट्रल बैंक का स्पष्ट लक्ष्य महंगाई दर को लगभग 2% पर बनाए रखना है। पिछले सप्ताह हुई बढ़ोतरी के बाद भी मुद्रास्फीति के दोबारा भड़कने की आशंका ने नीति निर्माताओं को उधारी दरें और बढ़ाने पर विचार करने के लिए बाध्य किया है। सवाल-जवाब 1. इसाबेल श्नाबेल ने ऊर्जा कीमतों के संबंध में क्या चेतावनी दी है? उन्होंने कहा कि ऊर्जा और विशेषकर डीजल की कीमतों में हालिया बदलाव काफी चिंताजनक हैं और अधिकारी ब्याज दरों में और बढ़ोतरी पर विचार कर रहे हैं। 2. डीजल और तेल की कीमतों में उछाल का प्रमुख कारण क्या बताया गया है? रिफाइनिंग क्षमता में भारी गिरावट आई है, जिसे अल्पकाल में दोबारा तैयार नहीं किया जा सकता। 3. यूरोपीय सेंट्रल बैंक का मुख्य मुद्रास्फीति लक्ष्य क्या है? ईसीबी का प्राथमिक दायित्व यूरोज़ोन में मूल्य स्थिरता बनाए रखते हुए मुद्रास्फीति को करीब 2% पर रखना है। 4. ईसीबी की नीतिगत बैठकें वर्ष में कितनी बार आयोजित होती हैं? ईसीबी की गवर्निंग काउंसिल मौद्रिक नीति संबंधी फैसले लेने के लिए साल में आठ बार बैठक करती है। 5. क्वांटिटेटिव टाइटनिंग यानी क्यूटी का यूरो पर क्या सामान्य प्रभाव पड़ता है? क्यूटी के दौरान केंद्रीय बैंक नए बॉन्ड खरीदना बंद कर देता है, जिससे बाजार से तरलता घटती है और यह कदम यूरो के लिए सकारात्मक या तेजी लाने वाला माना जाता है। 6. बैंक ऑफ कनाडा ने 2 सितंबर की बैठक में ब्याज दरों पर क्या फैसला लिया था? बैंक ऑफ कनाडा ने आम सहमति के अनुरूप अपनी ब्याज दर को 2.25% पर स्थिर रखा था। https://trendkia.com/market/ecb-adhikari-isabel-schnabel-ne-indhana-kimaton-men-uchhala-para-jatai-gahari-chinta-byaja-daron-men-nai-barhotari-ke-snketa-34042 TrendKia — Har trend, sabse pehle.