{
  "type": "article",
  "title": "यूरोपीय सेंट्रल बैंक के मार्टिन कोचर ने दी चेतावनी, महंगाई को जड़ें जमाने से रोकना जरूरी",
  "summary": "यूरोपीय सेंट्रल बैंक की गवर्निंग काउंसिल के सदस्य मार्टिन कोचर ने अत्यधिक मुद्रास्फीति को रोकने पर जोर दिया है, जबकि यूरोज़ोन की अर्थव्यवस्था अब भी नाजुक बनी हुई है। वैश्विक बाजारों में केंद्रीय बैंकों की नीतियों और व्यापार वार्ताओं पर नजरें टिकी हैं।",
  "content": "यूरोपीय सेंट्रल बैंक (ईसीबी) की गवर्निंग काउंसिल के सदस्य मार्टिन कोचर ने गुरुवार को स्पष्ट किया कि केंद्रीय बैंक को अत्यधिक महंगाई को अर्थव्यवस्था में स्थायी रूप से जड़ें जमाने से रोकना होगा। उनका यह बयान ऐसे समय में सामने आया है जब यूरोज़ोन की अर्थव्यवस्था लगातार संवेदनशील और नाजुक स्थिति से गुजर रही है। हालांकि, गर्मियों के बाद से यूरोज़ोन की आर्थिक गतिविधियों में कुछ हद तक गति और सकारात्मक संकेत देखने को मिले हैं, लेकिन मूल्य स्थिरता बनाए रखना अब भी नीति निर्माताओं के लिए एक प्रमुख चुनौती बना हुआ है। मुद्रा बाजार में इस टिप्पणी के समय यूरो और अमेरिकी डॉलर का युग्म (EUR/USD) बिना किसी बड़े बदलाव के 1.1380 पर कारोबार करता दिखा।\n\nनीतिगत विश्लेषण के पैमाने पर कोचर की इस टिप्पणी को भाषणों के ऐतिहासिक औसत स्तर के बराबर आंका गया, जहां उनका 6.1/10 का स्कोर किसी बड़े नीतिगत बदलाव के बजाय एक स्थिर रुख को दर्शाता है। महंगाई को जमने से रोकने पर उनका कड़ा जोर नीति को सख्त बनाए रखने की प्रतिबद्धता को रेखांकित करता है, जिससे संकेत मिलता है कि बैंक निकट भविष्य में ब्याज दरों में तेजी से कटौती या मौद्रिक ढील देने के पक्ष में नहीं है।\n\nयूरोपीय सेंट्रल बैंक की संरचना और मौद्रिक नियंत्रण प्रणाली\nजर्मनी के फ्रैंकफर्ट शहर में स्थित यूरोपीय सेंट्रल बैंक पूरे यूरोज़ोन के लिए रिज़र्व बैंक के रूप में कार्य करता है। यह संस्थान इस क्षेत्र की मौद्रिक नीति का निर्धारण करता है और मुख्य ब्याज दरों को तय करता है। ईसीबी का प्राथमिक और सबसे महत्वपूर्ण अधिदेश मूल्य स्थिरता को बनाए रखना है, जिसका मानक लक्ष्य मुद्रास्फीति को करीब 2 प्रतिशत के आसपास सीमित रखना तय किया गया है।\n\nइस निर्धारित लक्ष्य को हासिल करने के लिए बैंक का प्राथमिक हथियार ब्याज दरों को बढ़ाना या घटाना है। आमतौर पर जब ब्याज दरें अपेक्षाकृत ऊंची रखी जाती हैं, तो इसका परिणाम मजबूत यूरो के रूप में सामने आता है, जबकि दरों में कटौती से मुद्रा कमजोर होती है। मौद्रिक नीति से जुड़े फैसले ईसीबी की गवर्निंग काउंसिल द्वारा साल में आठ बार आयोजित होने वाली आधिकारिक बैठकों में लिए जाते हैं। इन अहम बैठकों में निर्णय यूरोज़ोन के राष्ट्रीय बैंकों के प्रमुखों और ईसीबी की अध्यक्ष क्रिस्टीन लेगार्ड सहित छह स्थायी सदस्यों द्वारा संयुक्त रूप से तय किए जाते हैं।\n\nक्वांटिटेटिव ईजिंग और क्वांटिटेटिव टाइटनिंग के माध्यम से तरलता प्रबंधन\nअत्यधिक गंभीर और असाधारण आर्थिक परिस्थितियों में केंद्रीय बैंक क्वांटिटेटिव ईजिंग (QE) जैसे गैर-पारंपरिक नीतिगत साधन का उपयोग कर सकता है। यह एक ऐसी वित्तीय प्रक्रिया है जिसके तहत ईसीबी नए यूरो जारी करता है और उनका इस्तेमाल वाणिज्यिक बैंकों तथा अन्य वित्तीय संस्थानों से संपत्तियों, विशेष रूप से सरकारी या कॉरपोरेट बॉन्ड को खरीदने के लिए करता है। आमतौर पर क्वांटिटेटिव ईजिंग की इस प्रक्रिया के चलते यूरो की विनिमय दर कमजोर होती है।\n\nइस कदम को एक अंतिम उपाय माना जाता है, जिसका इस्तेमाल तब किया जाता है जब केवल ब्याज दरों में कटौती करने से मूल्य स्थिरता का लक्ष्य प्राप्त होना असंभव लगता है। ईसीबी ने वर्ष 2009 से 2011 के वैश्विक वित्तीय संकट के दौरान, फिर 2015 में जब मुद्रास्फीति लगातार निम्न स्तर पर अटकी रही, और उसके बाद कोविड महामारी के दौर में इस साधन का सहारा लिया था।\n\nइसके विपरीत, क्वांटिटेटिव टाइटनिंग (QT) पूरी तरह से क्वांटिटेटिव ईजिंग की उल्टी प्रक्रिया है। इसे उस समय लागू किया जाता है जब अर्थव्यवस्था में सुधार गति पकड़ने लगता है और मुद्रास्फीति में बढ़ोतरी होने लगती है। जहां क्वांटिटेटिव ईजिंग में ईसीबी वित्तीय संस्थानों को नकदी और तरलता प्रदान करने के लिए बॉन्ड खरीदता है, वहीं क्वांटिटेटिव टाइटनिंग के दौरान बैंक नए बॉन्ड खरीदना बंद कर देता है। इसके साथ ही, अपने पास मौजूद परिपक्व होने वाले बॉन्ड के मूलधन का दोबारा निवेश करना भी रोक दिया जाता है। इस प्रक्रिया को आम तौर पर यूरो के लिए सकारात्मक और तेजी लाने वाला कारक माना जाता है।\n\nएशियाई सत्र में प्रमुख मुद्राओं और बॉन्ड प्रतिफल का हाल\nगुरुवार के एशियाई कारोबारी सत्र में ऑस्ट्रेलियाई डॉलर और अमेरिकी डॉलर (AUD/USD) में कमजोरी देखी गई और यह गिरकर 0.7000 के स्तर की ओर खिसक गया। यह गिरावट ऑस्ट्रेलिया के अगस्त रोजगार आंकड़े जारी होने के बाद आई, जिसमें बेरोजगारी दर अनुमानित 4.5 प्रतिशत के मुकाबले बढ़कर 4.6 प्रतिशत दर्ज की गई, जबकि रोजगार परिवर्तन का आंकड़ा उम्मीदों को पीछे छोड़ते हुए 39.5K पर पहुंच गया। बाजार प्रतिभागी शीर्ष अमेरिकी और चीनी नेतृत्व के बीच होने वाली बैठक को लेकर भी सतर्क दिखे।\n\nदूसरी ओर, अमेरिकी डॉलर और जापानी येन (USD/JPY) अपने तीन सप्ताह के उच्चतम स्तर से पीछे हटते हुए एशियाई सत्र में 158.00 के करीब नुकसान में रहा। जापानी बॉन्ड प्रतिफल में तेज उछाल ने संभावित सरकारी हस्तक्षेप के जोखिमों के बीच येन को सहारा दिया। वहीं दूसरी ओर, अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा सख्त नीति बनाए रखने की उम्मीदों और ऊंचे अमेरिकी बॉन्ड यील्ड के चलते अमेरिकी डॉलर ने रातों-रात दो महीने के उच्चतम स्तर पर बनाई गई अपनी बढ़त को थामे रखा।\n\nसोने की चाल, बैंक ऑफ जापान का फैसला और व्यापारिक समझौता\nकमोडिटी बाजार में सोना एक सप्ताह के निचले स्तर के करीब सीमित दायरे में कारोबार करता रहा, जिसे उसने एशियाई सत्र के दौरान छुआ था। निवेशक अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उनके चीनी समकक्ष शी जिनपिंग के बीच होने वाली महत्वपूर्ण वार्ता के नतीजों की प्रतीक्षा कर रहे हैं। हालांकि किसी बहुत बड़ी घोषणा की उम्मीदें कम हैं, फिर भी कारोबारी दुर्लभ खनिजों, तकनीकी प्रतिबंधों और मौजूदा व्यापार समझौते के विस्तार से जुड़ी प्रगति पर नजर बनाए हुए हैं।\n\nव्यापारिक मोर्चे पर एक अहम घटनाक्रम में अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने बताया कि अमेरिका और चीन द्विपक्षीय व्यापार विराम समझौते को आगे बढ़ाने पर सहमत हो गए हैं। यह समझौता पहले नवंबर में समाप्त होने वाला था, जिसे अब 10 जनवरी तक बढ़ा दिया गया है। यह निर्णय स्कॉट बेसेंट और चीन के उप प्रधानमंत्री हे लिफेंग के बीच वॉशिंगटन में हुई एक अनिर्धारित बैठक के बाद सामने आया।\n\nइसके साथ ही मौद्रिक नीति सामान्यीकरण की दिशा में आगे बढ़ते हुए बैंक ऑफ जापान (BoJ) ने अपनी अल्पकालिक ब्याज दर के लक्ष्य को 1.00 प्रतिशत से बढ़ाकर 1.25 प्रतिशत कर दिया। यह निर्णय 7-2 के बहुमत से लिया गया, जो पिछले कई हफ्तों से वित्तीय विश्लेषकों और बाजार की आम उम्मीदों के पूरी तरह अनुकूल रहा।\n\nइसका आप पर असर\nप्रमुख केंद्रीय बैंकों द्वारा ब्याज दरों को ऊंचा रखने और नीतियों को सख्त करने से वैश्विक वित्तीय बाजारों और उपभोक्ताओं पर सीधा असर पड़ेगा।\n\n• भारत में प्रभाव: वैश्विक स्तर पर ब्याज दरें ऊंची रहने और अमेरिकी डॉलर मजबूत होने से भारतीय रुपये पर दबाव बढ़ सकता है। इसके चलते आयात महंगा हो सकता है और घरेलू स्तर पर महंगाई का दबाव देखने को मिल सकता है।\n• वैश्विक निवेशकों के लिए: यूरोपीय सेंट्रल बैंक के सख्त रुख से निकट भविष्य में दरों में कटौती की संभावना कम हो गई है। निवेशकों को बॉन्ड प्रतिफल और मुद्रा विनिमय दरों में जारी उतार-चढ़ाव के अनुसार अपनी रणनीतियों को ढालना होगा।\n• ऋण और उधारी लागत: केंद्रीय बैंकों द्वारा मौद्रिक ढील में देरी करने से वैश्विक स्तर पर कर्ज की लागत ऊंची बनी रहेगी। कॉरपोरेट और व्यक्तिगत उधारकर्ताओं को अपनी वित्तीय देनदारियों पर अधिक ब्याज चुकाना जारी रखना पड़ सकता है।\n• सोना और कमोडिटी: ऊंची दरों और डॉलर की मजबूती के कारण सोने की कीमतों पर दबाव देखा जा रहा है। सर्राफा बाजार के खरीदारों को अमेरिकी और चीनी वार्ता के नतीजों तक सतर्क रहने की जरूरत है।\n\nऐसा क्यों हुआ\nयूरोपीय सेंट्रल बैंक और अन्य प्रमुख केंद्रीय बैंक महंगाई के लंबे समय तक बने रहने के जोखिमों को समाप्त करने के लिए सतर्कता बरत रहे हैं। आर्थिक अनिश्चितताओं, भू-राजनीतिक तनाव और द्विपक्षीय व्यापारिक वार्ताओं के बीच नीतिगत स्थिरता बनाए रखना उनकी प्राथमिकता है।\n\n• मुद्रास्फीति का दबाव: यूरोज़ोन में भले ही आर्थिक गतिविधियों में मामूली सुधार हुआ हो, लेकिन महंगाई के दोबारा भड़कने का खतरा टला नहीं है। अधिकारियों का मानना है कि समय से पहले नीति को ढीला करने से महंगाई हमेशा के लिए अर्थव्यवस्था में बस सकती है।\n• जापान में नीतिगत बदलाव: बैंक ऑफ जापान ने दशकों की अति-सुलभ मौद्रिक नीति को समाप्त करते हुए ब्याज दरें 1.25 प्रतिशत कर दी हैं। यह कदम मुद्रा के अवमूल्यन और आंतरिक आर्थिक स्थिरता को बहाल करने के उद्देश्य से उठाया गया है।\n• व्यापारिक अनिश्चितताएं: अमेरिका और चीन के बीच शुल्कों और व्यापार विवादों को टालने के लिए 10 जनवरी तक संघर्ष विराम बढ़ाया गया है। अनिश्चित भू-राजनीतिक माहौल के कारण केंद्रीय बैंक अपनी मौद्रिक नीतियों को लचीला और सतर्क बनाए हुए हैं।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. मार्टिन कोचर ने महंगाई को लेकर क्या बयान दिया है?\nमार्टिन कोचर ने कहा कि यूरोपीय सेंट्रल बैंक को अत्यधिक महंगाई को यूरोज़ोन की अर्थव्यवस्था में स्थायी रूप से जड़ें जमाने से रोकना होगा।\n\n2. इस बयान के समय यूरो-डॉलर (EUR/USD) की विनिमय दर क्या थी?\nइस बयान के समय EUR/USD विनिमय दर 1.1380 पर अपरिवर्तित कारोबार कर रही थी।\n\n3. ईसीबी का मुख्य लक्ष्य और मुख्यालय कहां है?\nईसीबी का मुख्यालय फ्रैंकफर्ट, जर्मनी में है और इसका प्राथमिक उद्देश्य मुद्रास्फीति को लगभग 2 प्रतिशत पर स्थिर रखना है।\n\n4. क्वांटिटेटिव ईजिंग और टाइटनिंग में क्या अंतर है?\nक्वांटिटेटिव ईजिंग में बैंक नकदी बढ़ाने के लिए बॉन्ड खरीदता है, जबकि टाइटनिंग में नए बॉन्ड खरीदना और परिपक्व बॉन्ड में निवेश बंद कर दिया जाता है।\n\n5. बैंक ऑफ जापान ने ब्याज दरों में क्या बदलाव किया?\nबैंक ऑफ जापान ने 7-2 के बहुमत से अपनी अल्पकालिक ब्याज दर 1.00 प्रतिशत से बढ़ाकर 1.25 प्रतिशत कर दी।\n\n6. अमेरिका और चीन के बीच व्यापार विराम कब तक बढ़ाया गया है?\nअमेरिका और चीन के बीच द्विपक्षीय व्यापार विराम को नवंबर की समयसीमा से आगे बढ़ाकर 10 जनवरी तक लागू कर दिया गया है।\n\n7. ऑस्ट्रेलियाई अर्थव्यवस्था से जुड़े कौन से आंकड़े सामने आए?\nऑस्ट्रेलिया की बेरोजगारी दर बढ़कर 4.6 प्रतिशत हो गई, जबकि रोजगार परिवर्तन में 39.5K की वृद्धि दर्ज की गई।",
  "url": "https://trendkia.com/market/ecb-ke-martin-kocher-ne-di-chetavani-mahngai-ko-jaren-jamane-se-rokana-jaruri-37912",
  "category": "बाज़ार",
  "publishedAt": "2026-09-24",
  "tags": [
    "यूरोपीय सेंट्रल बैंक",
    "मार्टिन कोचर",
    "मुद्रास्फीति",
    "बैंक ऑफ जापान",
    "ब्याज दरें",
    "अमेरिकी डॉलर",
    "विदेशी मुद्रा बाजार"
  ],
  "language": "hi",
  "site": "TrendKia"
}