यूरोपीय सेंट्रल बैंक के परेरा ने कहा, मौजूदा समय में दूसरे दौर के महंगाई के असर के संकेत नहीं यूरोपीय सेंट्रल बैंक के अधिकारी परेरा के अनुसार मौजूदा मुद्रास्फीति 2022 के ऊर्जा संकट से काफी नीचे है और दूसरे दौर का दबाव नहीं दिख रहा है। यूरोपीय सेंट्रल बैंक के नीति निर्माता परेरा ने क्षेत्र के आर्थिक हालात पर अपने विचार साझा करते हुए स्पष्ट किया है कि वर्तमान समय में मुद्रास्फीति और कोर मुद्रास्फीति दोनों का स्तर 2022 के ऊर्जा संकट के दौरान देखे गए चरम स्तरों से काफी नीचे आ चुका है। उन्होंने जोर देकर कहा कि मौजूदा समय में मूल्य वृद्धि के दूसरे दौर के प्रभाव देखने को नहीं मिल रहे हैं, जिससे केंद्रीय बैंक के लिए नीतिगत संतुलन बनाना संभव हो रहा है। इसके साथ ही अन्य उपभोक्ता वस्तुओं की कीमतों में भी महंगाई की उम्मीदों के बेकाबू होने के कोई संकेत नजर नहीं आ रहे हैं। इस आर्थिक परिदृश्य के बीच फ्रांस को अपने राजकोषीय घाटे और कर्ज को घटाने के लिए जरूरी सुधार लागू करने और वित्तीय अनुशासन बरतने की सलाह दी गई है। यूरोपीय सेंट्रल बैंक की भूमिका और नीतिगत ढांचा जर्मनी के फ्रैंकफर्ट में स्थित यूरोपीय सेंट्रल बैंक यूरोज़ोन के केंद्रीय बैंक के रूप में कार्य करता है। यह प्रमुख वित्तीय संस्थान पूरे क्षेत्र के लिए ब्याज दरों का निर्धारण करता है और समग्र मौद्रिक नीति का प्रबंधन संभालता है। संस्था का मुख्य कानूनी दायित्व कीमत स्थिरता बनाए रखना है, जिसका व्यावहारिक अर्थ मुद्रास्फीति की दर को लगभग 2 प्रतिशत के वार्षिक लक्ष्य के आसपास रखना होता है। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए बैंक मुख्य रूप से अपनी नीतिगत ब्याज दरों को घटाने या बढ़ाने का सहारा लेता है। वित्तीय बाजारों के सामान्य नियम के तहत अपेक्षाकृत उच्च ब्याज दरें यूरो को मजबूती प्रदान करती हैं, जबकि ब्याज दरों में कटौती से मुद्रा में कमजोरी देखी जाती है। नीतिगत निर्णयों की प्रक्रिया को संचालित करने के लिए गवर्निंग काउंसिल वर्ष में आठ बार नियमित बैठकें आयोजित करती है। इन बैठकों में मौद्रिक नीति संबंधी महत्वपूर्ण निर्णय लिए जाते हैं, जिसमें यूरोज़ोन के सदस्य देशों के राष्ट्रीय केंद्रीय बैंकों के प्रमुख और छह स्थायी सदस्य शामिल होते हैं। इस उच्चस्तरीय समिति का नेतृत्व यूरोपीय सेंट्रल बैंक की अध्यक्ष क्रिस्टीन लेगार्ड करती हैं। सामान्य परिस्थितियों में जब महंगाई तय लक्ष्य से लगभग दोगुनी रफ्तार से भाग रही हो, तो केंद्रीय बैंक का सीधा कदम ब्याज दरें बढ़ाना होता है, लेकिन वर्तमान हालात जटिल हैं क्योंकि बॉन्ड बाजार पहले से ही नीतिगत सख्ती का काम आंशिक रूप से कर रहा है, जिससे नीति निर्माताओं के समक्ष असमंजस की स्थिति बन रही है। क्वांटिटेटिव ईजिंग और क्वांटिटेटिव टाइटनिंग के उपकरण अत्यधिक आर्थिक संकट या असामान्य परिस्थितियों में केंद्रीय बैंक पारंपरिक ब्याज दर कटौती से इतर क्वांटिटेटिव ईजिंग जैसे गैर-पारंपरिक नीतिगत साधन का उपयोग करता है। इस प्रक्रिया के तहत यूरो जारी करके बैंकों और अन्य वित्तीय संस्थानों से सरकारी या कॉरपोरेट बॉन्ड खरीदे जाते हैं ताकि बैंकिंग तंत्र में नकदी का प्रवाह बढ़ाया जा सके। यह अंतिम उपाय आमतौर पर मुद्रा को कमजोर करता है और इसे तब आजमाया जाता है जब मात्र ब्याज दरें घटाकर स्थिरता लाना संभव न हो। इस उपकरण का सहारा 2009 से 2011 के वैश्विक वित्तीय संकट, 2015 की सुस्त मुद्रास्फीति की अवधि और कोरोना महामारी के दौरान बड़े पैमाने पर लिया गया था। इसके विपरीत जब अर्थव्यवस्था पटरी पर लौटने लगती है और महंगाई बढ़ने लगती है, तब क्वांटिटेटिव टाइटनिंग की प्रक्रिया अमल में लाई जाती है। जहां पूर्व प्रक्रिया में बॉन्ड खरीदकर नकदी डाली जाती है, वहीं इस नीति के तहत केंद्रीय बैंक नए बॉन्ड खरीदना बंद कर देता है और अपने पास मौजूद मैच्योर हो रहे बॉन्ड के मूलधन का पुनर्निवेश भी रोक देता है। यह कदम बाजार से अतिरिक्त तरलता को सोखता है और सामान्य तौर पर साझा मुद्रा के लिए सकारात्मक माना जाता है। वैश्विक मुद्रा और कमोडिटी बाजारों की स्थिति अंतरराष्ट्रीय मुद्रा बाजार में लाइव मार्केट डेटा के अनुसार EUR/USD की जोड़ी 1.12 के स्तर पर कारोबार कर रही है, जो पिछले बंद स्तर 1.12 से 0.20 प्रतिशत की गिरावट दर्शाती है। इसका 52 हफ्तों का दायरा 1.12 से 1.20 के बीच बना हुआ है। तकनीकी संकेतकों में 14 दिवसीय रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स 15 के स्तर पर ओवरसोल्ड स्थिति दिखा रहा है, जबकि एमएसीडी -0.01 पर मंदी का रुझान बनाए हुए है। मूविंग एवरेज संकेत दे रहे हैं कि 50 दिवसीय एक्सपोनेंशियल मूविंग एवरेज 1.15 और 200 दिवसीय एक्सपोनेंशियल मूविंग एवरेज 1.16 के स्तर पर हैं, जहां डेथ क्रॉस की स्थिति दीर्घकालिक मंदी को दर्शा रही है। 20 दिवसीय बॉलिंजर बैंड 1.12 से 1.17 के दायरे में है, जबकि औसत ट्रू रेंज 0.01 दर्ज की गई है। प्रमुख धुरी स्तर 1.12 पर स्थित है, जिसमें पहला प्रतिरोध 1.12 और दूसरा 1.13 है, वहीं समर्थन स्तर 1.12 और 1.11 पर टिके हैं। अन्य प्रमुख संपत्तियों में बुधवार के एशियाई कारोबारी सत्र में AUD/USD की जोड़ी 0.7000 के नीचे दबाव में रही, जहां अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में उछाल के चलते अमेरिकी डॉलर में खरीदारी लौटी, भले ही ऑस्ट्रेलियाई रिजर्व बैंक से सख्त रुख की उम्मीदें बनी हुई थीं। दूसरी तरफ USD/JPY की जोड़ी 158.50 के स्तर के पास डेढ़ हफ्ते के उच्च स्तर पर कारोबार करती दिखी। सोने की कीमतों में भी मंगलवार की तेजी के बाद बुधवार को गिरावट आई और XAU/USD टूटकर 4,120 डॉलर के नीचे फिसल गया, जो मंगलवार के 4,180 डॉलर के दायरे से पीछे हटते हुए 4,104 डॉलर के दो महीने के निचले स्तर के करीब पहुंच गया। क्रिप्टो बाजार में डॉगकॉइन में बिकवाली का दबाव बढ़ता दिखा और यह लगभग 5 प्रतिशत से अधिक की साप्ताहिक गिरावट के साथ 0.090 डॉलर के आसपास आ गया। घरेलू मोर्चे पर भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति बैठक के बाद भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले काफी कमजोर हुआ और USD/INR उछलकर 96.72 के स्तर तक पहुंच गया, जो चार महीनों का उच्चतम स्तर है। इस नीति समीक्षा में भारतीय रिजर्व बैंक ने अपनी रेपो रेट को 25 आधार अंक बढ़ाकर 5.5 प्रतिशत करने का निर्णय लिया, जो फरवरी 2023 के बाद पहली ब्याज दर वृद्धि दर्ज की गई। अब वैश्विक वित्तीय निवेशकों की निगाहें फेडरल रिजर्व की बैठक के कार्यवृत्त पर टिकी हुई हैं। इसका आप पर असर केंद्रीय बैंकों के नीतिगत बयानों और ब्याज दर निर्णयों का सीधा असर मुद्रा विनिमय दरों, आयात लागत और वैश्विक वित्तीय बाजारों पर पड़ता है। • वैश्विक निवेशकों के लिए: मुद्रास्फीति के दबाव में नरमी आने से ब्याज दरों में आक्रामक बढ़ोतरी की आशंका कम हो जाती है। इसके परिणामस्वरूप विदेशी मुद्रा विनिमय और अंतरराष्ट्रीय बॉन्ड पोर्टफोलियो में स्थिरता देखने को मिल सकती है। • आयात और विदेश यात्रा पर: कमजोर यूरो और मजबूत अमेरिकी डॉलर से अंतरराष्ट्रीय यात्रा और डॉलर आधारित आयात के खर्च प्रभावित होते हैं। विदेश यात्रा या शिक्षा की योजना बना रहे लोगों को विनिमय दरों में उतार-चढ़ाव पर नजर रखनी चाहिए। • घरेलू ब्याज दरों पर: भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा रेपो रेट को बढ़ाकर 5.5 प्रतिशत करने से कर्ज महंगे हो सकते हैं। इससे बैंक से लिए जाने वाले होम लोन और ऑटो लोन की ईएमआई में बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है। • कमोडिटी और सोने के खरीदारों के लिए: सोने के 4,120 डॉलर के नीचे फिसलने से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कीमती धातुओं में नरमी के संकेत मिलते हैं। इससे खुदरा खरीदारों और आभूषण निवेशकों को खरीदारी के बेहतर अवसर मिल सकते हैं। ऐसा क्यों हुआ यूरोपीय सेंट्रल बैंक के अधिकारी का यह बयान यूरोज़ोन में आपूर्ति श्रृंखला में सुधार और 2022 के ऊर्जा झटके के बाद मुद्रास्फीति के सामान्य होने के कारण सामने आया है। इसके साथ ही वैश्विक बाजारों में केंद्रीय बैंकों की अलग-अलग मौद्रिक नीतियों का प्रभाव देखने को मिल रहा है। • ऊर्जा संकट का असर घटना: वर्ष 2022 में आए भीषण ऊर्जा संकट के बाद आपूर्ति श्रृंखलाएं काफी हद तक स्थिर हो चुकी हैं। इसके चलते वस्तुओं और सेवाओं की लागत में होने वाली असामान्य बढ़ोतरी पर विराम लगा है। • मजबूत मजदूरी-मूल्य चक्र का अभाव: मौजूदा समय में वेतन और कीमतों के बीच अनियंत्रित प्रतिस्पर्धा यानी दूसरे दौर का महंगाई प्रभाव शुरू नहीं हुआ है। इसके कारण सामान्य उपभोक्ता वस्तुओं में दीर्घकालिक महंगाई की आशंकाएं सीमित रही हैं। • केंद्रीय बैंकों की नीतियों में भिन्नता: जहां यूरोप में महंगाई पर संयम दिख रहा है, वहीं अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में तेजी और भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा 25 आधार अंकों की दर वृद्धि यह दर्शाती है कि अलग-अलग अर्थव्यवस्थाएं अलग आर्थिक दबावों का सामना कर रही हैं। सवाल-जवाब 1. यूरोपीय सेंट्रल बैंक के अधिकारी परेरा ने मुद्रास्फीति को लेकर क्या कहा है? उन्होंने कहा कि वर्तमान मुद्रास्फीति 2022 के ऊर्जा संकट से काफी नीचे है और इस समय दूसरे दौर के महंगाई प्रभाव के कोई संकेत नहीं हैं। 2. यूरोपीय सेंट्रल बैंक का प्राथमिक दायित्व क्या है? बैंक का प्राथमिक दायित्व कीमत स्थिरता बनाए रखना है, जिसका लक्ष्य मुद्रास्फीति को लगभग 2 प्रतिशत के स्तर पर रखना होता है। 3. क्वांटिटेटिव ईजिंग क्या होता है? यह एक मौद्रिक नीति साधन है जिसके तहत केंद्रीय बैंक अतिरिक्त यूरो जारी करके वित्तीय संस्थानों से सरकारी और कॉरपोरेट बॉन्ड खरीदता है ताकि तरलता बढ़ाई जा सके। 4. भारतीय रिजर्व बैंक ने अपनी नीतिगत दरों में क्या बदलाव किया? भारतीय रिजर्व बैंक ने अपनी मौद्रिक समीक्षा बैठक में रेपो रेट को 25 आधार अंक बढ़ाकर 5.5 प्रतिशत कर दिया, जो फरवरी 2023 के बाद पहली वृद्धि है। 5. EUR/USD की वर्तमान तकनीकी स्थिति क्या है? EUR/USD 1.12 पर कारोबार कर रहा है और 15 के आरएसआई स्तर के साथ ओवरसोल्ड स्थिति में है। https://trendkia.com/market/ecb-ke-pereira-ne-kaha-maujuda-samaya-men-dusare-daura-ke-mahngai-ke-asara-ke-snketa-nahin-44587 TrendKia — Har trend, sabse pehle.