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  "type": "article",
  "title": "यूरोपीय सेंट्रल बैंक के पीटर काजिमिर ने दी सख्त चेतावनी, महंगाई सामान्य आदत बनने से पहले कड़े फैसलों की जरूरत",
  "summary": "यूरोपीय सेंट्रल बैंक के गवर्निंग काउंसिल सदस्य पीटर काजिमिर ने कहा है कि मुद्रास्फीति अर्थव्यवस्था में पूरी तरह जड़ें जमाए उससे पहले मौद्रिक सख्ती का पैमाना तय करना जरूरी है।",
  "content": "यूरोपीय वित्तीय बाजारों के कारोबारी सत्र के दौरान सोमवार को मौद्रिक नीतियों को लेकर एक बेहद गंभीर रुख देखने को मिला। यूरोपीय सेंट्रल बैंक (ईसीबी) की गवर्निंग काउंसिल के सदस्य और नेशनल बैंक ऑफ स्लोवाकिया (एनबीएस) के गवर्नर पीटर काजिमिर ने ब्याज दरों और मुद्रास्फीति के संतुलन पर कड़ा रुख स्पष्ट किया है। उनका मानना है कि नीति निर्माताओं के सामने अब यह बहस पीछे छूट चुकी है कि आगे कदम उठाने की जरूरत है या नहीं, बल्कि अब असल सवाल यह बन चुका है कि मौद्रिक सख्ती का स्तर कितना बड़ा होना चाहिए।\n\nमहंगाई की आदत बनने से पहले निर्णायक कदमों पर जोर\nपीटर काजिमिर का कहना है कि जब तक महंगाई व्यापक रूप से फैल न जाए और कंपनियां अपनी बढ़ती लागत का बोझ पूरी तरह आम उपभोक्ताओं पर न डालने लगें, तब तक हाथ पर हाथ धरे बैठे रहना किसी भी लिहाज से सही नीति नहीं मानी जा सकती। यदि नीतिगत दरें तय करने वाले संस्थान समय रहते हरकत में नहीं आते हैं, तो ऊंची कीमतें अर्थव्यवस्था में स्थायी रूप ले सकती हैं। इसके साथ ही उन्होंने वित्तीय बाजारों की मौजूदा सोच पर भी सवाल उठाए। उनके अनुसार वित्तीय बाजार अब भी इस बात का सही आकलन करने में चूक कर रहे हैं कि मुद्रास्फीति को काबू में लाने के लिए वास्तव में किस हद तक सख्त रास्ते पर चलने की आवश्यकता पड़ सकती है।\n\nयूरोपीय सेंट्रल बैंक की मौद्रिक प्रणाली और मुख्य दायित्व\nजर्मनी के फ्रैंकफर्ट में स्थित यूरोपीय सेंट्रल बैंक पूरे यूरोज़ोन के लिए केंद्रीय रिजर्व बैंक की भूमिका निभाता है। यह संस्थान समूचे क्षेत्र के लिए आधिकारिक ब्याज दरें तय करता है और मौद्रिक नीति का पूरा संचालन करता है। ईसीबी का सबसे बुनियादी और प्राथमिक अधिदेश मूल्य स्थिरता बनाए रखना है, जिसके तहत महंगाई की दर को लगभग 2% के स्तर पर नियंत्रित रखने का लक्ष्य तय किया गया है।\n\nइस दो प्रतिशत के लक्ष्य को हासिल करने के लिए केंद्रीय बैंक का प्राथमिक हथियार ब्याज दरों को बढ़ाना या घटाना है। जब ईसीबी ब्याज दरों में अपेक्षाकृत बढ़ोतरी करता है, तो इससे आम तौर पर यूरो मुद्रा को मजबूती मिलती है। इसके विपरीत, जब ब्याज दरों में कटौती की जाती है, तो यूरो पर दबाव बढ़ता है और वह कमजोर होता है। नीतिगत दरों से जुड़े ये तमाम फैसले ईसीबी गवर्निंग काउंसिल की साल में आठ बार होने वाली आधिकारिक बैठकों में लिए जाते हैं। इन अहम बैठकों में यूरोज़ोन के सभी राष्ट्रीय केंद्रीय बैंकों के प्रमुख और छह स्थायी सदस्य मिलकर निर्णय लेते हैं, जिनमें ईसीबी की अध्यक्ष क्रिस्टीन लेगार्ड भी शामिल हैं।\n\nक्वांटिटेटिव ईजिंग और क्वांटिटेटिव टाइटनिंग का गणित\nअत्यधिक गंभीर और असाधारण आर्थिक परिस्थितियों में ईसीबी पारंपरिक ब्याज दरों से आगे बढ़कर क्वांटिटेटिव ईजिंग (क्यूई) जैसे नीतिगत औजार का इस्तेमाल करता है। इस प्रक्रिया में केंद्रीय बैंक नई मुद्रा तैयार करके वित्तीय प्रणाली से सरकारी या कॉरपोरेट बॉन्ड खरीदता है। यह खरीद बैंकों और बड़े वित्तीय संस्थानों से की जाती है ताकि बाजार में नकदी का प्रवाह बढ़ाया जा सके। आम तौर पर क्वांटिटेटिव ईजिंग की इस प्रक्रिया का सीधा असर मुद्रा पर पड़ता है और इससे यूरो कमजोर होता है।\n\nकेंद्रीय बैंक इस नीति को बिल्कुल आखिरी हथियार के तौर पर तभी लागू करता है जब केवल ब्याज दरों में कटौती करके कीमतों में स्थिरता ला पाना संभव नहीं दिखता। अतीत में ईसीबी ने 2009 से 2011 के वैश्विक वित्तीय संकट के दौरान, 2015 में लंबे समय तक बनी रही बहुत कम महंगाई के दौर में, और फिर कोविड महामारी के अभूतपूर्व संकट के दौरान इस असाधारण माध्यम का उपयोग किया था।\n\nइसके बिल्कुल उलट क्वांटिटेटिव टाइटनिंग (क्यूटी) की प्रक्रिया होती है, जिसे आर्थिक सुधार शुरू होने और महंगाई में तेजी आने के बाद अपनाया जाता है। जहां एक ओर क्वांटिटेटिव ईजिंग में नकदी उपलब्ध कराने के लिए बॉन्ड खरीदे जाते हैं, वहीं क्वांटिटेटिव टाइटनिंग के तहत केंद्रीय बैंक नए बॉन्ड खरीदना पूरी तरह बंद कर देता है। इसके अलावा, अपने पास पहले से मौजूद जिन बॉन्डों की परिपक्वता अवधि पूरी हो जाती है, उनके मूलधन का दोबारा निवेश भी रोक दिया जाता है। वित्तीय बाजार के समीकरणों के मुताबिक इस कदम को यूरो के लिए सकारात्मक और तेजी लाने वाला कारक माना जाता है।\n\nवैश्विक मुद्रा और कमोडिटी बाजारों में हलचल\nमौद्रिक नीतियों के इन बयानों के बीच वैश्विक मुद्रा बाजार में भी सोमवार को कई अहम बदलाव दर्ज किए गए। एशियाई सत्र में आई गिरावट के बाद AUD/USD की जोड़ी में सुधार देखा गया। अमेरिका और ईरान के बीच कूटनीतिक बातचीत को लेकर बनी नई उम्मीदों ने निवेशकों के भरोसे को मजबूती दी, जिससे सुरक्षित ठिकाना माने जाने वाले अमेरिकी डॉलर पर दबाव बना और जोखिम उठाने की क्षमता से जुड़ी ऑस्ट्रेलियाई मुद्रा को सहारा मिला। हालांकि, रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया (आरबीए) के आगामी महत्वपूर्ण निर्णय से पहले निवेशक सतर्क हैं और हाजिर भाव पिछले गुरुवार को छुए गए एक महीने के उच्चतम स्तर से नीचे ही बना रहा।\n\nउधर जापानी मुद्रा के मोर्चे पर USD/JPY जोड़ी ने नए हफ्ते की सकारात्मक शुरुआत की। बैंक ऑफ जापान (बीओजे) के बाद शुक्रवार को 157.00 के निचले स्तर पर लुढ़कने के बाद यह जोड़ी उबरते हुए एशियाई सत्र में 158.00 के करीब पहुंच गई। जापान की वित्त मंत्री तात्सुकी कातायामा की ओर से बाजार में हस्तक्षेप को लेकर दी गई ताजा चेतावनियों का भी इस तेजी पर कोई खास असर देखने को नहीं मिला।\n\nकमोडिटी बाजार में सोने ने अपनी मामूली बढ़त का कुछ हिस्सा गंवा दिया और शुरुआती यूरोपीय सत्र के दौरान यह 3,900 डॉलर प्रति औंस के आंकड़े से नीचे हल्के सकारात्मक रुख के साथ कारोबार करता दिखा। अमेरिका-ईरान युद्ध को समाप्त करने के संभावित कूटनीतिक रास्ते की उम्मीद में अमेरिकी डॉलर में आई बिकवाली ने सोने को कुछ समर्थन तो दिया, लेकिन ऊर्जा की ऊंची कीमतों से उपजी महंगाई के कारण अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरें बढ़ाने की संभावना अभी भी बनी हुई है। इस आशंका ने बिना ब्याज देने वाली इस पीली धातु को शुक्रवार को दर्ज अक्टूबर 2025 के निचले स्तर के करीब सीमित रखा है।\n\nक्रिप्टोकरेंसी और भू-राजनीतिक मोर्चे की स्थिति\nक्रिप्टोकरेंसी बाजार में डॉगकॉइन (DOGE) सोमवार को लगभग 0.075 डॉलर के स्तर पर मंडराता दिखाई दिया। सितंबर के अंत से शुरू होकर यह लगातार पांचवां हफ्ता रहा जब इस कॉइन में गिरावट दर्ज की गई। ऑन-चेन एनालिटिक्स फर्म सेंटिमेंट के आंकड़ों से पता चलता है कि बड़े टोकन धारकों की गतिविधियों में विरोधाभास बना हुआ है; बहुत बड़े व्हेल निवेशक अपनी हिस्सेदारी घटा रहे हैं, जबकि अपेक्षाकृत छोटे व्हेल वॉलेट टोकन जमा करने में जुटे हैं। कमजोर पड़ते ऑन-चेन संकेतकों और तकनीकी चार्ट पर बिगड़ते रुझान के चलते इस टोकन में आगे और गिरावट का जोखिम बना हुआ है। इसके साथ ही सप्ताहांत में पश्चिम एशिया युद्ध से जुड़े घटनाक्रमों पर भी बाजार की कड़ी नजर टिकी है, जो आगामी कारोबारी दिनों में उतार-चढ़ाव तय कर सकते हैं।\n\nइसका आप पर असर\nयूरोपीय सेंट्रल बैंक की सख्त मौद्रिक नीति और वैश्विक मुद्राओं की उठापटक सीधे तौर पर अंतरराष्ट्रीय व्यापार, यात्रा और निवेश पोर्टफोलियो पर असर डालती है।\n\n• वैश्विक कर्ज और ब्याज दरें: यदि यूरोज़ोन में नीतिगत दरों में और बढ़ोतरी होती है, तो अंतरराष्ट्रीय वित्तीय बाजारों में उधारी की लागत और अधिक बढ़ जाएगी। इसका असर वैश्विक बॉन्ड यील्ड और बहुराष्ट्रीय कंपनियों के पूंजीगत खर्च पर साफ दिखाई देगा।\n• मुद्रा विनिमय दर: कड़े मौद्रिक फैसलों और क्वांटिटेटिव टाइटनिंग से यूरो को अमेरिकी डॉलर और अन्य वैश्विक मुद्राओं के मुकाबले मजबूती मिल सकती है। विदेश यात्रा करने वाले पर्यटकों या यूरोज़ोन से आयात-निर्यात करने वाले व्यापारियों के लिए विनिमय लागत बदल जाएगी।\n• सोना और सुरक्षित निवेश: प्रमुख केंद्रीय बैंकों द्वारा ब्याज दरों को ऊंचा बनाए रखने से सोने जैसी गैर-ब्याज वाली संपत्तियों पर दबाव बना रहेगा। जो निवेशक सोने में सुरक्षित ठिकाना तलाश रहे हैं, उन्हें दर वृद्धि के चक्र के चलते सीमित रिटर्न के साथ सतर्क रुख अपनाना होगा।\n• क्रिप्टोकरेंसी और जोखिम वाली संपत्तियां: वैश्विक तरलता घटने और बड़े निवेशकों द्वारा बिकवाली के कारण डॉगकॉइन जैसी सट्टा संपत्तियों में कमजोरी जारी रह सकती है। खुदरा निवेशकों को अत्यधिक अस्थिर डिजिटल संपत्तियों में नई पूंजी लगाने से पहले तकनीकी रुझानों को परखना चाहिए।\n\nऐसा क्यों हुआ\nकेंद्रीय बैंकों का यह आक्रामक रुख लगातार बनी हुई मुद्रास्फीति और वैश्विक आपूर्ति संकट के चलते पैदा हुआ है, जिससे नीति निर्माताओं को त्वरित फैसले लेने पड़ रहे हैं।\n\n• लागत का चक्र: जब विनिर्माण और ऊर्जा लागत लंबे समय तक ऊंची रहती है, तो कारोबारी इसका बोझ सीधे उपभोक्ताओं पर डालना शुरू कर देते हैं। केंद्रीय बैंक इस प्रक्रिया के सामान्य आदत बनने से पहले ही मांग को नियंत्रित करने के लिए दरें बढ़ाने पर जोर देते हैं।\n• अत्यधिक नकदी का दबाव: विगत वर्षों में वैश्विक संकटों और महामारी के दौरान बड़े पैमाने पर किए गए क्वांटिटेटिव ईजिंग से बाजारों में भारी नकदी पहुंच गई थी। अर्थव्यवस्था में सुधार के बाद इस अतिरिक्त तरलता को वापस खींचने के लिए क्वांटिटेटिव टाइटनिंग शुरू की गई है।\n• भू-राजनीतिक अनिश्चितता: पश्चिम एशिया में जारी सैन्य तनाव और तेल आपूर्ति से जुड़ी चिंताओं ने ऊर्जा की कीमतों को ऊंचा रखा हुआ है। ऊर्जा से संचालित यह महंगाई केंद्रीय बैंकों को ब्याज दरें ऊंची बनाए रखने के लिए मजबूर कर रही है।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. पीटर काजिमिर ने मुद्रास्फीति को लेकर क्या चेतावनी दी है?\nउन्होंने कहा कि महंगाई के पूरी तरह फैलने और कंपनियों द्वारा लागत बढ़ाने का इंतजार करना गलत नीति है, और अब सवाल यह है कि कितनी मौद्रिक सख्ती जरूरी है।\n\n2. यूरोपीय सेंट्रल बैंक का मुख्य अधिदेश क्या है?\nईसीबी का प्राथमिक दायित्व मूल्य स्थिरता बनाए रखना है, जिसका लक्ष्य यूरोज़ोन में महंगाई दर को लगभग 2% के आसपास सीमित रखना होता है।\n\n3. क्वांटिटेटिव ईजिंग और क्वांटिटेटिव टाइटनिंग में क्या अंतर है?\nक्वांटिटेटिव ईजिंग में केंद्रीय बैंक नकदी बढ़ाने के लिए बॉन्ड खरीदता है, जबकि टाइटनिंग में बॉन्ड खरीद रोककर बाजार से तरलता घटाई जाती है।\n\n4. सोने की कीमतों पर मौजूदा मौद्रिक नीति का क्या प्रभाव पड़ रहा है?\nअमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरें बढ़ाने की संभावनाओं के कारण सोना 3,900 डॉलर प्रति औंस के नीचे सीमित दायरे में कारोबार कर रहा है।\n\n5. डॉगकॉइन के मौजूदा बाजार रुझान क्या संकेत दे रहे हैं?\nडॉगकॉइन 0.075 डॉलर के आसपास बना हुआ है और लगातार पांच 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