ईसीबी के फैसले से पहले यूरो में शानदार रिकवरी, उधर मिडिल ईस्ट के तनाव से क्रूड ऑयल 90 डॉलर के करीब यूरोपीय सेंट्रल बैंक (ईसीबी) के ब्याज दरों पर फैसले से पहले यूरो में मजबूती देखने को मिल रही है, जिसे स्पॉट डिमांड का सपोर्ट मिला है। दूसरी तरफ, अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल आया है, जबकि बिटकॉइन में गिरावट के बावजूद ETF में निवेश जारी है। यूरोपीय सेंट्रल बैंक (ईसीबी) के बहुप्रतीक्षित ब्याज दर फैसले से पहले, करेंसी मार्केट में यूरो ने एक बार फिर अपनी मजबूत वापसी के संकेत दिए हैं। ग्लोबल फाइनेंशियल फर्म बीएनवाई की एक विस्तृत मार्केट रिपोर्ट के अनुसार, भारी उतार-चढ़ाव के दौर से गुजरने के बाद अब यह करेंसी काफी स्थिर स्थिति में नजर आ रही है। हालांकि, एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह रिकवरी अभी भी पूरी तरह से मुकम्मल नहीं हुई है। इस मौजूदा मजबूती के पीछे सबसे बड़ा कारण स्पॉट डिमांड में आई भारी तेजी है। स्पॉट फ्लो में हो रहा यह सुधार यूरोज़ोन के एसेट्स की रिकवरी की एक बहुत ही सकारात्मक और बड़ी तस्वीर पेश कर रहा है। लेकिन, मार्केट एनालिस्ट्स ने इस बात को लेकर आगाह भी किया है कि इस उछाल को अभी तक फॉरवर्ड या स्वैप डिमांड का मजबूत समर्थन नहीं मिला है। बाजार की लंबी अवधि की सेहत के लिए यह बहुत जरूरी है कि यूरो की होल्डिंग अपने सामान्य और ऐतिहासिक स्तर पर वापस आए, जिसके लिए आने वाले दिनों में और अधिक फंड फ्लो की आवश्यकता होगी। हेजिंग में कमी और EUR/USD का आउटलुक यूरो की इस स्थिरता के तकनीकी पहलुओं को गहराई से समझें, तो क्रॉस-बॉर्डर हेजिंग का कम होना इसकी मजबूती का सबसे स्पष्ट और तात्कालिक कारण बनकर उभरा है। जैसे-जैसे ग्लोबल निवेशक अपने जोखिमों का दोबारा आकलन कर रहे हैं, क्रॉस-बॉर्डर हेजिंग की कुल मात्रा में लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है। इसका सीधा असर यह हुआ है कि यूरोज़ोन के एसेट्स में निवेशकों का नेट एक्सपोजर पिछले दो सालों के अपने उच्चतम स्तर पर पहुंच गया है। इस भारी निवेश के बावजूद, यूरोज़ोन के घरेलू निवेशक अभी भी आक्रामक रूप से यूरो की फॉरवर्ड-बाइंग करने से बच रहे हैं, जो कहीं न कहीं बाजार के पूरे विश्वास को सीमित कर रहा है। हालांकि, तात्कालिक स्पॉट ट्रेडिंग की बात करें तो, EUR/USD करेंसी पेयर ने लगातार दूसरे दिन अपनी मजबूत और सकारात्मक गति को बनाए रखा है। गुरुवार को यूरोपीय ट्रेडिंग सेशन के दौरान यह पेयर 1.1400 के अहम स्तर के ऊपर बहुत ही आराम से ट्रेड कर रहा है। अब बाजार के सभी निवेशकों की निगाहें ईसीबी की आगामी पॉलिसी घोषणा पर टिकी हैं, जहां ब्याज दरों में और बढ़ोतरी को लेकर मिलने वाले किसी भी छोटे से इशारे पर भी बारीकी से नजर रखी जाएगी। ब्रिटिश पाउंड और कमोडिटी मार्केट पर भारी दबाव इंग्लिश चैनल के दूसरी तरफ, ब्रिटिश पाउंड को एक बहुत ही अलग और चुनौतीपूर्ण आर्थिक माहौल का सामना करना पड़ रहा है। GBP/USD पेयर का हालिया तकनीकी उछाल अचानक से रुक गया है और यह 1.3400 के महत्वपूर्ण मनोवैज्ञानिक स्तर से काफी नीचे बना हुआ है। पाउंड की इस तेजी पर लगी रोक के पीछे घरेलू और अंतरराष्ट्रीय, दोनों ही तरह के कारक जिम्मेदार हैं। सबसे मुख्य कारण अमेरिकी डॉलर में आया वह मामूली लेकिन लगातार बना हुआ उछाल है, जो अन्य सभी प्रमुख करेंसी पेयर्स पर भारी दबाव बना रहा है। पाउंड की मुश्किलें बढ़ाने में यूके के ताज़ा महंगाई के आंकड़ों का भी बड़ा हाथ है, जो बाजार के अनुमानों से काफी कम आए हैं। हालांकि कम महंगाई आम उपभोक्ताओं के लिए एक राहत की खबर है, लेकिन यह बैंक ऑफ इंग्लैंड द्वारा लंबे समय तक आक्रामक रूप से ब्याज दरें बढ़ाने की संभावनाओं को कम कर देती है, जिससे इस करेंसी का आकर्षण भी घटता है। इसके अलावा, मिडिल ईस्ट में तेजी से बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव ने निवेशकों को सुरक्षित निवेश विकल्पों की तरफ भागने पर मजबूर कर दिया है, जिससे स्टर्लिंग जैसी जोखिम वाली मुद्राओं पर अतिरिक्त दबाव पड़ रहा है। दुनिया भर में चल रही इस भू-राजनीतिक उथल-पुथल ने ग्लोबल कमोडिटी मार्केट में भी जबरदस्त हलचल पैदा कर दी है, जिससे ऊर्जा और कीमती धातुओं की कीमतों के समीकरण पूरी तरह से बदल गए हैं। अमेरिकी क्रूड ऑयल की कीमतें तेजी से उछलकर पिछले छह हफ्तों के अपने सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गई हैं और यह अब 90 डॉलर प्रति बैरल के अहम आंकड़े की तरफ आक्रामक रूप से बढ़ रही है। इस भारी उछाल के पीछे अमेरिका और ईरान के बीच कूटनीतिक और सैन्य तनाव का बहुत ज्यादा बढ़ जाना है। ऊर्जा की बढ़ती कीमतें एक बार फिर से दुनिया भर में महंगाई बढ़ने के गहरे डर को हवा दे रही हैं। अगर तेल की कीमतें इसी तरह ऊंचे स्तर पर बनी रहीं, तो इसका सीधा असर कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स पर पड़ेगा, जिससे अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में बढ़ोतरी जारी रखने की उम्मीदों को और बल मिलेगा। कर्ज के महंगा होने की इस आशंका ने उन संपत्तियों पर भारी दबाव डाल दिया है जो कोई ब्याज नहीं देती हैं। इसी के चलते, फेड की सख्त नीतियों की आशंका से गोल्ड यानी सोने की कीमतों में गिरावट देखने को मिल रही है और गुरुवार के यूरोपीय सेशन में यह 4,100 डॉलर के महत्वपूर्ण आंकड़े के आसपास संघर्ष करता नजर आया। क्रिप्टो मार्केट में संस्थागत निवेशकों का भरोसा कायम डिजिटल एसेट्स की तेजी से बदलती दुनिया की बात करें, तो क्रिप्टोकरेंसी मार्केट इस समय छोटी अवधि की कीमतों में गिरावट और लंबी अवधि के संस्थागत आशावाद के एक बहुत ही जटिल मिश्रण से गुजर रहा है। क्रिप्टो मार्केट के सबसे बड़े खिलाड़ी बिटकॉइन में चल रही गिरावट का दौर और गहरा हो गया है। पिछले 24 घंटों में आई मामूली लेकिन लगातार गिरावट के बाद, यह अब 65,800 डॉलर के स्तर से नीचे ट्रेड कर रहा है। हालांकि, स्पॉट मार्केट में बिटकॉइन की कीमतों में भले ही कमजोरी दिख रही हो, लेकिन संस्थागत निवेशकों की इसे लेकर भूख अभी भी बहुत जबरदस्त है। आंकड़ों से पता चलता है कि बुधवार को अमेरिकी बाजारों में लिस्टेड स्पॉट बिटकॉइन ETF ने भारी मात्रा में संस्थागत पूंजी को अपनी ओर आकर्षित करना जारी रखा। यह लगातार सातवां दिन था जब पारंपरिक वित्त बाजार का पैसा इन निवेश माध्यमों में सकारात्मक रूप से आया, जो यह स्पष्ट तौर पर दिखाता है कि बाजार की तात्कालिक कीमतों और संस्थागत निवेशकों की लंबी अवधि की रणनीति के बीच एक बड़ा अंतर है। रोजमर्रा के बाजार के उतार-चढ़ाव से इतर, क्रिप्टो इंडस्ट्री के प्रमुख दिग्गज इस बात की भविष्यवाणी कर रहे हैं कि ग्लोबल इकोनॉमी में डिजिटल एसेट्स की भूमिका में एक बड़ा ढांचागत बदलाव आने वाला है। प्रमुख क्रिप्टो एसेट मैनेजमेंट कंपनी बिटवाइज़ के चीफ इन्वेस्टमेंट ऑफिसर मैट होगन ने हाल ही में स्पष्ट किया है कि अगला बड़ा क्रिप्टोकरेंसी बुल मार्केट पूरी तरह से ब्लॉकचेन-आधारित वित्तीय बुनियादी ढांचे और पारंपरिक वित्त प्रणाली के बीच बढ़ते और सहज जुड़ाव से संचालित होगा। मंगलवार देर रात प्रकाशित अपनी एक विस्तृत विश्लेषणात्मक रिपोर्ट में, होगन ने एक बहुत ही मजबूत तर्क पेश किया कि पूरा क्रिप्टो स्पेस शायद अभी से ही मार्केट बॉटम के शुरुआती और निश्चित संकेत दे रहा है। इस बुनियादी बदलाव को समझाने के लिए, उन्होंने हाल के प्रदर्शन के कुछ अहम तुलनात्मक आंकड़े भी साझा किए, जैसे कि 1 जुलाई के बाद से बिटकॉइन ने 9 प्रतिशत की एक बहुत ही ठोस बढ़त हासिल की है। यह उछाल इसकी जबरदस्त ताकत को दर्शाता है, वह भी तब जब उसी समान समयावधि में टेक-हैवी नैस्डैक 100 इंडेक्स में 6 प्रतिशत की भारी गिरावट दर्ज की गई है। इसका आप पर असर • निवेशकों के लिए: कमोडिटी बाजार में उतार-चढ़ाव और तेल की बढ़ती कीमतें ग्लोबल मार्केट में महंगाई और ब्याज दरों से जुड़े जोखिम को बढ़ा रही हैं। • क्रिप्टो निवेशकों के लिए: बिटकॉइन में शॉर्ट-टर्म गिरावट के बावजूद, ETF के जरिए आ रहा संस्थागत पैसा बाजार के लंबी अवधि के मजबूत भविष्य का संकेत देता है। सवाल-जवाब 1. ईसीबी के फैसले से पहले यूरो की स्थिति कैसी है? स्पॉट डिमांड और हेजिंग में कमी के कारण यूरो में स्थिरता और रिकवरी देखने को मिल रही है। 2. कच्चे तेल की कीमतों में उछाल क्यों आया है? अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतें 90 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गई हैं। 3. ब्रिटिश पाउंड (GBP/USD) दबाव में क्यों है? यूके में महंगाई दर के उम्मीद से कम रहने और अमेरिकी डॉलर में उछाल के कारण पाउंड पर दबाव बना हुआ है। 4. बिटकॉइन की कीमत गिरने के बावजूद इसमें क्या सकारात्मक है? कीमतें 65,800 डॉलर से नीचे आने के बावजूद, अमेरिकी स्पॉट बिटकॉइन ETF में लगातार सातवें दिन भारी निवेश दर्ज किया गया है। https://trendkia.com/market/ecb-ke-phaisale-se-pahale-euro-men-shanadara-rikavari-udhara-middle-east-ke-tanava-se-crude-oil-90-dollar-ke-kariba-10253 TrendKia — Har trend, sabse pehle.