यूरोपीय सेंट्रल बैंक की आगामी बैठकों में हर विकल्प खुला, मखलूफ ने महंगाई के बढ़ते जोखिमों पर दिया जोर यूरोपीय सेंट्रल बैंक के गवर्निंग काउंसिल सदस्य मखलूफ ने स्पष्ट किया है कि भविष्य की बैठकों में किसी भी नीतिगत कदम से इनकार नहीं किया जा सकता, क्योंकि महंगाई के जोखिम अब भी ऊपर की ओर बने हुए हैं। यूरोपीय सेंट्रल बैंक की आगामी नीतिगत बैठकों को लेकर सभी विकल्प खुले रखे गए हैं। गवर्निंग काउंसिल के सदस्य मखलूफ के अनुसार आने वाले सत्रों में किसी भी फैसले की संभावना को नकारा नहीं जा सकता। मुद्रास्फीति के दबावों पर चर्चा करते हुए उन्होंने रेखांकित किया कि महंगाई को लेकर जोखिम अभी भी ऊंचे स्तरों की तरफ झुके हुए हैं। राहत की बात यह है कि अर्थव्यवस्था में चिंताजनक दूसरे दौर के प्रभाव यानी सेकंड राउंड इफेक्ट्स के पुख्ता संकेत फिलहाल दिखाई नहीं दे रहे हैं। यूरोपीय सेंट्रल बैंक की कार्यप्रणाली और मूल्य स्थिरता का लक्ष्य जर्मनी के फ्रैंकफर्ट शहर में स्थित यूरोपीय सेंट्रल बैंक पूरे यूरोज़ोन के लिए मुख्य रिज़र्व बैंक के रूप में कार्य करता है। यह प्रमुख वित्तीय संस्थान इस पूरे क्षेत्र के लिए ब्याज दरों का निर्धारण करता है और मौद्रिक नीति का संपूर्ण संचालन संभालता है। बैंक का प्राथमिक और सबसे महत्वपूर्ण अधिदेश मूल्य स्थिरता बनाए रखना है। इसके तहत यूरोज़ोन में वार्षिक मुद्रास्फीति को करीब 2 प्रतिशत के आसपास रखने का लक्ष्य तय किया गया है। मूल्य स्थिरता के इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए बैंक के पास ब्याज दरों को घटाने या बढ़ाने का सबसे सशक्त साधन मौजूद रहता है। सामान्य आर्थिक परिस्थितियों में जब ब्याज दरों को तुलनात्मक रूप से ऊंचा रखा जाता है, तो यूरो मुद्रा को मजबूती मिलती है। इसके विपरीत जब ब्याज दरों में कटौती की जाती है, तो आम तौर पर यूरो की विनिमय दर कमजोर पड़ती है। बैंक की गवर्निंग काउंसिल साल में आठ बार बैठकें आयोजित करके मौद्रिक नीति संबंधी अहम फैसले लेती है। इन नीतिगत निर्णयों में यूरोज़ोन के सभी राष्ट्रीय केंद्रीय बैंकों के प्रमुख और छह स्थायी सदस्य भाग लेते हैं, जिनमें बैंक की अध्यक्ष क्रिस्टीन लेगार्ड भी शामिल हैं। क्वांटिटेटिव ईजिंग और क्वांटिटेटिव टाइटनिंग का असर जब आर्थिक हालात असाधारण रूप से कठिन हो जाते हैं, तब केंद्रीय बैंक क्वांटिटेटिव ईजिंग यानी क्यूई का सहारा ले सकता है। इस अपरंपरागत नीतिगत उपाय के तहत बैंक नई यूरो करेंसी जारी करता है और उस पूंजी से बैंकों तथा अन्य वित्तीय संस्थानों से सरकारी या कॉरपोरेट बॉन्ड खरीदता है। इस बड़े पैमाने की खरीदारी से वित्तीय बाजार में नकदी की आपूर्ति बढ़ाई जाती है, लेकिन इसका एक सामान्य परिणाम यह होता है कि मुद्रा बाजार में यूरो कमजोर हो जाता है। क्वांटिटेटिव ईजिंग को हमेशा अंतिम उपाय के तौर पर देखा जाता है, जिसे केवल तब अमल में लाया जाता है जब केवल ब्याज दरों में कटौती करके मूल्य स्थिरता लाना संभव न दिख रहा हो। यूरोपीय सेंट्रल बैंक ने अतीत में इस उपकरण का इस्तेमाल 2009 से 2011 के वैश्विक वित्तीय संकट के दौरान, फिर 2015 में जब महंगाई लंबे समय तक बेहद निचले स्तर पर अटकी रही, और उसके बाद कोविड महामारी के संकट के समय किया था। दूसरी ओर क्वांटिटेटिव टाइटनिंग यानी क्यूटी पूरी तरह से क्यूई की उल्टी प्रक्रिया होती है। क्यूटी को उस समय शुरू किया जाता है जब अर्थव्यवस्था में सुधार आ रहा हो और महंगाई ऊपर की ओर चढ़ने लगे। क्यूई में जहां बैंक वित्तीय संस्थानों को अतिरिक्त नकदी उपलब्ध कराने के लिए सरकारी और कॉरपोरेट बॉन्ड खरीदता है, वहीं क्यूटी में बैंक नए बॉन्ड खरीदना पूरी तरह बंद कर देता है। इसके साथ ही अपने पास मौजूद पुराने बॉन्डों की अवधि पूरी होने पर मिलने वाली मूल रकम को दोबारा निवेश करने से भी रोक दिया जाता है। इस कदम से व्यवस्था में अतिरिक्त नकदी घटती है और यह आमतौर पर यूरो मुद्रा के लिए सकारात्मक या तेजी लाने वाला कारक साबित होता है। वैश्विक मुद्रा बाजारों में डॉलर, येन और ऑस्ट्रेलियाई डॉलर की स्थिति अंतरराष्ट्रीय मुद्रा बाजारों में अमेरिकी डॉलर की फेडरल रिजर्व प्रेरित सख्त रैली पर थोड़ी रोक लगी है। डॉलर के अपने जुलाई के अंत के उच्चतम स्तरों से थोड़ा शांत होने के बाद एशियाई सत्र में गुरुवार को ऑस्ट्रेलियाई डॉलर बनाम अमेरिकी डॉलर में नई खरीदारी लौटी और यह 0.7100 के स्तर को दोबारा हासिल करने में कामयाब रहा। इस जोड़ी को ऑस्ट्रेलियाई रिज़र्व बैंक की ओर से संभावित ब्याज दर वृद्धि के दांवों और अमेरिका तथा ईरान के बीच राजनयिक कोशिशों की उम्मीदों से जोखिम धारणा में आए सुधार का सहारा मिला। दूसरी तरफ अमेरिकी डॉलर बनाम जापानी येन की विनिमय दर एशियाई सत्र में 156.00 के स्तर से नीचे की संक्षिप्त गिरावट से संभलती दिखी। यह जोड़ी पिछले दिन बने करीब दो सप्ताह के शीर्ष स्तर के बाद अपनी लगातार तीन दिनों की बढ़त की कड़ी को थामने की स्थिति में नजर आई। अमेरिकी डॉलर फेड के बाद सात सप्ताह के उच्च स्तर तक जाने के बाद रुका, जबकि बैंक ऑफ जापान द्वारा अपनी नीति सामान्यीकरण की राह को अधिक सख्त बनाने की संभावनाओं ने जापानी येन को सहारा दिया। इससे जोड़ी की तेजी सीमित रही और बाजार का पूरा ध्यान बैंक ऑफ जापान के शुक्रवार को आने वाले नीतिगत फैसले पर केंद्रित हो गया। सोने की कीमतों में सुधार और जापान की दशकों पुरानी नीति का नया मोड़ यूरोपीय सत्र की शुरुआत से पहले गुरुवार को सोने की कीमतें एक बार फिर 4,300 डॉलर के स्तर से ऊपर निकल गईं। हालांकि, यह कीमती धातु पिछले दिन छुए गए छह सप्ताह के निचले स्तर के काफी करीब बनी हुई है। जुलाई के अंत के बाद से बने नए उच्च स्तर से अमेरिकी डॉलर में आई मामूली नरमी ने सोने को कुछ समर्थन दिया। इसके बावजूद अमेरिकी फेडरल रिजर्व के आक्रामक दृष्टिकोण और मध्य पूर्व में गहराते तनाव ने सुरक्षित निवेश के रूप में सोने को सहारा देने के साथ-साथ इस बिना ब्याज वाली परिसंपत्ति की बढ़त को सीमित भी रखा है। वैश्विक वित्तीय प्रणाली में जापान की बेहद कम ब्याज दरों ने एक दशक से अधिक समय तक दुनिया भर में खरबों डॉलर के निवेश को वित्तपोषित करने में केंद्रीय भूमिका निभाई है। इस दीर्घकालिक व्यवस्था की वजह से जापानी येन पूरी दुनिया में पूंजी जुटाने का सबसे सस्ता स्रोत बना रहा। जहां दुनिया की अधिकांश प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं ने मुद्रास्फीति से निपटने के लिए ब्याज दरों में जोरदार बढ़ोतरी की, वहीं जापान लंबे समय तक वैश्विक अपवाद बना रहा और अपनी अति-उदार नीति पर टिका रहा। अब बैंक ऑफ जापान द्वारा नीति को कड़ा किए जाने की संभावनाओं के साथ यह दशकों पुराना सस्ता फंडिंग लाभ एक बिल्कुल नए दौर में प्रवेश कर सकता है। इसका आप पर असर प्रमुख केंद्रीय बैंकों द्वारा ब्याज दरों को लेकर लिए जाने वाले सख्त फैसलों से वैश्विक पूंजी लागत, मुद्रा विनिमय दरों और कीमती धातुओं के भावों पर सीधा असर पड़ रहा है। • भारत में: विदेशी मुद्रा बाजारों में डॉलर और प्रमुख मुद्राओं के उतार-चढ़ाव से भारतीय रुपये की विनिमय दरों और आयात बिलों पर सीधा असर पड़ता है। इससे अंतरराष्ट्रीय व्यापार करने वाली भारतीय कंपनियों और विदेश में खर्च करने वाले छात्रों की लागत प्रभावित होती है। • वैश्विक निवेशकों पर: बैंक ऑफ जापान द्वारा ब्याज दरें सख्त करने से लंबे समय से चल रहा बेहद सस्ता जापानी येन फंडिंग चक्र समाप्त होने की कगार पर है। इसका मतलब है कि अंतरराष्ट्रीय बाजारों में उधार लेकर शेयर या बॉन्ड में निवेश करने वाले फंडों को अपनी रणनीतियां बदलनी होंगी। • सोने के खरीदारों पर: अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सोने का भाव 4,300 डॉलर के ऊपर संभलने के बावजूद फेडरल रिजर्व की सख्ती के कारण सीमित दायरे में बंधा हुआ है। घरेलू बाजारों में आभूषण खरीदने वालों या स्वर्ण निवेशकों को निकट भविष्य में तीव्र उतार-चढ़ाव के लिए तैयार रहना चाहिए। • मुद्रा कारोबारियों पर: यूरोज़ोन में ईसीबी के किसी भी अप्रत्याशित कदम और अमेरिकी डॉलर की चाल से यूरो और ऑस्ट्रेलियाई डॉलर की विनिमय दरों में अस्थिरता बनी रहेगी। व्यापारियों को अपनी पोजीशन को हेज करके और स्टॉप लॉस के सख्त नियमों के साथ काम करना चाहिए। ऐसा क्यों हुआ वैश्विक केंद्रीय बैंक लगातार बनी हुई मुद्रास्फीति के दबावों, भू-राजनीतिक तनावों और वर्षों की असामान्य मौद्रिक नीतियों को सामान्य करने की आवश्यकता के बीच नीतिगत संतुलन बनाने का प्रयास कर रहे हैं। • मुद्रास्फीति के बने हुए जोखिम: यूरोज़ोन में भले ही दूसरे दौर के प्रभाव अभी नहीं दिख रहे हैं, लेकिन आवश्यक वस्तुओं और सेवाओं के दाम उम्मीद से ज्यादा समय तक ऊंचे बने हुए हैं। यही कारण है कि ईसीबी के नीति-निर्माता भविष्य की किसी भी बैठक में ब्याज दरों से संबंधित विकल्पों को बंद नहीं कर रहे हैं। • फेडरल रिजर्व का सख्त रुख: अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों को लेकर आक्रामक दृष्टिकोण अपनाने से डॉलर सात सप्ताह के उच्च स्तर तक मजबूत हुआ। इसके प्रभाव से अन्य मुद्राओं और गैर-ब्याज वाली संपत्तियों जैसे सोने पर लगातार दबाव बना रहा। • जापान की असाधारण नीति का अंत: दशकों तक शून्य और नकारात्मक ब्याज दरों पर टिके रहने के बाद बैंक ऑफ जापान पर अपनी नीति को सामान्य करने का दबाव बढ़ा है। इस वजह से वैश्विक बाजार में उपलब्ध सबसे सस्ता फंडिंग स्रोत अब धीरे-धीरे समाप्त हो रहा है। • भू-राजनीतिक अनिश्चितताएं: मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और अमेरिका-ईरान के बीच कूटनीतिक उतार-चढ़ाव ने सुरक्षित संपत्तियों की मांग और ऊर्जा बाजारों में अनिश्चितता को बनाए रखा है। इसने केंद्रीय बैंकों के लिए महंगाई के अनुमानों को सटीक रखना और अधिक चुनौतीपूर्ण बना दिया है। सवाल-जवाब 1. मखलूफ ने यूरोपीय सेंट्रल बैंक की भविष्य की बैठकों के बारे में क्या बयान दिया? उन्होंने कहा कि भविष्य की बैठकों में किसी भी नीतिगत कदम से इनकार नहीं किया जा सकता क्योंकि मुद्रास्फीति के जोखिम अब भी ऊपर की ओर बने हुए हैं। 2. यूरोपीय सेंट्रल बैंक का मुख्य अधिदेश क्या है? यूरोपीय सेंट्रल बैंक का प्राथमिक काम मूल्य स्थिरता बनाए रखना है, जिसका लक्ष्य मुद्रास्फीति को 2 प्रतिशत के आसपास रखना है। 3. क्वांटिटेटिव ईजिंग और क्वांटिटेटिव टाइटनिंग में मुख्य अंतर क्या है? क्वांटिटेटिव ईजिंग में केंद्रीय बैंक नए यूरो जारी करके वित्तीय संस्थानों से बॉन्ड खरीदता है, जबकि क्वांटिटेटिव टाइटनिंग में बॉन्ड खरीदारी और मूलधन का पुनर्निवेश रोक दिया जाता है। 4. गुरुवार को सोने की कीमतों की क्या स्थिति रही? सोने की कीमत यूरोपीय सत्र से पहले 4,300 डॉलर प्रति औंस के ऊपर आ गई, हालांकि यह पिछले दिन के छह सप्ताह के निचले स्तर के करीब बनी रही। 5. जापान की ब्याज दरों का वैश्विक अर्थव्यवस्था पर क्या असर रहा है? जापान की बेहद कम ब्याज दरों ने एक दशक से अधिक समय तक खरबों डॉलर के वैश्विक निवेश को वित्तपोषित करने में दुनिया के सबसे सस्ते फंडिंग स्रोत के रूप में मदद की है। https://trendkia.com/market/ecb-ki-agami-baithakon-men-hara-vikalpa-khula-makhlouf-ne-mahngai-ke-barhate-jokhimon-para-diya-jora-33687 TrendKia — Har trend, sabse pehle.