ईसीबी की बैठक से पहले यूरो में तेजी, डॉलर के मुकाबले शानदार बढ़त यूरोपीय सेंट्रल बैंक (ईसीबी) के ब्याज दर फैसले से ठीक पहले यूरो/डॉलर (EUR/USD) 1.14 के पार कारोबार कर रहा है। निवेशकों की नजर इस बात पर है कि केंद्रीय बैंक बढ़ती महंगाई, मिडिल ईस्ट के तनाव और बाजार के बदलते समीकरणों के बीच क्या कदम उठाता है। करेंसी मार्केट में इस वक्त बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है, जहां अमेरिकी डॉलर के मुकाबले यूरो लगातार मजबूत हो रहा है। यूरोपीय सेंट्रल बैंक (ईसीबी) की बहुप्रतीक्षित मौद्रिक नीति की घोषणा से ठीक पहले, EUR/USD पेयर 1.1430 के स्तर के करीब शानदार मजबूती दिखा रहा है। यूरो में यह तेजी काफी अहम है क्योंकि यह बाजार की बड़ी रणनीति को दर्शाती है। बड़े निवेशक और करेंसी ट्रेडर्स इस समय अपने पोर्टफोलियो को एडजस्ट कर रहे हैं, ताकि ईसीबी की तरफ से आने वाले किसी भी बड़े फैसले या बदलाव के लिए वे पूरी तरह तैयार रह सकें। ब्याज दरें स्थिर रहने की उम्मीद जैसे-जैसे यूरोपीय सेंट्रल बैंक अपनी मौद्रिक नीति का ऐलान करने के करीब पहुंच रहा है, वित्तीय बाजारों में यह आम सहमति बन गई है कि पॉलिसी रेट्स में कोई बदलाव नहीं किया जाएगा। महंगाई पर काबू पाने के लिए लगातार ब्याज दरें बढ़ाने के बाद, अब ऐसा लग रहा है कि केंद्रीय बैंक फिलहाल इंतजार करने के मूड में है। दरें स्थिर रखकर, पॉलिसीमेकर्स यह देखना चाहते हैं कि पिछली बढ़ोतरी का यूरोजोन की अर्थव्यवस्था पर क्या असर हो रहा है। बाजार को इस बार दरों में किसी बड़े झटके की उम्मीद नहीं है; इसके बजाय, सबकी नजरें आधिकारिक बयान और उसके बाद होने वाली प्रेस कॉन्फ्रेंस पर टिकी हैं। महंगाई का दूसरा दौर और बाजार का डर भले ही ब्याज दरों के मोर्चे पर शांति दिख रही हो, लेकिन अर्थव्यवस्था के अंदर काफी हलचल है। निवेशक यूरोजोन में महंगाई के दूसरे दौर (सेकंड-राउंड इन्फ्लेशन) के जोखिमों को लेकर नए संकेत तलाश रहे हैं। सेकंड-राउंड इफेक्ट तब होता है जब सप्लाई चेन या एनर्जी संकट की वजह से कीमतें बढ़ती हैं, और फिर उसकी देखादेखी मजदूरी भी बढ़ने लगती है, जिससे कंपनियों को मजबूरन अपने प्रोडक्ट और महंगे करने पड़ते हैं। इस तरह की जिद्दी महंगाई पर लगाम लगाना ईसीबी के लिए बड़ी चुनौती है, और इसी के आधार पर भविष्य की नीतियां तय होंगी। दुनिया भर की करेंसी के मुकाबले यूरो सबसे मजबूत मौजूदा ट्रेडिंग सेशन में ग्लोबल मार्केट के अंदर यूरो सबसे शानदार प्रदर्शन करने वाली करेंसी बनकर उभरा है। प्रमुख करेंसी के परसेंटेज चेंज को ट्रैक करने वाले हालिया मार्केट डेटा से साफ पता चलता है कि यूरो इस समय सबसे मजबूत स्थिति में है, खासकर अमेरिकी डॉलर के सामने। यह मजबूती कोई तुक्का नहीं है, बल्कि यह इस बात का सबूत है कि ग्लोबल ट्रेड और आर्थिक विकास को लेकर तमाम चिंताओं के बावजूद, निवेशकों का पैसा और उनका भरोसा वापस यूरोपीय एसेट्स की तरफ लौट रहा है। करेंसी हीट मैप को समझना विदेशी मुद्रा (फॉरेक्स) बाजार के उतार-चढ़ाव को समझने के लिए ट्रेडर्स हीट मैप का काफी इस्तेमाल करते हैं। ये मैप एक तरह का विजुअल टूल हैं, जो बताते हैं कि एक करेंसी के मुकाबले दूसरी करेंसी में कितना प्रतिशत बदलाव आया है। इसे देखने के लिए, ट्रेडर बाएं कॉलम से बेस करेंसी चुनते हैं और ऊपर की पंक्ति में कोट करेंसी देखते हैं। उदाहरण के लिए, अगर आप बेस के तौर पर यूरो को चुनते हैं और क्षैतिज रूप से अमेरिकी डॉलर की तरफ बढ़ते हैं, तो आपको EUR/USD पेयर का सटीक परसेंटेज चेंज दिख जाएगा। इस डेटा से बाजार के जानकारों को तुरंत पता चल जाता है कि कौन सी करेंसी मजबूत हो रही है और कौन सी कमजोर। महंगाई की उम्मीदों को बांधने पर फोकस यूरोपीय सेंट्रल बैंक की अंदरूनी सोच क्या है, इस पर बैंक ऑफ इटली के गवर्नर और ईसीबी पॉलिसीमेकर फैबियो पनेटा ने अहम जानकारी दी है। इसी महीने की शुरुआत में बोलते हुए, पनेटा ने साफ किया कि केंद्रीय बैंक का मुख्य लक्ष्य लॉन्ग-टर्म महंगाई की उम्मीदों को मजबूती से कंट्रोल में रखना है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि अचानक आने वाले आर्थिक झटकों के असर और सेकंड-राउंड इफेक्ट्स को तुरंत रोकना बहुत जरूरी है। उनके इस बयान से पता चलता है कि ईसीबी इस वक्त पूरी तरह अलर्ट है और महंगाई के खिलाफ अपनी जीत का ऐलान करने की जल्दी में बिल्कुल नहीं है। तेल के उछाल के बावजूद डॉलर पर दबाव आम तौर पर जब दुनिया में कोई संकट आता है, तो अमेरिकी डॉलर सबसे सुरक्षित निवेश (सेफ हेवन) माना जाता है, लेकिन इस बार हालात थोड़े अलग हैं। ग्लोबल टेंशन के बावजूद डॉलर पर इस वक्त हल्का लेकिन लगातार बिकवाली का दबाव बना हुआ है। मिडिल ईस्ट में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और एनर्जी सप्लाई को लेकर पैदा हुए डर के कारण कच्चे तेल (क्रूड ऑयल) की कीमतें आसमान छू रही हैं। तेल महंगा होने पर अक्सर डॉलर मजबूत होता है, लेकिन इस बार डॉलर शांत है। इसका मतलब है कि ट्रेडर्स शायद अमेरिका की घरेलू अर्थव्यवस्था को लेकर चिंतित हैं, या फिर उन्हें लगता है कि फेडरल रिजर्व अपनी नीतियों में कुछ ऐसा बदलाव कर सकता है जो सेफ-हेवन के इस पुराने नियम को तोड़ दे। टेक्निकल एनालिसिस में बेयरिश और न्यूट्रल ट्रेंड टेक्निकल चार्ट्स पर नजर डालें, तो EUR/USD पेयर काफी उलझा हुआ संकेत दे रहा है। फिलहाल यह पेयर 1.1430 के आसपास ऊंचे स्तर पर ट्रेड कर रहा है। खास बात यह है कि करेंसी ने बाउंस बैक करते हुए अपने 20-पीरियड एक्सपोनेंशियल मूविंग एवरेज (EMA) को छुआ है, जो 1.1433 पर है। लाइव मार्केट डेटा भी 1.14 के स्तर की पुष्टि कर रहा है, जो दिखाता है कि शॉर्ट-टर्म में इसका रुख एकदम न्यूट्रल है। लेकिन बड़े चार्ट को देखने पर पता चलता है कि यह पेयर एक 'बेयरिश फ्लैग' पैटर्न में फंसा हुआ है। टेक्निकल भाषा में, बेयरिश फ्लैग एक ऐसा पैटर्न है जो संकेत देता है कि थोड़ी देर की राहत या हल्की तेजी के बाद, बाजार वापस बड़ी गिरावट की तरफ जा सकता है। लाइव डेटा में दिखा 'डेथ क्रॉस', जहां 50-दिन का EMA 1.15, 200-दिन के EMA 1.16 के नीचे चला गया है, वह भी इस लंबे डाउनट्रेंड की गवाही दे रहा है। मोमेंटम इंडिकेटर्स दिखा रहे सुस्ती EUR/USD पेयर के मोमेंटम इंडिकेटर्स भी बाजार में हिचकिचाहट और अंदरूनी कमजोरी का इशारा कर रहे हैं। 14-पीरियड का रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स (RSI) लाइव डेटा के मुताबिक 46 पर टिका है। यह इंडिकेटर पूरी तरह से 40.00 से 60.00 के न्यूट्रल जोन के बीच में है, जिसका मतलब है कि बाजार में तेजी का कोई मजबूत मोमेंटम नहीं है। जब RSI इस तरह बीच में अटका रहता है, तो यह माना जाता है कि ऊपर की तरफ कोई भी उछाल ज्यादा देर नहीं टिकेगा और जल्द ही कमजोर पड़ जाएगा, खासकर तब तक, जब तक कि कीमतें मूविंग एवरेज और ट्रेंड-लाइन रेजिस्टेंस से नीचे हैं। इसके अलावा, 23 पर मौजूद एवरेज डायरेक्शनल इंडेक्स (ADX) भी साफ बता रहा है कि बाजार किसी खास दिशा में जाने के बजाय एक रेंज में फंसा हुआ है। अहम सपोर्ट और रेजिस्टेंस लेवल्स आने वाले समय में बाजार की चाल समझने के लिए अहम टेक्निकल लेवल्स पर नजर रखना जरूरी है। ऊपर की तरफ, 1.500 का मनोवैज्ञानिक स्तर एक बहुत बड़ा रेजिस्टेंस जोन बना हुआ है, जबकि राइजिंग चैनल के ऊपरी हिस्से में 1.1521 के करीब एक और तगड़ी रुकावट है। लाइव पिवट डेटा भी 1.14 (R1) और 1.15 (R2) पर रुकावट के संकेत दे रहा है। वहीं, अगर बिकवाली बढ़ती है, तो पहला मजबूत सपोर्ट चैनल के निचले हिस्से में 1.1402 के आसपास मिलेगा। अगर बाजार इस नाजुक स्तर को तोड़कर नीचे जाता है, तो फिर भारी गिरावट का रास्ता खुल सकता है, और भालू (बियर्स) 24 जून के निचले स्तर 1.1384 को टारगेट कर सकते हैं। ट्रेडर्स 0.01 के डेली एवरेज ट्रू रेंज (ATR) को देखकर अपने स्टॉप-लॉस का फैसला कर सकते हैं। ब्रिटिश पाउंड में हल्का उछाल बाकी प्रमुख करेंसी की बात करें, तो ब्रिटिश पाउंड भी डॉलर के सामने अपनी अलग चाल चल रहा है। गुरुवार को एशियाई कारोबारी सत्र के दौरान, GBP/USD पेयर ने वापसी करते हुए 1.3385 के स्तर को छुआ। हालांकि, एनालिस्ट्स का मानना है कि पाउंड में इस तेजी की गुंजाइश बहुत सीमित है। इसकी सबसे बड़ी वजह यूनाइटेड किंगडम के हालिया महंगाई के आंकड़े हैं, जो उम्मीद से काफी ठंडे रहे हैं। इससे बैंक ऑफ इंग्लैंड पर ब्याज दरें ऊंची रखने का दबाव कम हो गया है। इसके साथ ही, मिडिल ईस्ट का बढ़ता तनाव भी पाउंड जैसी रिस्क वाली करेंसी पर भारी पड़ रहा है। ऐसे में, करेंसी ट्रेडर्स अब शुक्रवार को आने वाली यूके रिटेल सेल्स की रिपोर्ट का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं, ताकि बाजार की अगली दिशा का अंदाजा लगाया जा सके। एशियाई सत्र में भी यूरो का दबदबा यूरो की मजबूती कोई कुछ पलों का जादू नहीं है; यह अलग-अलग ट्रेडिंग जोन्स में लगातार अपना दम दिखा रहा है। EUR/USD पेयर ने लगातार दूसरे दिन अपनी बढ़त को कायम रखा है। गुरुवार को पूरे एशियाई ट्रेडिंग सेशन के दौरान, यह करेंसी पेयर 1.1410 के शानदार स्तर के आसपास मजबूती से टिका रहा। कीमतों का इस तरह टिके रहना यह बताता है कि यूरोपीय सेंट्रल बैंक के ब्याज दर के फैसले से ठीक पहले, निवेशकों का यूरो पर भरोसा काफी गहरा हो गया है। कमोडिटीज में उछाल और महंगाई का डर ग्लोबल रिस्क बढ़ने के साथ ही कमोडिटी मार्केट में जबरदस्त हलचल मची हुई है। महंगाई से बचाव का पारंपरिक जरिया माना जाने वाला सोना (गोल्ड), एशियाई सत्र के दौरान $4,100 के भारी-भरकम स्तर के ऊपर अपनी जगह पक्की कर रहा है। ऐसा लग रहा है कि कीमती धातुओं ने पिछले दिन की अपनी ऊंचाई से हुई हल्की गिरावट को थाम लिया है। इसी बीच, एनर्जी मार्केट भी तेजी से गर्म हो रहा है। अमेरिका और ईरान के बीच तनाव फिर से भड़कने के कारण कच्चे तेल की कीमतें उछलकर 11 जून के बाद के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गई हैं। भू-राजनीतिक टकराव से अहम एनर्जी सप्लाई चेन टूटने का खतरा है, जिससे दुनिया भर में महंगाई बढ़ने का डर सता रहा है। इसी डर के कारण बाजार को लगने लगा है कि महंगे तेल से निपटने के लिए अमेरिकी फेडरल रिजर्व को मजबूरन ब्याज दरों में और बढ़ोतरी करनी पड़ सकती है। क्रिप्टो और ट्रेडिशनल फाइनेंस का मिलाप डिजिटल एसेट्स की दुनिया में भी बदलाव की हवा बह रही है। बिटवाइज के चीफ इन्वेस्टमेंट ऑफिसर मैट होगन के मुताबिक, अगला बड़ा क्रिप्टोकरेंसी बुल मार्केट एक बड़े बुनियादी बदलाव से शुरू हो सकता है। मंगलवार देर रात पब्लिश हुई अपनी रिपोर्ट में होगन ने दावा किया कि ब्लॉकचेन-बेस्ड फाइनेंशियल इंफ्रास्ट्रक्चर और पारंपरिक फाइनेंस (TradFi) सेक्टर के बीच बढ़ती जुगलबंदी एक नई ताकत पैदा कर रही है। उनका मानना है कि क्रिप्टो मार्केट ने शायद अपना सबसे निचला स्तर (बॉटम) छू लिया है। इस बात को साबित करने के लिए होगन ने एक अहम आंकड़ा पेश किया: 1 जुलाई के बाद से जहां तकनीक से भरे NASDAQ 100 इंडेक्स में 6% की भारी गिरावट आई है, वहीं इसी दौरान बिटकॉइन (BTC) ने हर झटके को सहते हुए 9% का शानदार रिटर्न दिया है। रिपल और स्टेलर के सामने टेक्निकल चुनौतियां अगर बड़े ऑल्टकॉइन मार्केट की बात करें, तो अलग-अलग टोकन अपनी टेक्निकल लड़ाइयां लड़ रहे हैं। रिपल (XRP) और स्टेलर (XLM) दोनों ही अहम टेक्निकल लेवल्स के पास बेहद संभलकर ट्रेड कर रहे हैं। इस वक्त XRP अपने 50-दिन के एक्सपोनेंशियल मूविंग एवरेज (EMA) पर भारी रेजिस्टेंस (रुकावट) का सामना कर रहा है। वहीं, XLM $0.187 के बेहद अहम सपोर्ट जोन के आसपास अटका हुआ है। बड़े मार्केट डेटा में भी यही हिचकिचाहट नजर आ रही है; मिक्स डेरिवेटिव्स डेटा में हल्का सा बेयरिश (गिरावट का) झुकाव दिख रहा है। यह अंदरूनी डेटा बताता है कि फ्यूचर्स और ऑप्शंस ट्रेडर्स अभी बहुत सतर्क हैं, और ऑल्टकॉइन्स की अगली बड़ी दिशा साफ होने तक अपने पत्ते खोलने से बच रहे हैं। इसका आप पर असर • ट्रेडर्स के लिए: EUR/USD में इस वक्त बेयरिश फ्लैग पैटर्न बन रहा है, इसलिए नई पोजीशन लेने से पहले ईसीबी के फैसले और 1.14 के अहम सपोर्ट लेवल पर नजर रखना जरूरी है। • आम निवेशकों के लिए: तेल की बढ़ती कीमतों और मिडिल ईस्ट के तनाव के कारण ग्लोबल महंगाई फिर से बढ़ सकती है, जिसका सीधा असर शेयर बाजार और ब्याज दरों पर पड़ेगा। सवाल-जवाब 1. ईसीबी (ECB) की मौद्रिक नीति बैठक से क्या उम्मीद है? बाजार के जानकारों का मानना है कि यूरोपीय सेंट्रल बैंक (ईसीबी) इस बार अपनी ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं करेगा और उन्हें स्थिर रखेगा। 2. EUR/USD करेंसी पेयर का मौजूदा रुख कैसा है? टेक्निकल चार्ट्स पर EUR/USD इस वक्त एक 'बेयरिश फ्लैग' पैटर्न दिखा रहा है, जो इशारा करता है कि हल्की राहत के बाद बाजार में फिर से गिरावट आ सकती है। 3. बिटकॉइन और नैस्डैक (NASDAQ) इंडेक्स के प्रदर्शन में क्या अंतर दिखा है? बिटवाइज के डेटा के अनुसार, 1 जुलाई के बाद से जहां नैस्डैक 100 में 6% की गिरावट आई है, वहीं बिटकॉइन ने बाजार के खिलाफ जाकर 9% की शानदार बढ़त दर्ज की है। 4. कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतें अचानक क्यों बढ़ रही हैं? अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और मिडिल ईस्ट में एनर्जी सप्लाई चेन टूटने के डर से कच्चे तेल की कीमतें 11 जून के बाद के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गई हैं। https://trendkia.com/market/ecb-ki-baithaka-se-pahale-euro-men-teji-usd-ke-mukabale-shanadara-barhata-10119 TrendKia — Har trend, sabse pehle.