यूरोपीय सेंट्रल बैंक ने महंगाई के बीच चुना संतुलित रास्ता, वैश्विक बाजारों में डॉलर की बढ़त से हलचल यूरोपीय सेंट्रल बैंक की प्रमुख क्रिस्टीन लेगार्ड ने मुद्रास्फीति के दबाव के बावजूद मौद्रिक नीति में संतुलित रुख अपनाने की बात कही है। दूसरी ओर मजबूत अमेरिकी डॉलर, ब्याज दरों में बढ़ोतरी की आशंकाओं और कच्चे तेल के बढ़ते दामों से वैश्विक मुद्रा और कमोडिटी बाजारों में दबाव गहरा गया है। यूरोपीय सेंट्रल बैंक की अध्यक्ष क्रिस्टीन लेगार्ड ने अर्थव्यवस्था में बढ़ती महंगाई और नीतिगत चुनौतियों को लेकर केंद्रीय बैंक का रुख स्पष्ट किया है। आर्थिक मोर्चे पर विकास की गति अधिकांश देशों और सेक्टरों में व्यापक रूप से दर्ज की जा रही है, और यह सकारात्मक रुझान तीसरी तिमाही के दौरान भी जारी रहने की संभावना जताई गई है। इसके साथ ही मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र ठोस प्रदर्शन दिखा रहा है और श्रम बाजार में भी लगातार मजबूती बनी हुई है। हालांकि तकनीकी क्षेत्र में बड़े बदलावों और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के विस्तार को लेकर अभी अंतिम निष्कर्ष सामने आना बाकी है, क्योंकि अब तक प्रमुख तकनीकी प्रगति ने रोजगार में कटौती नहीं की है। अनिश्चितता के बीच यूरोपीय सेंट्रल बैंक का संतुलित रुख अर्थव्यवस्था का समग्र परिदृश्य इस समय भारी अनिश्चितताओं से घिरा हुआ है। आने वाले समय में महंगाई के और ऊपर जाने के आसार दिखाई दे रहे हैं, यद्यपि अभी तक ऐसे कोई संकेत नहीं मिले हैं कि यह उच्च मुद्रास्फीति अर्थव्यवस्था में स्थायी रूप से जड़ जमा चुकी है। इसके बावजूद हालिया अनुमानों के मुकाबले वर्ष 2027 और 2028 में महंगाई का स्तर पहले लगाए गए कयासों से अधिक रहने का अंदेशा जताया गया है। क्रिस्टीन लेगार्ड के अनुसार, इस आर्थिक झटके की तीव्रता इतनी व्यापक है कि इसे पूरी तरह नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। इसके बावजूद मौद्रिक नीति के संचालन में केंद्रीय बैंक उस मध्यम और संतुलित रास्ते पर कायम रहेगा, जिसका खाका वर्ष की शुरुआत में खींचा गया था। नीति निर्धारकों का मानना है कि महंगाई को प्रभावी नियंत्रण में रखने के लिए एक नपा-तुला और संयमित नीतिगत कदम उठाना ही सबसे उपयुक्त विकल्प है। मजबूत डॉलर के आगे प्रमुख करेंसियों में घबराहट वैश्विक विदेशी मुद्रा बाजार में अमेरिकी डॉलर की चौतरफा मजबूती अन्य मुद्राओं पर भारी पड़ रही है। नए कारोबारी हफ्ते की शुरुआत में AUD/USD की जोड़ी किसी तरह 0.7000 के स्तर का बचाव करने की कोशिश कर रही है, जो 4 अगस्त के बाद का इसका निचला स्तर है। अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड्स कई वर्षों के उच्चतम स्तर के करीब टिकी हुई हैं, जिसे कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों से उपजे मुद्रास्फीति के जोखिम और अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा अक्टूबर में ब्याज दर बढ़ाने के बढ़ते दावों से समर्थन मिल रहा है। इसके साथ ही अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनातनी ने सुरक्षित निवेश के रूप में अमेरिकी डॉलर की मांग को और बढ़ा दिया है, जिससे ऑस्ट्रेलियाई डॉलर पर रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया के मंगलवार को आने वाले नीतिगत फैसलों से पहले ही भारी दबाव बन गया है। दूसरी तरफ USD/JPY की जोड़ी में गिरावट पर लिवाली देखने को मिली है, जिससे शुक्रवार की उस गिरावट की कुछ भरपाई हो सकी जो जापानी येन को सहारा देने के लिए सरकारी दखल की अटकलों के बाद आई थी। हालांकि बैंक ऑफ जापान की नरम रुख वाली मिनट्स ने येन की तेजी पर लगाम लगा दी। अमेरिका और ईरान के तनाव के चलते कच्चे तेल में तेजी, महंगाई की नई चिंताएं और फेड द्वारा अक्टूबर में संभावित ब्याज दर वृद्धि के समीकरण अमेरिकी डॉलर को लगातार सहारा दे रहे हैं, जिससे यह मुद्रा जोड़ी दोबारा 158.00 के स्तर की ओर अग्रसर हो गई है। सोने, डिजिटल परिसंपत्तियों और ईंधन पर असर कमोडिटी बाजार में सोने ने हफ्ते का आगाज कमजोरी के साथ किया है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में पीली धातु में तेज बिकवाली देखी गई और भाव फिसलकर 4,100 डॉलर प्रति ट्रॉय औंस के दायरे में पहुंच गए, जो स्तर पिछली बार अगस्त की शुरुआत में देखे गए थे। नए सिरे से उभरे भू-राजनीतिक तनावों के साथ-साथ मजबूत अमेरिकी डॉलर और बढ़ती ट्रेजरी यील्ड्स ने सोमवार को सोने को गहरे दबाव में बनाए रखा। क्रिप्टोकरेंसी बाजार में बिटकॉइन सोमवार को 82,800 डॉलर के नीचे कारोबार करता नजर आया। पिछले हफ्ते बिटकॉइन में 4% से अधिक की तेजी आई थी, लेकिन हालिया ऊंचाई के करीब इस तेजी की रफ्तार धीमी पड़ती दिखाई दे रही है। हालांकि स्पॉट बिटकॉइन एक्सचेंज ट्रेडेड फंड में निरंतर पूंजी प्रवाह और मजबूत संस्थागत मांग इस डिजिटल टोकन को जरूरी समर्थन प्रदान कर रही है। ऊर्जा क्षेत्र में ब्रिटेन के भीतर डीजल की कीमतें ऐतिहासिक रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई हैं, जिसने आर्थिक चिंताओं को और गहरा कर दिया है। तेल की आपूर्ति से जुड़ी तात्कालिक चिंताएं कुछ कम हुई हैं, फिर भी कच्चे तेल के भाव ऊंचे बने हुए हैं। बाजार वर्तमान में अमेरिकी फेडरल रिजर्व के आक्रामक नीतिगत चक्र की उम्मीद कर रहा है। इसी बीच फेड और बैंक ऑफ जापान दोनों ने पिछले हफ्ते अपनी ब्याज दरों में 25 आधार अंकों की बढ़ोतरी की थी, दोनों ही महंगाई के खतरों से जूझ रहे हैं और दोनों केंद्रीय बैंकों ने साफ किया है कि उनके आगामी कदम आने वाले आर्थिक आंकड़ों पर पूरी तरह निर्भर करेंगे। इसका आप पर असर वैश्विक स्तर पर केंद्रीय बैंकों की सख्त मौद्रिक नीतियों और मजबूत डॉलर से आम उपभोक्ताओं और निवेशकों पर सीधा वित्तीय असर पड़ने की संभावना है। • ईंधन की लागत: कच्चे तेल के बढ़ते भाव और डीजल की रिकॉर्ड कीमतें परिवहन तथा रोजमर्रा के सामान की ढुलाई को महंगा कर सकती हैं। इससे आने वाले हफ्तों में घरेलू बजट पर सीधा दबाव बढ़ेगा। • ऋण और ईएमआई: केंद्रीय बैंकों द्वारा ब्याज दरों में 25 आधार अंकों की बढ़ोतरी और आगे भी सख्ती के संकेतों से कर्ज महंगा बना रहेगा। आम ग्राहकों को होम लोन और पर्सनल लोन की बढ़ती ईएमआई का बोझ उठाना पड़ सकता है। • सोने में निवेश: सोना गिरकर 4,100 डॉलर प्रति औंस के करीब आ गया है, जिससे अल्पकालिक निवेशकों को सतर्क रहने की जरूरत है। मजबूत डॉलर और बढ़ती बॉन्ड यील्ड्स के चलते सुरक्षित निवेश माने जाने वाले सोने की चमक फिलहाल फीकी रह सकती है। • क्रिप्टोकरेंसी बाजार: बिटकॉइन 82,800 डॉलर के नीचे आने से रिटेल निवेशकों की सतर्कता बढ़ सकती है। हालांकि संस्थागत ईटीएफ निवेश के चलते लंबी अवधि के निवेशकों को भारी गिरावट से आंशिक सुरक्षा मिल सकती है। ऐसा क्यों हुआ वैश्विक अर्थव्यवस्था में भू-राजनीतिक अस्थिरता, ऊर्जा संकट और केंद्रीय बैंकों द्वारा महंगाई पर काबू पाने की जद्दोजहद के कारण यह स्थिति बनी है। • कच्चे तेल में उछाल: अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते गतिरोध ने कच्चे तेल की कीमतों को ऊंचा बनाए रखा है। ऊर्जा के महंगे होने से परिवहन और उत्पादन लागत बढ़ी है, जिसने महंगाई की चिंताओं को दोबारा हवा दी है। • डॉलर की सुरक्षित मांग: भू-राजनीतिक संकट और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड्स के बहुवर्षीय शिखर पर पहुंचने से निवेशकों ने डॉलर को सुरक्षित ठिकाना माना है। इस वजह से अन्य वैश्विक करेंसियों और सोने में तेज गिरावट दर्ज की गई। • केंद्रीय बैंकों की नीतिगत सख्ती: फेड और बैंक ऑफ जापान दोनों ने पिछली बैठक में ब्याज दरों में 25 आधार अंकों का इजाफा किया है। मुद्रास्फीति का परिदृश्य 2027 और 2028 के लिए भी ऊंचा दिखने से केंद्रीय बैंक आक्रामक रुख बनाए रखने पर मजबूर हैं। सवाल-जवाब 1. यूरोपीय सेंट्रल बैंक ने ब्याज दरों और महंगाई पर क्या रुख अपनाया है? क्रिस्टीन लेगार्ड के अनुसार ईसीबी एक संतुलित और मध्यम रास्ते पर कायम रहेगा। बैंक का मानना है कि महंगाई को नियंत्रण में रखने के लिए नपा-तुला नीतिगत कदम उठाना ही सबसे उचित है। 2. सोने की कीमतों में हालिया गिरावट की मुख्य वजह क्या है? मजबूत अमेरिकी डॉलर, अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड्स में बढ़ोतरी और भू-राजनीतिक उथल-पुथल के चलते सोने में भारी बिकवाली हुई, जिससे यह 4,100 डॉलर प्रति औंस के करीब आ गया। 3. बिटकॉइन की ताजा कीमत और बाजार की स्थिति क्या है? बिटकॉइन 82,800 डॉलर के नीचे कारोबार कर रहा है। पिछले हफ्ते 4% की बढ़त के बाद इसकी तेजी थमी है, हालांकि स्पॉट ईटीएफ में संस्थागत निवेश जारी है। 4. अमेरिकी डॉलर अन्य करेंसियों के मुकाबले क्यों मजबूत हो रहा है? अमेरिका-ईरान तनाव, कच्चे तेल के ऊंचे दाम और फेडरल रिजर्व द्वारा अक्टूबर में ब्याज दर बढ़ाने की बढ़ती संभावनाओं ने डॉलर को मजबूती दी है। 5. फेडरल रिजर्व और बैंक ऑफ जापान ने हाल ही में क्या कदम उठाया है? दोनों केंद्रीय बैंकों ने पिछले हफ्ते ब्याज दरों में 25 आधार अंकों की बढ़ोतरी की है और आगे के फैसले आर्थिक आंकड़ों पर निर्भर रखे हैं। https://trendkia.com/market/ecb-ne-mahngai-ke-bicha-chuna-sntulita-rasta-vaishvika-bajaron-men-dollar-ki-barhata-se-halachala-40199 TrendKia — Har trend, sabse pehle.